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Goa Elections 2027: दक्षिण गोवा की 21 सीटों पर सियासी गहमागहमी

Goa Elections 2027: उत्तर गोवा की हलचल और नाइटलाइफ के विपरीत दक्षिण गोवा जिला अपनी शांत-सुंदर जीवनशैली, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और गहरे राजनीतिक मिज़ाज के लिए जाना जाता है. 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर दक्षिण गोवा के सियासी गलियारों में भी रणनीतिक बिसात बिछने लगी है. मडगांव (Margao) जैसे वाणिज्यिक केंद्र, वास्को डा गामा (Vasco da Gama) के औद्योगिक व बंदरगाह क्षेत्र, कुर्टोरिम और कैनकोना के पारंपरिक ग्रामीण इलाकों से समृद्ध दक्षिण गोवा की राजनीति हमेशा से राज्य की सत्ता तय करने में बेहद निर्णायक रही है.

यहां की राजनीति में शांत रेतीले तटों (जैसे कोलवा, बेनॉलिम, पालोलेम), लक्जरी टूरिज्म, पारंपरिक मछुआरा समुदाय, कैथोलिक ईसाई और हिंदू मतदाताओं के अनूठे जनसांख्यिकीय संतुलन की बड़ी भूमिका रहती है. राजनीतिक दृष्टिकोण से दक्षिण गोवा ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस और क्षेत्रीय ताकतों (जैसे चर्चिल अलेमाओ और लूर्डिनियो फलेरो जैसे दिग्गज नेताओं के प्रभाव क्षेत्र) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. हालांकि, बीते कुछ वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मूरमुगाव और मडगांव बेल्ट में अपनी पैठ मजबूत की है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी (AAP) और रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) जैसे नए दल समीकरणों को लगातार दिलचस्प बना रहे हैं.

‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात दक्षिण गोवा की…

दक्षिण गोवा जिला केवल अपने शांत समुद्री तटों और लग्जरी रिसॉर्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक प्रभाव पूरे राज्य पर पड़ता है. यह वही दक्षिण गोवा है जिसका मडगांव शहर गोवा की सांस्कृतिक और व्यावसायिक राजधानी माना जाता है और जहां का मुर्मूगाव पोर्ट (Mormugao Port) राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है. दूधसागर जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता से लेकर ओल्ड गोवा के ऐतिहासिक संदर्भों और पश्चिमी घाट के जंगलों तक, दक्षिण गोवा की जनता ने राज्य के हर राजनीतिक आंदोलन में अपनी अलग छाप छोड़ी है.

दक्षिण गोवा की राजनीति का अपना एक अलग मिज़ाज है—यहां चुनावी मुद्दे अक्सर स्थानीय पहचान, पर्यावरण संरक्षण, तटीय विकास और रोजगार के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर दक्षिण गोवा जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस पार्टी का दबदबा कायम रहा है? और 2027 के महामुकाबले में किसका दांव सटीक बैठेगा? आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं…

उत्तर गोवा जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी / जेंडर कुल आबादी साक्षरता दर कुल साक्षर नागरिक
पुरुष 3,22,463 91.67% 2,64,085
महिला 3,18,074 83.47% 2,38,342
कुल 6,40,537 87.59% 5,02,427

उत्तर गोवा जिले की धार्मिक आबादी

धर्म जनसंख्या प्रतिशत
हिंदू 53.34%
ईसाई 36.21%
मुस्लिम 9.93%
अन्य 0.20%
सिख 0.13%
जैन 0.09%
बौद्ध 0.08%

2022 विधानसभा चुनाव परिणाम के अनुसार, दक्षिण गोवा जिले की सभी विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम

क्रमांक निर्वाचन क्षेत्र विजेता (दल) - कुल वोट उपविजेता (दल) - कुल वोट
1 पोंडा रवि नाइक (BJP) - 7,514 केतन भटिकर (MGP) - 7,437
2 प्रियोल गोविंद गौडे (BJP) - 11,019 दीपक धवलीकर (MGP) - 10,806
3 मडगाँव दिगंबर कामत (INC) - 13,674 मनोहर अजगांवकर (BJP) - 5,880
4 फतोर्डा विजय सरदेसाई (GFP) - 11,063 दामोदर नाइक (BJP) - 9,536
5 मूरमुगाव संकल्प अमोनकर (INC) - 9,067 मिलिंद नाइक (BJP) - 7,126
6 वास्को-डा-गामा कृष्णा साल्कर (BJP) - 13,117 कार्लोस अल्मेडा (INC) - 9,460
7 दाबोलिम माविन गोडिन्हो (BJP) - 7,594 प्रेमानंद नानोस्कर (INC) - 6,024
8 कोर्टालिम एंटोनियो वाज़ (Independent) - 5,430 अल्विनो अरुंजो (RGP) - 2,475
9 नुवेम अलेक्सो सेकेरा (INC) - 8,745 अरविन्द डी'कोस्टा (RGP) - 4,348
10 कर्टोरिम अलेक्सो रेजिनाल्डो लौरेंको (Independent) - 8,969 मोरेनो रेबेलो (INC) - 3,905
11 बेनाउलिम वेन्ज़ी वीगास (AAP) - 6,434 चर्चिल अलेमाओ (TMC) - 5,163
12 नावेलीम उल्हास तुएनकर (BJP) - 5,160 वलंका अलेमाओ (TMC) - 4,738
13 कुनकोलिम यूरी अलेमाओ (INC) - 9,866 राजन नाइक (BJP) - 6,632
14 वेलिम क्रूज़ सिल्वा (AAP) - 5,390 सावियो डी'सिल्वा (INC) - 3,606
15 क्यूपेम एल्टन डी'कोस्टा (INC) - 14,945 चंद्रकांत कवलेकर (BJP) - 11,334
16 करचोरम नीलेश कबराल (BJP) - 9,907 अमित पाटकर (INC) - 9,235
17 सानवोर्डेम गणेश गावकर (BJP) - 11,171 दीपक पास्कर (Independent) - 5,481
18 संगेम सुभाष फाल देसाई (BJP) - 8,770 सावित्री कवलेकर (Independent) - 7,341
19 कानाकोना रमेश तावडकर (BJP) - 9,063 इसिडोर फर्नांडीस (Independent) - 6,012
20 शिरोडा सुभाष शिरोडकर (BJP) - 8,350 तुकराम बोरकर (RGP) - 6,176
21 मारकैम सुदिन धवलीकर (MGP) - 13,951 सुदेश बिकल (RGP) - 4,003

सभी विधानसभा सीटों के बारे में जानें...

1. पोंडा (Ponda): यहाँ भाजपा के रवि नाइक और एमजीपी के केतन भटिकर के बीच बेहद रोमांचक मुकाबला हुआ था. रवि नाइक ने मात्र 77 वोटों के सबसे छोटे अंतर से इस सीट पर जीत दर्ज की थी.

2. प्रियोल (Priol): इस सीट पर भाजपा के गोविंद गौडे और एमजीपी के दीपक धवलीकर के बीच सीधी और कांटे की टक्कर थी. गोविंद गौडे ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी को केवल 213 वोटों से मात देकर सीट बचाई.

3. मडगाँव (Margao): यह सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता दिगंबर कामत का मजबूत गढ़ रही है, जहां उन्होंने बड़ी जीत हासिल की थी. हालांकि, चुनाव जीतने के कुछ महीनों बाद कामत अन्य विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए.

4. फतोर्डा (Fatorda): गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के प्रमुख विजय सरदेसाई ने इस सीट पर अपना दबदबा कायम रखा. उन्होंने भाजपा के दामोदर नाइक को हराकर विपक्ष के एक बड़े केंद्र के रूप में अपनी सीट बचाई.

5. मूरमुगाव (Mormugao): कांग्रेस के संकल्प अमोनकर ने भाजपा के तत्कालीन मंत्री मिलिंद नाइक को एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में हराया था. बाद में संकल्प अमोनकर भी कांग्रेस छोड़कर सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए.

6. वास्को-डा-गामा (Vasco-da-Gama): इस तटीय और शहरी निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कृष्णा साल्कर ने कांग्रेस के कार्लोस अल्मेडा को हराया था. इस जीत के साथ भाजपा ने वास्को के कमर्शियल हब पर अपनी पकड़ मजबूत की.

7. दाबोलिम (Dabolim): अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे वाले इस क्षेत्र में भाजपा के कद्दावर नेता माविन गोडिन्हो ने अपनी सीट का बचाव किया. उन्होंने कांग्रेस के प्रेमानंद नानोस्कर को हराकर लगातार अपनी साख बचाए रखी.

8. कोर्टालिम (Cortalim): इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार एंटोनियो वाज़ ने राजनीतिक पंडितों को चौंकाते हुए बड़ी जीत दर्ज की थी. यहाँ नई पार्टी 'क्रांतिकारी गोअन्स पार्टी' (RGP) दूसरे स्थान पर रहकर सबको हैरान कर दिया था.

9. नुवेम (Nuvem): ईसाई बहुल इस पारंपरिक सीट पर कांग्रेस के अलेक्सो सेकेरा ने आसान जीत दर्ज की थी. इस सीट पर भी पारंपरिक पार्टियों को पछाड़कर आरजीपी (RGP) दूसरे नंबर पर आ गई थी.

10. कर्टोरिम (Curtorim): दल-बदल के घटनाक्रम के बाद अलेक्सो रेजिनाल्डो लौरेंको ने निर्दलीय चुनाव लड़कर भारी बहुमत से जीत हासिल की. चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने भाजपा सरकार को अपना बाहर से समर्थन दे दिया.

11. बेनाउलिम (Benaulim): आम आदमी पार्टी (AAP) के वेन्ज़ी वीगास ने पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी उम्मीदवार चर्चिल अलेमाओ को हराकर इतिहास रचा था. इस जीत ने दक्षिण गोवा के तटीय बेल्ट में 'आप' की एंट्री पक्की की.

12. नावेलीम (Navelim): विपक्ष के वोटों में भारी बिखराव के कारण भाजपा के उल्हास तुएंकर ने इस अल्पसंख्यक बहुल सीट पर पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की. उन्होंने टीएमसी की वलंका अलेमाओ को बेहद कड़े मुकाबले में हराया.

13. कुन科लिम (Cuncolim): कांग्रेस के यूरी अलेमाओ ने भाजपा के राजन नाइक को हराकर इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ साबित की. यूरी अलेमाओ बाद में गोवा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) भी बने.

14. Velim (वेलिम): इस सीट पर 'आप' के क्रूज़ सिल्वा ने कांग्रेस के सावियो डी'सिल्वा को हराकर दूसरी बड़ी सफलता हासिल की थी. यहाँ भी क्रांतिकारी गोअन्स पार्टी (RGP) ने बड़े पैमाने पर पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई थी.

15. क्यूपेम (Quepem): कांग्रेस के एल्टन डी'कोस्टा ने भाजपा के कद्दावर नेता और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री चंद्रकांत 'बाबू' कवलेकर को हराया था. यह 2022 के गोवा चुनाव के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक माना गया.

16. करचोरम (Curchorem): भाजपा के नीलेश कबराल ने कांग्रेस के अमित पाटकर के खिलाफ कड़े मुकाबले में यह सीट जीती थी. खनन बेल्ट (Mining Belt) में पर्यावरण विरोध के बावजूद कबराल अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहे.

17. सानवोर्डेम (Sanvordem): खनन प्रभावित इस क्षेत्र में भाजपा के गणेश गावकर ने एकतरफा मुकाबले में निर्दलीय दीपक पास्कर को मात दी. यह निर्वाचन क्षेत्र शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी का एक मजबूत गढ़ माना जाता रहा है.

18. संगेम (Sanguem): भाजपा के सुभाष फाल देसाई ने अपनी ही पार्टी की बागी निर्दलीय उम्मीदवार सावित्री कवलेकर को हराकर जीत दर्ज की. टिकट न मिलने के कारण हुए आंतरिक विद्रोह के चलते यह मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था.

19. कानाकोना (Canacona): भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रमेश तावडकर ने निर्दलीय इसिडोर फर्नांडीस को हराकर अपनी पारंपरिक सीट वापस पाई. इस शानदार जीत के बाद रमेश तावडकर को गोवा विधानसभा का अध्यक्ष (Speaker) बनाया गया.

20. शिरोडा (Shiroda): भाजपा के अनुभवी नेता सुभाष शिरोडकर ने आरजीपी (RGP) के तुकराम बोरकर को हराकर चुनाव जीता था. इस सीट के नतीजों ने ग्रामीण इलाकों में क्रांतिकारी गोअन्स पार्टी के बढ़ते जनाधार को दिखाया था.

21. मारकैम (Marcaim): एमजीपी (MGP) के कद्दावर नेता सुदिन धवलीकर ने यहाँ एक बार फिर एकतरफा और रिकॉर्ड मतों से बड़ी जीत हासिल की. गठबंधन के उतार-चढ़ाव के बावजूद इस सीट पर उनका व्यक्तिगत दबदबा हमेशा कायम रहा है.

 

 

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दुनिया का पहला 'ब्रिज ट्रांसप्लांट', सुअर की किडनी से 271 दिनों तक बची इंसान की जान

Kidney Transplant: हर साल दुनिया में बड़ी संख्या में मरीज सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा रहे हैं क्योंकि उन्हें समय पर ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी शरीर का ऑर्गेन नहीं मिल पाता. किडनी, लिवर और हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है, लेकिन डोनर अंगों की उपलब्धता जरूरत के मुकाबले काफी कम है. भारत में भी ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है. मेडिकल रिपोर्ट्स बताती है कि लगभग हर दिन कम से कम 15 लोगों की मौतों अंगों की कमी से हो रही है. ऐसे में मेडिकल साइंस की एक नई उपलब्धि ने उन मरीजों के लिए उम्मीद पैदा कर दी है, जो लंबे समय से किसी ऑर्गन डोनर का इंतजार कर रहे हैं.

दरअसल, अमेरिका में डॉक्टरों ने पहली बार एक ऐसे मामले में सफलता हासिल की है, जहां जेनेटिकक्स रूप से तैयार किए गए सुअर की किडनी ने इंसानी शरीर में लंबे समय तक काम किया. यहां 66 वर्षीय टिम एंड्रयूज के शरीर में ट्रांसप्लांट की गई सूअर की किडनी करीब 271 दिनों तक सक्रिय रही. इसे अब तक के सबसे लंबे समय तक काम करने वाले जेनेटिकली मॉडिफाइड पिग किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. सूअर की किडनी से वह जिंदा रहा और उसे डायलिसिस नहीं हुआ.

टाइप-2 डायबिटीज के कारण खराब हो गई थीं दोनों किडनियां

टिम एंड्रयूज अमेरिका के मूल निवासी हैं और टाइप-2 डायबिटीज के कारण उनकी किडनी की स्थिति गंभीर हो गई थी. बीमारी बढ़ने के साथ उनकी किडनी ने भी लगभग काम करना बंद कर दिया था और वह एंड-स्टेज किडनी डिजीज के स्टेज पर पहुंच गए थे. ऐसे मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट सबसे बेस्ट ऑपशन्स में से एक माना जाता है, लेकिन उपयुक्त इंसानी डोनर मिलना आसान नहीं होता. एंड्रयूज भी इसी समस्या से जूझ रहे थे. उन्हें इंसानी किडनी मिलने में लंबा समय लग सकता था और लगातार डायलिसिस पर रहना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था. ऐसे में डॉक्टरों ने उन्हें एक प्रायोगिक उपचार का विकल्प दिया.

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किडनी में किए गए थे Genetical Changes

25 जनवरी 2025 को मैसाचुसेट्स जनरल ब्रिघम के डॉक्टरों ने एंड्रयूज के शरीर में आनुवंशिक रूप से बदले गए सुअर की किडनी ट्रांसप्लांट की. वैज्ञानिकों ने सुअर के जीन में कई बदलाव किए थे, ताकि उसका अंग इंसानी शरीर के साथ बेहतर तरीके से काम कर सके और प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा अंग को रिजेक्ट किए जाने का खतरा कम हो.

271 दिनों तक शरीर में सक्रिय रही किडनी

ट्रांसप्लांट के बाद सबसे बड़ी सफलता यह रही कि किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया. वह करीब 271 दिनों तक मरीज के शरीर में सक्रिय रही. इस दौरान एंड्रयूज को लंबे समय तक डायलिसिस से राहत मिली और वह रोजमर्रा के कई काम सामान्य रूप से कर सके. उनके लिए यह उपलब्धि सिर्फ चिकित्सा विज्ञान की सफलता नहीं थी, बल्कि सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर भी थी. वह खाना बनाने और घर के छोटे-मोटे काम करने जैसी गतिविधियां फिर से कर पा रहे थे.

इंसानी किडनी मिलने तक सूअर की किडनी बनी रही "ब्रिज"

हालांकि, कुछ समय बाद सुअर की किडनी की ब्लड वैसेल्स में नुकसान होने के संकेत दिखाई देने लगे थे. इस स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने आखिरकार इस किडनी को शरीर से निकाल दिया. इसके बाद कुछ समय के लिए एंड्रयूज को दोबारा डायलिसिस की जरूरत पड़ी.

इसी दौरान उनके लिए एक इंसानी डोनर की किडनी उपलब्ध हो गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने इंसानी किडनी का ट्रांसप्लांट किया, जो इसके बाद भी अच्छी तरह काम कर रही है. इस पूरे मामले की सबसे खास बात यह है कि सुअर की किडनी ने 'ब्रिज ट्रांसप्लांट' की भूमिका निभाई. ब्रिज ट्रांसप्लांट यानी उसने मरीज को उस मुश्किल दौर में संभाले रखा, जब तक उसके लिए इंसानी किडनी उपलब्ध नहीं हो गई.

क्या भविष्य में स्थायी समाधान बन सकती है 'पिग किडनी'?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जेनोट्रांसप्लांटेशन यानी एक प्रजाति के अंग को दूसरी प्रजाति के शरीर में प्रत्यारोपित करने की तकनीक भविष्य में अंगों की कमी की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. शुरुआत में ऐसी किडनी उन मरीजों के लिए अस्थायी विकल्प बन सकती है, जिन्हें इंसानी डोनर मिलने तक डायलिसिस से दूर रखना जरूरी होता है. अगर आने वाले समय में वैज्ञानिक यह साबित करने में सफल होते हैं कि आनुवंशिक रूप से बदली गई सुअर की किडनी लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से काम कर सकती है, तो यह तकनीक भविष्य में स्थायी किडनी ट्रांसप्लांट का विकल्प भी बन सकती है.

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