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Bigg Boss Controversy: यूरिन फेंकने से थप्पड़ मारने तक, बिग बॉस के इन झगड़ों ने हिला दिया था पूरा घर

Bigg Boss Controversy: बिग बॉस टीवी का सबसे विवादित रियलिटी शो में से एक है. पिछले 19 सालों में इस शो ने दर्शकों का जमकर एंटरटेनमेंट किया है. इसके साथ ही ऐसे विवाद भी हुए हैं, जिन्हें आज तक याद किया जाता है. घर के अंदर लंबे समय तक साथ रहने, टास्क करने और जीत की चाह कई बार कंटेस्टेंट्स को इतना गुस्सा दिला देती है कि बात बहस से आगे बढ़ जाती है. किसी ने थप्पड़ मार दिया तो किसी ने साथी कंटेस्टेंट पर चाय फेंक दी. एक कंटेस्टेंट तो ऐसा भी था जिसने अपने साथी पर यूरिन फेंक दी थी. तो आइए जानते हैं बिग बॉस के इतिहास के 5 सबसे बड़े विवादों के बारे में-

1. स्वामी ओम पर यूरिन फेंकने का आरोप

बिग बॉस से जुड़े सबसे बड़े विवादों की बात जैसे ही आती है तो सीजन 10 से  सबसे पहला नाम स्वामी ओम (Swami Om) का याद आता है. वो पूरे सीजन में अपने विवादित बयानों और हरकतों की वजह से चर्चा में रहे. लेकिन सबसे बड़ा विवाद तब हुआ जब एक टास्क के दौरान उन्होंने साथी कंटेस्टेंट्स बानी जे और रोहन मेहरा पर यूरिन फेंक दी थी. इस घटना के बाद घर में हंगामा मच गया था और सभी कंटेस्टेंट्स स्वामी ओम के खिलाफ हो गए. मामला इतना बढ़ गया कि मेकर्स को बीच में दखल देना पड़ा और आखिरकार उन्हें शो से बाहर कर दिया गया था.

2. KRK ने रोहित वर्मा पर फेंकी बोतल

बिग बॉस 3 (Bigg Boss 3) में भी एक बड़ा विवाद हुआ था. उस सीजन में कमाल राशिद खान (KRK) और फैशन डिजाइनर रोहित वर्मा के बीच जबरदस्त लड़ाई देखने को मिली थी. दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई थी कि KRK ने गुस्से में रोहित वर्मा की तरफ बोतल फेंकी थी. हालांकि बोतल सीधे नहीं लगी, लेकिन ये हरकत शो के नियमों के खिलाफ थी।.इसके बाद बिग बॉस ने सख्त कदम उठाते हुए KRK को घर से बाहर कर दिया था. उस समय यह घटना काफी चर्चा में रही थी.

3. पूजा मिश्रा और सिद्धार्थ भारद्वाज की लड़ाई

बिग बॉस सीजन 5 में पूजा मिश्रा (Pooja Mishra) अपने गुस्से की वजह से खूब सुर्खियों में रहीं थी. शो में उनकी कई लोगों से बहस हुई, लेकिन सिद्धार्थ भारद्वाज (Sidharth Bhardwaj) के साथ उनका झगड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. एक टास्क के दौरान दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि घर का माहौल पूरी तरह खराब हो गया. पूजा मिश्रा ने कई बार अपना आपा खोया और उनके डायलॉग "Talk to my hand" तक सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. इस लड़ाई ने पूरे सीजन में खूब सुर्खियां बटोरी थीं.

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4. डॉली बिंद्रा और मनोज तिवारी का विवाद

बिग बॉस सीजन 4 (Bigg Boss 4) में डॉली बिंद्रा का नाम सबसे ज्यादा विवादों में रहा. वो घर में आते ही कई कंटेस्टेंट्स से भिड़ गई थीं. लेकिन उनका सबसे चर्चित झगड़ा मनोज तिवारी के साथ हुआ. दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई थी कि घर में जोर-जोर से चिल्लाने की नौबत आ गई. डॉली का गुस्सा और उनका तेज बोलने का अंदाज उस समय चर्चा का विषय बन गया था. "बाप पे मत जाना" वाला उनका डायलॉग तो आज भी बिग बॉस के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है.

5.  सोनाली और अली का थप्पड़ कांड

बिग बॉस के इतिहास का सबसे चर्चित थप्पड़ कांड बिग बॉस 8 (Bigg Boss)  में देखने को मिला था, जब अली कुली मिर्जा (Ali Quli Mirza) और सोनाली राउत (Sonali Raut) के बीच झगड़ा हुआ. टास्क के दौरान बहस इतनी बढ़ गई कि सोनाली ने अली को थप्पड़ मार दिया था. इस घटना के बाद घर में हंगामा मच गया था. हालांकि बाद में दोनों ने अपने-अपने पक्ष रखे, लेकिन ये मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा और बिग बॉस के इतिहास में थप्पड़ मारने वाली ये सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन गया.

6. मधुरिमा तुली और विशाल सिंह 

अगर बिग बॉस के सबसे शॉकिंग झगड़ों की बात हो और मधुरिमा तुली (Madhurima Tuli) का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. बिग बॉस सीजन 13  (Bigg Boss 13) में मधुरिमा और उनके एक्स बॉयफ्रेंड विशाल आदित्य सिंह (Vishal Aditya Singh) के बीच लगातार लड़ाई देखने को मिलती थी. एक बहस के दौरान मधुरिमा ने गुस्से में विशाल को फ्राइंग पैन से मार दिया था. ये घटना टीवी पर दिखाए जाने के बाद काफी वायरल हुई और इसके बाद मेकर्स ने सख्त कदम उठाया और मधुरिमा को शो से बाहर कर दिया था.

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7. सिद्धार्थ शुक्ला और आसिम रियाज का झगड़ा

बिग बॉस सीजन 13 में एक और लड़ाई काफी फेसम थी, सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) और आसिम रियाज (Asim Riaz) की. शुरुआत में दोनों की अच्छी दोस्ती थी, दोनों अक्सर साथ नजर आते थे, लेकिन धीरे-धीरे गेम और टास्क को लेकर उनके बीच मतभेद बढ़ने लगे, छोटी-छोटी बातों पर बहस होने लगी और देखते ही देखते दोनों की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई, दोनों के बीच कई बार जोरदार बहस हुई और मामला धक्का-मुक्की तक भी पहुंचा. उनका झगड़ा इतना पॉपुलर हुआ कि बिग बॉस 13 की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में शामिल हो गया. 

8. अर्चना गौतम ने पकड़ा शिव का गला

इसके अलावा बिग बॉस 16 में तो  अर्चना गौतम (Archana Gautam) ने शिव ठाकरे (Shiv Thakare) का गला ही पकड़ लिया था. दरअसल, दोनों की बहस के दौरान शिव की तरफ से अर्चना से जुड़ी राजनीतिक पार्टी को लेकर कमेंट किया गया, जिसके बाद अर्चना अपना आपा खो बैठीं थी और शिव का गला पकड़ा लिया था. शिव के गर्दन पर खरोंच भी आई थी. इसके बाद  फिजिकल वायलेंस की वजह से अर्चना को घर से बाहर कर दिया था, हालांकि बाद में वो वापस आ गई थी. 

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Goa Elections 2027: दक्षिण गोवा की 21 सीटों पर सियासी गहमागहमी

Goa Elections 2027: उत्तर गोवा की हलचल और नाइटलाइफ के विपरीत दक्षिण गोवा जिला अपनी शांत-सुंदर जीवनशैली, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और गहरे राजनीतिक मिज़ाज के लिए जाना जाता है. 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर दक्षिण गोवा के सियासी गलियारों में भी रणनीतिक बिसात बिछने लगी है. मडगांव (Margao) जैसे वाणिज्यिक केंद्र, वास्को डा गामा (Vasco da Gama) के औद्योगिक व बंदरगाह क्षेत्र, कुर्टोरिम और कैनकोना के पारंपरिक ग्रामीण इलाकों से समृद्ध दक्षिण गोवा की राजनीति हमेशा से राज्य की सत्ता तय करने में बेहद निर्णायक रही है.

यहां की राजनीति में शांत रेतीले तटों (जैसे कोलवा, बेनॉलिम, पालोलेम), लक्जरी टूरिज्म, पारंपरिक मछुआरा समुदाय, कैथोलिक ईसाई और हिंदू मतदाताओं के अनूठे जनसांख्यिकीय संतुलन की बड़ी भूमिका रहती है. राजनीतिक दृष्टिकोण से दक्षिण गोवा ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस और क्षेत्रीय ताकतों (जैसे चर्चिल अलेमाओ और लूर्डिनियो फलेरो जैसे दिग्गज नेताओं के प्रभाव क्षेत्र) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. हालांकि, बीते कुछ वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मूरमुगाव और मडगांव बेल्ट में अपनी पैठ मजबूत की है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी (AAP) और रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) जैसे नए दल समीकरणों को लगातार दिलचस्प बना रहे हैं.

‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात दक्षिण गोवा की…

दक्षिण गोवा जिला केवल अपने शांत समुद्री तटों और लग्जरी रिसॉर्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक प्रभाव पूरे राज्य पर पड़ता है. यह वही दक्षिण गोवा है जिसका मडगांव शहर गोवा की सांस्कृतिक और व्यावसायिक राजधानी माना जाता है और जहां का मुर्मूगाव पोर्ट (Mormugao Port) राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है. दूधसागर जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता से लेकर ओल्ड गोवा के ऐतिहासिक संदर्भों और पश्चिमी घाट के जंगलों तक, दक्षिण गोवा की जनता ने राज्य के हर राजनीतिक आंदोलन में अपनी अलग छाप छोड़ी है.

दक्षिण गोवा की राजनीति का अपना एक अलग मिज़ाज है—यहां चुनावी मुद्दे अक्सर स्थानीय पहचान, पर्यावरण संरक्षण, तटीय विकास और रोजगार के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर दक्षिण गोवा जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस पार्टी का दबदबा कायम रहा है? और 2027 के महामुकाबले में किसका दांव सटीक बैठेगा? आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं…

उत्तर गोवा जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी / जेंडर कुल आबादी साक्षरता दर कुल साक्षर नागरिक
पुरुष 3,22,463 91.67% 2,64,085
महिला 3,18,074 83.47% 2,38,342
कुल 6,40,537 87.59% 5,02,427

उत्तर गोवा जिले की धार्मिक आबादी

धर्म जनसंख्या प्रतिशत
हिंदू 53.34%
ईसाई 36.21%
मुस्लिम 9.93%
अन्य 0.20%
सिख 0.13%
जैन 0.09%
बौद्ध 0.08%

2022 विधानसभा चुनाव परिणाम के अनुसार, दक्षिण गोवा जिले की सभी विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम

क्रमांक निर्वाचन क्षेत्र विजेता (दल) - कुल वोट उपविजेता (दल) - कुल वोट
1 पोंडा रवि नाइक (BJP) - 7,514 केतन भटिकर (MGP) - 7,437
2 प्रियोल गोविंद गौडे (BJP) - 11,019 दीपक धवलीकर (MGP) - 10,806
3 मडगाँव दिगंबर कामत (INC) - 13,674 मनोहर अजगांवकर (BJP) - 5,880
4 फतोर्डा विजय सरदेसाई (GFP) - 11,063 दामोदर नाइक (BJP) - 9,536
5 मूरमुगाव संकल्प अमोनकर (INC) - 9,067 मिलिंद नाइक (BJP) - 7,126
6 वास्को-डा-गामा कृष्णा साल्कर (BJP) - 13,117 कार्लोस अल्मेडा (INC) - 9,460
7 दाबोलिम माविन गोडिन्हो (BJP) - 7,594 प्रेमानंद नानोस्कर (INC) - 6,024
8 कोर्टालिम एंटोनियो वाज़ (Independent) - 5,430 अल्विनो अरुंजो (RGP) - 2,475
9 नुवेम अलेक्सो सेकेरा (INC) - 8,745 अरविन्द डी'कोस्टा (RGP) - 4,348
10 कर्टोरिम अलेक्सो रेजिनाल्डो लौरेंको (Independent) - 8,969 मोरेनो रेबेलो (INC) - 3,905
11 बेनाउलिम वेन्ज़ी वीगास (AAP) - 6,434 चर्चिल अलेमाओ (TMC) - 5,163
12 नावेलीम उल्हास तुएनकर (BJP) - 5,160 वलंका अलेमाओ (TMC) - 4,738
13 कुनकोलिम यूरी अलेमाओ (INC) - 9,866 राजन नाइक (BJP) - 6,632
14 वेलिम क्रूज़ सिल्वा (AAP) - 5,390 सावियो डी'सिल्वा (INC) - 3,606
15 क्यूपेम एल्टन डी'कोस्टा (INC) - 14,945 चंद्रकांत कवलेकर (BJP) - 11,334
16 करचोरम नीलेश कबराल (BJP) - 9,907 अमित पाटकर (INC) - 9,235
17 सानवोर्डेम गणेश गावकर (BJP) - 11,171 दीपक पास्कर (Independent) - 5,481
18 संगेम सुभाष फाल देसाई (BJP) - 8,770 सावित्री कवलेकर (Independent) - 7,341
19 कानाकोना रमेश तावडकर (BJP) - 9,063 इसिडोर फर्नांडीस (Independent) - 6,012
20 शिरोडा सुभाष शिरोडकर (BJP) - 8,350 तुकराम बोरकर (RGP) - 6,176
21 मारकैम सुदिन धवलीकर (MGP) - 13,951 सुदेश बिकल (RGP) - 4,003

सभी विधानसभा सीटों के बारे में जानें...

1. पोंडा (Ponda): यहाँ भाजपा के रवि नाइक और एमजीपी के केतन भटिकर के बीच बेहद रोमांचक मुकाबला हुआ था. रवि नाइक ने मात्र 77 वोटों के सबसे छोटे अंतर से इस सीट पर जीत दर्ज की थी.

2. प्रियोल (Priol): इस सीट पर भाजपा के गोविंद गौडे और एमजीपी के दीपक धवलीकर के बीच सीधी और कांटे की टक्कर थी. गोविंद गौडे ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी को केवल 213 वोटों से मात देकर सीट बचाई.

3. मडगाँव (Margao): यह सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता दिगंबर कामत का मजबूत गढ़ रही है, जहां उन्होंने बड़ी जीत हासिल की थी. हालांकि, चुनाव जीतने के कुछ महीनों बाद कामत अन्य विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए.

4. फतोर्डा (Fatorda): गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के प्रमुख विजय सरदेसाई ने इस सीट पर अपना दबदबा कायम रखा. उन्होंने भाजपा के दामोदर नाइक को हराकर विपक्ष के एक बड़े केंद्र के रूप में अपनी सीट बचाई.

5. मूरमुगाव (Mormugao): कांग्रेस के संकल्प अमोनकर ने भाजपा के तत्कालीन मंत्री मिलिंद नाइक को एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में हराया था. बाद में संकल्प अमोनकर भी कांग्रेस छोड़कर सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए.

6. वास्को-डा-गामा (Vasco-da-Gama): इस तटीय और शहरी निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कृष्णा साल्कर ने कांग्रेस के कार्लोस अल्मेडा को हराया था. इस जीत के साथ भाजपा ने वास्को के कमर्शियल हब पर अपनी पकड़ मजबूत की.

7. दाबोलिम (Dabolim): अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे वाले इस क्षेत्र में भाजपा के कद्दावर नेता माविन गोडिन्हो ने अपनी सीट का बचाव किया. उन्होंने कांग्रेस के प्रेमानंद नानोस्कर को हराकर लगातार अपनी साख बचाए रखी.

8. कोर्टालिम (Cortalim): इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार एंटोनियो वाज़ ने राजनीतिक पंडितों को चौंकाते हुए बड़ी जीत दर्ज की थी. यहाँ नई पार्टी 'क्रांतिकारी गोअन्स पार्टी' (RGP) दूसरे स्थान पर रहकर सबको हैरान कर दिया था.

9. नुवेम (Nuvem): ईसाई बहुल इस पारंपरिक सीट पर कांग्रेस के अलेक्सो सेकेरा ने आसान जीत दर्ज की थी. इस सीट पर भी पारंपरिक पार्टियों को पछाड़कर आरजीपी (RGP) दूसरे नंबर पर आ गई थी.

10. कर्टोरिम (Curtorim): दल-बदल के घटनाक्रम के बाद अलेक्सो रेजिनाल्डो लौरेंको ने निर्दलीय चुनाव लड़कर भारी बहुमत से जीत हासिल की. चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने भाजपा सरकार को अपना बाहर से समर्थन दे दिया.

11. बेनाउलिम (Benaulim): आम आदमी पार्टी (AAP) के वेन्ज़ी वीगास ने पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी उम्मीदवार चर्चिल अलेमाओ को हराकर इतिहास रचा था. इस जीत ने दक्षिण गोवा के तटीय बेल्ट में 'आप' की एंट्री पक्की की.

12. नावेलीम (Navelim): विपक्ष के वोटों में भारी बिखराव के कारण भाजपा के उल्हास तुएंकर ने इस अल्पसंख्यक बहुल सीट पर पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की. उन्होंने टीएमसी की वलंका अलेमाओ को बेहद कड़े मुकाबले में हराया.

13. कुन科लिम (Cuncolim): कांग्रेस के यूरी अलेमाओ ने भाजपा के राजन नाइक को हराकर इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ साबित की. यूरी अलेमाओ बाद में गोवा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) भी बने.

14. Velim (वेलिम): इस सीट पर 'आप' के क्रूज़ सिल्वा ने कांग्रेस के सावियो डी'सिल्वा को हराकर दूसरी बड़ी सफलता हासिल की थी. यहाँ भी क्रांतिकारी गोअन्स पार्टी (RGP) ने बड़े पैमाने पर पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई थी.

15. क्यूपेम (Quepem): कांग्रेस के एल्टन डी'कोस्टा ने भाजपा के कद्दावर नेता और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री चंद्रकांत 'बाबू' कवलेकर को हराया था. यह 2022 के गोवा चुनाव के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक माना गया.

16. करचोरम (Curchorem): भाजपा के नीलेश कबराल ने कांग्रेस के अमित पाटकर के खिलाफ कड़े मुकाबले में यह सीट जीती थी. खनन बेल्ट (Mining Belt) में पर्यावरण विरोध के बावजूद कबराल अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहे.

17. सानवोर्डेम (Sanvordem): खनन प्रभावित इस क्षेत्र में भाजपा के गणेश गावकर ने एकतरफा मुकाबले में निर्दलीय दीपक पास्कर को मात दी. यह निर्वाचन क्षेत्र शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी का एक मजबूत गढ़ माना जाता रहा है.

18. संगेम (Sanguem): भाजपा के सुभाष फाल देसाई ने अपनी ही पार्टी की बागी निर्दलीय उम्मीदवार सावित्री कवलेकर को हराकर जीत दर्ज की. टिकट न मिलने के कारण हुए आंतरिक विद्रोह के चलते यह मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था.

19. कानाकोना (Canacona): भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रमेश तावडकर ने निर्दलीय इसिडोर फर्नांडीस को हराकर अपनी पारंपरिक सीट वापस पाई. इस शानदार जीत के बाद रमेश तावडकर को गोवा विधानसभा का अध्यक्ष (Speaker) बनाया गया.

20. शिरोडा (Shiroda): भाजपा के अनुभवी नेता सुभाष शिरोडकर ने आरजीपी (RGP) के तुकराम बोरकर को हराकर चुनाव जीता था. इस सीट के नतीजों ने ग्रामीण इलाकों में क्रांतिकारी गोअन्स पार्टी के बढ़ते जनाधार को दिखाया था.

21. मारकैम (Marcaim): एमजीपी (MGP) के कद्दावर नेता सुदिन धवलीकर ने यहाँ एक बार फिर एकतरफा और रिकॉर्ड मतों से बड़ी जीत हासिल की. गठबंधन के उतार-चढ़ाव के बावजूद इस सीट पर उनका व्यक्तिगत दबदबा हमेशा कायम रहा है.

 

 

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