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मेधावी छात्रों के सपनों को मिल रहा सहारा, 17,852 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दे रही धामी सरकार

Dhami Government: उत्तराखंड में मेधावी छात्रों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने और उनके बेहतर भविष्य की नींव मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार काम कर रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित ‘मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना’ के तहत कक्षा 6 से 12वीं तक के मेधावी विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है. इस योजना से प्रदेश के 17,852 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर योजना की जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रदेश के मेधावी छात्रों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना और उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने कहा कि सरकार विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ शिक्षा के प्रति उनकी रुचि और लगन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन पर प्रोत्साहन

इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्कूल स्तर पर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना है. छात्रवृत्ति मिलने से मेधावी छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल रहा है. योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को हर महीने 600 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक की छात्रवृत्ति दी जा रही है.

सरकार का मानना है कि स्कूली स्तर पर विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए तो वे आगे चलकर उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. इसी सोच के साथ मेधावी छात्रों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ आगे बढ़ने का अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है.

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स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा

मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में आगे बढ़ने की इच्छा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है. छात्र जब अपने प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहित होते हैं तो उनमें पढ़ाई के प्रति उत्साह बढ़ता है और वे बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए मेहनत करते हैं.

सरकार की ओर से इस तरह की योजनाओं के जरिए विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया जा रहा है कि मेहनत और बेहतर प्रदर्शन को सम्मान और प्रोत्साहन मिलेगा. इससे स्कूलों में पढ़ाई को लेकर सकारात्मक माहौल बनाने में भी मदद मिल सकती है.

शिक्षा को लेकर सरकार का फोकस

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. कई परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च चुनौती बन सकते हैं. ऐसे में मेधावी विद्यार्थियों को नियमित छात्रवृत्ति मिलने से उन्हें अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है.

मुख्यमंत्री धामी लगातार युवाओं और विद्यार्थियों को प्रदेश के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते रहे हैं. मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने की यह योजना इसी सोच को आगे बढ़ाती है. सरकार का प्रयास है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर मिलें और आर्थिक कारण उनकी राह में बाधा न बनें.

17,852 छात्रों तक पहुंचा योजना का लाभ

मुख्यमंत्री के मुताबिक, योजना के तहत अब तक 17,852 मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है. बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलने से यह पहल स्कूली शिक्षा के स्तर पर प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर सामने आई है. सरकार का जोर ऐसे माहौल को तैयार करने पर है, जहां विद्यार्थी सिर्फ परीक्षा पास करने तक सीमित न रहें, बल्कि बेहतर प्रदर्शन करने, नई चीजें सीखने और अपने भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित हों.

कुल मिलाकर, ‘मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना’ उत्तराखंड के मेधावी विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ आगे बढ़ने का प्रोत्साहन बन रही है. 600 से 1200 रुपये की मासिक छात्रवृत्ति के जरिए सरकार प्रतिभाशाली छात्रों को आर्थिक सहयोग दे रही है, वहीं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन की भावना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार की इस पहल का लक्ष्य प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को मजबूत आधार देना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है.

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'जेल में रहकर...', महाराष्ट्र के मंत्री ने संजय दत्त से की मराठी बोलने की अपील, एक्टर ने दिया मजेदार जवाब

Sanjay Dutt Refuse Speak Marathi: बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त (Sanjay Dutt) अक्सर किसी न किसी वजह से खबरों में रहते हैं. इस बार भी उनके चर्चा आने का कारण एक मेजदार बयान है. जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा हो रही है. एक्टर हाल ही में महाराष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. जहां पर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी बोलने के लिए कहा था. एक्टर ने इस दौरान ऐसा मजेदार जवाब दिया. जिसके बारे में सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है. आइए जानते हैं कि एक्टर ने मराठी बोलने पर क्या जवाब दिया. 

महाराष्ट्र के मंत्री ने संजय दत्त से की मराठी बोलने की अपील

दरअसल, मिनिस्टर ने स्टेज पर संजय दत्त से मराठी में बात करने के लिए कहा. लेकिन उन्होंने अपने जेल में रहने के दिनों का एक किस्सा सुनाया. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि महाराष्ट्र में इन दिनों मराठी बोलने की काफी चर्चा हो रही है, जिसके चलते कॉन्ट्रोवर्सी भी देखने को मिली. कार्यक्रम में जब संजय दत्त से कहा गया कि मराठी में कुछ बोले. उन्होंने कहा कि वह जब जेल में थे तब भी मराठी नहीं सीख पाए.  

एक्टर ने दिया मजेदार जवाब

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि जब मिनिस्टर संजय दत्त से मराठी बोलने के लिए कहते हैं तो इस पर वह कहते हैं, प्रताप भाई, 'मैं 6 साल यरवदा जेल में रहा. तब भी मराठी नहीं सीख पाया. मैं थोड़ा सीखा था.' वहीं नेता के कंधे पर रख कर वह आगे कहते हैं, 'मैं प्रताप भाई का आभारी हूं कि मुझे यहां बुलाए. हमारा रिश्ता बहुत पुराना है. 25 साल हो गए हैं.' इसके बाद एक्टर हर हर महादेव के नारे लगाते हैं. उनका यह जवाब सुनकर वहां मौजूद पब्लिक जोर-जोर हंसने लगती है. उनका ये जवाब इसलिए भी मजेदार माना जा रहा है कि उन्होंने नेता के सामने कितनी आसानी से कह दिया कि वह मराठी बोलना नहीं सीख पाए. 

प्रताप सिंह सिखा रहे सिखा रहे मराठी बोलना

दरअसल, इस इवेंट में प्रताप सरनाईक लोगों को मराठी बोलना सिखाते हुए नजर आए. उन्होंने कहा कि वह आज सब को मराठी सिखा रहे हैं. उन्होंने कहा, 'आजकल मैं सब लोगों को मराठी सिखा रहा हूं. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि यह मामला सरनाईक के विभाग के हालिया आदेश से जुड़ा है, जिसके तहत मुंबई में काम जारी रखने के लिए ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी वाक्यांशों की व्यावहारिक समझ होना जरूरी है. वहीं जब इस बयान पर लोग हंसने लगे तो मराठी में उन्होंने कहा कि उनके (संजय दत्त) आने के बाद मैंने सोचा कि क्यों न हम सब मिलकर संजय दत्त से मराठी में बात करें. वे हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं. 

संजय दत्त के वर्कफंट के बारे में जानिए

संजय दत्त के वर्कफ्रंट की बात करें तो इस साल अब तक उनकी 6 फिल्‍में रिलीज हो चुकी हैं. इनमें प्रभास के साथ 'द राजा साब', रणवीर सिंह के साथ 'धुरंधर: द रिवेंज', ध्रुव सरजा के साथ 'केडी: द डेविल', रितेश देशमुख के साथ 'राजा श‍िवाजी', 'आखिरी सवाल' और हालिया रिलीज फ‍िल्म '7 डॉग्स' में कैमियो रोल शामिल है. इसके बाद अब वह अपकमिंग फिल्म 'बाप' और 'खलनायक रिटर्न्‍स' में नजर आएंगे. 

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  Sports

No. 3 पर बल्लेबाजी की चुनौती? Devdutt Padikkal बोले - सिर्फ Team India के योगदान पर फोकस

भारत के बल्लेबाज़ देवदत्त पडिक्कल ने टेस्ट टीम में अपनी वापसी के बारे में बात करते हुए कहा कि जब उन्हें मौका मिलेगा, तब वे तैयार रहने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे। साथ ही, श्रीलंका के खिलाफ़ सीरीज़ में शामिल किए जाने की खबर सुनकर वे काफी उत्साहित थे। श्रीलंका के खिलाफ़ दो मैचों की टेस्ट सीरीज़, जिसे भारत ने 1-0 से जीता, में पडिक्कल ने नंबर 3 के बल्लेबाज़ साई सुदर्शन की जगह ली, जो चोट के कारण टीम से बाहर थे।
 

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कर्नाटक के साथ शानदार घरेलू सीज़न और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की लगातार IPL खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने के बाद, पडिक्कल ने अपनी शानदार फ़ॉर्म को इंटरनेशनल क्रिकेट में भी जारी रखा। उन्होंने तीन पारियों में 109 से ज़्यादा की औसत से 328 रन बनाकर 'प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़' का ख़िताब जीता। उन्होंने दो शतक भी लगाए, जिसमें उनका बेस्ट स्कोर 167 रन रहा। JioStar से बात करते हुए पडिक्कल ने कहा कि टेस्ट में खेलने का मौका आसानी से नहीं मिलता; इसके लिए लगातार कड़ी मेहनत और तैयारी की ज़रूरत होती है।

पडिक्कल ने कहा कि ज़ाहिर है, मुझे इसका बेसब्री से इंतज़ार था। ऐसे मौके आसानी से नहीं मिलते। खुद को बेहतर बनाते रहने और उस मौके का इंतज़ार करने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मुझे यह पक्का करना था कि जब भी मुझे मौका मिले, मैं उसके लिए तैयार रहूँ। उन्होंने आगे कहा कि सीरीज़ की शुरुआत में ही जब मुझे बताया गया कि मैं खेलने वाला हूँ, तो मैं बहुत उत्साहित था। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगा कि जिस तरह से मैं बैटिंग कर रहा था, उससे मैं अपने करियर के सबसे अच्छे दौर में था, इसलिए मैं इसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।
 

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पडिक्कल ने भारत के लिए नंबर 3 पर बैटिंग करने के बारे में भी बात की, यह एक ऐसी जगह है जहाँ पहले राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा जैसे टेस्ट के महान खिलाड़ी खेलते थे। इस बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने कहा कि उनका ध्यान पुराने खिलाड़ियों से तुलना करने के बजाय टीम में योगदान देने पर है। पडिक्कल ने कहा कि आखिरकार, बात मैदान पर जाकर बैटिंग करने की है। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि मैं किस नंबर पर बैटिंग कर रहा हूँ; मैं टीम के लिए योगदान देने की कोशिश कर रहा हूँ।
 
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Mon, 07 Sep 2026 17:32:00 +0530

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