राजपरिवार की परंपराओं को संजोया, इतिहास में दिया योगदान, महाराव रघुवीर सिंह देवड़ा को मिला पद्मश्री
Maharaj Raghuveer Singh Devra: राजस्थान में अरावली की पहाड़ियों में बसे सिरोही का इतिहास देवड़ा चौहान राजवंश की के शौर्य और संस्कृति के लिए पहचाना जाता है. इसी राजवंश की आधुनिक पीढ़ी और वर्तमान मुखिया 83 वर्षीय महाराव रघुवीर सिंह देवड़ा का नाम उनके इतिहास में दिए गए योगदान के लिए पहचाना जाता है. वर्ष 2018 में उन्हें इस योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.
घर में कपूर जलाने की क्यों है परंपरा? जानें पूजा-पाठ और धार्मिक मान्यताओं में इसका महत्व
Kapoor jalane ka mahatva: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और आरती के दौरान कपूर का विशेष उपयोग किया जाता है। मंदिरों के साथ-साथ कई घरों में भी सुबह या शाम की पूजा के दौरान कपूर जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कपूर की आरती करना शुभ माना जाता है और इसे पूजा की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
कपूर जलने के बाद पूरी तरह समाप्त हो जाता है और राख नहीं छोड़ता। इसी कारण धार्मिक परंपराओं में इसे त्याग और समर्पण के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
पूजा और आरती में क्यों जलाया जाता है कपूर?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के अंत में कपूर से आरती करने की परंपरा है। माना जाता है कि भगवान के सामने कपूर जलाकर आरती करने से पूजा पूर्ण होती है।
कई घरों में देवी-देवताओं की आरती के बाद परिवार के सदस्य कपूर की आरती लेते हैं। यह परंपरा लंबे समय से हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रही है।
कपूर को सकारात्मकता से क्यों जोड़कर देखा जाता है?
लोकमान्यताओं में कपूर की सुगंध को सकारात्मक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से पूजा के अलावा कई लोग घर में शाम के समय भी कपूर जलाते हैं।
धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि पूजा स्थल पर कपूर जलाने से वातावरण पवित्र होता है। हालांकि, ये बातें मुख्य रूप से धार्मिक विश्वासों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
वास्तु परंपराओं में भी मिलता है कपूर का उल्लेख
वास्तु और लोक-परंपराओं में भी कपूर का उपयोग शुभता से जोड़कर देखा जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि घर में कपूर जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हालांकि, वास्तु से जुड़े नियम और मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं और विशेषज्ञों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
कपूर जलाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
पूजा के दौरान कपूर जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। कपूर को हमेशा सुरक्षित दीपक या आरती पात्र में ही जलाना चाहिए और जलते हुए कपूर को बच्चों या ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखना चाहिए।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कपूर की आरती श्रद्धा और साफ-सफाई के साथ की जाती है।
आज भी घरों में निभाई जाती है यह परंपरा
बदलती जीवनशैली के बावजूद पूजा-पाठ के दौरान कपूर जलाने की परंपरा आज भी देश के अनेक परिवारों में प्रचलित है। सुबह-शाम की आरती हो या कोई विशेष धार्मिक आयोजन, कपूर का उपयोग कई हिंदू घरों में श्रद्धा के साथ किया जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक विश्वासों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।
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