Responsive Scrollable Menu

सेल की बिक्री अगस्त में 13 प्रतिशत बढ़ी, उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहा

नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। सरकारी कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने शुक्रवार को कहा कि उसकी बिक्री अगस्त में सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़कर 1.87 मिलियन टन हो गई है। इस दौरान होट मेटल, क्रूड स्टील और बिकने योग्य स्टील का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहा है।

सरकारी कंपनी ने कहा कि बीते महीने कच्ची स्टील का उत्पादन सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़कर 1.68 मिलियन टन हो गया है, जो कि बीते वर्ष 1.55 मिलियन टन था। वहीं, होट मेटल का उत्पादन सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़कर 1.78 मिलियन टन हो गया है, जो कि पहले 1.63 मिलियन टन था।

बिक्री योग्य स्टील का उत्पादन सालाना आधार पर एक प्रतिशत बढ़कर 1.69 मिलियन टन हो गया है, जो कि पहले 1.66 मिलियन टन था।

सेल ने बताया कि अगस्त में उसकी कुल बिक्री 1.871 मिलियन टन रही है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 1.654 मिलियन टन थी, जो कि बिक्री में सालाना आधार पर 13.11 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

सेल चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ए.के. पांडा ने कहा, अगस्त और अप्रैल-अगस्त की अवधि में सेल का प्रदर्शन कंपनी की ऑपरेशनल क्षमता, कमर्शियल डिलीवरी और वित्तीय समझदारी के बीच बढ़ते तालमेल को दिखाता है।

पांडा ने कहा कि कंपनी के रिकॉर्ड प्रोडक्शन, बिक्री की रफ्तार और फाइनेंशियल मैनेजमेंट ने इसके आधार को मजबूत किया है। साथ ही, जैसे-जैसे विस्तार प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहे हैं और मांग का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है, सेल विकास की गति बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

कंपनी के अनुसार, इस महीने कैश कलेक्शन में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

सेल ने बताया कि उसने अगस्त में कई वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट कैटेगरी में अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की, जिनमें कोल्ड रोल्ड, गैल्वेनाइज्ड और अलॉय स्टील शामिल हैं।

अगस्त में भारतीय रेलवे को आपूर्ति सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 1,23,000 टन हो गई।

कंपनी ने बताया कि लॉन्ग रेल की सप्लाई 11 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 112,000 टन हो गई।

वहीं, कंपनी ने 31 मार्च के स्तर से अपना कर्ज भी 8.7 अरब रुपए कम किया।

अप्रैल-अगस्त के दौरान, सेल की कुल बिक्री सालाना आधार पर 5.6 प्रतिशत बढ़कर 7.71 मिलियन टन हो गई।

कंपनी ने कहा कि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, मजबूत क्षेत्रीय पहुंच और घरेलू बाजार में मजबूत मांग की वजह से पांच महीने की इस अवधि में फिनिश्ड और प्रोसेस्ड स्टील की बिक्री अच्छी रही।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

Goa Elections 2027: उत्तर गोवा जिले की 19 सीटों पर बिछी सियासी बिसात...

Goa Elections 2027: गोवा की राजनीति का गढ़ और प्रशासनिक केंद्र माना जाने वाला उत्तर गोवा (North Goa) जिला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और रणनीतिक महत्व रखने वाला क्षेत्र है. 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर यहां भी सियासी बिसात बिछने लगी है और चुनावी हलचल तेज हो गई है. अपने खूबसूरत समुद्री तटों, ऐतिहासिक अगुआड़ा किले, प्रतिष्ठित चर्चों और जीवंत नाइटलाइफ के लिए दुनिया भर में मशहूर उत्तर गोवा की राजनीति में तटीय (Coastal) टूरिज्म बेल्ट के मतदाताओं, पारंपरिक मछुआरा समुदाय, खदान-श्रमिकों और ग्रामीण कैथोलिक व हिंदू वोटरों के साथ-साथ पर्यटन-आधारित आजीविका से जुड़े मुद्दों की भूमिका बेहद अहम रहती है.

राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिले की सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच पारंपरिक और सीधा मुकाबला रहा है, जबकि महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (MGP), आम आदमी पार्टी (AAP), रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) और कई प्रभावशाली निर्दलीय उम्मीदवार समय-समय पर समीकरण बिगाड़ते रहे हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की सत्ता के साथ जिले की अधिकांश सीटों पर अपना दबदबा बनाकर मजबूत बढ़त बनाई थी, वहीं कांग्रेस और क्षेत्रीय दल अपनी खोई जमीन वापस पाने की पुरजोर कोशिश में हैं. ऐसे में 2027 में भाजपा के सामने अपने इस प्रदर्शन को दोहराने और विपक्ष के लिए इस तटीय सियासी किले को भेदने की बड़ी परीक्षा होगी.

‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात उत्तर गोवा की…

उत्तर गोवा जिला, जिसकी पहचान सिर्फ कलंगूट, बागा या अंजुना के रेतीले तटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक और ऐतिहासिक इतिहास भी बेहद समृद्ध रहा है. यह वही उत्तर गोवा है, जिसकी राजधानी पणजी (Panaji) लंबे समय तक औपनिवेशिक पुर्तगाली शासन का प्रशासनिक केंद्र रही. 1961 में ऑपरेशन विजय के जरिए पुर्तगाली शासन से आजादी के आंदोलन से लेकर गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने तक, उत्तर गोवा की जनता ने हर मोड़ पर अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है.

उत्तर गोवा जिला आज अपने विश्व प्रसिद्ध कैसिनो, पुराने गोवा के ऐतिहासिक चर्च (Old Goa Basilica), जीवंत स्थानीय बाजारों और मंडोवी नदी के मनोरम दृश्यों के रूप में दुनियाभर में मशहूर है. लेकिन इन सब के बीच, पणजी और म्हापसा के शहरी व्यावसायिक केंद्रों से लेकर डिचोली, साकेलिम और सत्तरी के ग्रामीण व खनन क्षेत्रों तक यहां की सियासत का अपना एक अलग मिज़ाज है. आखिर उत्तर गोवा जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किस सीट पर किस पार्टी का दबदबा रहा है? कौन-से चेहरे (जैसे पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत तक) यहां बाजी मारते आए हैं और 2027 में किसका सिक्का चल सकता है? आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं…

उत्तर गोवा जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी कुल पुरुष महिला
जनसंख्या 8,18,008 4,20,568 3,97,440
साक्षरता दर 89.57% 93.40% 85.60%

उत्तर गोवा जिले की धार्मिक आबादी

धर्म जनसंख्या प्रतिशत (%)
हिंदू 6,22,213 76.06%
ईसाई 1,34,169 16.40%
मुस्लिम 57,941 7.08%
अन्य 3,767 (लगभग) 0.46%

2022 विधानसभा चुनाव परिणाम के अनुसार, उत्तर गोवा जिले की सभी विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम

निर्वाचन क्षेत्र (Constituency)

विजेता प्रत्याशी (पार्टी)

विजेता को वोट

उपविजेता प्रत्याशी (पार्टी)

उपविजेता को वोट

1. मंद्रेम 

जीत आरोलकर (MGP)

10,387

दयानंद सोपते (BJP)

9,672

2. पेर्नेम 

प्रवीण प्रभाकर आरलेकर (BJP)

13,063

राजन बाबू सो कोरगांवकर (MGP)

9,645

3. डिचोली

डॉ. चंद्रकांत शेट्ये (IND/निर्दलीय)

9,608

नरेश राजाराम सावल (MGP)

9,290

4. थिविम 

नीलकंठ रामनाथ हलर्नकर (BJP)

9,414

कविता कंडोलकर (AITC)

7,363

5. मपुसा  

जोशुआ पीटर डी सूजा (BJP)

10,195

सुधीर रामा कंडोलकर (INC)

8,548

6. सिओलिम  

डेलिला माइकल लोबो (INC)

9,699

दयानंद रायु मांद्रेकर (BJP)

7,972

7. सालिगांव  

केदार जयप्रकाश नायक (INC)

10,045

जयेश सालगांवकर (BJP)

8,146

8. कलंगुट  

माइकल विंसेंट लोबो (INC)

9,285

जोसेफ रॉबर्ट सिक्वेरा (BJP)

4,306

9. पोरवोरिम 

रोहन खौंटे (BJP)

11,714

संदीप वाज़कर (AITC)

3,764

10. एल्डोना

कार्लोस अल्वारेस फेरेरा (INC)

9,320

ग्लेन जॉन विजय ए सूजा टिकलो (BJP)

7,497

11. पणजी

अतानासियो मोन्सरेट (BJP)

6,787

उत्पल मनोहर पर्रिकर (IND/निर्दलीय)

6,071

12. तालेगांव 

जेनिफर मोन्सरेट (BJP)

10,066

टोनी रोड्रिग्स (INC)

7,908

13. सांता क्रूज

रोडोल्फो लुईस फर्नांडीस (INC)

8,841

एंटोनियो कैतैनो फर्नांडीस (BJP)

6,377

14. सेंट आंद्रे 

वीरेश मुकेश बोरकर (RGP)

5,395

फ्रांसिस्को सिलवीरा (BJP)

5,319

15. कुंबरजुआ

राजेश फालदेसाई (INC)

9,326

जनिता मडकैकर (BJP)

6,524

16. माएम / मयेम 

प्रेमेंद्र विष्णु शेट (BJP)

7,874

संतोष कुमार सावंत (GFP)

4,963

17. संगेम / सांकेलिम

डॉ. प्रमोद सावंत (BJP)

12,250

धर्मेश सगलानी (INC)

11,584

18. पोरिएम 

देविया विश्वजीत राणे (BJP)

17,816

रंजीत राणे (INC)

3,873

19. वालपोई 

विश्वजीत प्रतापसिंह राणे (BJP)

19,233

मनीषा उस्गाँवकर ( क्रांतिकारी गोवा पार्टी)

11,148

सभी विधानसभा सीटों के बारे में विस्तार से जानें...

1. मंद्रेम: यहाँ महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (MGP) के जीत आरोलकर ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने भाजपा के दयानंद सोपते को कड़े मुकाबले में हराया था.

2. पेर्नेम: इस अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित सीट पर भाजपा के प्रवीण प्रभाकर आरलेकर ने जीत हासिल की थी. उन्होंने MGP के राजन बाबू सो कोरगांवकर को पराजित किया था.

3. डिचोली / बिचोलिम: यहाँ से निर्दलीय (IND) उम्मीदवार डॉ. चंद्रकांत शेट्ये ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत पाई थी. उन्होंने MGP के नरेश राजाराम सावल को कुछ ही वोटों से हराया था.

4. थिविम: भाजपा के नीलकंठ रामनाथ हलर्नकर ने इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत रखी थी. उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) की कविता कंडोलकर को मात दी थी.

5. मपुसा: इस प्रमुख सीट पर भाजपा के जोशुआ पीटर डी सूजा ने विजय हासिल की थी. उन्होंने कांग्रेस (INC) के सुधीर रामा कंडोलकर को सीधे मुकाबले में हराया था.

6. सिओलिम: यहाँ कांग्रेस की डेलिला माइकल लोबो ने भाजपा के कद्दावर नेता दयानंद रायु मांद्रेकर को शिकस्त दी थी. यह चुनाव काफी चर्चा में रहा था.

7. सालिगांव: कांग्रेस के केदार जयप्रकाश नायक ने यहाँ से जीत का परचम लहराया था. उन्होंने भाजपा के जयेश सालगांवकर को सम्मानजनक अंतर से पराजित किया था.

8. कलंगुट: कांग्रेस के कद्दावर नेता माइकल विंसेंट लोबो ने यहाँ एकतरफा और बड़ी जीत दर्ज की थी. उन्होंने भाजपा के जोसेफ रॉबर्ट सिक्वेरा को भारी अंतर से हराया था.

9. पोरवोरिम: भाजपा के रोहन खौंटे ने इस सीट पर बड़े अंतर से एकतरफा जीत हासिल की थी. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (AITC) के संदीप वाज़कर को करारी शिकस्त दी थी.

10. एल्डोना: कांग्रेस के कार्लोस अल्वारेस फेरेरा ने यहाँ से जीत हासिल कर अपनी पार्टी को मजबूती दी थी. उन्होंने भाजपा के ग्लेन जॉन विजय ए सूजा टिकलो को हराया था.

11. पणजी: राजधानी की इस हाई-प्रोफाइल सीट पर भाजपा के अतानासियो मोन्सरेट ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर के बेटे और निर्दलीय उम्मीदवार उत्पल पर्रिकर को कड़े मुकाबले में हराया था.

12. तालेगांव: भाजपा की जेनिफर मोन्सरेट ने यहाँ अपनी पारिवारिक राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी थी. उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी टोनी रोड्रिग्स को शिकस्त दी थी.

13. सांता क्रूज: यहाँ से कांग्रेस के रोडोल्फो लुईस फर्नांडीस ने शानदार जीत हासिल की थी. उन्होंने भाजपा के प्रतिद्वंद्वी एंटोनियो कैतैनो फर्नांडीस को पीछे छोड़ दिया था.

14. सेंट आंद्रे: क्रांतिकारी गोवा पार्टी (RGP) के वीरेश मुकेश बोरकर ने यहाँ मात्र 76 वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. उन्होंने भाजपा के मौजूदा विधायक फ्रांसिस्को सिलवीरा को हराया था.

15. कुंबरजुआ: कांग्रेस के राजेश फालदेसाई ने इस सीट पर अपना परचम लहराया था. उन्होंने भाजपा की महिला प्रत्याशी जनिता मडकैकर को चुनाव में पराजित किया था.

16. माएम / मयेम: भाजपा के प्रेमेंद्र विष्णु शेट ने इस सीट पर अपनी पार्टी की जीत सुनिश्चित की थी. उन्होंने गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के संतोष कुमार सावंत को हराया था.

17. संगेम / सांकेलिम: तत्कालीन मुख्यमंत्री और भाजपा नेता डॉ. प्रमोद सावंत की यह गृह सीट थी. उन्होंने बेहद कांटे की टक्कर में कांग्रेस के धर्मेश सगलानी को कुछ सौ वोटों से हराया था.

18. पोरिएम: भाजपा की देविया विश्वजीत राणे ने यहाँ ऐतिहासिक और सबसे बड़े अंतरों में से एक से जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस के रंजीत राणे को पूरी तरह एकतरफा मुकाबले में हराया था.

19. वालपोई: भाजपा के दिग्गज नेता विश्वजीत प्रतापसिंह राणे ने इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ दिखाई थी. उन्होंने क्रांतिकारी गोवा पार्टी की मनीषा उस्गाँवकर को बड़े अंतर से पराजित किया था.

 

 

Continue reading on the app

  Sports

Mike Hesson का बड़ा खुलासा: Rizwan और Imam-ul-Haq को हटाने के फैसले में मेरा कोई हाथ नहीं, PCB पर फोड़ा ठीकरा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो हार के बाद मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में टीम में किए गए बड़े बदलावों को लेकर अंतरिम लाल गेंद कोच माइक हेसन ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। हेसन ने कहा कि मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा और इमाम-उल-हक को टीम से बाहर करने के फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि जब उन्हें जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया, तब तक ये तीनों खिलाड़ी टीम छोड़कर स्वदेश लौट चुके थे।

बता दें कि इंग्लैंड ने सीरीज के पहले मुकाबले में हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी इंग्लैंड ने 194 रन से जीत दर्ज की। इन लगातार दो हार के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा और अंतिम टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन में खेला जाना है।

इन हार के बाद पाकिस्तान बोर्ड ने टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के स्तर पर बड़े बदलाव किए। मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद आवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से हटा दिया गया। इसके अलावा मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

माइक हेसन को इसके बाद अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की लाल गेंद वाली टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई। बर्मिंघम में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने रिजवान, आगा और इमाम को हटाए जाने के फैसले से खुद को अलग करते हुए कहा कि बोर्ड ने जब उनसे अंतिम टेस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बारे में पूछा, तब तक तीनों खिलाड़ी टीम से बाहर किए जा चुके थे और घर लौट रहे थे।

हालांकि हेसन ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी खिलाड़ियों को हटाने और कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका थी। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य अंतिम टेस्ट के लिए टीम में बेहतर संतुलन तैयार करना था।

मौजूद जानकारी के अनुसार, हेसन पाकिस्तान की सीमित ओवरों वाली टीम के साथ काम करने के बाद जापान से लौटे थे। जापान में एशियाई खेलों का आयोजन चल रहा है। लाहौर में पाकिस्तान का सीमित ओवरों का प्रशिक्षण शिविर भी हुआ था। इसी दौरान क्रिकेट बोर्ड ने उनसे टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा।

हेसन ने कहा कि अब उनका मुख्य जोर ऐसी गेंदबाजी इकाई तैयार करने पर है जिसमें अलग-अलग तरह के गेंदबाज मौजूद हों। वह टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ियों को भी रखना चाहते हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में योगदान दे सकें। उनके अनुसार, अंतिम टेस्ट में टीम का संतुलन सुधारना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

नई पाकिस्तान टीम में सैम अयूब और अब्दुल्ला फजल जैसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनके अलावा अराफात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बैग, मोहम्मद इमरान और रजाउल्लाह जैसे ऐसे खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं जिन्हें अभी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करना बाकी है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले ही श्रृंखला गंवा चुका है, इसलिए एजबेस्टन टेस्ट उसके लिए परिणाम से ज्यादा अपनी कमजोरियों को सुधारने का अवसर होगा। लगातार हार के बाद टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को मौका देकर भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करना चाहता है। ऐसे में अंतिम मुकाबले में नए चेहरों के प्रदर्शन और माइक हेसन की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Fri, 04 Sep 2026 21:59:00 +0530

  Videos
See all

Nepal Flood 2026: नेपाल बाढ़ के लिए मुआवजे की मांग पर भारत ने दिया ये जवाब| India Nepal | Hindi News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-04T18:13:00+00:00

What could happen to the Falkland Islands? | BBC News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-04T18:15:28+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers