कौन हैं फरमान हसन खान? इलाज से शिक्षा तक सेवा के जरिए हजारों जिंदगियों में किया बदलाव
समाज में बदलाव केवल बड़े भाषणों से नहीं आता. इसके लिए जमीन पर उतरकर लोगों की जरूरतों को समझना और उनके समाधान के लिए लगातार काम करना पड़ता है. बरेली के भारत गौरव रत्न से सम्मानित युवा सामाजिक कार्यकर्ता फरमान हसन खान इसी सोच के साथ लंबे समय से स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. उनकी पहल का उद्देश्य जरूरतमंदों को केवल तत्काल सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर उपलब्ध कराना है.
फरमान हसन खान की सामाजिक पहल के तहत अब तक 6,000 से अधिक जरूरतमंद मरीजों की मुफ्त शल्य चिकित्सा करवाया गया है. इसके अलावा हज़ारो की संख्या में गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा संबंधी सहायता, प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है. नीट जैसी कठिन चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की मुफ्त तैयारी के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है. इस साल उनकी मुफ्त नीट कोचिंग से तकरीबन 30 बच्चों ने क्वालीफाई किया.
इलाज के खर्च से मिली राहत
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए गंभीर बीमारी का इलाज अक्सर बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे परिवारों को ध्यान में रखते हुए मुफ्त चिकित्सा सहायता और शल्य चिकित्सा की व्यवस्था की गई. मोतियाबिंद, गुर्दे, पित्त की पथरी, हर्निया सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ मिला है.
एक मरीज के लिए मुफ्त ऑपरेशन का अर्थ केवल इलाज मिलना नहीं, बल्कि परिवार पर पड़ने वाले बड़े आर्थिक बोझ से राहत भी है. इसी सोच के साथ स्वास्थ्य सेवा को सामाजिक कार्यों का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है.
गरीब बच्चों के सपनों को मिला सहारा
फरमान हसन खान का मानना है कि आर्थिक कमजोरी किसी बच्चे की प्रतिभा के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए. इसी उद्देश्य से जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए मुफ्त शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की व्यवस्था की जा रही है. विशेष रूप से नीट,यूपीएससी,कक्षा 6 से 12 की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मुफ्त कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की पहल ने उन परिवारों के बच्चों के लिए उम्मीद पैदा की है, जो महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं. इस पहल से कई विद्यार्थी चिकित्सा शिक्षा की दिशा में आगे बढ़े हैं.
कंप्यूटर शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर
आज के दौर में शिक्षा के साथ तकनीकी ज्ञान भी जरूरी है. इसे ध्यान में रखते हुए युवाओं और महिलाओं के लिए मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण की पहल की गई है. कंप्यूटर शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ रोजगार के लिए जरूरी कौशल विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है. खास तौर पर लड़कियों को कंप्यूटर शिक्षा से जोड़ना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है. फरमान हसन खान की सोच है कि किसी जरूरतमंद को केवल सहायता देने के बजाय उसे ऐसा हुनर दिया जाए, जिससे वह भविष्य में स्वयं अपने पैरों पर खड़ा हो सके.
पौधारोपण का संदेश पहुंचा देश-दुनिया तक
सेवा का दायरा केवल स्वास्थ्य और शिक्षा तक सीमित नहीं है. पर्यावरण संरक्षण को भी सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है. फरमान हसन खान के आह्वान पर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ दुनिया के अलग-अलग स्थानों पर लाखों पौधे लगाए जाने का अभियान चलाया जा रहा है. लोगों को अपने बुजुर्गों की याद में पौधे लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया गया. इस पहल का उद्देश्य केवल पौधारोपण की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है.
बच्चों को शिक्षा सामग्री से लेकर जरूरतमंदों तक भोजन
फरमान हसन खान की सामाजिक पहल में जरूरतमंद बच्चों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता जैसे कार्य भी शामिल हैं. किताबें, कॉपियां और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. जरूरतमंद और गरीब लोगों तक भोजन पहुंचाने के प्रयास भी किए जाते हैं, ताकि किसी व्यक्ति को भूखे पेट न सोना पड़े.
महिलाओं और युवाओं को आगे बढ़ाने पर जोर
समाज के विकास के लिए महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को जरूरी मानते हुए कौशल विकास और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है. कंप्यूटर प्रशिक्षण, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और शिक्षा के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को अधिक सक्षम बनाने की कोशिश की जा रही है. उनका मानना है कि जब युवा अपने पैरों पर खड़े होंगे और महिलाएं आर्थिक व सामाजिक रूप से मजबूत होंगी, तभी समाज वास्तविक अर्थों में आगे बढ़ेगा.
इसरो का स्पष्टीकरण: न निजीकरण होगा, न भूमिका घटेगी; मीडिया रिपोर्टों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने निजीकरण और भूमिका कम किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह बेबुनियाद और गलत बताया है। इसरो ने स्पष्ट किया कि वह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का केंद्रीय संस्थान बना रहेगा और भविष्य के सभी महत्वपूर्ण मिशनों का नेतृत्व करता रहेगा।
इसरो ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी विस्तृत बयान में कहा कि हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह अटकलें लगाई गईं कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के बाद इसरो का निजीकरण किया जाएगा या उसकी भूमिका सीमित कर दी जाएगी। संगठन ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसरो का न तो निजीकरण होगा और न ही उसकी अहमियत कम की जाएगी।
इसरो ने कहा कि वह देश में उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान, राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशनों, मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी की लॉन्च तकनीकों, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्र और ग्रहों की खोज जैसे मिशनों का नेतृत्व करता रहेगा।
संगठन के अनुसार, निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य इसरो की भूमिका कम करना नहीं, बल्कि उसे और अधिक उन्नत अनुसंधान एवं भविष्य की तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना है।
इसरो ने कहा कि वर्ष 2020 से शुरू किए गए अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधार और भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 का उद्देश्य भारत में एक बड़ा, मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना है।
बयान में कहा गया कि उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में भागीदारी का अवसर दिया जा रहा है, जिससे इसरो की क्षमताएं और मजबूत होंगी। इसलिए इन सुधारों को निजीकरण नहीं, बल्कि स्पेस इकोसिस्टम के विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए।
इसरो ने बताया कि उसने अपनी कई परिपक्व तकनीकों का उद्योगों को हस्तांतरण पहले ही कर दिया है। इसका मतलब यह नहीं कि इसरो उस क्षेत्र से हट रहा है। इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन, व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान होगी, जबकि इसरो के वैज्ञानिक अगली पीढ़ी की तकनीकों और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर काम कर सकेंगे।
इसरो ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना, 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजना, पुन: प्रयोज्य लॉन्च सिस्टम विकसित करना और चंद्रमा व अन्य ग्रहों की दीर्घकालिक खोज को आगे बढ़ाना है।
संगठन ने कहा कि ऐसे महत्वाकांक्षी मिशनों के लिए इसरो का उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और रणनीतिक क्षमताओं पर केंद्रित रहना बेहद जरूरी है।
इसरो के अनुसार, 2020 में भारत में गिने-चुने स्पेस स्टार्टअप थे, जबकि आज उनकी संख्या 450 से अधिक हो चुकी है। ये स्टार्टअप लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट, प्रोपल्शन, अर्थ ऑब्जर्वेशन, कम्युनिकेशन और स्पेस एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
इसरो ने बताया कि भारत की स्पेस इकोनॉमी फिलहाल करीब 8.4 अरब डॉलर की है और 2033 तक इसे बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकारी संसाधनों के साथ-साथ निजी निवेश, औद्योगिक क्षमता और उद्यमिता की भी जरूरत होगी।
--आईएएनएस
डीएससी
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