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हाथी के बच्चे बराबर वजन, इंसानों को जिंदा निगलती है:सड़ा-गला मांस खाती है, नेपाल से बहकर बिहार आईं खतरनाक मछलियों की कहानी

26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का मलबा अब बिहार पहुंच रहा है और उसके साथ बहकर आ रही हैं- थाई मांगुर, गोइता (गूंछ फिश) जैसी खतरनाक मछलियां, जो इंसानी शव खाती हैं। जिनको खाने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है। नेपाल से बिहार बहकर आई इन मछलियों की कहानी क्या है, क्या यह भारत में प्रतिबंधित है, इन्हें खाना कितना जानलेवा है; जानेंगे बूझे की नाही में... सबसे पहले जानिए, नेपाल से बहकर कौन-कौन सी मछली बिहार आई नेपाल में आई तबाही के तीसरे दिन यानी 29 अगस्त की सुबह गोपालगंज में मछुआरों ने गंडक नदी से भारी मात्रा में मछलियों को पकड़ा। गोपालगंज के मंगलपुर घाट से कई क्विंटल मछलियों के पकड़ने और उन्हें पश्चिम बंगाल के बाजारों में भेजने की खबर है। बिहार सरकार के मत्स्य निदेशालय ने लोगों से बाढ़ के पानी में आई मछलियों को नहीं खाने की अपील की है। निदेशालय ने कहा है, 'बाढ़ के पानी से सीधे पकड़ी गई मछलियों की खरीद-बिक्री में सावधानी बरतें। बिना जांच के मछली नहीं खाएं। एक-एक कर जानिए, बिहार आईं मछलियों की कहानी… 1. गूंछ कैटफिशः इंसानों को नदी में खींचकर खाती हैं गूंछ कैटफिश यानी गोइता, जिसे 'आदमखोर कैटफिश' के नाम से भी जाना जाता है। नुकीले जबड़ों और बड़ी आंखों वाली एक बेहद भयानक मछली है। यह आम मछलियों जैसी नहीं होती, क्योंकि इसका शरीर काफी लंबा और सिर चौड़ा व चपटा होता है, जिस पर मूंछों के तीन जोड़े होते हैं। इन्हें कहा जाता है- 'नदी का शैतान' अलग-अलग रिपोर्ट में इन्हें नदी का शैतान यानी रिवर मॉन्स्टर भी कहा गया है। 'द हिमालयन आउटबैक' मैगजीन के मुताबिक, 1988 और 2007 के बीच नेपाल की काली नदी के किनारे तीन अलग-अलग घटनाएं हुईं। इनमें से किसी का भी शव बाद में नहीं मिला। तीनों घटनाएं नेपाल में काली नदी और भारत के निकटवर्ती हिस्से के पास हुई थीं। इस घटना के बाद लोगों ने दावा किया कि किसी विशाल जीव ने आदमी को खींच लिया है। इन दावों के बाद दुनियाभर की नजर इधर गई। भारत में प्रतिबंधित नहीं 2. थाई मांगुरः भारत में प्रतिबंधित, खाने से हो सकता है कैंसर थाई मांगुर मछली कैटफिश समूह में आती है। यह अलग-अलग तरह की रे-फिन्ड यानी पंखों वाली मछलियों का एक समूह है। इनका नाम इनके खास बार्बेल्स (मूंछों) के कारण पड़ा है, जो बिल्ली की मूंछों जैसी दिखती है। थाई मांगुर को वैज्ञानिक रूप से 'क्लैरियस गैरीपिनस' नाम से जाना जाता है। यह 3-5 फीट लंबी हवा में सांस लेने वाली मछली है, जो अपने खास रेस्पिरेटरी सिस्टम (ARS) की वजह से सूखी जमीन पर चल सकती है। कीचड़ में भी जीवित रह सकती है। यह तेजी से बढ़ती है। अगर इसे पाला जाए तो उत्पादन तीन गुना तक बढ़ सकता है। इसलिए इसे कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली मछली भी कहा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अन्य प्रजाति की मछलियां छह महीने में 300 ग्राम बढ़ती है, तो थाई मांगुर उतने ही समय में लगभग एक किलो तक बढ़ जाती है। 2000 में NGT ने लगाया प्रतिबंध भारत में 'थाई मांगुर' के पालने, खाने और बेचने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 2000 में रोक लगा दी थी। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि यह मांसाहारी मछली पानी में रहने वाली दूसरी मछलियों के लिए खतरा पैदा करती थी। 3. वल्लागो कैटफिश यानी मीठे पानी का शार्क वल्लागो कैटफिश, जिसे बराली, बोआल, पठान या हेलीकॉप्टर कैटफिश के नाम से जाना जाता है। मीठे पानी में पाई जाने वाली एक विशाल और आक्रामक शिकारी मछली है। यह 'सिलुरिडे' परिवार से संबंधित है। यह दक्षिण एशिया (जिसमें नेपाल भी शामिल है) के प्रमुख नदियों में रहती है।

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Dark Mehendi Tips: मेहंदी का रंग डार्क कैसे करें? करवा चौथ पर कम समय में रचाने के लिए फॉलो करें ये टिप्स

Dark Mehendi Tips: करवा चौथ पर सुहागन महिलाएं मेहंदी जरूर लगाती हैं। यह सुहाग चिन्ह माना जाता है। लेकिन कई बार मेहंदी का रंग फीका नजर आता है। अगर आप अपने हाथों में रची मेहंदी का रंग गाढ़ा और खूब चटक करना चाहती हैं तो कुछ टिप्स को फॉलो करें- 

फॉलो करें ये टिप्स

  1. मेहंदी लगाने से पहले हाथों को अच्छे से धो लें, हाथों को साफ कपड़े से पोंछ लें। इसके बाद नीलगिरी का तेल लगाएं और हल्का सा हाथों को पोंछ लें। अब मेहंदी के डिजाइन बनवाएं। लगाने के बाद मेहंदी को चार-पांच घंटे तक सूखने दें।
  2. नीबू के रस में चीनी मिलाकर मिक्सचर तैयार करें। इस मिक्सचर को कॉटन की मदद से मेहंदी लगे हाथों पर लगाएं। कुछ देर मेहंदी को और सूखने दें। इसके बाद रब करके मेहंदी को हटाएं। 
  3. मेहंदी हटाने के बाद पानी से हाथ ना धोएं। दिन भर में दो-तीन बार गुनगुना सरसों का तेल हाथों पर लगाएं। शाम तक मेहंदी का रंग खूब गाढ़ा हो जाएगा।  4-5 लौंग तवे पर भून लें, इसके धुएं में मेहंदी लगे हाथ सेंक लें। कुछ देर में ही मेहंदी का रंग गाढ़ा हो जाएगा। 

                                  प्रस्तुति : सहेली फीचर्स
 

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  Sports

जब क्रिकेट के 'भगवान' के सामने खेला गया इतिहास का सबसे रहस्यमयी मैच, क्या था 54 गेंदों पर सिर्फ 16 रन बनने का राज?

cricket unique stories: 1994 में कानपुर में खेले गए भारत-वेस्टइंडीज वनडे मैच में अंतिम 9 ओवरों (54 गेंदों) में जहां आक्रामक बल्लेबाजी की उम्मीद थी, वहां मोंगिया और प्रभाकर मिलकर केवल 16 रन ही बना सके. मोंगिया ने 21 गेंदों में महज 4 रन बनाए. दूसरी तरफ, प्रभाकर ने अपना शतक तो पूरा किया (154 गेंदों में नाबाद 102 रन), लेकिन उन्होंने टीम को जीत दिलाने का कोई प्रयास नहीं किया. भारत यह मैच 46 रनों से हार गया और स्टेडियम में मौजूद दर्शक सन्न रह गए. Tue, 8 Sep 2026 13:16:22 +0530

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Saharanpur Masjid News Live : सहारनपुर ढाहाई गई मस्जिद के नीचे मिला कुआं 250 साल पुराना, मिला खजाना! #tmktech #vivo #v29pro
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