स्टार्टअप्स को लैब से बाजार तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का माध्यम बनना चाहिए: डॉ. जितेंद्र सिंह
कोलकाता, 6 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में मौजूद नवाचार क्षमता को पहचानने और उसे वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग जगत तथा निवेशकों से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि स्वदेशी तकनीकों को प्रयोगशालाओं से बाजार तक तेजी से पहुंचाया जा सके।
कोलकाता में आयोजित छठे राइज कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि देश के 50 से 60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप अब छोटे शहरों और उभरते शहरी केंद्रों से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में नवाचार को बढ़ावा देने की रणनीति भी इन्हीं क्षेत्रों को केंद्र में रखकर तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के युवा नवोन्मेषक अब न केवल बड़े शहरों के उद्यमियों की बराबरी कर रहे हैं, बल्कि कई मामलों में उनसे बेहतर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। इसलिए वैज्ञानिक संस्थानों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की जिम्मेदारी है कि वे इन प्रतिभाओं तक पहुंचें, बजाय इसके कि उनसे स्थापित तकनीकी केंद्रों तक आने की अपेक्षा की जाए।
डॉ. सिंह ने कहा कि राइज कॉन्क्लेव जैसे आयोजन स्टार्टअप, उद्योग जगत, शोधकर्ताओं, संभावित मार्गदर्शकों और सरकारी प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करते हैं, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता के बीच मजबूत संबंध विकसित होते हैं और नई तकनीकों को व्यावसायिक रूप देने की प्रक्रिया तेज होती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुसंधान का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक पत्रों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। शोध को उद्यमिता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, व्यावसायीकरण और समाज के व्यापक उपयोग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स को प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने के प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य करना चाहिए।
कोलकाता को कॉन्क्लेव के आयोजन स्थल के रूप में महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इस शहर ने भारत के वैज्ञानिक और शैक्षणिक विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। बंगाल की धरती ने देश को अनेक महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद और संस्थान दिए हैं, जिन्होंने भारत की वैज्ञानिक प्रगति की नींव मजबूत की।
उन्होंने डॉ. बिधान चंद्र रॉय, प्रो. यू.एन. ब्रह्मचारी, सर सी.वी. रमन और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी महान हस्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह इस विरासत को आगे बढ़ाए और कोलकाता को फिर से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करे।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार का होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण अब धीरे-धीरे होल-ऑफ-साइंस मॉडल में विकसित हो रहा है, जिसके तहत मंत्रालयों, विभागों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और उद्योग जगत को एक साझा उद्देश्य के तहत जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने पूर्वी भारत में एक मजबूत नॉलेज कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, आईआईटी खड़गपुर, आईआईएसईआर कोलकाता, एनआईटी दुर्गापुर, अटल टिंकरिंग लैब्स तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से जुड़े संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाकर क्षेत्र को नवाचार और अनुसंधान का बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के आत्मनिर्भर तकनीकी भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि अनुसंधान संस्थानों में विकसित ज्ञान को तेजी से उद्योग और बाजार से जोड़ा जाए, जिससे न केवल नई तकनीकों का व्यावसायीकरण होगा, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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Putin से 3 घंटे की मुलाकात के बाद कीव पहुंचे ट्रंप के दूत, क्या अब खत्म होगा रूस-यूक्रेन युद्ध?
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें एक बार फिर तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुश्नर रविवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे।
उनका यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब इससे एक दिन पहले दोनों ने मॉस्को के क्रेमलिन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तीन घंटे से ज्यादा समय तक बंद कमरे में बैठक की थी।
पुतिन के साथ बैठक को बताया 'सकारात्मक'
मॉस्को में हुई इस हाईलेवल बैठक को रूसी अधिकारियों ने 'सकारात्मक और उपयोगी' बताया। हालांकि, बैठक के बाद किसी बड़े समझौते का ऐलान नहीं किया गया। बातचीत में युद्ध खत्म करने के संभावित रास्तों के साथ-साथ आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इस बीच, दोनों पक्षों ने कूटनीतिक बातचीत के दौरान माहौल को बेहतर बनाने के लिए तीन दिनों के अस्थायी हवाई सीजफायर पर सहमति जताई है।
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तीन दिन तक कीव और मॉस्को पर हवाई हमले नहीं
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कीव पर तीन दिनों तक हवाई हमले नहीं करने का आदेश दिया है। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी अमेरिकी दूतों से बातचीत के बाद सोशल मीडिया के जरिए कहा कि यूक्रेन शनिवार, रविवार और सोमवार को मॉस्को पर जवाबी हमले नहीं करेगा। दोनों देशों की राजधानियों को निशाना न बनाने की इस अस्थायी पहल से आम लोगों को कुछ समय के लिए राहत मिलने की उम्मीद है।
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रूस की मांग को यूक्रेन ने किया खारिज
ईरान से जुड़े तनाव के कारण पिछले करीब छह महीनों से धीमी पड़ी शांति प्रक्रिया अब फिर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। अमेरिका दोनों देशों के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई मुद्दों पर अभी भी दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद है। रूस ने यूक्रेन से पूर्वी डोनेट्स्क और लुहान्स्क के उन इलाकों से अपनी सेना हटाने की मांग की है, जिन पर यूक्रेन का नियंत्रण है। यूक्रेन इस मांग को पहले ही खारिज कर चुका है।
जेलेंस्की से मुलाकात पर टिकी नजरें
अब अमेरिकी दूतों की कीव यात्रा पर सबकी नजरें हैं। स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर की राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ होने वाली बातचीत में युद्ध रोकने और संभावित शांति समझौते को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि, क्या यह बातचीत रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में कोई बड़ा रास्ता खोल पाएगी, यह आने वाले दिनों में ही साफ होगा।
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