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Krishna Janmashtami: घर की साधारण मटकी को बनाएं खास, दही हांडी की सजावट देख रुक जाएगी सबकी नजर

Janmashtami Decoration Ideas: जन्माष्टमी पर कान्हा के स्वागत के लिए घर की सजावट में माखन मटकी का अपना खास आकर्षण होता है। साधारण सी मटकी को थोड़ी सी क्रिएटिविटी से कान्हा की झांकी का खूबसूरत हिस्सा बनाया जा सकता है। इसके लिए महंगी डेकोरेशन आइटम्स खरीदने की जरूरत नहीं है। 

फूल, मोरपंख, लेस, रिबन, मोती और रंग जैसी चीजों से मटकी को नया लुक दिया जा सकता है। ये आसान और कम खर्च वाले आइडिया से आपकी जन्माष्टमी की सजावट और भी खास हो जाएगी।

1. गोटा-पट्टी से सजाएं मटकी
अगर आपके पास साधारण मिट्टी की मटकी है तो उसे पहले अपनी पसंद के रंग से पेंट कर लें। इसके बाद मटकी के चारों तरफ गोटा-पट्टी या चमकदार लेस लगाएं। बीच-बीच में छोटे शीशे या सजावटी नग चिपकाने से मटकी का लुक और निखर जाएगा।

2. फूलों से बनाएं खूबसूरत माखन मटकी
कान्हा की माखन मटकी को सजाने के लिए गेंदे या आर्टिफिशियल फूलों का इस्तेमाल कर सकते हैं। मटकी के मुंह के चारों ओर फूलों की माला लगाएं और बीच में मोरपंख लगा दें। यह सजावट देखने में सुंदर लगेगी और जन्माष्टमी वाला माहौल भी बनाएगी।

3. मोरपंख वाली मटकी
भगवान कृष्ण से जुड़ी सजावट में मोरपंख बेहद खूबसूरत लगता है। मटकी पर रंगों से छोटे-छोटे मोरपंख के डिजाइन बनाएं या बाहर की तरफ असली मोरपंख लगाएं। साथ में छोटी बांसुरी और कुछ मोती लगा दें तो मटकी को एक खास कृष्ण थीम मिल जाएगी।

4. कुंदन और मोतियों से सजावट
घर में बची हुई कुंदन की लेस, मोती या पुरानी ज्वेलरी भी मटकी सजाने के काम आ सकती है। इन्हें मटकी पर अपनी पसंद के पैटर्न में चिपकाएं। गहरे रंग की मटकी पर गोल्डन या सिल्वर सजावट काफी आकर्षक दिखाई देती है।

5. रंगीन शीशों से दें ट्रेडिशनल लुक
मटकी को पारंपरिक अंदाज देना है तो छोटे-छोटे रंगीन शीशे और चमकदार लेस इस्तेमाल करें। पहले मटकी को गहरे रंग से पेंट करें और सूखने के बाद शीशे और लेस चिपकाएं। यह तरीका आसान होने के साथ-साथ बजट में भी रहेगा।

घर में मौजूद सामान से करें सजावट
जन्माष्टमी की सजावट के लिए हर बार बाजार से नई चीजें खरीदने की जरूरत नहीं है। पुरानी साड़ी की लेस, रिबन, मोती, आर्टिफिशियल फूल, गोटा-पट्टी और सजावटी कागज जैसी चीजों का इस्तेमाल करके मटकी को नया लुक दिया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: जन्माष्टमी पर ऐसे सजाएं घर का पूजा कॉर्नर, फूलों से झूले तक ये 7 आइडियाज देंगे कान्हा वाला लुक

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Health Benefits of Ghee: घी को सिर्फ स्वाद के लिए न समझें, रोजाना सही मात्रा में खाने से मिल सकते हैं कई फायदे

Health Benefits of Ghee: घी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों को दाल, रोटी और गर्मागर्म खाने की याद आ जाती है।  भारतीय खान-पान में घी सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला नहीं, बल्कि लंबे समय से डाइट का हिस्सा भी रहा है। सही मात्रा में घी खाने से शरीर को ऊर्जा देने वाले फैट के साथ कुछ जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं।

इसमें विटामिन A, D, E और K जैसे फैट में घुलने वाले विटामिन पाए जाते हैं। जानें रोजाना सीमित मात्रा में घी खाने से सेहत को कौन-कौन से फायदे मिल सकते हैं।

1. पाचन के लिए हो सकता है फायदेमंद
घी में ब्यूटिरेट नाम का फैटी एसिड पाया जाता है। यह आंतों की सेहत को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। हालांकि, घी को पाचन संबंधी किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

2. शरीर को जरूरी फैट देता है
घी में फैट की अच्छी मात्रा होती है। शरीर को कई जरूरी कामों के लिए फैट की जरूरत होती है, इसलिए संतुलित डाइट में सीमित मात्रा में घी शामिल किया जा सकता है।

3. विटामिन A, D, E और K का स्रोत
घी में फैट में घुलने वाले विटामिन पाए जाते हैं। ये शरीर के अलग-अलग कामों, जैसे त्वचा, आंखों और सामान्य इम्यून फंक्शन के लिए जरूरी होते हैं।

विटामिन A, D, E और K का स्रोत

4. खाने से पोषक तत्वों का फायदा
कुछ विटामिन और पोषक तत्व शरीर में फैट के साथ बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं। इसलिए सब्जियों या दूसरे पौष्टिक भोजन के साथ थोड़ी मात्रा में घी लेने से इन पोषक तत्वों के इस्तेमाल में मदद मिल सकती है।

5. खाना पकाने में आसानी
घी का इस्तेमाल खाना पकाने और भूनने के लिए किया जाता है। इसका धुआं निकलने का तापमान मक्खन की तुलना में ज्यादा होता है, इसलिए यह तेज आंच पर खाना बनाने के लिए उपयोगी फैट माना जाता है।

6. त्वचा के लिए भी उपयोगी माना जाता है
घी में मौजूद फैट और कुछ विटामिन त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और संवेदनशील त्वचा पर किसी भी चीज को लगाने से पहले सावधानी जरूरी है।

7. पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद
घी फैट से भरपूर होता है, इसलिए थोड़ी मात्रा में खाने से भोजन ज्यादा संतोषजनक लग सकता है। लेकिन इसे वजन घटाने का सीधा तरीका नहीं समझना चाहिए, क्योंकि घी में कैलोरी और सैचुरेटेड फैट भी काफी होता है।

कितनी मात्रा में घी खाना ठीक है?
घी सेहतमंद डाइट का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसकी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। एक चम्मच घी में करीब 40-45 कैलोरी हो सकती हैं। इसलिए जरूरत से ज्यादा घी खाने से कुल कैलोरी और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बढ़ सकती है।

(Disclaimer): अगर आपको हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय संबंधी समस्या या वजन से जुड़ी परेशानी है, तो अपनी डाइट में घी की मात्रा तय करने के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर है।

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  Sports

Duleep Trophy से बाहर होने पर Karun Nair का बल्ले से जवाब, Thimmappiah Trophy में जड़ा शानदार Century

दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल और चेन्नई में खेले जा रहे फाइनल मुकाबले के लिए दक्षिण क्षेत्र की टीम में जगह नहीं मिलने के बाद कर्नाटक के अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर वापस बेंगलुरु लौट आए हैं। इसके बजाय वह चिन्नास्वामी स्टेडियम में केएससीए सचिव एकादश की ओर से थिम्मापैया ट्रॉफी में खेल रहे हैं। यह लाल गेंद से खेली जाने वाली प्रतियोगिता आमतौर पर कर्नाटक की रणजी ट्रॉफी की तैयारियों की शुरुआत मानी जाती है।

करुण नायर शनिवार को चेपॉक में दलीप ट्रॉफी फाइनल से पहले दक्षिण क्षेत्र के अभ्यास सत्र का हिस्सा थे। हालांकि, लगातार दूसरे मुकाबले के लिए टीम में चयन नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने रविवार को टीम का साथ छोड़ दिया। इसके अगले ही दिन सोमवार को नायर ने केएससीए सचिव एकादश की ओर से छत्तीसगढ़ के खिलाफ शानदार शतक जड़ दिया।

दलीप ट्रॉफी के दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद दक्षिण क्षेत्र के मुख्य कोच विक्रम वर्मा ने कहा कि नायर निजी कारणों से टीम से अलग हुए हैं। हालांकि, नायर की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट से अलग संकेत मिले। इसके बाद दक्षिण क्षेत्र की टीम में चयन को लेकर सवाल उठने लगे।

विक्रम वर्मा ने कहा कि नायर ने घर जाने के लिए अनुमति ली थी और उन्हें निजी कारणों के चलते वापस जाना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि टीम संयोजन को ध्यान में रखते हुए नायर को अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक, दक्षिण क्षेत्र की टीम के सामने दोनों मुकाबलों में बाएं हाथ के स्पिनरों की चुनौती थी, इसलिए मध्यक्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाज को उतारने की रणनीति बनाई गई।

वर्मा ने बताया कि उत्तर क्षेत्र के खिलाफ पहले मुकाबले में युवा कोडिमेला हिमतेजा को मौका दिया गया था। इसके बाद देवदत्त पडिक्कल की वापसी हुई और टीम संयोजन को देखते हुए उन्हें फिर से अंतिम एकादश में जगह दी गई। ऐसे में नायर को बाहर रखना टीम प्रबंधन के लिए आसान फैसला नहीं था, लेकिन टीम के संतुलन को प्राथमिकता दी गई।

दक्षिण क्षेत्र की फाइनल टीम में विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज के तौर पर केवल एन जगदीशन हैं। मुकाबले से पहले कप्तान तिलक वर्मा ने चयन का बचाव करते हुए कहा था कि उपकप्तान रिकी भुई भी पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। भुई ने बेंगलुरु में खेले गए सेमीफाइनल में भी पारी की शुरुआत की थी, जहां उन्होंने 5 और 42 रन बनाए थे।

हालांकि, प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 90 मुकाबले खेल चुके रिकी भुई ने अब तक केवल तीन मैचों में सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई है। तिलक वर्मा के अनुसार भुई पहले भी पारी की शुरुआत कर चुके हैं और वरिष्ठ खिलाड़ी होने के कारण जरूरत के मुताबिक अपनी भूमिका बदल सकते हैं। इसी वजह से टीम ने उन्हें जगदीशन के साथ पारी की शुरुआत कराने का फैसला किया।

गौरतलब है कि दलीप ट्रॉफी की टीमों का चयन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं द्वारा नहीं किया जाता। प्रत्येक क्षेत्र की टीम के लिए संबंधित राज्य क्रिकेट संघों के चयनकर्ता खिलाड़ियों का चयन करते हैं। ऐसे में करुण नायर के लगातार दो मुकाबलों से बाहर रहने और उनके तुरंत बाद दूसरी प्रतियोगिता में शतक लगाने के घटनाक्रम ने दक्षिण क्षेत्र के चयन और टीम संयोजन पर चर्चा तेज कर दी है। नायर फिलहाल मैदान पर अपने बल्ले से जवाब देते नजर आ रहे हैं और उनके प्रदर्शन पर कर्नाटक की आगामी रणजी तैयारियों के दौरान भी नजरें टिकी हैं।
Tue, 08 Sep 2026 22:12:00 +0530

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