कितने छात्र फंसे हैं, कहना मुश्किल... Satya Niketan Building Collapse पर BJP MLA का बड़ा बयान
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के मोती बाग इलाके में सत्य निकेतन के पास रविवार दोपहर एक 5 मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि इस इमारत में छात्रों के लिए हॉस्टल और पीजी संचालित किए जा रहे थे। ऐसे में मलबे में कई छात्रों समेत अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका है।
हादसे के बाद बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन
इमारत गिरने की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस (DFS), दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, एमसीडी और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।
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छात्रों के फंसे होने की आशंका
बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि इस इमारत में अलग-अलग जगहों से पढ़ाई करने आए छात्र PG में रह रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी यह कहना मुश्किल है कि मलबे में कितने छात्र फंसे हैं, लेकिन कुछ छात्रों के अंदर फंसे होने की जानकारी है।
विधायक के मुताबिक, एनडीआरएफ और एमसीडी की टीमों ने अब तक दो छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं, कुछ छात्र अंदर से फोन भी कर रहे हैं, जिससे आशंका है कि अभी कई और लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं।
#WATCH | Delhi: On the building collapse near Satya Niketan in South-West Delhi, BJP MLA Anil Sharma says, "This is a deeply tragic incident; there could be nothing more heartbreaking. Students come here from various places to study and stay in PGs in this building; the structure… pic.twitter.com/fiOm2e01ff
— ANI (@ANI) September 6, 2026
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सरकार की टीम मौके पर
अनिल शर्मा ने बताया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की पूरी टीम को मौके पर भेजा है। सरकार का मुख्य फोकस मलबे में फंसे छात्रों और अन्य लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने पर है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है और फंसे लोगों की संख्या को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
Hydrogen Train को 110 किमी प्रति घंटा रफ्तार से चलाने की तैयारी, Railway Board ने दी जानकारी
इंदौर (मप्र), छह सितंबर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सतीश कुमार ने रविवार को कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से परिचालित करने का प्रयास किया जा रहा है और अन्य रेल खंडों पर भी इसके संचालन को लेकर विचार किया जा रहा है। कुमार ने आला अफसरों के साथ इंदौर और इसके आस-पास के क्षेत्रों की कई रेल परियोजनाओं की समीक्षा की। इनमें अलग-अलग रेल लाइन के निर्माण के साथ ही इंदौर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े अन्य काम शामिल हैं।
उन्होंने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अब तक हाइड्रोजन ट्रेन की परिचालन गति अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई। हालांकि, इसका 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए परीक्षण कर लिया गया है। इसके बाद इसे अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से परिचालित करने का प्रयास किया जा रहा है।’’ हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे मार्ग पर संचालित की जा रही भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 जुलाई को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
कुमार ने कहा कि सभी हितधारकों से चर्चा करके तय किया जा रहा है कि नयी हाइड्रोजन ट्रेन को देश के किन रेल खंडों में चलाया जा सकता है और इस सिलसिले में तकनीकी पहलुओं व ईंधन की आपूर्ति की व्यवस्थाओं को भी परखा जा रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन हावड़ा और कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच परिचालित की जा रही है, जबकि ऐसी चार और ट्रेन बनकर आ चुकी हैं तथा आने वाले दिनों में उनका विधिवत उद्घाटन होना है। उन्होंने कहा कि रेलवे को इस साल 11 और वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मिलने की उम्मीद है।
रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि 200 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर बनायी जा रही हैं और इन्हें तैयार होने में एक से डेढ़ साल लगेगा। उन्होंने यह भी बताया कि उज्जैन में 2028 के दौरान लगने वाले सिंहस्थ मेले के वास्ते 100 से 125 विशेष ट्रेन चलाने की योजना बनाई जा रही है और इस विशाल धार्मिक आयोजन के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। कुमार ने कहा कि रेलगाड़ियों में चूहों की समस्या के निदान के लिए जरूरी प्रशासनिक कदम उठाने के साथ ही व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।
रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि रेलगाड़ियों और रेलवे स्टेशन की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सीसीटीवी कैमरा के साथ कृत्रिम मेधा (एआई) को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन के लिए तेज गति से भूमि अधिग्रहण का कार्य किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि 18,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम चार से पांच साल में पूरा किया जाएगा।
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