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हम पर नहीं थोप सकते 'वंदे मातरम', अब भाजपा शासित राज्य में ही राष्ट्रीय गीत का विरोध; भारी दुविधा में सरकार

छात्रों के बड़े आंदोलन के बीच नागालैंड के संसदीय कार्य मंत्री और विशेष समिति के अध्यक्ष के. जी. केन्ये (KG Kenye) ने NSF अध्यक्ष को एक आधिकारिक पत्र लिखकर सरकार की दुविधा और रुख स्पष्ट किया है।

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AISA ने छात्र आंदोलनों को एकजुट करने के लिए बनाया National Platform

नयी दिल्ली, तीन सितंबर ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने बुधवार को देशभर के छात्र आंदोलनों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर राष्ट्रीय मंच बनाने की पहल की। संगठन का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक, शैक्षिक संस्थानों में हिंसा, जातिगत भेदभाव और छात्रों की आत्महत्या जैसे मुद्दे भारत के युवाओं के सामने मौजूद एक साझा संकट का हिस्सा हैं। दिल्ली में ‘कॉन्स्टिट्यूशन क्लब’ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन और जन सम्मेलन के दौरान, आइसा के ‘जेन जी राइजिंग’ अभियान के पहले चरण के समापन पर झारखंड, गुजरात, तेलंगाना, केरल, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों के छात्र आंदोलनों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।

छात्र संगठन ने इन अलग-अलग दिखने वाले आंदोलनों के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश की। आइसा ने कहा कि यह अभियान जंतर-मंतर पर हुए उन विरोध प्रदर्शनों से निकला है, जिनमें शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे की मांग की गई थी। संगठन ने कहा कि इस आंदोलन ने यह दिखाया कि छात्र अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर एकजुट हो सकते हैं और इसके बाद इसने विभिन्न परिसरों और राज्यों में होने वाले प्रदर्शनों को भी प्रेरित किया।

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा, ‘‘हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि छात्र आंदोलन एक-दूसरे से अलग-थलग नहीं हैं। ये सभी एक बड़े आंदोलन का हिस्सा हैं, जिसमें युवा अपने भविष्य से जुड़े सवाल उठा रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं।’’ सभा को संबोधित करने वालों में हबीबा भी शामिल थीं, जो झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन से जुड़ी थीं। अन्य छात्र आंदोलनों के प्रतिनिधियों ने भी शैक्षणिक परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति पर कथित पाबंदियों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बारे में अपने विचार रखे।

नालसार आंदोलन से जुड़े एक प्रतिनिधि ने हालिया विवाद का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में हुए घटनाक्रम के खिलाफ प्रदर्शन करने पर छात्रों को दबाव का सामना करना पड़ा। प्रतिनिधि ने कहा कि कानूनी हस्तक्षेप और जनता की प्रतिक्रिया के बाद निर्देशों को वापस लिया जाना इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि फैसले किस तरीके से लिए गए, इसे लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में एक छात्र की आत्महत्या के बाद हुए प्रदर्शनों का मुद्दा भी सम्मेलन में उठाया गया।

प्रतिनिधियों ने संस्थागत स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, शैक्षणिक प्रक्रियाओं और मानसिक तनाव से जूझ रहे छात्रों के प्रति प्रशासनिक रवैये को लेकर चिंताएं जताईं।

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ना उगलते बन रहा ना निगलते...कैसे गले की फांस बने रोहित शर्मा, 2027 वर्ल्ड कप में ले जाना बीसीसीआई की सबसे बड़ी मजबूरी

Rohit Sharma 2027 World Cup Opinion: 2027 वनडे वर्ल्ड क में रोहित शर्मा का खेलना सिर्फ उनकी बेहतरीन फॉर्म का नतीजा नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट सेलेक्टर्स की बड़ी विफलता है. पिछले कुछ वर्षों में केएल राहुल, ईशान किशन, ऋतुराज गायकवाड़ और यशस्वी जायसवाल जैसे कई विकल्पों को आजमाया गया, लेकिन कोई भी रोहित जैसी निरंतरता और आक्रामक प्रभाव नहीं छोड़ सका. दक्षिण अफ्रीका की चुनौतीपूर्ण पिचों और कप्तानी के दबाव को देखते हुए, विकल्पहीन बीसीसीआई के लिए रोहित शर्मा पर दांव लगाना रणनीतिक मजबूरी बन चुका है. Fri, 4 Sep 2026 06:01:02 +0530

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