दिल्ली स्टार्टअप और इनक्यूबेशन नीति 2026 को मिले उद्योग जगत के सुझाव; 10,000 स्टार्टअप और 4 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी को देश के प्रमुख स्टार्ट-अप केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए स्टार्ट-अप संस्थापकों, उद्यमियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने रविवार को आयोजित बैठक में स्टार्ट-अप और इनक्यूबेशन नीति 2026 के क्रियान्वयन को लेकर सुझाव लिए और नीति को और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के युवाओं से किया गया वादा अब धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा, दिल्ली स्टार्ट-अप और इनक्यूबेशन नीति 2026 के तहत विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में स्टार्ट-अप्स के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने तथा इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने की दिशा में सरकार ने ठोस रोडमैप तैयार किया है। देशभर से आए प्रमुख स्टार्ट-अप संस्थापकों, सीईओ और उद्योग प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए हैं, जिससे नीति को और अधिक व्यावहारिक, प्रभावी तथा स्टार्ट-अप-अनुकूल बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल नई कंपनियों को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां युवा नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन के माध्यम से देश के आर्थिक विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने भरोसा जताया कि उद्योग जगत की भागीदारी से तैयार की जाने वाली नीतियां स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को नई गति देंगी।
वहीं, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार स्टार्ट-अप और इनक्यूबेशन नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उद्योग जगत के साथ लगातार संवाद कर रही है। उन्होंने बताया कि इस बैठक का उद्देश्य उन उद्यमियों के अनुभवों को समझना था, जिन्होंने दिल्ली में अपने व्यवसाय की शुरुआत की और उसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का विजन अपने कार्यकाल के दौरान 10,000 से अधिक स्टार्ट-अप्स को समर्थन और प्रोत्साहन देना है, और इसके माध्यम से युवाओं के लिए 4 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा देने से न केवल रोजगार बढ़ेंगे, बल्कि नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
इस दौरान, जिप इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आकाश गुप्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार का यह प्रयास राजधानी को देश की स्टार्ट-अप राजधानी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद के नेतृत्व में युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने, नए संस्थापकों को मार्गदर्शन देने और स्टार्ट-अप्स को इनक्यूबेशन समर्थन उपलब्ध कराने का जो अभियान शुरू किया गया है, वह बेहद सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में पढ़ने वाले उन युवाओं के लिए यह पहल विशेष रूप से उपयोगी होगी जो अपना स्टार्ट-अप शुरू करने या अपनी कंपनी स्थापित करने का सपना देखते हैं।
आकाश गुप्ता ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दिल्ली ऐसी स्टार्ट-अप नीति लेकर आएगी, जो न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बनाएगी।
इस बीच, एस्ट्रोटॉक के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गुप्ता ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि सरकार द्वारा स्टार्ट-अप संस्थापकों से सीधे सुझाव लेना एक सराहनीय पहल है। उन्होंने बताया कि पहले उनकी कंपनी ने दिल्ली में कारोबार शुरू करने पर विचार किया था, लेकिन उस समय उपयुक्त परिस्थितियां नहीं बन सकीं। हालांकि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ हुई हालिया बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि दिल्ली सरकार स्टार्ट-अप्स को सहयोग देने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार लगातार उद्योग जगत से सुझाव लेकर नीतियां तैयार करती रही तो इससे बेहतर और अधिक प्रभावी नीतियां सामने आएंगी। पुनीत गुप्ता के अनुसार, ऐसी पहलें भविष्य में नए उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर देंगी और बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन करेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की जीडीपी बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका रोजगार सृजन है। जब अधिक लोग रोजगार प्राप्त करेंगे तो उनकी आय बढ़ेगी, उपभोग बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। उनके अनुसार, आज स्टार्ट-अप्स को दिया गया समर्थन आने वाले पांच से दस वर्षों में बड़े आर्थिक परिणामों के रूप में दिखाई देगा।
इसके अलावा, कैशकरो और अर्नकरो की सह-संस्थापक स्वाति भार्गवा ने भी दिल्ली सरकार की इस पहल की सराहना की। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि मुख्यमंत्री और मंत्री ने रविवार के दिन भी समय निकालकर बड़ी संख्या में स्टार्ट-अप संस्थापकों से मुलाकात की और उनके सुझाव सुने।
स्वाति भार्गवा ने आगे कहा कि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार नीतियां बनाते समय उद्योग जगत को सहभागी बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि जब नीति निर्माण प्रक्रिया में वास्तविक कारोबारियों और उद्यमियों की भागीदारी होती है, तो नीतियां अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनती हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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सीएम योगी ने वाराणसी में बाढ़ पीढ़ितों को बांटी राहत किट, कहा- 'अब सूखी ब्रेड नहीं, 50 किलो का पूरा पैकेज'
UP News: यूपी के कई जिले इनदिनों बाढ़ की मार झेल रहे हैं. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी बाढ़ का प्रकोप देखने को मिल रही है. इस बीच शनिवार को सीएम योगी वाराणसी पहुंचे. जहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की. साथ ही उन्हें राहत सामग्री भी बांटी. विद्या विहार इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की और प्रशासन की तैयारियों का जायजा लिया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने मौजूदा राहत व्यवस्था की तुलना वर्ष 2017 से पहले की स्थिति से करते हुए सरकार की ओर से किए जा रहे इंतजामों को गिनाया.
यूपी में पहले बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिलती थी राहत
सीएम योगी ने कहा कि करीब एक दशक पहले प्रदेश के 45 जिले बाढ़ की चपेट में आते थे. कई जिलों में मस्तिष्क ज्वर के कारण बच्चों की मौत होती थी. उन्होंने कहा कि उस समय बाढ़ प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिल पाती थी. आज प्रभावित परिवारों को करीब 50 किलो वजन की राहत किट उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें 26 अलग-अलग तरह की जरूरी वस्तुएं शामिल हैं. सीएम योगी ने कहा कि बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं, उनका सर्वे कराया जा रहा है. सर्वे के आधार पर किसानों को मुआवजा देने के निर्देश भी दिए गए हैं.
राहत किट में रोजमर्रा की जरूरत का सामान
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रत्येक प्रभावित परिवार को दी जा रही राहत किट में खाद्य सामग्री के साथ-साथ घरेलू और व्यक्तिगत उपयोग की जरूरी चीजें शामिल हैं. इसमें आटा, चावल, दाल, आलू, लाई, कच्चा और भुना चना, चीनी, बिस्किट, तेल, नमक, मसाले, साबुन, मोमबत्ती, माचिस, बाल्टी, तिरपाल, तौलिया, सैनिटरी पैड, मग और सैनिटाइजर जैसे सामान दिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राहत व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ की वजह से प्रभावित परिवारों को तत्काल जरूरत की चीजों के लिए परेशान न होना पड़े.
जनपद वाराणसी में आज बाढ़ प्रभावित परिवारों के मध्य पहुंचकर उनका कुशल-क्षेम जाना एवं उन्हें राहत सामग्री प्रदान की।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 5, 2026
मैं आश्वस्त करता हूं कि आपदा की इस घड़ी में डबल इंजन की सरकार हर प्रकार का सहयोग करने के लिए आपके साथ खड़ी है।
25 करोड़ प्रदेश वासियों की सेवा, सुरक्षा और सुविधा… pic.twitter.com/KrwzHiGHWH
बाढ़ से निपटने के लिए बनाए गए 21 राहत शिविर
सीएम योगी ने बताया कि वाराणसी के 16 वार्डों में फिलहाल 567 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं. इन परिवारों के करीब 2,486 लोगों के रहने के लिए 21 राहत शिविर बनाए गए हैं. शिविरों में भोजन समेत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है. बचाव कार्य के लिए 48 नावों के साथ एनडीआरएफ, पीएसी और जल पुलिस की टीमें तैनात हैं.
प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप भी लगाए जा रहे हैं. जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उन्हें कार्ड उपलब्ध कराने के साथ जरूरत के मुताबिक मुफ्त दवाएं भी दी जा रही हैं. सीएम ने कहा कि बाढ़ के दौरान डूबने, आकाशीय बिजली, मकान गिरने और सांप-बिच्छू के काटने जैसी घटनाओं में होने वाली जनहानि को भी आपदा राहत के दायरे में रखा गया है.
मौत होने पर 24 घंटे में चार लाख रुपये की सहायता
योगी ने कहा कि आपदा में किसी व्यक्ति की मौत होने पर प्रभावित परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक मदद देने की व्यवस्था की गई है. डूबने, आकाशीय बिजली गिरने या खेत में काम करने के दौरान हुई मौत की स्थिति में पात्र परिवार को आपदा राहत निधि से चार लाख रुपये की सहायता 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान है. उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ में किसी गरीब का घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने या बह जाने की स्थिति में प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी.
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1,129 किसानों की जमीन जलमग्न
मुख्यमंत्री के अनुसार वाराणसी में 1,129 किसानों की करीब 131 हेक्टेयर भूमि बाढ़ के पानी से प्रभावित हुई है. प्रशासन की ओर से इसका सर्वे कराया जा रहा है. रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा. सीएम योगी ने कहा कि वरुणा नदी में गंगा का जलस्तर बढ़ने पर बैकफ्लो की वजह से वाराणसी के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा होती है. पहले ऐसी परिस्थितियों में लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी. सरकार ने बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी की दिशा में कई कदम उठाए हैं.
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