भारत-लक्जमबर्ग के बीच अंतरिक्ष, एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। भारत और लक्जमबर्ग ने अंतरिक्ष, उभरती प्रौद्योगिकियों और जीवन विज्ञान के क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा की है। सोमवार को लक्जमबर्ग के अर्थव्यवस्था, लघु एवं मध्यम उद्यम, ऊर्जा और पर्यटन मंत्री लेक्स डेल्स ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने का प्रस्ताव रखा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक ऐसे सहयोगी तंत्र पर विचार किया जो अंतरिक्ष क्षेत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री विज्ञान और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ा सके। यह तंत्र जनवरी 2027 में प्रस्तावित लक्जमबर्ग के भारत दौरे से पहले दोनों देशों की ओर से ठोस सुझाव और सहयोगी परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करने में भी मदद करेगा।
बैठक के दौरान भारत-लक्जमबर्ग अंतरिक्ष सहयोग की मौजूदा स्थिति, संस्थागत और व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं तथा प्रस्तावित राजकीय यात्रा की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। लक्जमबर्ग के प्रतिनिधिमंडल में मंत्री के कार्यालय, आर्थिक नीति, उद्योग, नई प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान विभाग और लक्जमबर्ग स्पेस एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग पिछले कुछ वर्षों में व्यावसायिक आयाम भी हासिल कर चुका है, जिसमें संचार उपग्रह ट्रांसपोंडर लीजिंग और भारतीय पीएसएलवी रॉकेट के माध्यम से लक्जमबर्ग के दो उपग्रहों का वाणिज्यिक प्रक्षेपण शामिल है। उन्होंने बताया कि इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (इन-स्पेस) और लक्जमबर्ग स्पेस एजेंसी भी दोनों देशों के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय और व्यावसायिक सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे विदेशी कंपनियों और निवेशकों के लिए भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में सहभागिता की संभावनाएं बढ़ी हैं।
जीवन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डॉ. सिंह ने लक्जमबर्ग इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और लक्जमबर्ग सेंटर फॉर सिस्टम्स बायोमेडिसिन जैसे संस्थानों के साथ सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से अल्जाइमर और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों से जुड़े अनुसंधान क्षेत्रों में संयुक्त कार्य की संभावना पर जोर दिया।
वहीं, मंत्री लेक्स डेल्स ने कहा कि लक्जमबर्ग भारत के साथ अंतरिक्ष, उपग्रह संचार, एआई, साइबर सुरक्षा और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को इच्छुक है। उन्होंने भारत में व्यवसाय विस्तार के लिए लक्जमबर्ग की कंपनियों के सामने मौजूद अवसरों का भी उल्लेख किया।
डेल्स ने यह भी कहा कि दोनों देशों के सरकारी संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच अधिक संपर्क और सहयोग आवश्यक है, ताकि प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाया जा सके।
--आईएएनएस
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LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम बदले, अब 25 दिन बाद ही कर सकेंगे दूसरा रिफिल
LPG Cylinder: केंद्र सरकार ने देशभर के घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सिलेंडर रीफिल की बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब ग्रामीण और शहरी, दोनों ही क्षेत्रों के ग्राहकों के लिए दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच 25 दिनों की समान समयावधि तय कर दी गई है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का यह कदम देश के सभी रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक समान सुविधा देने की दिशा में उठाया गया है.
ग्रामीण और शहरी भेद हुआ खत्म
नए नियम के लागू होने के बाद अब किसी भी घरेलू एलपीजी ग्राहक को एक सिलेंडर बुक कराने के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना अनिवार्य होगा. इससे पहले यह 25 दिनों की पाबंदी केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित थी, जबकि ग्रामीण इलाकों में दो बुकिंग के बीच 45 दिनों का एक लंबा अंतर तय किया गया था. सरकार के इस नए आदेश के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का यह अंतर पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीनों प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों - इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्रमुखों को पत्र भेजकर इन नए निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश जारी कर दिया है.
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सप्लाई में सुधार के बाद लिया गया फैसला
मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में उपजे तनाव और संघर्ष के कारण एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति काफी प्रभावित हुई थी. उस संकट के दौर में बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने तथा कालाबाजारी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अस्थायी तौर पर 45 दिनों की समय-सीमा तय की गई थी. हालांकि, अब देश में रसोई गैस की आपूर्ति स्थिति में काफी सुधार हो चुका है और पुराना बैकलॉग भी लगभग समाप्त हो गया है, जिसके चलते आम जनता को राहत देते हुए इस पाबंदी को वापस ले लिया गया है.
करोड़ों ग्रामीण परिवारों को मिलेगी सीधी राहत
इस फैसले का सबसे बड़ा और सीधा फायदा देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करोड़ों परिवारों को मिलने जा रहा है. पहले 45 दिनों के लंबे इंतजार के कारण कई बार ग्रामीण परिवारों को रसोई गैस खत्म होने पर चूल्हा जलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. अब इस नए और एकीकृत नियम के तहत देशभर के सभी नागरिक एक समान व्यवस्था के आधार पर 25 दिनों के अंतराल पर आसानी से अपना अगला सिलेंडर बुक करा सकेंगे.
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