अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच कर नेशनल वोटर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे अमेरिका में मौजूद करीब 26 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 10 लाख के नाम कटने का खतरा बताया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने का है। ट्रम्प ने ICE को डेटाबेस की जिम्मेदारी दी ट्रम्प प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को वोटर डेटाबेस की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में वोटर लिस्ट की जांच और डेटाबेस अपडेट करने के लिए कंपनियों को काम सौंपा गया है। वोटरों की जानकारी को अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। घर-घर जाकर सर्वे नहीं होगा अमेरिका में भारत की तरह घर-घर जाकर वोटरों का सर्वे नहीं किया जा रहा है। वोटर लिस्ट को कंप्यूटर के जरिए इमिग्रेशन रिकॉर्ड समेत दूसरे रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। रिकॉर्ड में नाम या जानकारी का मिलान नहीं होने पर संबंधित वोटर की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा रहेगा। भारतवंशी वोटरों पर ज्यादा असर की आशंका क्यों? अमेरिका में करीब 26 लाख भारतवंशी वोटर हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव काफी अहम माना जाता है। इन राज्यों में वोटर पहचान और रजिस्ट्रेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई जांच प्रक्रिया में रिकॉर्ड का मिलान होने से भारतवंशी वोटरों के नाम भी जांच के दायरे में आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कितने लोगों के नाम वास्तव में हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा। अमेरिका में चुनाव भारत से अलग तरीके से होते हैं अमेरिका में भारत के चुनाव आयोग जैसी एक केंद्रीय संस्था पूरे देश के चुनाव नहीं कराती। वहां चुनाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन संभालते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान के नियम भी अलग हैं। अमेरिका में वोटर पहचान के नियम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं। कई राज्यों में वोटर से अपनी पहचान की घोषणा कराना ही पर्याप्त होता है, जबकि कुछ राज्यों में पहचान के दस्तावेज जरूरी होते हैं। 12 राज्यों में पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कैलिफोर्निया में वोटर के हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। टेक्सास में पहले भी नाम हटाने पर विवाद हुआ टेक्सास में करीब 24 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा था। फेडरल कोर्ट से इस मामले में राहत मिली थी और संबंधित मामला अभी लंबित है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन की नई वोटर लिस्ट जांच को लेकर भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। ट्रम्प वोटर आईडी के भी समर्थक ट्रम्प अमेरिका में वोटिंग के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। अब वोटर लिस्ट की देशभर में जांच और एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की कोशिश को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है। खासकर उन राज्यों में इसका असर महत्वपूर्ण होगा, जहां भारतवंशी और दूसरे प्रवासी वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।
ईरान बोला- US एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत पर मिसाइलें दागीं:नुकसान के बाद दोनों जहाज इलाका छोड़कर भागे, ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और एक युद्धपोत पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। IRGC ने बताया कि दोनों अमेरिकी जहाज ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे और ईरान की समुद्री नाकाबंदी में शामिल थे। हमले में दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद वे इलाका छोड़कर चले गए। हालांकि, ईरान ने यह नहीं बताया कि उसने किस एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमला किया। अमेरिका ने पिछले महीने पश्चिम एशिया में USS जॉर्ज वॉशिंगटन को तैनात किया है। उसने USS अब्राहम लिंकन की जगह ली है। अमेरिका बोला- ईरानी मिसाइल हमलों से बच निकले जहाज अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इससे पहले कहा था कि 5 सितंबर को एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर पर ईरान ने कई हमले किए। CENTCOM के मुताबिक, दोनों अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान के ‘बिना उकसावे के हमलों’ को सफलतापूर्वक टाल दिया। हमले में किसी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई। अमेरिका ने ईरानी मिसाइलों से जहाजों को नुकसान पहुंचने या उनके इलाके से भागने की बात नहीं कही है। अमेरिका ने 3 ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया CENTCOM ने बताया कि ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी क्रूड ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिका के मुताबिक, M/T Downy को खार्ग द्वीप के पास और M/T Stark 1 को जास्क के पास स्थायी रूप से निष्क्रिय किया गया। तीसरा खाली तेल टैंकर M/T Kylo, जिसे ‘Noxen’ भी कहा जाता है, ओमान की खाड़ी में पूरी तरह नष्ट हो गया। ईरान का जवाबी कार्रवाई में 6 जहाजों पर हमले का दावा ईरानी IRGC नौसेना ने कहा कि अमेरिकी हमले के जवाब में उसने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे 3 तेल टैंकरों और दूसरे इलाकों में अमेरिका से जुड़े 3 जहाजों को निशाना बनाया। ईरान ने इन जहाजों के रास्ते को ‘अनधिकृत’ बताया और हॉर्मुज के आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी ऐसे रास्तों से गुजरने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान ने अमेरिका को और हमलों की चेतावनी दी IRGC ने कहा कि अगर अमेरिका ईरानी जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखता है तो उसे ईरान की ओर से और कड़े जवाब का सामना करना पड़ेगा। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव में हॉर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम इलाकों में से एक है। यहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल समुद्र के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है।
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