दुनिया का पहला 'ब्रिज ट्रांसप्लांट', सुअर की किडनी से 271 दिनों तक बची इंसान की जान
Kidney Transplant: हर साल दुनिया में बड़ी संख्या में मरीज सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा रहे हैं क्योंकि उन्हें समय पर ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी शरीर का ऑर्गेन नहीं मिल पाता. किडनी, लिवर और हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है, लेकिन डोनर अंगों की उपलब्धता जरूरत के मुकाबले काफी कम है. भारत में भी ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है. मेडिकल रिपोर्ट्स बताती है कि लगभग हर दिन कम से कम 15 लोगों की मौतों अंगों की कमी से हो रही है. ऐसे में मेडिकल साइंस की एक नई उपलब्धि ने उन मरीजों के लिए उम्मीद पैदा कर दी है, जो लंबे समय से किसी ऑर्गन डोनर का इंतजार कर रहे हैं.
दरअसल, अमेरिका में डॉक्टरों ने पहली बार एक ऐसे मामले में सफलता हासिल की है, जहां जेनेटिकक्स रूप से तैयार किए गए सुअर की किडनी ने इंसानी शरीर में लंबे समय तक काम किया. यहां 66 वर्षीय टिम एंड्रयूज के शरीर में ट्रांसप्लांट की गई सूअर की किडनी करीब 271 दिनों तक सक्रिय रही. इसे अब तक के सबसे लंबे समय तक काम करने वाले जेनेटिकली मॉडिफाइड पिग किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. सूअर की किडनी से वह जिंदा रहा और उसे डायलिसिस नहीं हुआ.
टाइप-2 डायबिटीज के कारण खराब हो गई थीं दोनों किडनियां
टिम एंड्रयूज अमेरिका के मूल निवासी हैं और टाइप-2 डायबिटीज के कारण उनकी किडनी की स्थिति गंभीर हो गई थी. बीमारी बढ़ने के साथ उनकी किडनी ने भी लगभग काम करना बंद कर दिया था और वह एंड-स्टेज किडनी डिजीज के स्टेज पर पहुंच गए थे. ऐसे मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट सबसे बेस्ट ऑपशन्स में से एक माना जाता है, लेकिन उपयुक्त इंसानी डोनर मिलना आसान नहीं होता. एंड्रयूज भी इसी समस्या से जूझ रहे थे. उन्हें इंसानी किडनी मिलने में लंबा समय लग सकता था और लगातार डायलिसिस पर रहना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था. ऐसे में डॉक्टरों ने उन्हें एक प्रायोगिक उपचार का विकल्प दिया.
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किडनी में किए गए थे Genetical Changes
25 जनवरी 2025 को मैसाचुसेट्स जनरल ब्रिघम के डॉक्टरों ने एंड्रयूज के शरीर में आनुवंशिक रूप से बदले गए सुअर की किडनी ट्रांसप्लांट की. वैज्ञानिकों ने सुअर के जीन में कई बदलाव किए थे, ताकि उसका अंग इंसानी शरीर के साथ बेहतर तरीके से काम कर सके और प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा अंग को रिजेक्ट किए जाने का खतरा कम हो.
271 दिनों तक शरीर में सक्रिय रही किडनी
ट्रांसप्लांट के बाद सबसे बड़ी सफलता यह रही कि किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया. वह करीब 271 दिनों तक मरीज के शरीर में सक्रिय रही. इस दौरान एंड्रयूज को लंबे समय तक डायलिसिस से राहत मिली और वह रोजमर्रा के कई काम सामान्य रूप से कर सके. उनके लिए यह उपलब्धि सिर्फ चिकित्सा विज्ञान की सफलता नहीं थी, बल्कि सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर भी थी. वह खाना बनाने और घर के छोटे-मोटे काम करने जैसी गतिविधियां फिर से कर पा रहे थे.
इंसानी किडनी मिलने तक सूअर की किडनी बनी रही "ब्रिज"
हालांकि, कुछ समय बाद सुअर की किडनी की ब्लड वैसेल्स में नुकसान होने के संकेत दिखाई देने लगे थे. इस स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने आखिरकार इस किडनी को शरीर से निकाल दिया. इसके बाद कुछ समय के लिए एंड्रयूज को दोबारा डायलिसिस की जरूरत पड़ी.
इसी दौरान उनके लिए एक इंसानी डोनर की किडनी उपलब्ध हो गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने इंसानी किडनी का ट्रांसप्लांट किया, जो इसके बाद भी अच्छी तरह काम कर रही है. इस पूरे मामले की सबसे खास बात यह है कि सुअर की किडनी ने 'ब्रिज ट्रांसप्लांट' की भूमिका निभाई. ब्रिज ट्रांसप्लांट यानी उसने मरीज को उस मुश्किल दौर में संभाले रखा, जब तक उसके लिए इंसानी किडनी उपलब्ध नहीं हो गई.
क्या भविष्य में स्थायी समाधान बन सकती है 'पिग किडनी'?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जेनोट्रांसप्लांटेशन यानी एक प्रजाति के अंग को दूसरी प्रजाति के शरीर में प्रत्यारोपित करने की तकनीक भविष्य में अंगों की कमी की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. शुरुआत में ऐसी किडनी उन मरीजों के लिए अस्थायी विकल्प बन सकती है, जिन्हें इंसानी डोनर मिलने तक डायलिसिस से दूर रखना जरूरी होता है. अगर आने वाले समय में वैज्ञानिक यह साबित करने में सफल होते हैं कि आनुवंशिक रूप से बदली गई सुअर की किडनी लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से काम कर सकती है, तो यह तकनीक भविष्य में स्थायी किडनी ट्रांसप्लांट का विकल्प भी बन सकती है.
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Uttarakhand Elections 2027: अल्मोड़ा की 6 सीटों पर सियासी घमासान शुरू, वोटों के गणित से तय होगी जीत-हार
Uttarakhand Elections 2027: उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जिसके लिए सभी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. राज्य में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होगा. लेकिन बीएसपी, आम आदमी पार्टी (AAP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) उत्तराखंड क्रांति दल (UKD), समाजवादी पार्टी (SP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) CPI(ML), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी राजनीतिक किस्मत आजमाते हैं.
कुमाऊं की ऐतिहासिक धरोहर है अल्मोड़ा
ऐसे में हम आज बात करने वाले हैं उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी और कुमाऊं की ऐतिहासिक धरोहर माना जाने वाला अल्मोड़ा (Almora) जिला राजनीतिक रूप से बेहद सजग और रणनीतिक महत्व रखने वाला क्षेत्र है. 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर यहां भी सियासी बिसात बिछने लगी है और चुनावी हलचल तेज हो गई है.
अपनी मनमोहक बाल मिठाई, ऐतिहासिक जागेश्वर धाम, प्रसिद्ध कसार देवी मंदिर और हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों के अद्भुत नजारों के लिए दुनिया भर में मशहूर अल्मोड़ा की राजनीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार, पलायन की समस्या, स्वास्थ्य-शिक्षा व्यवस्था, कृषि-बागवानी और पर्वतीय बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों की भूमिका बेहद अहम रहती है.
राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिले की सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच पारंपरिक व सीधा मुकाबला रहा है, जबकि उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) और निर्दलीय उम्मीदवार कई सीटों पर समीकरण बनाते-बिगाड़ते रहे हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला था, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. ऐसे में 2027 के चुनाव में भाजपा के सामने अपना दबदबा बनाए रखने और कांग्रेस के लिए कुमाऊं के इस सांस्कृतिक किले पर फिर से मजबूत पकड़ बनाने की बड़ी परीक्षा होगी.
‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात अल्मोड़ा जिले की…
अल्मोड़ा जिला, जिसकी पहचान सिर्फ इसके सुहावने मौसम और पहाड़ों की खूबसूरती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक और ऐतिहासिक इतिहास भी बेहद समृद्ध रहा है. यह वही अल्मोड़ा है, जो चंद राजाओं की ऐतिहासिक राजधानी रहा और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कुमाऊं में राजनीतिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना. गोविंद वल्लभ पंत जैसे दिग्गज नेताओं की इस कर्मभूमि ने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर आज तक राज्य की दिशा तय करने में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है.
अल्मोड़ा जिला आज अपने सांस्कृतिक वैभव, ऐतिहासिक चितई गोलू देवता मंदिर, कसार देवी की अलौकिक ऊर्जा और जीवंत स्थानीय बाजारों के रूप में पहचाना जाता है. लेकिन इन सब के बीच, अल्मोड़ा नगर के शहरी क्षेत्रों से लेकर रानीखेत, द्वारहाट, सल्ट, सोमेश्वर और भिकियासैंण के ग्रामीण व पर्वतीय अंचलों तक यहां की सियासत का अपना एक अलग मिज़ाज है. आखिर अल्मोड़ा जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किस सीट पर किस पार्टी का दबदबा रहा है? कौन-से चेहरे यहां बाजी मारते आए हैं और 2027 में किसका सिक्का चल सकता है? आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं…
अल्मोड़ा जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर
| क्रमांक | विवरण | संख्या / दर |
|---|---|---|
| 1 | कुल जनसंख्या | 6,22,506 |
| 2 | पुरुष जनसंख्या | 2,91,081 |
| 3 | महिला जनसंख्या | 3,31,425 |
| 4 | कुल साक्षर व्यक्ति | 4,36,497 |
| 5 | कुल साक्षरता दर | 80.47% |
| 6 | पुरुष साक्षरता दर | 92.86% |
| 7 | महिला साक्षरता दर | 69.92% |
| 8 | ग्रामीण साक्षरता दर | 78.60% |
| 9 | शहरी साक्षरता दर | 93.73% |
अल्मोड़ा जिले की कुल धार्मिक आबादी
| क्रमांक | धर्म | आबादी | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| 1 | हिंदू | 6,11,250 | 98.19% |
| 2 | मुस्लिम | 7,752 | 1.25% |
| 3 | ईसाई | 1,895 | 0.30% |
| 4 | सिख | 256 | 0.04% |
| 5 | बौद्ध | 201 | 0.03% |
| 6 | जैन | 31 | 0.00% |
| 7 | अन्य धर्म | 6 | 0.00% |
| 8 | धर्म नहीं बताया | 1,115 | 0.18% |
| कुल | सभी धर्म | 6,22,506 | 100% |
2022 विधानसभा चुनाव परिणाम के अनुसार अल्मोड़ा की सभी 6 सीटों पर ऐसा रहा रिजल्ट
| क्र. | विधानसभा सीट | विजेता प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त मत | निकटतम प्रतिद्वंद्वी | पार्टी | प्राप्त मत | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | द्वाराहाट (48) | मदन सिंह बिष्ट | कांग्रेस | 17,766 | अनिल सिंह शाही | भाजपा | 17,584 | 182 |
| 2 | सल्ट (49) | महेश सिंह जीना | भाजपा | 22,393 | सुरेंद्र सिंह जीना | कांग्रेस | 18,705 | 3,688 |
| 3 | रानीखेत (50) | प्रमोद नैनवाल | भाजपा | 21,047 | करण माहरा | कांग्रेस | 18,463 | 2,584 |
| 4 | सोमेश्वर (51, अ.जा.) | रेखा आर्या | भाजपा | 26,161 | राजेंद्र बाराकोटी | कांग्रेस | 20,868 | 5,293 |
| 5 | अल्मोड़ा (52) | मनोज तिवारी | कांग्रेस | 24,439 | कैलाश शर्मा | भाजपा | 24,312 | 127 |
| 6 | जागेश्वर (53) | मोहन सिंह महरा | भाजपा | 27,530 | गोविंद सिंह कुंजवाल | कांग्रेस | 21,647 | 5,883 |
अल्मोड़ा में बीजेपी और कांग्रेस बीच रहा कांटे का मुकाबला
अल्मोड़ा (Almora): इस हॉट सीट पर कांग्रेस के मनोज तिवारी और भाजपा के कैलाश शर्मा के बीच बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. अंत में कांग्रेस प्रत्याशी ने महज 127 वोटों के बेहद करीबी अंतर से भाजपा को हराकर इस सीट पर जीत दर्ज की.
द्वाराहाट सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच 182 मतों से हुई जीत-हार
द्वाराहाट (Dwarahat): इस सीट पर भी कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ, जिसमें कांग्रेस के मदन सिंह बिष्ट ने बाजी मारी. उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अनिल सिंह शाही को मात्र 182 वोटों के अंतर से हराकर विधानसभा में अपनी जगह बनाई.
जागेश्वर सीट पर जिले की सबसे बड़ी जीत
जागेश्वर (Jageshwar): लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट पर इस बार बड़ा उलटफेर हुआ और भाजपा के मोहन सिंह महरा ने जीत दर्ज की. उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल को 5,883 वोटों से शिकस्त दी.
बीजेपी उम्मीदवार ने कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष को दी पटखनी
रानीखेत (Ranikhet): इस प्रतिष्ठित सीट पर भाजपा के प्रमोद नैनवाल ने कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष करण महरा को चुनावी मैदान में पटखनी दी. प्रमोद नैनवाल ने 2,584 वोटों के अंतर से यह महत्वपूर्ण मुकाबला अपने नाम किया था.
सोमेश्वर में लगातार दूसरी बार 2022 में खिला कमल
सोमेश्वर (Someshwar - SC): इस सुरक्षित सीट पर भाजपा की कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत रखी. उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र बाराकोटी को 5,293 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार इस सीट पर कमल खिलाया.
बीजेपी के महेश जीना ने सल्ट सीट पर बरकरार रखी जीत
सल्ट (Salt): इस सीट पर भाजपा के महेश जीना ने अपनी पारिवारिक विरासत और राजनीतिक पकड़ को बरकरार रखते हुए जीत हासिल की. उन्होंने मुख्य मुकाबले में कांग्रेस के अनुभवी नेता रंजीत सिंह रावत को 3,688 वोटों के अंतर से चुनाव हराया.
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