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Delhi Building Collapse: हादसे में एक की मौत, अब भी मलबे में दबे कई छात्र, चश्मदीदों ने बताई आपबीती

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई. इमारत गिरते ही यहां पर मौजूद लोगों में भगदड़ जैसे हालात बन गए. इस दौरान एक शख्स की मौत की खबर सामने आई. सीएम रेखा गुप्ता हालात का जायजा लेने पहुंचीं. चश्मदीदों के अनुसार, कुछ ही पल में पूरी बिल्डिंग मलबे में बदल गई. एक चश्मदीद ने बताया कि अंदर 20-30 बच्चे फंसे होने की संभावना बताई जा रही है. हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. 

दिल्ली पुलिस ने बताया, "स्थानीय पूछताछ से पता चला कि यह 40-50 साल पुरानी इमारत थी, जिसमें एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल PG के तौर पर किया जा रहा था. घटना के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था. अब तक छह लोगों को बचाकर अस्पताल पहुंचाया जा चुका है. खोज और बचाव अभियान जारी है."

अब तक मलबे से चार लोगों को रेस्क्यू किया गया है. इमारत के मालिक का नाम आनंद बंसल है. हादसा मोती बाग के पास सत्य निकेतन में शिव मंदिर के करीब हुआ. ऐसा बताया जा रहा है कि इस इमारत में पीजी चलाया जा रहा था. ऐसे में अंदर छात्रों के मौजूद होने की आशंका जताई गई है. सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंच गईं. बचाव दल मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुटे हुए हैं. सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के करीब है. यहां पर बड़ी संख्या में छात्र पीजी में रहते हैं. इसके कारण हादसे के बाद छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है.

धूल का गुबार देखने को मिला

हादसे के समय मौके पर मौजूद एक चश्मदीद के अनुसार, इमारत अचानक गिर पड़ी. लोग कुछ समझते, इससे पहले ही चारों ओर से धूल का गुबार देखने को मिला. यहां पर आसपास मौजूद लोग तुरंत यहां से भागे. चश्मदीद के अनुसार, मलबे में 20 से 30 लोग दबे होने ही आशंका है. एक अन्य चश्मदीद ने जानकारी दी कि मलबे में  कई लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो सका है कि हादसे के समय इमारत के अंदर कितने लोग मौजूद थे. 

बचाव दल मलबा हटाने में जुटी

फायर डिपार्टमेंट को दोपहर के वक्त 1:33 बजे हादसे की जानकारी मिली. इसके बाद 12 दमकल गाड़ियां मौके पर  पहुंचीं. पुलिस, एमसीडी और बचाव दल मलबा हटाने में जुटी हैं. आरके पुरम के विधायक अनिल कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि कुछ लोग मलबे के नीचे फोन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग अभी अंदर फंसे हो सकते हैं. बचाव अभियान लगातार जारी है. स्थानीय लोग भी रेस्क्यू टीमों के साथ मिलकर मलबा हटाने में मदद कर रहे हैं. सबसे बड़ा प्रयास मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने को लेकर है. 

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स्टार्टअप्स को लैब से बाजार तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का माध्यम बनना चाहिए: डॉ. जितेंद्र सिंह

कोलकाता, 6 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में मौजूद नवाचार क्षमता को पहचानने और उसे वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग जगत तथा निवेशकों से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि स्वदेशी तकनीकों को प्रयोगशालाओं से बाजार तक तेजी से पहुंचाया जा सके।

कोलकाता में आयोजित छठे राइज कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि देश के 50 से 60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप अब छोटे शहरों और उभरते शहरी केंद्रों से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में नवाचार को बढ़ावा देने की रणनीति भी इन्हीं क्षेत्रों को केंद्र में रखकर तैयार की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के युवा नवोन्मेषक अब न केवल बड़े शहरों के उद्यमियों की बराबरी कर रहे हैं, बल्कि कई मामलों में उनसे बेहतर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। इसलिए वैज्ञानिक संस्थानों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की जिम्मेदारी है कि वे इन प्रतिभाओं तक पहुंचें, बजाय इसके कि उनसे स्थापित तकनीकी केंद्रों तक आने की अपेक्षा की जाए।

डॉ. सिंह ने कहा कि राइज कॉन्क्लेव जैसे आयोजन स्टार्टअप, उद्योग जगत, शोधकर्ताओं, संभावित मार्गदर्शकों और सरकारी प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करते हैं, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता के बीच मजबूत संबंध विकसित होते हैं और नई तकनीकों को व्यावसायिक रूप देने की प्रक्रिया तेज होती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुसंधान का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक पत्रों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। शोध को उद्यमिता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, व्यावसायीकरण और समाज के व्यापक उपयोग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स को प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने के प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य करना चाहिए।

कोलकाता को कॉन्क्लेव के आयोजन स्थल के रूप में महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इस शहर ने भारत के वैज्ञानिक और शैक्षणिक विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। बंगाल की धरती ने देश को अनेक महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद और संस्थान दिए हैं, जिन्होंने भारत की वैज्ञानिक प्रगति की नींव मजबूत की।

उन्होंने डॉ. बिधान चंद्र रॉय, प्रो. यू.एन. ब्रह्मचारी, सर सी.वी. रमन और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी महान हस्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह इस विरासत को आगे बढ़ाए और कोलकाता को फिर से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करे।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार का होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण अब धीरे-धीरे होल-ऑफ-साइंस मॉडल में विकसित हो रहा है, जिसके तहत मंत्रालयों, विभागों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और उद्योग जगत को एक साझा उद्देश्य के तहत जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने पूर्वी भारत में एक मजबूत नॉलेज कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, आईआईटी खड़गपुर, आईआईएसईआर कोलकाता, एनआईटी दुर्गापुर, अटल टिंकरिंग लैब्स तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से जुड़े संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाकर क्षेत्र को नवाचार और अनुसंधान का बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के आत्मनिर्भर तकनीकी भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि अनुसंधान संस्थानों में विकसित ज्ञान को तेजी से उद्योग और बाजार से जोड़ा जाए, जिससे न केवल नई तकनीकों का व्यावसायीकरण होगा, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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20 साल का सूखा खत्म, बांग्लादेश को हराकर भारत ने AFC अंडर-20 एशियाई कप के लिए किया क्वालीफाई

India seal AFC U20 Asian Cup qualification: भारत ने बांग्लादेश को 3-0 से हराकर 20 साल बाद पहली बार एएफसी अंडर-20 एशियाई कप के मुख्य टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई कर लिया. डैनी मीतेई लैशराम, विशाल यादव और एमडी अरबाश के गोलों की मदद से मिली इस जीत के बाद भारत ग्रुप बी में दूसरे स्थान पर रहा. उज्बेकिस्तान से सीरिया की हार के साथ ही भारत का 2006 के बाद से चला आ रहा मुख्य टूर्नामेंट का सूखा खत्म हुआ. यह टूर्नामेंट 2027 में चीन में आयोजित होगा. Sun, 6 Sep 2026 23:36:41 +0530

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