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नेपाल में बाढ़ का कोहराम: अमेरिकी सांसदों ने Marco Rubio से DART Team और राहत पैकेज की मांग की

अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से आग्रह किया कि वे बाढ़ से प्रभावित नेपाल में अमेरिकी राहत और खोज-बचाव कार्यों को तेज़ करें। इसमें 'डिज़ास्टर असिस्टेंस रिस्पॉन्स टीम' (DART) को तैनात करना, अतिरिक्त मानवीय सहायता देना और बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण में मदद की योजना बनाना शामिल है, क्योंकि इस आपदा में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रुबियो को लिखे एक पत्र में, सांसदों ने अमेरिकी विदेश विभाग से आग्रह किया कि वे चल रहे खोज-बचाव कार्यों में मदद के लिए "हर उपलब्ध संसाधन" का इस्तेमाल करें और अमेरिकी नागरिकों तथा इस भयानक बाढ़ से प्रभावित अन्य लोगों की सुरक्षा और रिकवरी सुनिश्चित करें। 
सांसदों ने पत्र में कहा, "हम विदेश विभाग से आग्रह करते हैं कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद चल रहे खोज-बचाव कार्यों में मदद के लिए हर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल किया जाए और अमेरिकी नागरिकों तथा इस आपदा से प्रभावित अन्य लोगों की सुरक्षा और रिकवरी सुनिश्चित की जाए।" यह अपील ऐसे समय में की गई है जब नेपाल बाढ़ से हुई भारी तबाही से जूझ रहा है। 'नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' (NDRRMA) की ओर से जारी अपडेट के अनुसार, शुक्रवार शाम 6:30 बजे तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,294 हो गई थी और खोज टीमें कई प्रभावित ज़िलों से शव बरामद कर रही थीं। NDRRMA के अपडेट के अनुसार, सबसे ज़्यादा मौतें चितवन में (359) हुईं, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट (221), नवलपरासी वेस्ट (212), नुवाकोट (184) और रसुवा (140) का नंबर आता है। अब तक 96 शव परिवारों को सौंपे जा चुके हैं। 

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NDRRMA ने बताया कि ज़मीन और हवा से चलाए गए जॉइंट ऑपरेशन के ज़रिए 13,000 से ज़्यादा लोगों को बचाया गया है। इस बचाव कार्य में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के 21,421 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। सांसदों ने खास तौर पर बाढ़ से प्रभावित इलाकों में 'डिज़ास्टर असिस्टेंस रिस्पॉन्स टीम' (DART) तैनात करने की मांग की, ताकि खोज, बचाव, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल ऑपरेशन में मदद मिल सके। उन्होंने कहा, "DART तेज़ी से काम करने वाली यूनिट्स हैं जो आपदा प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल सेवाओं में मदद करती हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि आपदा का पैमाना इतना बड़ा है कि DART को "जितनी जल्दी हो सके" तैनात किया जाना चाहिए। उन्होंने वॉशिंगटन से यह भी अपील की कि लापता लोगों का पता लगाने और बचाव टीमों को रियल-टाइम जानकारी देने के लिए US की तकनीकी क्षमताओं का ज़्यादा इस्तेमाल किया जाए, जिसमें ज़्यादा ऊंचाई पर काम करने वाले साधन, थर्मल और इन्फ्रारेड ड्रोन, सैटेलाइट इमेजिंग और हवाई निगरानी के दूसरे उपकरण शामिल हैं।

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कानून बनाने वालों ने कहा कि स्टेट डिपार्टमेंट को नेशनल जियोस्पेशियल-इंटेलिजेंस एजेंसी और अमेरिकी रक्षा विभाग की एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि जियोस्पेशियल और एरियल तस्वीरें सुरक्षित रूप से फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स, मानवीय संगठनों और स्थानीय अधिकारियों के साथ शेयर की जा सकें। उन्होंने कमर्शियल सैटेलाइट कंपनियों के साथ तालमेल बिठाने और लापता लोगों का पता लगाने के लिए फ़ोन-लोकेशन डेटा का इस्तेमाल करने की कोशिशों पर भी ज़ोर दिया। पत्र में कहा गया है कि हज़ारों लोगों का अभी भी कोई पता नहीं चल पाया है। NDRRMA के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, लापता लोगों की संख्या लगभग 5,053 है, जिनमें रसुवा में 2,130, नुवाकोट में 2,340 और 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि इस संख्या में ऐसी अज्ञात लाशें भी शामिल हो सकती हैं जिन्हें पहले ही बरामद किया जा चुका है। 

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Nepal Floods में मृतकों का आंकड़ा 1344 पहुंचा, 5000 लोग अभी भी लापता

(फोटो के साथ) (शिरीष बी प्रधान) काठमांडू, पांच सितंबर नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रभावित जिलों से और शव बरामद किए जाने के साथ मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर 1,344 हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बचाव दल करीब 5,000 लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं, जिनमें कम से कम 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

वहीं, 13,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। शनिवार को बचाए गए लोगों में नुवाकोट जिले के बिदुर शहर में चार मंजिला मकान की ऊपरी मंजिल से सुरक्षित निकाली गई 60 वर्षीय महिला भी शामिल है। यह मकान मलबे और कीचड़ में दब गया था और महिला उसमें 10 दिनों से फंसी हुई थी।

चंडिका श्रेष्ठा को सशस्त्र पुलिस बल की एक टीम ने बेहोशी की हालत में पाया। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए त्रिशूली स्थित नेपाली सेना की मैथिली बैरक ले जाया गया। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के कारण बाढ़ आई थी।

इसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई। हिमालयी सीमावर्ती इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बाढ़ से मकान, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए और पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। चीन की मीडिया की खबरों के अनुसार, इस आपदा में चीन की ओर कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अब तक बरामद शवों में 758 वयस्कों और 85 बच्चों के शव शामिल हैं, जबकि 501 शव ऐसे मिले हैं, जिनके कुछ अंग गायब हैं। अधिकारियों ने बताया कि शवों की यह स्थिति लंबे समय तक पानी में रहने और मलबे के दबाव के कारण हुई है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, सबसे अधिक 360 शव अकेले चितवन जिले से बरामद किए गए हैं।

इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम जिलों से भी शव मिले हैं। अब तक डीएनए नमूने एकत्र करने जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1,030 शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है। एनडीआरआरएमए के अनुसार, पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब तक केवल 96 शव ही परिजनों को सौंपे गए हैं।

मृतकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ के पानी में बहकर आए शव अक्सर बुरी तरह क्षतिग्रस्त या सड़-गल गए होते हैं, या फिर उनके केवल कुछ हिस्से ही मिल पाते हैं, जिससे चेहरे, कपड़ों या निजी सामान के ज़रिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। बाढ़ प्रभावित जिलों में स्थित जलविद्युत परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं, जहां सैकड़ों लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।

इन अभियानों में भारत और चीन के विशेषज्ञों की टीम अपने नेपाली समकक्षों की सहायता कर रही हैं। शुक्रवार से अब तक सुरंगों में फंसे तीन लोगों को बचाया जा चुका है। शुक्रवार को त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो नेपाली नागरिकों को बचाया गया, जबकि शनिवार को अपर त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग से एक चीनी नागरिक को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि नेपाल की सेना के साथ मिलकर काम कर रही भारतीय सुरंग बचाव टीम ने बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले की चिलिमे सुरंग के अंदर एक अस्थायी रास्ता तैयार किया है, जिससे भारी उपकरणों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। अधिकारी कई नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखे हुए हैं। इनमें कोशी, नारायणी, बागमती, कर्णाली, महाकाली, कंकई, कमला, बबई, पूर्वी राप्ती और पश्चिमी राप्ती नदियां शामिल हैं।

वहीं, नेपाली सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल शनिवार को 11वें दिन भी खोज और बचाव अभियान में जुटे रहे।

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