tilak varma sledge: दलीप ट्रॉफी फाइनल में तिलक वर्मा का पारा चढ़ा, वैभव सूर्यवंशी को बोले- 'क्या रे ये वाइस-कैप्टन'
स्पोर्ट्स डेस्क। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पहले ही दिन मैदान पर रोमांच के साथ गर्मागर्मी भी देखने को मिली। साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ईस्ट जोन के ओपनर्स वैभव सूर्यवंशी और अभिमन्यु ईश्वरन की शानदार बल्लेबाजी से इस कदर परेशान हुए कि उन्होंने 10वें ओवर के आसपास वैभव को स्लेज करना शुरू कर दिया। हालांकि तिलक की यह कोशिश युवा बल्लेबाज पर ज्यादा असर नहीं डाल सकी।
ईस्ट जोन की पारी की शुरुआत से ही वैभव और ईश्वरन ने साउथ जोन के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया था। मोहम्मद सिराज जैसे तेज गेंदबाज के खिलाफ भी दोनों बल्लेबाजों ने आसानी से रन बनाए। कुछ ओवर पहले ही वैभव ने सिराज की गेंदों पर जोरदार शॉट लगाए थे। इसके बाद तिलक ने खुद वैभव के पास जाकर उनका ध्यान भटकाने की कोशिश की।
तिलक ने वैभव के सामने जाकर कहा- 'क्या रे ये वाइस-कैप्टन' इसके बाद वह वहां से चले गए। तिलक की इस छोटी सी स्लेजिंग का वैभव की बल्लेबाजी पर कोई खास असर नहीं पड़ा। दोनों बल्लेबाजों ने अपनी लय बरकरार रखी और ईस्ट जोन को शानदार शुरुआत दिलाई।
????POOR BEHAVIOUR BY TILAK VERMA AGAINST VAIBHAV SURYAVANSHI????
— Sam (@cricsam02) September 6, 2026
Tilak Varma has not done well as a captain in the first two hours of game in Duleep Trophy final.
- Vaibhav & Abhimanyu Easwaran exposed his captaincy.
- frustrated & lost Tilak Varma trying to break partnership by… pic.twitter.com/u8vDgfrFHA
ईश्वरन ने महज 46 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। वह 14वें ओवर में इस मुकाम तक पहुंचे। दूसरी ओर वैभव भी तेजी से अपने अर्धशतक की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन 16वें ओवर में बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सीवी मिलिंद की शॉर्ट गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे।
हालांकि, तब तक दोनों बल्लेबाज मैच का रुख तय कर चुके थे। वैभव और ईश्वरन ने शुरुआती 15 ओवर में ही 100 रन जोड़ दिए। खास बात यह थी कि जिस पिच पर पहले घंटे में बल्लेबाजों से संभलकर खेलने की उम्मीद थी, वहां दोनों ने आक्रामक अंदाज दिखाया।
इससे पहले ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। उन्हें उम्मीद थी कि शुरुआती घंटे में तेज गेंदबाजों को पिच से मदद मिलेगी। मोहम्मद सिराज के पहले ओवर में सीम और बाउंस के संकेत भी मिले, लेकिन ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने धीरे-धीरे साउथ के गेंदबाजी आक्रमण की धार कुंद कर दी।
वैभव ने ऑफ साइड पर जमकर रन बटोरे, जबकि ईश्वरन ने लेग साइड को निशाना बनाया। दोनों की बल्लेबाजी से परेशान तिलक को 8वें ओवर से ही पांच बाउंड्री राइडर्स लगाने पड़े। रेड-बॉल क्रिकेट में इस तरह का फील्ड सेटअप कम ही देखने को मिलता है।
हालांकि, साउथ जोन ने पहले सत्र में दोनों बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया। वैभव शॉर्ट गेंद पर आउट हुए, जबकि ईश्वरन रन आउट हो गए। पिच पर बल्लेबाज एस मोहन के साथ हुई गलतफहमी के कारण ईश्वरन को विकेट गंवाना पड़ा। पहले सत्र के अंत तक ईस्ट जोन का स्कोर 133 रन पर दो विकेट था।
Mouth Ulcers Remedies: मुंह के छालों का पेट से है गहरा कनेक्शन? इन आसान घरेलू उपायों से मिलेगी जल्द राहत
Mouth Ulcers Remedies: मुंह में बार-बार होने वाले छाले भले ही छोटी समस्या लगें, लेकिन इनकी वजह से खाना-पीना और यहां तक कि बोलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार मसालेदार खाना, मुंह में चोट या पोषण की कमी इसके पीछे कारण हो सकती है। वहीं, पाचन से जुड़ी गड़बड़ियां भी कुछ लोगों में मुंह के छालों के साथ जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए अगर छाले बार-बार परेशान कर रहे हैं, तो केवल उन्हें दबाने के बजाय इसकी संभावित वजह पर भी ध्यान देना जरूरी है।
खास बात यह है कि हर मुंह का छाला पेट खराब होने की वजह से नहीं होता। तनाव, नींद की कमी, आयरन या विटामिन B12 जैसी पोषक तत्वों की कमी, हार्मोनल बदलाव और कुछ दवाओं के कारण भी छाले हो सकते हैं। सामान्य और छोटे छाले अक्सर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। इस दौरान कुछ आसान उपाय दर्द और जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
क्या पेट की गड़बड़ी से हो सकते हैं मुंह में छाले?
पाचन तंत्र और मुंह की सेहत के बीच संबंध माना जाता है। एसिडिटी, कब्ज या अपच जैसी समस्याएं सीधे तौर पर हर व्यक्ति में छाले पैदा करती हैं, ऐसा कहना सही नहीं होगा। हालांकि, कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्थितियों में मुंह के छाले एक लक्षण के रूप में दिखाई दे सकते हैं। बार-बार छाले होने पर पोषण की कमी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की जांच की जरूरत पड़ सकती है।
नमक के पानी से करें कुल्ला
मुंह के छालों में नमक मिले गुनगुने पानी से कुल्ला करना एक आसान घरेलू उपाय है। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा में नमक मिलाएं और कुछ सेकंड तक मुंह में घुमाकर थूक दें। इसे दिन में कुछ बार किया जा सकता है। इससे मुंह की सफाई बनाए रखने और जलन में कुछ राहत पाने में मदद मिल सकती है।
मसालेदार और बहुत गर्म भोजन से दूरी
छाले होने पर बहुत तीखा, खट्टा, नमकीन या बेहद गर्म खाना जलन बढ़ा सकता है। ऐसे समय में नरम और सामान्य तापमान वाला भोजन लेना बेहतर रहता है। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। अगर किसी खास खाद्य पदार्थ को खाने के बाद बार-बार छाले होते हैं, तो कुछ समय उसके सेवन से बचकर देखें।
खान-पान पर दें खास ध्यान
अगर छाले बार-बार होते हैं, तो भोजन में आयरन, फोलेट और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों के पर्याप्त स्रोत शामिल करना जरूरी है। हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, अंडे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। सप्लीमेंट खुद से शुरू करने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी?
अगर मुंह के छाले दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बने रहें, बहुत बड़े या बेहद दर्दनाक हों, बार-बार लौटते हों या उनके साथ बुखार, निगलने में परेशानी, वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। लगातार छालों के पीछे किसी पोषण संबंधी कमी या अन्य बीमारी की वजह हो सकती है, जिसकी जांच जरूरी है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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