आज का एक्सप्लेनर:ट्रम्प के दामाद, दोस्त से लेकर CIA डायरेक्टर तक, मॉस्को क्यों जा रहे; क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है
25 अगस्त को अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुखिया जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को की सीक्रेट विजिट की। 10 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत- जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी मॉस्को पहुंचे और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले। आखिर अमेरिकी अधिकारी एक के बाद एक मॉस्को क्यों जा रहे, बंद कमरों में क्या बात हो रही और क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बीते दिनों ट्रम्प के किन अधिकारियों ने रूस का दौरा किया? जवाब: पिछले 2 हफ्तों में ट्रम्प के 3 बड़े अधिकारी मॉस्को पहुंचे… जेरेड और स्टीव के दौरे से पहले रूस ने कीव पर 72 घंटे के लिए हमले रोकने का ऐलान किया था। यूक्रेन ने भी मॉस्को पर ड्रोन-मिसाइल हमले न करने की बात कही है। सवाल-2: CIA डायरेक्टर रास्ते बदल-बदलकर क्यों पहुंचे मॉस्को, हुआ क्या? जवाब: CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को दौर काफी सीक्रेट रहा। वे सामान्य प्लेन से सीधे मॉस्को नहीं पहुंचे, बल्कि उन्होंने अमेरिकी एयरफोर्स के C-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट से सफर किया। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि रैटक्लिफ के C-17 ने अमेरिका के मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज से लातविया के रीगा के लिए उड़ान भरी। फिर वे 25 अगस्त को मॉस्को के व्नुकोवो एयरपोर्ट पहुंचे। सिर्फ 8 घंटे मॉस्को में रहे। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रैटक्लिफ ने रूसी इंटेलिजेंस SVR के मुखिया सर्गेई नारिश्किन और घरेलू सुरक्षा एजेंसी FSB के चीफ अलेक्जेंडर बोर्तनिकोव से बात की। बाद में पुतिन को इसकी जानकारी दी गई। अमेरिकी न्यूज आउटलेट एक्सियोस, न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से लिखा… सवाल-3: ट्रम्प के दामाद और दोस्त ने पुतिन से क्या बात की? जवाब: गाजा-इजराइल और रूस-यूक्रेन जंग को अमेरिका की ओर से ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत संभाल रहे हैं। एक तो हैं- ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और दूसरे उनके 30 साल पुराने दोस्त स्टीव विटकॉफ हैं। जेरेड ट्रम्प की बेटी इवांका के पति और बिजनेसमैन हैं। वहीं स्टीव उनके रियल एस्टेट बिजनेस में पार्टनर हैं। जेरेड और स्टीव की जोड़ी मौजूदा डिप्लोमेसी की दुनिया में काफी मशहूर है। 5 सितंबर को ये जोड़ी मॉस्को पहुंची। एयरपोर्ट पर रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव ने उनकी अगवानी की। इसके बाद दोनों क्रेमलिन गए, जहां वे पुतिन से मिले। 3 घंटे 10 मिनट मीटिंग चली और फिर डिनर भी हुआ। रूसी राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने इस मीटिंग को पॉजिटिव, भरोसेमंद और नतीजा देने वाली बताया। बैठक में आर्थिक मुद्दों और रूस-अमेरिका के जॉइंट प्रोजेक्ट्स पर भी बात हुई। जेरेड और स्टीव के दौरे से पहले ट्रम्प ने कहा था कि दोनों जंग खत्म करने का नया प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं और यह अच्छा मौका है कि हम यह कर पाएं। लेकिन दिमित्री पेस्कोव ने मीटिंग में कोई नई बात या चर्चा होने से इनकार किया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में बड़ी बैठकें हो सकती हैं, जिनके अच्छे नतीजे होंगे। सवाल-4: अगर ट्रम्प, पुतिन और जेलेंस्की साथ बैठे तो क्या बात हो सकती है? जवाब: ऐसी चर्चा पहली बार नहीं हो रही है कि ट्रम्प, पुतिन और जेलेंस्की बातचीत की मेज पर एक साथ आएं। पहले भी ट्रम्प और जेलेंस्की इसके लिए राजी थे, लेकिन पुतिन इसे टालते रहे। अब रैटक्लिफ ने फिर से ये पेशकश की है। ऐसे में अगर तीनों के बीच बैठक हुई तो 4 बड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है… सवाल-5: तो क्या जल्द ही रूस-यूक्रेन जंग रुकने वाली है? जवाब: खुद ईरान जंग में उलझा अमेरिका 8 महीने बाद फिर से रूस-यूक्रेन जंग रोकने के लिए लामबंदी कर रहा है। जेरेड और स्टीव पहली बार कीव भी जा रहे हैं, जो अब तक सिर्फ मॉस्को जाते रहे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जंग खत्म हो सकती है। पिछले महीने जेलेंस्की ने उम्मीद जताई थी कि सितंबर में बहुत कुछ बदल सकता है। अमेरिकी और रूसी अधिकारियों ने भी संभावना जताई है कि आने वाले दिनों पर सकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं। 4 एक्सपर्ट्स से जानिए… ******* रिसर्च सहयोग- आदित्य रवि ----------- ये भी खबर पढ़िए… क्या बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होकर सऊदी-पाक-तुर्किये के साथ लड़ेगा; भारत के तीन तरफ से घिरने का खतरा हाल ही में सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम है भारत का पड़ोसी- बांग्लादेश। पूरी खबर पढ़िए…
शेयर बाजार में इस हफ्ते हलचल की उम्मीद:US-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमत और महंगाई-आंकड़ों जैसे 8 फैक्टर तय करेंगे बाजार की चाल
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका के महंगाई आंकड़े इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। इसके अलावा विदेशी निवेशकों का रुख, डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल और नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाला 18वां ब्रिक्स सम्मेलन भी घरेलू बाजार पर असर डालेंगे। इस हफ्ते 8 फैक्टर्स बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. US-ईरान के बीच बढ़ा तनाव इरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में एंट्री करने की कोशिश कर रहे एक अमेरिकी जहाज पर हमला करने का दावा किया है। इसके एक दिन पहले अमेरिकी सेना ने नौसैनिक जहाजों पर मिसाइल हमले के जवाब में तीन ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया था। इस घटनाक्रम से भू-राजनीतिक संकट गहरा गया है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में सप्लाई में रुकावट आने की आशंका से ब्रेंट क्रूड पिछले हफ्ते 8% और WTI क्रूड 9% से ज्यादा बढ़ गया। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एनर्जी मार्केट में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने से ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ी है, जिससे जोखिम वाले एसेट्स पर दबाव बना है। 3. अमेरिकी महंगाई के आंकड़े मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद अब सबकी नजरें US इन्फ्लेशन डेटा पर हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूएस फेडरल रिजर्व की नीतियों और ग्लोबल मार्केट सेंटिमेंट को आकार देने में यह आंकड़े बेहद अहम साबित होंगे। 4. प्राइमरी मार्केट में 11 नए IPO इस हफ्ते प्राइमरी मार्केट में काफी हलचल रहेगी। रेंटोमोजो, करमतारा इंजीनियरिंग और मनोहर इलेक्ट्रिकल्स जैसी 11 मेन-बोर्ड कंपनियां आईपीओ के जरिए टोटल ₹7,055 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं। 5. रुपए की रिकवरी और मजबूती अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए ने पिछले पांच हफ्तों का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। केंद्रीय बैंक की विशेष योजनाओं में मजबूत डॉलर इनफ्लो से रुपए को समर्थन मिला है, जिसकी चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। 6. FII की लगातार बिकवाली विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सितंबर के पहले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार से ₹7,443 करोड़ निकाले हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रहने और रुपया मजबूत होने के बावजूद अमेरिका में 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 4.78% होने के कारण FIIs बिकवाली कर रहे हैं। 7. ग्लोबल इकोनॉमिक इवेंट्स ग्लोबल लेवल पर अमेरिकी इन्फ्लेशन डेटा के साथ-साथ यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की बैठक, जापान का GDP ग्रोथ डेटा और चीन के महंगाई आंकड़े बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। 8. ब्रिक्स सम्मेलन नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में ग्लोबल ट्रेड और आर्थिक नीतियों पर होने वाली चर्चाएं भारतीय बाजारों के सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकती हैं। पिछले हफ्ते सेंसेक्स 1.2% गिरा था पिछले हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में 1.2% तक की गिरावट दर्ज की गई। लगातार चौथे हफ्ते बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार, 4 सितंबर को बाजार में तेजी रही। सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,515 पर बंद हुआ। निफ्टी में 24 अंक की तेजी रही, ये 23897 के स्तर पर बंद हुआ था। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है FII और FPI आउटफ्लो? जब फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) या फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) किसी देश के शेयर बाजार से अपने शेयर बेचकर पैसा निकालते हैं, तो उसे आउटफ्लो कहा जाता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है जब वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें या बॉन्ड यील्ड बढ़ती हैं, जिससे निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
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