आपका पैसा- टाइम पर EMI नहीं चुकाया तो क्या होगा:RBI ने रिकवरी रूल्स में किया बदलाव, जानिए अब बैंक आपके साथ क्या नहीं कर सकता
आजकल कोई भी लोन लेना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। लेकिन किसी वजह से EMI मिस हो जाए या लोन डिफॉल्ट हो जाए, तो बैंक ग्राहक के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकता है। इसे लेकर लोगों के मन में अक्सर कई सवाल रहते हैं। एक जरूरी सवाल यह है कि क्या बैंक या रिकवरी एजेंट लोन की रकम वसूलने के लिए ग्राहक के मोबाइल, लैपटॉप या दूसरे डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल कर सकते हैं? इन्हीं सवालों के बीच हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन रिकवरी से जुड़े नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों का मकसद ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा करना और लेंडर्स की जिम्मेदारियां स्पष्ट करना है। इसलिए आज 'आपका पैसा' में RBI के नए रिकवरी रूल्स पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद सवाल- हाल ही में RBI ने लोन डिफॉल्ट को लेकर एक नया फैसला लिया है। इसकी पूरी डिटेल बताएं? जवाब- RBI ने लोन डिफाॅल्ट और रिकवरी से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पहले बैंक लोन वसूली के लिए ग्राहकों को किन तरीकों से परेशान करते थे? जवाब- बैंक और लोन लेंडिंग कंपनियां लोन रिकवरी के लिए ये तरीके आजमाती थीं- 1. फोन को दूर से लॉक कर देना। ग्राहक फोन हाथ में होने पर भी उसे यूज नहीं कर पाते थे। अब क्या होगा: अब फोन लॉक नहीं किया जा सकेगा। 2. डिवाइस की कुछ सुविधाएं बंद कर देना। यह तरीका लोन पर डिवाइस लेने पर इस्तेमाल किया जाता था। अब क्या होगा: RBI ने अब इस तरह के तकनीकी प्रतिबंधों के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया तय की है। 3. बार-बार रिकवरी कॉल करना रिकवरी के लिए ग्राहकों को बार-बार फोन किया जाता था। अब क्या होगा: RBI के नए नियमों में अब रिकवरी कॉल का रिकॉर्ड रखने और कॉल रिकॉर्ड करने का प्रावधान है। 4. लगातार दबाव बनाना और धमकाना रिकवरी एजेंट ग्राहकों को डराते-धमकाते और आक्रामक व्यवहार करते थे। अब क्या होगा: RBI ने साफ किया है कि रिकवरी का तरीका ग्राहक के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ नहीं होना चाहिए। 5. परिवार या दूसरे लोगों से संपर्क करना रिकवरी एजेंट परिवार, दोस्तों को फोन कर ग्राहक पर दबाव बनाते थे। अब क्या होगा: नए नियमों में ऐसे उत्पीड़न पर ज्यादा स्पष्ट सीमाएं लगाई गई हैं। 6. फोन के पर्सनल डेटा का इस्तेमाल अब तक डिवाइस में मौजूद कॉन्टैक्ट, एसएमएस, कॉल लॉग, फोटो और लोकेशन हिस्ट्री जैसे डेटा को रिकवरी के लिए इस्तेमाल किया जाता था। अब क्या होगा: बैंक ने साफ किया है कि ये पर्सनल डेटा लोन रिकवरी के लिए यूज नहीं किया जा सकता। सवाल- यह नियम किस तरह के लोन पर लागू होगा? जवाब- यह नियम उन सभी लोन पर लागू होगा, जिनकी रिकवरी RBI के रेगुलेटेड बैंक, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) और अन्य वित्तीय संस्थान करते हैं। सवाल- RBI को ये फैसला लेने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- लोन रिकवरी को लेकर पहले क्या स्थिति थी? जवाब- पहले इसके लिए बैंक और फाइनेंस कंपनियों के पास सामान्य अधिकार थे। लेकिन डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट और एकसमान नियम नहीं थे। खासकर EMI पर खरीदे गए मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप के मामलों में अलग-अलग तरीके अपनाए जाते थे। इसी वजह से RBI ने अब इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सवाल- क्या अब किसी भी स्थिति में मोबाइल या लैपटॉप लॉक नहीं किया जा सकेगा? जवाब- नहीं, RBI के नए नियमों में कुछ अपवाद भी हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की कुछ सर्विसेस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके लिए RBI ने स्पष्ट शर्तें तय की हैं। सवाल- अगर फोन या लैपटॉप EMI पर खरीदा गया हो तो क्या होगा? जवाब- डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक या फाइनेंस कंपनी उसकी कुछ सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा सकती है। हालांकि ऐसा तभी किया जा सकेगा, जब इसकी शर्त लोन एग्रीमेंट में पहले से स्पष्ट रूप से शामिल हो और RBI के तय नियमों का पालन किया जाए। इसके अलावा डिवाइस पर प्रतिबंध लगाने से पहले ग्राहक को नोटिस देना भी जरूरी होगा। सवाल- डिवाइस लॉक होने पर कौन-सी सुविधाएं चालू रहनी चाहिए? जवाब- RBI के मुताबिक, अगर किसी डिवाइस पर प्रतिबंध लगाया भी जाता है, तब भी कुछ जरूरी सुविधाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- लोन डिफॉल्ट से रिकवरी के लिए अब बैंकों के पास क्या अधिकार होंगे? जवाब- RBI के नए नियमों का मतलब यह नहीं है कि बैंक या फाइनेंस कंपनियां लोन की वसूली नहीं कर सकेंगी। उन्हें अब भी बकाया राशि वसूलने के लिए कई अधिकार प्राप्त रहेंगे। लेकिन यह प्रक्रिया तय नियमों और ग्राहक के अधिकारों को ध्यान में रखकर पूरी करनी होगी। लोन रिकवरी के लिए बैंक के पास कौन-से अधिकार हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या इस फैसले का मतलब ये है कि EMI न भरने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी? जवाब- नहीं, RBI के नए नियम सिर्फ लोन रिकवरी के तरीके तय करते हैं, लोन चुकाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं करते। अगर कोई व्यक्ति EMI नहीं भरता है, तो उसे डिफॉल्टर माना जा सकता है और उसके खिलाफ नियमानुसार रिकवरी प्रक्रिया जारी रह सकती है। सवाल- EMI न भरने पर ग्राहक को क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- इससे सिर्फ पेनल्टी ही नहीं लगती, बल्कि क्रेडिट हिस्ट्री पर भी इसका असर पड़ता है। लगातार डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक या फाइनेंस कंपनी रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर सकती है। ग्राफिक में देखिए EMI न भरने पर ग्राहक को क्या नुकसान हो सकते हैं- सवाल- लोन की EMI नहीं चुकाने पर क्या बैंक घर, कार या दूसरी संपत्ति जब्त कर सकता है? जवाब- हां, लेकिन यह लोन के प्रकार पर निर्भर करता है। अगर आपने होम लोन, कार लोन या किसी अन्य सिक्योर्ड लोन के बदले कोई संपत्ति गिरवी रखी है, तो लगातार डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत उस संपत्ति पर कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, बैंक तुरंत घर या कार जब्त नहीं कर सकते। इसके लिए नोटिस देने जैसी अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है। वहीं पर्सनल लोन जैसे इनसिक्योर्ड लोन में बैंक के पास कोई गिरवी संपत्ति नहीं होती। ऐसे मामलों में बैंक रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं, लेकिन सीधे किसी संपत्ति पर दावा नहीं कर सकते। सवाल- लोन लेने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- लोन लेते समय सिर्फ EMI की रकम नहीं, बल्कि उसकी पूरी जिम्मेदारी को समझना भी जरूरी है। समय पर भुगतान और सही वित्तीय योजना से डिफॉल्ट की स्थिति से बचा जा सकता है। ग्राफिक में देखिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए- RBI का यह फैसला याद दिलाता है कि लोन लेते समय सिर्फ रकम और EMI नहीं, बल्कि उससे जुड़ी शर्तों को समझना भी जरूरी है। जागरूक उधारकर्ता अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है और अनावश्यक विवादों से बच सकता है। ***** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………… ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- इंवेस्टमेंट के 7 आसान नियम:एक्सपर्ट से समझें पैसा कब होगा डबल, कितना करें निवेश और कितना रिस्क लेना सही हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा समय के साथ दोगुना, तीन गुना या चार गुना हो जाए। इसके लिए कुछ लोग जल्दबाजी में बिना प्लानिंग के निवेश शुरू कर देते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि उन्हें अलग-अलग जगहों से अलग-अलग सलाह मिलती है। पूरी खबर पढ़ें…
इजराइल बोला- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे:रक्षा मंत्री ने कहा- हमास हथियार नहीं छोड़ रहा, लोगों को हटाकर ही समस्या सुलझेगी
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। काट्ज ने कहा कि हमास हथियार छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में गाजा की समस्या का समाधान लोगों को वहां से हटाए बिना संभव नहीं है। फिलिस्तीनियों को गाजा से बाहर निकालने की योजना तैयार है। लोगों को समुद्र, हवाई मार्ग या किसी भी दूसरे तरीके से बाहर भेजने की तैयारी है। उन्होंने कहा- अब इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा। इजिप्ट के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में कहा था कि गाजा के करीब 20 लाख फिलिस्तीनियों को वहां से चले जाना चाहिए। ट्रम्प ने गाजा को फिर से बसाने और उसे भूमध्यसागर के किनारे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की बात कही थी। ट्रम्प के इस प्रस्ताव का कई देशों ने विरोध किया था। इनमें मिस्र भी शामिल था। मिस्र, इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना था कि अगर उन्हें उनकी जमीन से जबरन हटाया गया तो यह उन्हें 1948 की याद दिलाएगा, जब इजराइल के बनने के दौरान बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। फिलिस्तीनी इस घटना को ‘नकबा’ यानी तबाही कहते हैं। बाद में अक्टूबर में गाजा में युद्धविराम का ऐलान करते हुए ट्रम्प ने इलाके के लिए 20 बिंदुओं वाली योजना पेश की। इसमें फिलिस्तीनियों को गाजा से जबरन हटाने की बात नहीं थी। काट्ज बोले- 80% लोग गाजा छोड़ने को तैयार काट्ज ने अब इस प्लान को लेकर कहा कि योजना रद्द नहीं हुई है। ट्रम्प ने इस विचार को सिर्फ फ्रीज किया है। वे फिलिस्तीनियों को रखने वाले देशों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने भी दावा किया कि गाजा के 80% लोग वहां से जाना चाहते हैं, लेकिन हमास उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है। गाजा से लोगों को जबरन हटाने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कानून के लिहाज से भी गंभीर है। जिनेवा कन्वेंशन के तहत कब्जे वाले इलाके से आम नागरिकों को जबरन दूसरी जगह भेजना युद्ध अपराध माना जाता है। नेतन्याहू बोले- इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को गाजा पट्टी में तैनात इजराइली सैनिकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी। अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच सीजफायर लागू होने के बाद नेतन्याहू का गाजा इलाके का यह पहला दौरा था। नेतन्याहू ने गाजा में तथाकथित येलो लाइन के पास कहा, "हम इस इलाके को नियंत्रित कर रहे हैं। हम पीछे नहीं हट रहे हैं। हम इसी लाइन पर बने रहेंगे।" यलो लाइन गाजा के उन इलाकों को अलग करती है, जो हमास और इजराइली सेना के नियंत्रण में हैं। हम गाजा पट्टी के 60% हिस्से को नियंत्रित करते हैं और हम रुकने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम उन आतंकियों को खत्म कर रहे हैं जो हर दिन हमें धमकी देते हैं। हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा हमास के हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइली आंकड़ों के अनुसार, हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। गाजा में जंग से 98% जमीन बंजर, 21 लाख लोग बेघर जंग की वजह से गाजा के 23 लाख लोगों में से 90% बेघर हो गए हैं। ये बिना पानी-बिजली के तंबुओं में रह रहे हैं और आधे से ज्यादा भुखमरी झेल रहे हैं। 80% इलाका मिलिट्री जोन बन चुका है। UN की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में जमा 510 लाख टन मलबा हटाने में 10 साल और 1.2 ट्रिलियन डॉलर लग सकते हैं। 80% इमारतें तबाह हो गई हैं, जिससे 4.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में घुसपैठ की और करीब 251 लोगों को बंधक बना लिया। जवाब में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत जंग का ऐलान किया और हमास पर हमले शुरू कर दिए। 66 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए उत्तर और दक्षिण गाजा से भगाए गए लाखों लोग अब टेंटों में बिना पानी, बिजली और दवा के दिन गुजार रहे हैं। यूएन एजेंसियों के मुताबिक, आधे से ज्यादा लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं। अब तक 66,158 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, इनमें 18,430 बच्चे (लगभग 31%) शामिल हैं। गाजा में करीब 39,384 बच्चे सूचि बद्ध हैं जिनके माता या पिता में से कोई एक मारा गया है। वहीं, 17,000 फिलिस्तीनी बच्चे माता-पिता दोनों खो चुके हैं। राहत एजेंसियां कहती हैं- यह अब शहर नहीं, जिंदा बचे लोगों का कैंप मात्र है। गाजा दो हिस्सों में बट गया UN रिपोर्ट के मुताबिक 80% इमारतें तबाह हो गई हैं। जिनमें से आधी से ज्यादा पूरी तरह ढह गईं। इजराइल ने एक किलोमीटर गहरा बफर जोन और 4 सैन्य कॉरिडोर बना दिए हैं। इनमें सबसे बड़ा मोराग कॉरिडोर है, जिससे अब गाजा को दो हिस्सों में बांट चुका है। अभी गाजा के 80% से ज्यादा हिस्से पर इजराइली सेना का कब्जा है। आम गाजा वासियों की आवाजाही सिर्फ 20% हिस्से में सीमित है। 90% स्कूल और 94% अस्पतालों को नुकसान गाजा में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों बर्बादी के निशान बन चुके हैं। हमले से पहले गाजा में 850 स्कूल थे, आज 90% स्कूल तबाह हो चुके हैं। गाजा में 10 यूनिवर्सिटी की 51 इमारतों में से एक भी इमारत चालू हालत में नहीं है। 30 हजार करोड़ का एजुकेशन इंफ्रा तबाह। गाजा में 2 साल पहले 36 अस्पतालों में 3412 बेड थे। 94% अस्पतालों को नुकसान पहुंचा है। जिनमें से आधे बंद हैं। 19 अस्पताल में थोड़ा-बहुत इलाज हो रहा है। यहां सिर्फ 33% बेड ही उपलब्ध हैं। करीब 40 हजार करोड़ रुपए का हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर तबाह हो गया है। हाल ही में गाजा के अस्पतालों का दौरा करने वाले विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉ रिख पीपरकॉर्न का कहना है कि स्कूलों की जगह अब टेंट हैं और अस्पतालों की जगह खामोशी है। यहां बच्चों के पास किताब नहीं, मरीजों के पास डॉक्टर नहीं है। गाजा के 83% कुएं भी टूट गए कभी उपजाऊ रही गाजा की धरती इजराइली हवाई हमलों से अब बंजर हो गई है। इसके अलावा, 83% सिंचाई कुएं भी टूट चुके हैं। बेतलहिया के किसान हानी शफाई का 65 करोड़ रुपए का स्ट्रॉबेरी फार्म अब सिर्फ राख है। उनका कहना है कि मेरे दादा के लगाए पेड़, मेरी बनाई ग्रीनहाउस, सब बुलडोजर से मिटा दिए गए। वे कहते हैं कि अब खेत नहीं, बस धूल और यादें हैं। संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, गाजा युद्ध की वजह से मिट्टी में विस्फोटक रसायनों का स्तर 3 गुना तक बढ़ गया है। -------------- ये खबर भी पढ़ें 2 दिन बाद अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल हमला:19 की मौत, 68 घायल; जवाब में जॉर्डन-बहरीन के अमेरिकी मिलिट्री बेस पर ईरानी स्ट्राइक अमेरिका ने 2 दिन बाद फिर ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक की। ईरान के अनुसार इन हमलों में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 68 लोग घायल हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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