Atal Awasiya Vidyalaya: मजदूरों के बच्चों को मुफ्त आवासीय शिक्षा, जानें अटल आवासीय विद्यालय योजना की पूरी जानकारी
Atal Awasiya Vidyalaya: उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और निर्माण श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अटल आवासीय विद्यालय योजना संचालित की जा रही है. यह योजना खासतौर पर उन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके माता-पिता रोजगार के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित होती है. सरकार ने इसी समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2022 में इस योजना की शुरुआत की.
योजना के तहत बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि रहने, खाने और स्कूल से जुड़ी जरूरी सुविधाएं भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं.
क्या है अटल आवासीय विद्यालय योजना?
अटल आवासीय विद्यालय योजना उत्तर प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग के अंतर्गत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) द्वारा लागू की जाती है.
इस योजना में चयनित बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त आवासीय शिक्षा देने की व्यवस्था है. विद्यार्थियों को हॉस्टल, भोजन, यूनिफॉर्म और किताबें जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं. स्कूलों में पढ़ाई का पाठ्यक्रम CBSE से मान्यता प्राप्त मानकों के अनुरूप रखा गया है.
यूपी में 18 अटल आवासीय विद्यालय
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 18 अटल आवासीय विद्यालय संचालित हैं. हर मंडल मुख्यालय पर एक स्कूल स्थापित किया गया है. इनमें से 16 विद्यालयों को सितंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया था.
इन विद्यालयों के निर्माण पर करीब 1,115 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. योजना का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और स्थिर वातावरण उपलब्ध कराना है.
कक्षा 6 और 9 में मिलता है दाखिला
अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश मुख्य रूप से कक्षा 6 और कक्षा 9 में दिया जाता है. चयनित विद्यार्थी आगे इसी विद्यालय में कक्षा 12 तक अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं.
प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा देनी होती है. इससे योग्य विद्यार्थियों का चयन सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है.
किन बच्चों को मिलता है लाभ?
योजना का प्रमुख लाभ उन निर्माण श्रमिकों के बच्चों को दिया जाता है, जिनके माता-पिता का UPBOCW में कम से कम 365 दिनों से पंजीकरण है.
इसके अलावा अनाथ बच्चों और कोविड-19 महामारी के दौरान महिला कल्याण विभाग द्वारा चिन्हित बच्चों को भी योजना के दायरे में रखा गया है. एक परिवार से अधिकतम दो बच्चे आवेदन कर सकते हैं.
खास बात यह है कि पंजीकृत निर्माण श्रमिक होने की शर्त के अलावा अलग से कोई आय सीमा निर्धारित नहीं है. यानी योजना का फोकस उन परिवारों के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं.
लड़कियों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित
योजना में बेटियों की शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है. अटल आवासीय विद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित हैं. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को भी गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलता है.
स्कूलों में मिलती हैं ये सुविधाएं
इन विद्यालयों के कैंपस को आधुनिक आवासीय स्कूल की तर्ज पर विकसित किया गया है. यहां विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग बालक और बालिका हॉस्टल, डाइनिंग हॉल और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं हैं.
इसके अलावा खेलकूद के लिए सुविधाएं, सिक रूम और रेजिडेंट नर्स की व्यवस्था भी की गई है. स्कूल परिसर में शिक्षकों के लिए आवासीय क्वार्टर भी बनाए गए हैं.
कब और कैसे करें आवेदन?
अटल आवासीय विद्यालयों में दाखिले की सूचना आमतौर पर जनवरी के अंत से फरवरी के मध्य के बीच जारी की जाती है. कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए निर्धारित प्रवेश परीक्षा आयोजित होती है.
आवेदन फॉर्म UPBOCW की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित जिला श्रम कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं. आवेदन के दौरान माता-पिता का यूपी लेबर कार्ड या निर्माण श्रमिक पंजीकरण और बच्चे का आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जरूरी होते हैं.
बच्चों के भविष्य को स्थिर बनाने की पहल
अटल आवासीय विद्यालय योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य उन बच्चों को लगातार शिक्षा का अवसर देना है, जिनके माता-पिता का रोजगार स्थायी नहीं है. निर्माण श्रमिकों के बार-बार पलायन के कारण बच्चों की पढ़ाई छूटने या बाधित होने की समस्या आम है.
ऐसे में मुफ्त आवासीय शिक्षा बच्चों को पढ़ाई के साथ सुरक्षित वातावरण और बेहतर भविष्य की दिशा प्रदान करने का प्रयास है. योजना के जरिए सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बोर्डिंग स्कूल जैसी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है.
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Gujarat Govt: गुजरात में MSP खरीद प्रक्रिया में AI की एंट्री, 10 केंद्रों पर अनाज की जांच
गुजरात में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज खरीद की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है. गुजरात स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत चार जिलों के 10 खरीद केंद्रों पर AI आधारित ग्रेन एनालाइजर लगाए हैं. इन मशीनों के जरिए खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) 2025-26 में धान के नमूनों की जांच की गई.
10 खरीद केंद्रों पर कुल 13,334 किसानों का रजिस्ट्रेशन
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, 10 खरीद केंद्रों पर कुल 13,334 किसानों के रजिस्ट्रेशन हुए. इनमें महिसागर के लूनावाड़ा में 2,278 और संतरामपुर में 1,246, आनंद के खंभात में 2,663 और बोरसद में 884 रजिस्ट्रेशन शामिल हैं. अहमदाबाद जिले के धोलका में 1,000, बावला में 909, वीरमगाम में 1,078 और साणंद में 1,288 रजिस्ट्रेशन हुए. वहीं पंचमहल के गोधरा में 986 और शेहरा में 1,002 रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए.
इन केंद्रों पर कुल 6,191 धान के नमूनों की AI तकनीक से जांच की गई. इनमें 3,379 नमूने यानी 54.6 प्रतिशत ग्रेड-ए और 2,812 यानी 45.4 प्रतिशत सामान्य श्रेणी के पाए गए. कुल 341 नमूने रिजेक्ट किए गए. धोलका में सबसे ज्यादा 24 प्रतिशत रिजेक्शन दर्ज हुआ, जबकि वीरमगाम में कोई नमूना रिजेक्ट नहीं हुआ.
कई गुणवत्ता मानकों की जांच
AI ग्रेन एनालाइजर धान में बाहरी पदार्थ, खराब या बदरंग दाने, अधपके या सिकुड़े हुए दाने, मिलावट और नमी की जांच कर सकता है. इसके संचालन के लिए लगातार बिजली और प्रत्येक केंद्र पर एक कर्मचारी की जरूरत होती है. कॉरपोरेशन के मौजूदा थर्ड-पार्टी सिस्टम की तुलना में AI सिस्टम में कम मानव संसाधन की जरूरत पड़ती है. मौजूदा व्यवस्था में नमूने लेने और वैज्ञानिक उपकरणों से ग्रेडिंग करने के लिए दो कर्मचारियों की आवश्यकता होती है.
कॉरपोरेशन ने अपने गुणवत्ता मानक तय किए
गुजरात स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन गेहूं, चावल, धान, बाजरा, ज्वार, रागी, तुअर दाल, चना, मूंगफली तेल, डबल-फोर्टिफाइड नमक और सफेद चीनी जैसी खाद्य वस्तुओं की खरीद और वितरण करता है. गेहूं और चावल की खरीद FCI के मानकों के अनुसार, जबकि MSP के तहत अनाज की खरीद केंद्र सरकार द्वारा तय यूनिफॉर्म स्पेसिफिकेशन के आधार पर की जाती है. इसके अलावा तुअर दाल, चना, खाद्य तेल, चीनी और डबल-फोर्टिफाइड नमक के लिए कॉरपोरेशन ने अपने गुणवत्ता मानक तय किए हैं, जो FSSAI के मानकों से भी अधिक सख्त हैं.
कॉरपोरेशन के अनुसार, गोदामों में पहुंचने वाली खाद्य सामग्री के नमूनों की Food Research Laboratory (FRL) में Quality Control शाखा के जरिए 100 प्रतिशत क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाता है. इस प्रक्रिया से योजनाओं के लाभार्थियों तक साफ, मिलावट रहित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न पहुंचाने में मदद मिलती है. AI तकनीक के इस्तेमाल से MSP खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर लोगों का भरोसा भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है.
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