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Krishna Janmashtami 2026: आज देशभर में धूमधाम से मनाई जा रही जन्माष्टमी, जानें उनके जन्म की कहानी और अचूक उपाय

Krishna Janmashtami 2026: आज यानी 4 सितंबर 2026 शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाई जा रही है. हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर जन्माष्टमी मनाई जाती है. भक्त इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का पूजन किया जाता है. रात के समय उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान कृष्ण सृष्टि के कर्ता-धर्ता विष्णु के आठवें अवतार हैं. उनका जन्म अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. आज उनका 5253 वां जन्मोत्सव मनाया जाता है. इसलिए, रोहिणी नक्षत्र में ही उनकी पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है.

आज भगवान का 5253 वां जन्मदिन

द्रिक पंचांग के अनुसार, आज भगवान श्रीकृष्ण का 5253 वां जन्मदिन मनाया जा रहा है. शोधकर्ताओं और खगोलीय घटनाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म लगभग 3228 ईसा पूर्व में हुआ था. यानी कि आज से करीब 5000 साल पहले. जिस समय उनका जन्म हुआ था चंद्रमा वृषभ राशि में थे और वार बुधवार का था.

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भगवान कृष्ण का जन्म कहां हुआ था?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था. उनका जन्म मथुरा में कंस महल में कारागार में हुआ था. दरअसल, कंस जो श्रीकृष्ण के मामा थे, उन्होंने अपनी बहन और उनके पति को बंदी बनाकर जेल में रखा था. ऐसी आकाशवाणी हुई थी कि जब देवकी और वासुदेव की आंठवी संतान होगी तो वह कंस की मृत्यु का कारण बनेगी. इसलिए, कंस ने विवाह के तुरंत बाद ही देवकी और वासुदेव को जेल में डाल दिया था. वहां उनकी सात संतानों की हत्या अपने हाथों से कंस ने खुद की और आठवीं संतान का जन्म हुआ. कृष्ण का जन्म होने के बाद पृथ्वी पर मानो समय रुक गया हो, भारी वर्षा हुई जिससे पूरा गोकुल डूब गया था. इस भयावह स्थिति में वासुदेव ने अपने पुत्र को वृंदावन में अपने मित्र नंद को सौंपा. इसलिए, जन्म लेते ही कृष्ण जी यशोदा मैया की गोद में पहुंच गए. 

उनका पूरा बचपन वृंदावन में बीता और जब वे 11 वर्ष के हुए तो कंस का वध करने मथुरा पहुंचे. वहां कंस ने धनुश यज्ञ का आयोजन किया था. इस समय कान्हा ने वृंदावन छोड़ दिया. मथुरा के रंगमंच पर कंस के वध से पहले मल्ल युद्ध में श्रीकृष्ण ने शक्तिशाली पहलवानों चाणूर और मुष्टिक का भी अंत किया था. इसके बाद कंस को उसके सिंहासन से खींचकर उसका वध किया और मथुरा को उसके अत्याचारों से मुक्त करवाया. इसके बाद वे उज्जैन में गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने चले गए थे. वहां उन्होंने 64 दिनों में ही 64 कलाओं का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लिया था. आश्रम से मथुरा लौटने के बाद भगवान कृष्ण का जीवन पूरी तरह से राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल और लोक-कल्याण के कार्यों में लग गया था. इसके बाद समुद्र के बीच द्वारका नगरी का निर्माण हुआ और वहां यदुवंशी प्रजा को सुरक्षित स्थानांतरित कर दिया. द्वारका बसने के बाद रुक्मिणी हरण हुआ और उनका विवाह संपन्न हुआ.

आज पूजा करने का शुभ मुहूर्त

पहला मुहूर्त- सुबह 5:46 से 10:26 तक

दूसरा मुहूर्त- दोपहर 12:05 से लेकर 1 बजकर 33 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:36 से लेकर दोपहर 12:24 तक

चौथा मुहूर्त- शाम 4:41 से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक

पांचवां मुहूर्त- रात 9:07 से लेकर 10 बजकर 33 मिनट तक

छठा मुहूर्त- रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर सुबह 4:19 बजे 

इसके अलावा, आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:26 से लेकर 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. आज राहुकाल का समय सुबह 10:39 से लेकर दोपहर 12:13 मिनट तक रहेगा.

आज करें ये जरूरी उपाय

  • तुलसी का भोग- आज कान्हा को भोग में तुलसी पत्र जरूर अर्पित करें. कहा जाता है कि इन पत्रों के बिना वह भोग स्वीकार नहीं करते हैं.
  • तुलसी की परिक्रमा- जन्माष्टमी की शाम को तुलसी के पौधे के सामने देसी घी का दिया जलाना चाहिए और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए. इसके बाद आप पौधे की 11 या 21 बार परिक्रमा करें.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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ISRO को बड़ी सफलता! अब धरती की निगरानी करेगा भारत, आधी रात में लॉन्च हुआ पहला EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट

EOS 05 Imaging Satellite: भारत के लिए गर्व का विषय है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपना पहला विशेष इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च कर दिया है. इसमें EOS 05 सैटेलाइट लगाई लगी है. GSLV-F17 रॉकेट की मदद से आधी रात को मिशन लॉन्च किया गया. 
 
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने करीब 8 महीने के लंबे अंतराल के बाद शुक्रवार को एक बार फिर बड़ी लॉन्चिंग की. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17/EOS-05 मिशन को सफलतापूर्वक रवाना किया गया. 51.7 मीटर लंबे GSLV-F17 रॉकेट ने शुक्रवार तड़के 2 बजकर 55 मिनट पर निर्धारित समय पर उड़ान भरी. रॉकेट ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड (SLP) से आसमान की ओर रफ्तार पकड़ी. 

इस मिशन के लिए 27 घंटे की उल्टी गिनती बुधवार रात 11 बजकर 30 मिनट पर शुरू हुई थी. यह लॉन्चिंग चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा से की गई. इस मिशन में GSLV-F17 के जरिए EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित किया जा रहा है। यह सैटेलाइट धरती की निगरानी और इमेजिंग से जुड़े कामों में उपयोगी होगा. 

8 महीने बाद लॉन्च हुआ कोई मिशन

ISRO की इससे पहले आखिरी लॉन्चिंग जनवरी में PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के दौरान हुई थी. इसके बाद करीब 8 महीने तक कोई लॉन्चिंग नहीं हुई. ऐसे में GSLV-F17 की उड़ान ISRO के लिए एक अहम मिशन मानी जा रही है. 

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क्या है EOS-05 सैटेलाइट?

EOS-05 एक आधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, यानी यह अंतरिक्ष से धरती की निगरानी और तस्वीरें लेने का काम करता है. यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है.

लॉन्च व्हीकल: GSLV-F17
सैटेलाइट का प्रकार: अर्थ ऑब्जर्वेशन
मुख्य उपयोग: धरती की निगरानी और इमेजिंग

क्या है GSLV-F17 रॉकेट?

GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 19वीं उड़ान है. इसमें 4 मीटर व्यास वाला ओजाइव कम्पोजिट पेलोड फेयरिंग लगाया गया है. GSLV-F17 ने EOS-05 सैटेलाइट को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Sub-GTO) में स्थापित किया है. इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर, SHAR के दूसरे लॉन्च पैड (SLP) से लॉन्च करने की योजना थी.

ISRO प्रमुख ने बताया रणनीतिक महत्व

ISRO प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने GSLV-F17/EOS-05 मिशन को बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि GSLV-F17 ने EOS-05 सैटेलाइट को उसकी तय कक्षा में सफलतापूर्वक और सटीक तरीके से स्थापित कर दिया है. उन्होंने बताया कि इस मिशन के जरिए GSLV से अब तक के सबसे भारी सैटेलाइट को कक्षा में भेजा गया है. सैटेलाइट के काम शुरू करने के बाद यह जियो ऑर्बिट से भारत का पहला खास इमेजिंग सैटेलाइट होगा. ISRO प्रमुख के मुताबिक, EOS-05 से मिलने वाला महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा देश के लिए काफी उपयोगी होगा। इससे भारत की अंतरिक्ष आधारित इमेजिंग और निगरानी क्षमता को मजबूती मिलेगी.

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  Sports

England Tour से पहले मुश्किल में श्रीलंका, Kusal Mendis की जगह Charit Asalanka को मिली कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी

श्रीलंका क्रिकेट टीम को इंग्लैंड दौरे से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के कप्तान कुसल मेंडिस मांसपेशियों की चोट से समय पर उबर नहीं सके हैं और अब वह इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज में नहीं खेल पाएंगे। उनकी गैरमौजूदगी में चरित असलंका टीम की कप्तानी संभालेंगे।

बता दें कि कुसल मेंडिस को जुलाई में लंका प्रीमियर लीग के दौरान कोलंबो कैप्स की ओर से खेलते हुए चोट लगी थी। प्रतियोगिता में केवल दो मुकाबले खेलने के बाद उनकी जांघ की पिछली मांसपेशी में खिंचाव की समस्या सामने आई थी। इस चोट के कारण वह भारत के खिलाफ घरेलू मैदान पर खेली गई दो टेस्ट मैचों की सीरीज से भी बाहर हो गए थे। अब तक पूरी तरह फिट नहीं होने के चलते इंग्लैंड के खिलाफ सबसे छोटे प्रारूप की श्रृंखला से भी उन्हें बाहर बैठना पड़ेगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, चरित असलंका को पहले इस दौरे के लिए उपकप्तान बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें सीधे टीम की कमान सौंपी गई है। यह सीरीज उनके लिए छोटे प्रारूप में वापसी का भी मौका होगी। असलंका को जून में वेस्टइंडीज दौरे के लिए श्रीलंका की टी20 टीम में जगह नहीं मिली थी। ऐसे में कप्तानी की जिम्मेदारी के साथ उनकी वापसी भी टीम के लिए अहम मानी जा रही है।

कुसल मेंडिस की जगह बल्लेबाज पवन रथनायके को टीम में शामिल किया गया है। वहीं बाएं हाथ के तेज गेंदबाज बिनुरा फर्नांडो की जगह दिलशान मदुशंका को भी टीम में बुलाया गया है। बिनुरा पीठ की चोट से परेशान हैं और इसी वजह से वह टी20 श्रृंखला में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

श्रीलंका और इंग्लैंड के बीच टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 15 सितंबर को साउथम्पटन के रोज बाउल मैदान में खेला जाएगा। दोनों टीमों के लिए यह श्रृंखला आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। श्रीलंका को खास तौर पर अपने प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता और फिटनेस पर नजर रखनी होगी।

श्रीलंका की संशोधित टीम में कप्तान चरित असलंका के अलावा पथुम निसांका, कमिल मिशारा, लाहिरु उदारा, कामिंदु मेंडिस, जनिथ लियानगे, दासुन शनाका, दुनिथ वेल्लालागे, वानिंदु हसरंगा, महीश तीक्षणा, थारिंदु रथनायके, दुश्मंथा चमीरा, ईशान मलिंगा, नुवान तुषारा, पवन रथनायके और दिलशान मदुशंका शामिल हैं।

गौरतलब है कि कुसल मेंडिस श्रीलंका के अहम बल्लेबाजों में गिने जाते हैं और टीम की कप्तानी भी संभाल रहे थे। ऐसे में उनका बाहर होना श्रीलंका के लिए बड़ा नुकसान है। दूसरी ओर चरित असलंका के सामने युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण वाली टीम को संभालने की चुनौती होगी। इंग्लैंड की मजबूत टीम के खिलाफ उनकी कप्तानी की असली परीक्षा 15 सितंबर से शुरू होने वाली है।
Fri, 04 Sep 2026 20:30:00 +0530

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