8th Pay Commission Update: सरकारी कर्मचारियों की आ गई मौज, HRA में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी
8th Pay Commission Update: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों के लिए आने वाला समय बड़ी आर्थिक राहत लेकर आ सकता है. आठवें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर कर्मचारी वर्ग में लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं. सबसे ज्यादा ध्यान कर्मचारियों के भत्तों पर है, जिनमें मकान किराया भत्ता यानी HRA सबसे प्रमुख माना जाता है. ताजा जानकारी के मुताबिक कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने नए फिटमेंट फैक्टर के साथ साथ HRA की दरों में भारी बदलाव का प्रस्ताव रखा है. अगर सरकार इस मांग पर मुहर लगाती है, तो लेवल पांच के कर्मचारियों को मिलने वाला किराया भत्ता पहले के मुकाबले लगभग दोगुने से भी अधिक हो सकता है. इससे कर्मचारियों की हर महीने घर ले जाने वाली सैलरी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.
मकान किराया भत्ता और इसके फायदे
नौकरीपेशा लोगों के लिए मकान किराया भत्ता सैलरी का बेहद अहम हिस्सा होता है. यह भत्ता नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी को रहने की जगह और मकान के किराए का खर्च निकालने के लिए दिया जाता है. देश के बड़े शहरों में मकान का किराया लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह भत्ता कर्मचारियों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को काफी हद तक हल्का कर देता है. इसके अलावा HRA केवल आर्थिक मदद ही नहीं देता, बल्कि आयकर बचाने में भी एक बड़ा माध्यम बनता है. जो कर्मचारी पुरानी कर व्यवस्था का विकल्प चुनते हैं, वे आयकर कानून की धारा 10(13A) के तहत अपने HRA पर मिलने वाली टैक्स छूट का पूरा फायदा उठा सकते हैं. इस प्रकार यह भत्ता दोहरे लाभ के साथ कर्मचारियों के वित्तीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है.
सातवें वेतन आयोग में HRA का मौजूदा गणित
सातवें वेतन आयोग की मौजूदा व्यवस्था पर नजर डालें तो पे मैट्रिक्स के लेवल पांच पर काम करने वाले किसी भी कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन 29,200 रुपये प्रति माह तय है. सरकारी नियमों के अनुसार जब महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर जाता है, तब महानगरों यानी एक्स श्रेणी के शहरों के लिए HRA की दर बढ़कर मूल वेतन की 30 प्रतिशत हो जाती है. मौजूदा समय में महंगाई भत्ता इस सीमा को पार कर चुका है, इसलिए लेवल पांच के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन 29,200 रुपये का 30 प्रतिशत यानी 8,760 रुपये हर महीने मकान किराया भत्ता के रूप में मिल रहा है. यह व्यवस्था कर्मचारियों को मौजूदा महंगाई के दौर में शहरों में टिके रहने में मदद कर रही है.
कर्मचारी संगठनों की नई मांग और संभावित उछाल
आठवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है. उनकी सबसे प्रमुख मांग बेसिक पे को बढ़ाने और फिटमेंट फैक्टर को नए सिरे से तय करने की है. इसके साथ ही कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि एक्स श्रेणी के शहरों में रहने का खर्च पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है, इसलिए यहां HRA की दर को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 40 प्रतिशत किया जाना चाहिए. अगर मूल वेतन बढ़कर 61,320 रुपये के आसपास पहुंचता है और HRA की दर 40 प्रतिशत कर दी जाती है, तो कर्मचारियों को हर महीने मिलने वाला भत्ता 24,528 रुपये तक पहुंच सकता है. वहीं यदि सामान्य संशोधन के तहत भी गणना की जाए तो लेवल पांच के कर्मचारियों को हर महीने लगभग 15,768 से 15,800 रुपये तक का HRA आसानी से मिल सकता है, जो कि मौजूदा 8,760 रुपये से बहुत ज्यादा है.
शहरों की श्रेणियों के आधार पर भत्ते का निर्धारण
सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में रहने की लागत को ध्यान में रखते हुए शहरों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा हुआ है. पहली श्रेणी एक्स श्रेणी कहलाती है, जिसमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे देश के प्रमुख महानगर आते हैं. यहां मकानों का किराया और दैनिक जीवन का खर्च सबसे अधिक होता है, इसलिए यहां मूल वेतन पर सबसे ऊंची दर से HRA दिया जाता है. इसके बाद वाई श्रेणी आती है, जिसमें लखनऊ, जयपुर और पटना जैसे टियर दो शहर शामिल हैं. इन शहरों में रहने का खर्च मध्यम स्तर का होता है, इसलिए यहां बेसिक पे के आधार पर 20 प्रतिशत HRA मिलता है. सबसे अंत में जेड श्रेणी आती है, जिसमें देश के छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं, जहां मकान का किराया काफी कम होता है और कर्मचारियों को बेसिक पे का 10 प्रतिशत भत्ता दिया जाता है. नए वेतन आयोग में इन सभी श्रेणियों के भत्तों में सुधार होने की पूरी संभावना है.
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