बीजेपी समर्थित अखिल भारतीय कामगार कर्मचारी संघ ने नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स NCPA के कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण वेतन समझौता किया है. इस समझौते के तहत NCPA के सभी कर्मचारियों के वेतन में हर महीने ₹7,250 की बढ़ोतरी की गई है. इसके अलावा कर्मचारियों को हर साल ₹50,000 का बोनस भी मिलेगा. यह वेतन समझौता भाजपा महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और अखिल भारतीय कामगार कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के नेतृत्व में संपन्न हुआ. समझौते की अवधि 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2028 तक चार वर्ष की होगी.
NCPA के साथ तीसरा वेतन समझौता
रविंद्र चव्हाण ने बताया कि NCPA प्रबंधन और कामगार संगठन के बीच यह तीसरा वेतनवृद्धि समझौता है. उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कामगार कर्मचारी संघ ने अपनी संगठनात्मक ताकत के माध्यम से कर्मचारियों के वेतन और हितों के लिए लगातार प्रयास किए हैं और यह समझौता उन्हीं प्रयासों की महत्वपूर्ण सफलता है.
मुंबई लेबर यूनियन के सदस्यों के संगठन में शामिल होने का दावा
संगठन के मुताबिक, इससे पहले NCPA में मुंबई लेबर यूनियन बहुसंख्यक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियन थी. अखिल भारतीय कामगार कर्मचारी संघ का दावा है कि संगठनात्मक स्तर पर प्रभावी काम करते हुए मुंबई लेबर यूनियन के पूरे सदस्य वर्ग को अखिल भारतीय कामगार कर्मचारी संघ के साथ जोड़ा गया. संगठन के अनुसार, इसके बाद औद्योगिक न्यायालय में चली कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अखिल भारतीय कामगार कर्मचारी संघ NCPA में सबसे बड़ी और एकमात्र प्रमाणित कामगार यूनियन के रूप में सामने आई है. संघ का कहना है कि इस संगठनात्मक सफलता से NCPA के कर्मचारियों के अधिकारों और मांगों को अधिक प्रभावी ढंग से उठाने की ताकत मिली है.
हस्ताक्षर समारोह में NCPA और यूनियन के पदाधिकारी मौजूद
वेतन समझौते के हस्ताक्षर समारोह में NCPA की ओर से अध्यक्ष श्री संटूक, निदेशक श्री फ्रेडी तलाठी, तकनीकी निदेशक श्री काळे और मानव संसाधन विभाग के महाप्रबंधक श्री व्हिन्सेंट डिसूजा उपस्थित रहे. वहीं अखिल भारतीय कामगार कर्मचारी संघ की ओर से महासचिव श्री साई साटे, उपाध्यक्ष श्री प्रशांत वर्तक सहित संगठन के प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे.
‘एकजुटता और संगठनात्मक ताकत की जीत’
रविंद्र चव्हाण ने कहा कि कामगारों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करने वाले अखिल भारतीय कामगार कर्मचारी संघ के प्रयासों को मिली यह सफलता कर्मचारियों की एकजुटता, संगठनात्मक ताकत और न्यायसंगत मांगों के लिए किए गए संघर्ष की जीत है. उन्होंने कहा कि संघ के नेतृत्व में NCPA कर्मचारियों को मिली यह वेतनवृद्धि भविष्य में बेहतर सेवा-सुविधाओं और कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
Continue reading on the app
भारत और जापान के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर क्रिकेट के मैदान पर एक ऐतिहासिक मुकाबला देखने को मिलेगा। बीसीसीआई ने घोषणा की है कि दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें पहली बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में आमने-सामने उतरेंगी। यह एकमात्र बीस ओवर का अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 22 सितंबर को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में खेला जाएगा।
बता दें कि यह मुकाबला केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण और कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के समारोह का हिस्सा है। दोनों देशों के बीच क्रिकेट का यह पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होने के कारण इसे खास माना जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह आयोजन खेल के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाने की व्यापक पहल से जुड़ा है। भारत द्वारा वर्ष 2036 के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पहल को खेल सहयोग के नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
यह पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान बने व्यापक सहयोग के विचार से आगे बढ़ी है। इसके तहत भारत और जापान खेल के क्षेत्र में आपसी संपर्क, खिलाड़ियों के आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों के बीच खेल आधारित इस कार्यक्रम को “खेल 75” पहल की शुरुआती कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने इस फैसले को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उनके अनुसार, भारतीय और जापानी पुरुष टीमों का जापान में विशेष मुकाबले के लिए एक साथ आना ऐतिहासिक क्षण है। इससे भारतीय टीम को एक नए क्रिकेट क्षेत्र में खेलने का मौका मिलेगा और जापान के साथ-साथ पूर्वी एशिया के अन्य हिस्सों में भी क्रिकेट को नए दर्शकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
देवजीत सैकिया ने कहा कि भारत और जापान के बीच मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर क्रिकेट का जुड़ना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इस मुकाबले को संभव बनाने में जापान क्रिकेट संघ के प्रयासों की भी सराहना की है।
गौरतलब है कि बीसीसीआई लंबे समय से क्रिकेट के विस्तार को पारंपरिक क्रिकेट देशों तक सीमित न रखने की बात करता रहा है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट संगठनों में शामिल होने के नाते भारतीय बोर्ड का मानना है कि खेल को नए देशों और नए दर्शकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसकी है। बोर्ड ने संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में जापान क्रिकेट संघ के साथ मिलकर वहां क्रिकेट को मजबूत करने के लिए काम करेगा।
जापान क्रिकेट संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नाओकी मियाजी ने भी भारतीय टीम के आगमन को अपने देश के क्रिकेट इतिहास का बड़ा अवसर बताया है। उनके अनुसार, मौजूदा विश्व विजेता भारतीय टीम का जापान आना जापानी क्रिकेट के लिए यादगार क्षण होगा। उन्होंने कहा कि यह मुकाबला स्थानीय लोगों को क्रिकेट को करीब से समझने और इस खेल से जुड़ने का अवसर देगा।
जापान में क्रिकेट अभी उतना लोकप्रिय नहीं है जितना बेसबॉल, फुटबॉल या अन्य खेल हैं, लेकिन वहां इस खेल को विकसित करने की कोशिश लगातार की जा रही है। भारतीय टीम की मौजूदगी से जापान में क्रिकेट को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग और क्रिकेट फैंस भी इस मुकाबले को देखने पहुंच सकते हैं।
कुल मिलाकर 22 सितंबर का यह मुकाबला केवल जीत और हार तक सीमित नहीं रहेगा। यह भारत और जापान के बीच 75 वर्षों की साझेदारी, दोस्ती और आपसी सहयोग का प्रतीक भी बनेगा। साथ ही यह क्रिकेट को नए देशों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है और दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही हैं।
Continue reading on the app