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Uttarakhand Elections 2027: हरि के द्वार की 11 विधानसभा सीटों पर बिछी सियासी बिसात

Uttarakhand Elections 2027: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड की सियासत में 'हरिद्वार' केवल आस्था, मां गंगा के पावन तटों और कुंभ की पावन स्थली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला पूरे राज्य की सत्ता की कुंजी माना जाता है. जहां उत्तर गोवा अपनी तटीय जीवनशैली और अनूठे जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए जाना जाता है, वहीं मैदानी और ग्रामीण ताने-बाने से बुना हरिद्वार जिला अपने धार्मिक महत्व, औद्योगिक केंद्रों (जैसे BHEL और रुड़की) और अनूठे सामाजिक समीकरणों के कारण राज्य के राजनीतिक पटल पर बेहद असरदार भूमिका निभाता है. 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर देवभूमि के इस सबसे बड़े वोट बैंक वाले जिले में भी राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है.

हरिद्वार की राजनीति का मिज़ाज राज्य के पहाड़ी जिलों से काफी अलग है. 11 विधानसभा सीटों वाला यह जिला (हरिद्वार शहर, रानीपुर, ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, रुड़की, खानपुर, लक्सर, मंगलौर और हरिद्वार ग्रामीण) सामाजिक और जनसांख्यिकीय दृष्टिकोण से बेहद विविध है. यहां चुनावी वैतरणी पार करने के लिए धार्मिक व आध्यात्मिक पहचान, गंगा किनारे का तीर्थ पर्यटन, सिडकुल का औद्योगिक विकास, किसानों के स्थानीय मुद्दे, और मुस्लिम, दलित व ऊपरी जातियों के वोट बैंक का अनूठा संतुलन बेहद निर्णायक सिद्ध होता है.

ऐतिहासिक रूप से हरिद्वार की राजनीति किसी एक दल का स्थाई गढ़ नहीं रही है. राज्य गठन के बाद से ही यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के बीच सीधी और तीखी टक्कर देखने को मिली है. हालांकि, राज्य के अन्य हिस्सों के विपरीत, हरिद्वार जिले में बहुजन समाज पार्टी (BSP) और निर्दलीय उम्मीदवारों का भी खासा दबदबा रहा है, जो अक्सर त्रिकोणीय मुकाबला बनाकर सत्ता के बड़े-बड़े समीकरणों को बिगाड़ने की ताकत रखते हैं.

‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात हरिद्वार जिले की...

हरिद्वार जिला न केवल उत्तराखंड का धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि रुड़की जैसा प्रमुख शैक्षणिक व सैन्य केंद्र और बीएचईएल (BHEL) जैसी औद्योगिक इकाइयां इसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती हैं. पिरान कलियर की ऐतिहासिक दरगाह से लेकर हरिद्वार के पौराणिक घाटों तक, और खादर-तराई के कृषि इलाकों से लेकर शहरी औद्योगिक बेल्ट तक, हरिद्वार की जनता का हर राजनीतिक फैसला देहरादून की विधानसभा की दिशा तय करता है.

यहाँ के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे तीर्थ पर्यटन का इंफ्रास्ट्रक्चर, बाढ़ व जलभराव प्रबंधन, उद्योगों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, और किसानों के गन्ना भुगतान के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर हरिद्वार जिले की 11 विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस पार्टी का पलड़ा भारी रहा है? और 2027 के इस महामुकाबले में किसकी चुनावी रणनीति सटीक बैठेगी? आइये सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं…

उत्तर गोवा जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी विवरण संख्या / प्रतिशत
जनसंख्या पुरुष 1,005,295
महिलाएं 885,127
कुल जनसंख्या 1,890,422
साक्षरता दर पुरुष साक्षरता दर 81.00%
महिला साक्षरता दर 64.00%
कुल साक्षरता दर 74.62%

उत्तर गोवा जिले की धार्मिक आबादी

धर्म (Religion) जनसंख्या प्रतिशत (Population Percentage)
हिंदू (Hindu) 64.27%
मुस्लिम (Muslim) 34.28%
सिख (Sikh) 0.92%
ईसाई (Christian) 0.26%

अब नजर 2022, विधानसभा सीट के परिणाम पर

विधानसभा क्षेत्र (Constituency) विजयी प्रत्याशी (Winner) पार्टी (Party) प्राप्त वोट (Votes Received) निकटतम प्रतिद्वंद्वी (Runner-up) पार्टी (Party) प्राप्त वोट (Votes Received)
हरिद्वार (Haridwar) मदन कौशिक BJP 53,147 सतपाल ब्रह्मचारी INC 37,910
हरिद्वार ग्रामीण (Haridwar Rural) अनुपमा रावत INC 50,028 स्वामी यतीश्वरानंद BJP 45,556
बीएचईएल रानीपुर (BHEL Ranipur) आदेश चौहान BJP 57,544 राजवीर सिंह चौहान INC 43,682
ज्वालापुर (Jwalapur - SC) रवि बहादुर INC 42,372 सुरेश राठौड़ BJP 29,029
भगवानपुर (Bhagwanpur - SC) ममता राकेश INC 44,808 सुबोध राकेश BSP 39,997
झबरेड़ा (Jhabrera - SC) वीरेन्द्र कुमार INC 39,652 राजपाल सिंह BJP 31,436
पिरान कलियर (Pirankaliyar) फुरकान अहमद INC 43,539 मुनीश कुमार सैनी BJP 27,796
रुड़की (Roorkee) प्रदीप बत्रा BJP 36,986 यशपाल राणा INC 34,709
खानपुर (Khanpur) उमेश कुमार IND 38,767 रवींद्र सिंह BSP 31,915
मंगलौर (Manglaur) सरवत करीम अंसारी BSP 32,660 काजी मोहम्मद निजामुद्दीन INC 32,062
लक्सर (Laksar) मोहम्मद शहजाद BSP 34,899 संजय गुप्ता BJP 24,459

अब जानें सभी सीटों के बारे में...

हरिद्वार (Haridwar): यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ रही है, जहां 2022 में वरिष्ठ नेता मदन कौशिक ने लगातार जीत दर्ज कर अपनी पकड़ बनाए रखी. यह निर्वाचन क्षेत्र धार्मिक पर्यटन, गंगा घाटों और आश्रमों के केंद्र होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

2. हरिद्वार ग्रामीण (Haridwar Rural): ग्रामीण परिवेश और कृषि प्रधान क्षेत्र वाली यह सीट 2022 के चुनाव में सबसे चर्चित रही क्योंकि यहां कांग्रेस की अनुपमा रावत ने तत्कालीन कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद को हराया था. यहां किसान और स्थानीय ग्रामीण मतदाता ही चुनाव की दिशा तय करते हैं.

3. बीएचईएल रानीपुर (BHEL Ranipur): औद्योगिक क्षेत्र (BHEL) और शहरी आबादी से घिरे इस निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के आदेश चौहान ने 2022 में जीत की हैट्रिक लगाई थी. इस सीट पर मुख्य रूप से बीएचईएल कर्मचारी, औद्योगिक मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों के मतदाता निर्णायक होते हैं.

4. ज्वालापुर (Jwalapur - SC): अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित इस सीट पर 2022 में बड़ा फेरबदल हुआ और कांग्रेस के रवि बहादुर ने भाजपा के मौजूदा विधायक को पटखनी दी. इस क्षेत्र में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी होने के कारण चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प रहते हैं.

5. भगवानपुर (Bhagwanpur - SC): यह सीट लंबे समय से दिवंगत नेता सुरेंद्र राकेश और उनके परिवार के प्रभाव में रही है, जहां 2022 में उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस से जीतीं. यह आरक्षित सीट उत्तर प्रदेश की सीमा से लगी हुई है, जिससे यहां बसपा की उपस्थिति भी हमेशा बहुत मजबूत रहती है.

6. झबरेड़ा (Jhabrera - SC): अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस विधानसभा क्षेत्र में 2022 में कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. ग्रामीण और कृषि-आधारित इस क्षेत्र में विकास, सड़क और बुनियादी सुविधाएं हमेशा मुख्य चुनावी मुद्दे रहते हैं.

7. पिरान कलियर (Pirankaliyar): विश्व प्रसिद्ध पिरान कलियर दरगाह के नाम से जानी जाने वाली यह सीट कांग्रेस के फुरकान अहमद का मजबूत गढ़ है, जिन्होंने 2022 में भी अपनी जीत बरकरार रखी. इस निर्वाचन क्षेत्र में अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं की संख्या बहुलता में है, जो हार-जीत तय करती है.

8. रुड़की (Roorkee): शिक्षा (IIT रुड़की) और व्यापारिक हब के रूप में पहचानी जाने वाली इस शहरी सीट पर 2022 में भाजपा के प्रदीप बत्रा ने बहुत करीबी मुकाबले में जीत हासिल की थी. यहां व्यापारी वर्ग और प्रबुद्ध मतदाता चुनाव परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

9. खानपुर (Khanpur): 2022 के चुनाव में यह उत्तराखंड की सबसे चर्चित सीटों में से एक थी, जहां निर्दलीय उम्मीदवार उमेश कुमार ने बड़े राजनीतिक दलों को हराकर जीत दर्ज की. यह सीट हमेशा से अपनी आक्रामक राजनीति और किसान आंदोलनों के प्रभाव के लिए जानी जाती है.

10. मंगलौर (Manglaur): पारंपरिक रूप से यह सीट बसपा और कांग्रेस के बीच का मुकाबला रही है, जहां 2022 में बसपा के दिवंगत सरवत करीम अंसारी ने बेहद मामूली अंतर (करीब 598 वोट) से जीत हासिल की थी. यह क्षेत्र पूरी तरह से कृषि और अल्पसंख्यक-दलित आबादी के प्रभुत्व वाला है.

11. लक्सर (Laksar): गन्ना किसानों की बेल्ट और जलभराव की समस्या के लिए चर्चित लक्सर सीट पर 2022 में बसपा के कद्दावर नेता मोहम्मद शहजाद ने जीत हासिल की थी. इस सीट पर किसान राजनीति, गन्ने के दाम और बाढ़ नियंत्रण जैसे स्थानीय मुद्दे हमेशा हावी रहते हैं.

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