सिंगापुर जा रहे एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान की चेन्नई में कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग, 180 यात्री थे सवार
Air India Express Emergency Landing: तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से सिंगापुर के लिए उड़ान भरने वाले एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान में उस समय हड़कंप मच गया जब बीच रास्ते में उसमें तकनीकी खराबी आ गई. विमान जब ऊंचाई पर सफर कर रहा था, तभी पायलट को कुछ तकनीकी गड़बड़ी का अहसास हुआ. बिना किसी देरी के पायलट ने स्थिति की गंभीरता को समझा और तुरंत नजदीकी चेन्नई हवाई अड्डे के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से संपर्क साधा. कंट्रोल रूम को हालात से अवगत कराते हुए विमान को चेन्नई की तरफ मोड़ने की अनुमति मांगी गई, जिसके बाद हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी से बचने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाए गए.
चेन्नई हवाई अड्डे पर आपात तैयारी
पायलट की ओर से चेतावनी मिलते ही चेन्नई हवाई अड्डे पर शाम करीब पौने छह बजे लोकल स्टैंड-बाई का एलान कर दिया गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए रनवे के आसपास राहत और बचाव से जुड़े दल तैयार कर दिए गए. कुछ ही पलों में विमान ने चेन्नई एयरपोर्ट के रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग की. विमान के जमीन पर पहिए छूते ही अंदर बैठे सभी लोगों ने राहत की गहरी सांस ली. अधिकारियों ने साफ किया कि विमान में मौजूद सभी 180 लोग, जिनमें मुसाफिर और चालक दल के सदस्य शामिल थे, पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.
विमान की जांच और यात्रियों के लिए इंतजाम
लैंडिंग के बाद हवाई जहाज को रनवे से हटाकर खड़ा कर दिया गया है. तकनीकी भाषा में इसे एयरक्राफ्ट ऑन ग्राउंड घोषित किया गया है, जिसका मतलब है कि जब तक तकनीकी टीम इसकी पूरी पड़ताल नहीं कर लेती, तब तक यह विमान दोबारा उड़ान नहीं भरेगा. एयरलाइन के इंजीनियरों का दल विमान के हर हिस्से की बारीकी से जांच कर रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि हवा में किस वजह से रुकावट आई थी. इस पूरे घटनाक्रम के बीच चेन्नई हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन पूरी तरह सामान्य बना रहा और अन्य उड़ानों पर कोई असर नहीं पड़ा. वहीं फंसे हुए यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए दूसरे विमान की व्यवस्था की जा रही है ताकि वे जल्द से जल्द सिंगापुर रवाना हो सकें.
एक ही दिन में दो विमानों में गड़बड़ी
चेन्नई हवाई अड्डे के लिए यह दिन काफी हलचल भरा रहा, क्योंकि कुछ ही घंटों के अंतराल में यह दूसरी बड़ी घटना थी जब किसी अंतरराष्ट्रीय उड़ान को तकनीकी खराबी की वजह से यहां उतारना पड़ा. इससे पहले मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से जेद्दा जा रही मलेशिया एयरलाइंस की एक उड़ान को भी चेन्नई डाइवर्ट किया गया था. मलेशिया एयरलाइंस के उस विमान में करीब एक सौ छियासी यात्री और क्रू सवार थे. उस विमान के दूसरे नंबर के इंजन में अचानक कुछ खराबी आ गई थी, जिसकी वजह से पायलट को उड़ान का रास्ता बदलना पड़ा.
मलेशियाई विमान में भी इंजन की परेशानी
मलेशिया एयरलाइंस के मामले में भी चेन्नई एयरपोर्ट पर तुरंत इमरजेंसी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए थे. अच्छी बात यह रही कि वह विमान भी पूरी सुरक्षा के साथ रनवे पर उतर गया था. लैंडिंग के बाद टोइंग गाड़ी की मदद से उस बड़े विमान को पार्किंग एरिया में पहुंचाया गया. उस विमान की भी तकनीकी जांच की जा रही है और उसके यात्रियों के ठहरने का उचित प्रबंध हवाई अड्डे पर ही कराया गया. एक ही दिन में दो अलग-अलग एयरलाइंस के विमानों में आई तकनीकी दिक्कतों ने सुरक्षा एजेंसियों और तकनीकी टीमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर ला दिया. हालांकि, दोनों ही मामलों में पायलटों की सूझबूझ और समय पर लिए गए फैसलों की वजह से सैकड़ों लोगों की जान सुरक्षित बच गई.
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भारत के साथ स्पेस पार्टनरशिप को लेकर ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी बोले- 'इसरो के साथ साझेदारी सबसे उच्च स्तर पर है'
बेंगलुरु, 7 सितंबर (आईएएनएस)। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंतरिक्ष सहयोग को लेकर ऑस्ट्रेलियाई व्यापार और निवेश आयोग के आयुक्त नाथन डेविस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 2022 में आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ईसीटीए) लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुंचा है। इस समझौते ने स्पेस सेक्टर को भी नई गति दी है। अधिकारी ने इसरो और ऑस्ट्रेलियन स्पेस एजेंसी (एएसए) के बीच एमओयू को वैश्विक साझेदारियों में सबसे उच्च स्तर का बताया।
सवाल : जब साल 2022 में आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता लागू हुआ, तो अंतरिक्ष क्षेत्र को लेकर भारत और ऑस्ट्रेलिया कितना आगे आए हैं?
जवाब : व्यापक द्विपक्षीय संबंधों में हम बहुत व्यापक साझेदार के रूप में और बहुत पुराने देशों के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। पिछले एक दशक में और खासकर पिछले पांच सालों में जिस तरह से आर्थिक संबंध बढ़ हैं, वह बहुत महत्वपूर्ण रहा है। 2021 में, हमने कई अलग-अलग क्षेत्रों में और अधिक निकटता से काम करने के लिए एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए। यह ऑस्ट्रेलियाई इकोसिस्टम के भीतर हमारी सबसे उच्च स्तर की पूरक साझेदारी है। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण रही है। हम अपने मुक्त व्यापार समझौते, एआई-ईसीटीए के तहत आगे बढ़ रहे हैं। पिछले एक साल में हम आखिरकार अपने दोनों देशों के बीच 50 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंच गए हैं, जो पहली बार है, जब यह उपलब्धि हासिल हुई है। मुक्त व्यापार समझौते के तहत इस तरह की बढ़ोतरी अभूतपूर्व रही है। निश्चित रूप से इसने अंतरिक्ष इकोसिस्टम को भी उसी तरह से समर्थन दिया है। हमने निश्चित रूप से देखा है कि हम किस तरह से अपनी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ा पाए हैं, खासकर पिछले कुछ सालों में जब भारत में आयात पर हमारे टैरिफ में सुधार हुआ है। इस अवधि में, हमने कई समझौते देखे हैं और निश्चित रूप से भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय में भी ऐसा ही रहा, जहां हमने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे हम पीएएक्सएक्स समझौता कहते हैं, जो साइबर टेक्नोलॉजी पर केंद्रित था और अंतरिक्ष उसमें एक महत्वपूर्ण साझेदारी थी।
सवाल : जब प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में दौरा किया था, तो कहा था कि भारत और ऑस्ट्रेलिया एक ही क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे से क्या उम्मीद कर सकते हैं?
जवाब : ऑस्ट्रेलियाई इकोसिस्टम और भारतीय इकोसिस्टम, हम लगातार एक-दूसरे के पूरक साझेदार होने की बात करते हैं। हम अलग-अलग तरीकों पर गौर कर रहे हैं कि कैसे वह इकोसिस्टम एक-दूसरे का पूरक बन सके। कच्चे माल के स्तर पर, हमारे पास बहुत सारे संसाधन हैं, जो भारत की विशाल विनिर्माण इकोसिस्टम में सप्लाई चेन के लिए उपयोगी हैं। हमारे पास जो टेक्नोलॉजी कंपनियां हैं, वे भारत में टेक स्टैक को एक अलग परत प्रदान करती हैं। इसके विपरीत भी है। भारत में भी एक मजबूत टेक इकोसिस्टम है जो समर्थन करता है, और जिस बात पर हमें बेहद गर्व है वह है भारतीयों का बड़ा प्रवासी समुदाय जो हमारी आबादी का 10 लाख से अधिक हिस्सा है, जो ज्यादा नहीं लगता, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के संदर्भ में यह काफी बड़ी संख्या है। हम देख रहे हैं कि हमारे द्वारा लाए गए प्रतिनिधिमंडल के साथ यह कैसे सामने आ रहा है। यहां आने वाली बहुत सी कंपनियां भारत जो करता है उसकी प्रतिस्पर्धी के तौर पर नहीं, बल्कि हमने 12 कंपनियां लाई हैं जो पूरकता के पहलू पर, उस संगम पर ध्यान दे रही हैं जहां उनकी तकनीक बहुत ही सहयोगात्मक तरीकों से व्यापक द्विपक्षीय इकोसिस्टम का समर्थन करती है।
सवाल : भारत को ऑस्ट्रेलिया से किस तरह की चीजें मिल सकती हैं?
जवाब: हमारे पास जो 12 कंपनियां यहां हैं, उनके लिहाज से देखें तो हमारे पास ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष इकोसिस्टम के पूरे स्पेक्ट्रम की झलक है। हमारे पास विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों के जरिए गहन शोध के शुरुआती चरण से लेकर, लॉन्च और री-एंट्री जैसी अपस्ट्रीम तकनीकों से लेकर, सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग और मैन्युफैक्चरिंग तक सब कुछ है। डाउनस्ट्रीम में हम उन कंपनियों को देख रहे हैं, जिनके पास अर्थ ऑब्जर्वेशन क्षमताएं हैं, इन-स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं हैं, विश्लेषण और एआई लेयर्स हैं। हम यहां जो बना रहे हैं, वह निश्चित रूप से ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष इकोसिस्टम के एक बहुत व्यापक ताने-बाने का एक छोटा सा मोजेक है।
सवाल : आपके नजरिए से दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियों जैसे कि एएसए की तुलना में इसरो कहां खड़ा है?
जवाब : एएसए और इसरो बेहद फायदेमंद साझेदार हैं और हमने इसे कई अलग-अलग तरीकों से देखा है। अंतरिक्ष पर उनकी हस्ताक्षरित प्रतिबद्धता एमओयू है, जो हमारी अंतरिक्ष एजेंसी और अन्य देशों के बीच बहुत कम द्विपक्षीय प्रतिबद्धताओं में से एक है। तो, एएसए-इसरो संबंध वैश्विक साझेदारियों में उस उच्चतम स्तर पर है, जहां हम अपनी दोनों सरकारों के बीच साझेदारी को देखते हैं।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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