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गैस चूल्हा संभालना…घर में खुद नहीं करने चाहिए ये 5 काम, एक्सपर्ट की होती है जरूरत

लोग जुगाड़ करके बहुत सारे काम कर लेते हैं, क्योंकि इससे पैसों की बचत हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में एक्सपर्ट की जरूरत होती है. 5 ऐसे काम हैं जो खुद से करने से बचना चाहिए, नहीं तो नुकसान हो सकता है.

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घर के मंदिर में शंख क्यों रखा जाता है? जानें इसे बजाने और पूजा में इस्तेमाल की धार्मिक मान्यता

Shankh religious significance: हिंदू धर्म में शंख को पवित्र माना जाता है और इसका उपयोग पूजा-पाठ तथा धार्मिक अनुष्ठानों में लंबे समय से किया जाता रहा है। कई घरों के पूजा स्थल में शंख रखा जाता है और विशेष अवसरों पर इसे बजाने की परंपरा निभाई जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शंख को भगवान विष्णु से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। भगवान विष्णु के हाथ में भी शंख का उल्लेख मिलता है, जिसे पंचजन्य कहा जाता है।

पूजा के दौरान शंख क्यों बजाया जाता है?
पूजा, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान शंख बजाने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि शंख की ध्वनि से पूजा का वातावरण पवित्र होता है और भक्तों का ध्यान आराधना की ओर केंद्रित होता है।

मंदिरों में आरती या विशेष पूजा के समय शंखनाद सुनाई देना आम बात है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और संप्रदायों में इसके उपयोग की परंपरा अलग हो सकती है।

भगवान विष्णु से क्या है शंख का संबंध?
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में भगवान विष्णु के चार प्रमुख आयुधों में शंख का भी उल्लेख किया जाता है। उनके हाथ में मौजूद शंख को पंचजन्य के नाम से जाना जाता है।

इसी वजह से भगवान विष्णु की पूजा और उनसे जुड़े कई धार्मिक अनुष्ठानों में शंख का विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालु पूजा के समय शंख में जल भरकर भगवान को अर्पित करने की परंपरा भी निभाते हैं।

समुद्र मंथन से भी जुड़ी है शंख की मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शंख को समुद्र से उत्पन्न हुई पवित्र वस्तुओं में से एक माना जाता है। समुद्र मंथन की कथाओं में विभिन्न रत्नों और दिव्य वस्तुओं का उल्लेख मिलता है, जिनसे शंख को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसी कारण शंख को समृद्धि और शुभता के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

क्या घर में रखा हर शंख बजाया जा सकता है?
धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग प्रकार के शंखों का उल्लेख मिलता है। कुछ शंखों को पूजा के दौरान बजाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि कुछ को केवल पूजा स्थल पर रखने की परंपरा है।

कई परिवार अपने धार्मिक विश्वास और पारंपरिक पूजा-पद्धति के अनुसार शंख का उपयोग करते हैं। यदि किसी विशेष प्रकार के शंख की पूजा या उपयोग को लेकर संशय हो, तो स्थानीय धार्मिक परंपरा का पालन किया जा सकता है।

शंख की देखभाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
पूजा में इस्तेमाल होने वाले शंख को साफ रखने की परंपरा है। धार्मिक दृष्टि से इसे पूजा स्थल पर सम्मानपूर्वक रखा जाता है।

व्यावहारिक रूप से भी शंख को समय-समय पर साफ रखना चाहिए। पूजा की विधि और नियम परिवार या स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

आज भी घरों और मंदिरों में कायम है शंखनाद की परंपरा
बदलती जीवनशैली के बावजूद शंख बजाने और इसे पूजा स्थल पर रखने की परंपरा आज भी व्यापक रूप से प्रचलित है। मंदिरों में आरती से लेकर घरों में होने वाली विशेष पूजा तक, शंख भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा बना हुआ है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और संप्रदायों में इन मान्यताओं में अंतर हो सकता है। इसे केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।

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  Sports

satwik-chirag: सात्विक-चिराग ने रचा इतिहास, चीन में पहली बार भारतीय जोड़ी ने जीता China Masters

स्पोटर्स डेस्क। भारत के स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने रविवार को चीन मास्टर्स में पुरुष डबल्स का खिताब अपने नाम कर लिया। BWF Super 750 टूर्नामेंट के फाइनल में वर्ल्ड नंबर-5 भारतीय जोड़ी ने चीन की जोड़ी को 11-21, 21-13, 21-17 से हराया। 70 मिनट तक चले इस रोमांचक मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने शानदार वापसी करते हुए खिताब पर कब्जा जमाया।

इस जीत के साथ सात्विक और चिराग ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। वे चीन मास्टर्स जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। यह टूर्नामेंट 2005 से खेला जा रहा है, लेकिन अब तक कोई भारतीय जोड़ी यहां चैंपियन नहीं बन सकी थी।

फाइनल की शुरुआत भारतीय जोड़ी के लिए अच्छी नहीं रही। चीन की जोड़ी ने जोरदार शुरुआत करते हुए 5-0 की बढ़त बना ली। सात्विक और चिराग ने वापसी की कोशिश की, लेकिन चीनी खिलाड़ी लगातार दबाव बनाए रहे। ब्रेक तक स्कोर 11-5 था। इसके बाद भी चीन की जोड़ी ने नियंत्रण बनाए रखा और पहला गेम 21-11 से सिर्फ 18 मिनट में अपने नाम कर लिया।

दूसरे गेम में भी चीन ने शुरुआत में 2-0 की बढ़त बनाई। लेकिन इस बार भारतीय जोड़ी ने तुरंत वापसी की। सात्विक और चिराग ने स्कोर 3-3 और फिर 6-6 से बराबर किया। इसके बाद दोनों ने मैच की रफ्तार अपने हाथ में ले ली। ब्रेक तक भारतीय जोड़ी 11-7 से आगे थी।

सात्विक के ताकतवर स्मैश और चिराग की आक्रामक नेट प्ले ने चीन की जोड़ी को लगातार दबाव में रखा। भारतीयों ने बढ़त को 17-11 तक पहुंचाया और आखिरकार दूसरा गेम 21-13 से जीतकर मुकाबले को निर्णायक गेम में पहुंचा दिया।

निर्णायक गेम में चीन ने फिर तेज शुरुआत की और 4-0 की बढ़त बना ली। लेकिन भारतीय जोड़ी ने हार नहीं मानी। सात्विक-चिराग ने स्कोर 7-7 से बराबर किया और ब्रेक तक 11-9 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया। भारतीय जोड़ी ने दबाव में शानदार खेल दिखाया और लगातार चार अंक हासिल कर मैच 21-17 से जीत लिया।

यह सात्विक-चिराग का BWF World Tour पर 10वां खिताब है। इस साल यह उनका दूसरा Super 750 खिताब और करियर का चौथा Super 750 खिताब है। 2026 में यह उनका तीसरा BWF World Tour फाइनल था। मई में उन्होंने Thailand Open में उपविजेता रहने के बाद उसी महीने Singapore Open का खिताब जीता था।

2023 और 2025 में China Masters के फाइनल में हारने वाली भारतीय जोड़ी ने इस बार कोई गलती नहीं की। पिछले महीने नई दिल्ली में World Championships के क्वार्टर फाइनल में बाहर होने के बाद सात्विक और चिराग ने शानदार वापसी करते हुए चीन की जमीन पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

Sun, 06 Sep 2026 19:47:54 +0530

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