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सीमावर्ती गांवों को नई पहचान: 11,639 करोड़ रुपए की 'वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम' से 2,616 गांवों के विकास का लक्ष्य

नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने देश के सीमावर्ती गांवों को विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित करने के लिए वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (वीवीपी) के तहत बड़े पैमाने पर पहल शुरू की है। सरकार ने रविवार को बताया कि 11,639 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय वाली इस योजना के माध्यम से देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर स्थित 2,616 से अधिक गांवों को बुनियादी सुविधाओं, रोजगार अवसरों और आधुनिक अवसंरचना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार का मानना है कि सीमावर्ती गांव केवल देश के अंतिम छोर पर बसे क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि वे भारत के प्रथम गांव हैं। इसी सोच के साथ इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत सड़क संपर्क, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, पेयजल, डिजिटल कनेक्टिविटी और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को विकास की वही सुविधाएं मिलें जो देश के अन्य हिस्सों में उपलब्ध हैं।

भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाएं 15,000 किलोमीटर से अधिक लंबी हैं और सात देशों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सबसे लंबी सीमा बांग्लादेश (4,096.7 किमी) के साथ है, जबकि चीन (3,488 किमी) और पाकिस्तान (3,323 किमी) के साथ भी लंबी सीमाएं साझा की जाती हैं। इसके अलावा, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान के साथ भी भारत की सीमाएं लगती हैं।

दशकों तक दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संपर्क सुविधाओं, कमजोर अवसंरचना और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण अनेक सीमावर्ती गांव विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। इन परिस्थितियों के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने इन क्षेत्रों से पलायन किया, जिससे कई गांवों की आबादी लगातार घटती चली गई।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने वर्ष 2023 में वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम शुरू किया, जिसका उद्देश्य केवल भौतिक अवसंरचना का निर्माण नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में टिकाऊ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर मजबूत और आत्मनिर्भर समुदाय तैयार करना भी है।

योजना को दो चरणों, वीवीपी-1 और वीवीपी-2, में लागू किया जा रहा है। वीवीपी-1 मुख्य रूप से उत्तरी सीमा क्षेत्रों के गांवों पर केंद्रित है, जबकि वीवीपी-2 के तहत अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े गांवों को शामिल किया जा रहा है। दोनों चरणों को मिलाकर 2,616 से अधिक गांवों को कवर किया जाएगा।

कार्यान्वयन व्यवस्था के लिहाज से भी दोनों चरण अलग हैं। वीवीपी-1 एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे राज्यों के सहयोग से लागू किया जा रहा है, जबकि वीवीपी-2 पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित केंद्रीय क्षेत्र योजना है। हालांकि दोनों का लक्ष्य सीमावर्ती समुदायों की जीवन गुणवत्ता में सुधार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

गौरतलब है कि वीवीपी-1 की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में की गई थी, जिसका औपचारिक शुभारंभ 10 अप्रैल 2023 को अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले स्थित किबिथू गांव से किया गया था। किबिथू भारत के सबसे पूर्वी और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में से एक माना जाता है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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कितने छात्र फंसे हैं, कहना मुश्किल... Satya Niketan Building Collapse पर BJP MLA का बड़ा बयान

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के मोती बाग इलाके में सत्य निकेतन के पास रविवार दोपहर एक 5 मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि इस इमारत में छात्रों के लिए हॉस्टल और पीजी संचालित किए जा रहे थे। ऐसे में मलबे में कई छात्रों समेत अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका है।

हादसे के बाद बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन

इमारत गिरने की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस (DFS), दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, एमसीडी और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।

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छात्रों के फंसे होने की आशंका

बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि इस इमारत में अलग-अलग जगहों से पढ़ाई करने आए छात्र PG में रह रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी यह कहना मुश्किल है कि मलबे में कितने छात्र फंसे हैं, लेकिन कुछ छात्रों के अंदर फंसे होने की जानकारी है।

विधायक के मुताबिक, एनडीआरएफ और एमसीडी की टीमों ने अब तक दो छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं, कुछ छात्र अंदर से फोन भी कर रहे हैं, जिससे आशंका है कि अभी कई और लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं।

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सरकार की टीम मौके पर

अनिल शर्मा ने बताया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की पूरी टीम को मौके पर भेजा है। सरकार का मुख्य फोकस मलबे में फंसे छात्रों और अन्य लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने पर है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है और फंसे लोगों की संख्या को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

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  Sports

tilak varma sledge: दलीप ट्रॉफी फाइनल में तिलक वर्मा का पारा चढ़ा, वैभव सूर्यवंशी को बोले- 'क्या रे ये वाइस-कैप्टन'

स्पोर्ट्स डेस्क। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पहले ही दिन मैदान पर रोमांच के साथ गर्मागर्मी भी देखने को मिली। साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ईस्ट जोन के ओपनर्स वैभव सूर्यवंशी और अभिमन्यु ईश्वरन की शानदार बल्लेबाजी से इस कदर परेशान हुए कि उन्होंने 10वें ओवर के आसपास वैभव को स्लेज करना शुरू कर दिया। हालांकि तिलक की यह कोशिश युवा बल्लेबाज पर ज्यादा असर नहीं डाल सकी।

ईस्ट जोन की पारी की शुरुआत से ही वैभव और ईश्वरन ने साउथ जोन के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया था। मोहम्मद सिराज जैसे तेज गेंदबाज के खिलाफ भी दोनों बल्लेबाजों ने आसानी से रन बनाए। कुछ ओवर पहले ही वैभव ने सिराज की गेंदों पर जोरदार शॉट लगाए थे। इसके बाद तिलक ने खुद वैभव के पास जाकर उनका ध्यान भटकाने की कोशिश की।

तिलक ने वैभव के सामने जाकर कहा- 'क्या रे ये वाइस-कैप्टन' इसके बाद वह वहां से चले गए। तिलक की इस छोटी सी स्लेजिंग का वैभव की बल्लेबाजी पर कोई खास असर नहीं पड़ा। दोनों बल्लेबाजों ने अपनी लय बरकरार रखी और ईस्ट जोन को शानदार शुरुआत दिलाई।

ईश्वरन ने महज 46 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। वह 14वें ओवर में इस मुकाम तक पहुंचे। दूसरी ओर वैभव भी तेजी से अपने अर्धशतक की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन 16वें ओवर में बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सीवी मिलिंद की शॉर्ट गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे।

हालांकि, तब तक दोनों बल्लेबाज मैच का रुख तय कर चुके थे। वैभव और ईश्वरन ने शुरुआती 15 ओवर में ही 100 रन जोड़ दिए। खास बात यह थी कि जिस पिच पर पहले घंटे में बल्लेबाजों से संभलकर खेलने की उम्मीद थी, वहां दोनों ने आक्रामक अंदाज दिखाया।

इससे पहले ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। उन्हें उम्मीद थी कि शुरुआती घंटे में तेज गेंदबाजों को पिच से मदद मिलेगी। मोहम्मद सिराज के पहले ओवर में सीम और बाउंस के संकेत भी मिले, लेकिन ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने धीरे-धीरे साउथ के गेंदबाजी आक्रमण की धार कुंद कर दी।

वैभव ने ऑफ साइड पर जमकर रन बटोरे, जबकि ईश्वरन ने लेग साइड को निशाना बनाया। दोनों की बल्लेबाजी से परेशान तिलक को 8वें ओवर से ही पांच बाउंड्री राइडर्स लगाने पड़े। रेड-बॉल क्रिकेट में इस तरह का फील्ड सेटअप कम ही देखने को मिलता है।

हालांकि, साउथ जोन ने पहले सत्र में दोनों बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया। वैभव शॉर्ट गेंद पर आउट हुए, जबकि ईश्वरन रन आउट हो गए। पिच पर बल्लेबाज एस मोहन के साथ हुई गलतफहमी के कारण ईश्वरन को विकेट गंवाना पड़ा। पहले सत्र के अंत तक ईस्ट जोन का स्कोर 133 रन पर दो विकेट था।

Sun, 06 Sep 2026 15:04:48 +0530

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