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'Battle of the Camel' का हवाला देकर CM VD Satheesan ने दी Kanthapuram को नसीहत, Muslim Leaders ने किया पलटवार

केरल के मुस्लिम धर्मगुरु कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर विवाद गुरुवार को और बढ़ गया, जब मुस्लिम विद्वानों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने के लिए मुख्यमंत्री वीडी सतीसन से मुलाक़ात की। जहाँ एक तरफ़ कांथापुरम के नेतृत्व वाले मुस्लिम गुट के नेताओं ने सतीसन से मुलाक़ात की, वहीं दूसरी तरफ़ एक अन्य प्रमुख मुस्लिम नेता ने कांथापुरम का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियाँ इस्लामी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप थीं। यह घटनाक्रम तब हुआ जब सतीसन ने भारत के ग्रैंड मुफ़्ती कांथापुरम की कड़ी आलोचना की। कांथापुरम ने कहा था कि महिलाओं को घरों में ही रहना चाहिए और सार्वजनिक जगहों पर नहीं आना चाहिए, साथ ही चेतावनी दी थी कि महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर लाने से "भारी तबाही" होगी।

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सतीसन ने इन बयानों को इस्लाम में महिलाओं के इतिहास और आधुनिक समाज व केरल के मूल्यों के खिलाफ़ बताते हुए खारिज कर दिया। हालाँकि, उनकी इन टिप्पणियों की वजह से अब मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व के कुछ वर्गों की ओर से उनकी आलोचना हो रही है। इस्लामिक इतिहास का ज़िक्र करते हुए, सथीसन ने पैगंबर मुहम्मद की पहली पत्नी खदीजा और उनकी एक और पत्नी आयशा का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं ने सार्वजनिक जीवन में अहम भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा पैगंबर की पहली पत्नी खदीजा एक बड़ी बिजनेसवुमन थीं। पैगंबर की एक और पत्नी आयशा ने 'बैटल ऑफ़ द कैमल' (ऊंट की लड़ाई) में हिस्सा लिया था। वह कमांडर-इन-चीफ़ थीं। 

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उन्होंने कहा हम 21वीं सदी में 19वीं सदी जैसी सोच ज़ाहिर करने का कड़ा विरोध करते हैं। हमारा प्रगतिशील नज़रिया यह है कि महिलाओं को सिर्फ़ घर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ज़िंदगी के हर पहलू में हिस्सा लेना चाहिए और मुख्यधारा का हिस्सा बनकर जीना चाहिए। इन बयानों के बाद, कांथपुरम के नेतृत्व वाले गुट के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार रात मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन पर इस्लामी इतिहास की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया, खासकर खदीजा और आयशा के संदर्भ में।

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नेताओं ने कहा कि बैठक पहले से तय थी, लेकिन बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री की टिप्पणियां एक अहम मुद्दा बन गईं। खबरों के अनुसार, बैठक के दौरान सतीसन अपनी पहले की बात पर कायम रहे। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय ने बातचीत में क्या हुआ, इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सतीसन की टिप्पणियों की मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व के कुछ वर्गों ने आलोचना की है। केरल के सबसे बड़े मुस्लिम संगठनों में से एक, समस्था केरल जेम-इय्यथुल उलेमा के अध्यक्ष जिफरी मुथुकोया थंगल ने मुख्यमंत्री पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि आस्था के मामलों पर बोलने के लिए धार्मिक विद्वानों को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। 

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जयशंकर बोले-भारत यूक्रेन जंग खत्म कराने में मदद को तैयार:कहा- जरूरत पड़ी तो मध्यस्थता करेंगे; डिजिटल सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा

केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद के लिए तैयार है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर मध्यस्थता करने की भी पेशकश की है। जयशंकर ने यह बात गुरुवार को कीव दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कही। वे यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ मौजूद थे। दोनो नेताओं के बीच ब्लैक सी में कमर्शियल शिपिंग पर हो रहे हमलों को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेक्टर में भारत-यूक्रेन सहयोग बढ़ाने पर भी बात हुई। जयशंकर के यूक्रेन दौरे की तस्वीरें… यूक्रेनी विदेश मंत्री बोले- रूसी हमलों के बीच जयशंकर का दौरा अहम यूक्रेन के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कीव पहुंचने पर स्वागत किया। उन्होंने इसे भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली खास द्विपक्षीय यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि रूस लगातार यूक्रेनी शहरों, बंदरगाहों और नागरिक जहाजों पर हमले कर रहा है। ऐसे हालात में जयशंकर का कीव दौरा अहम है। दोनों नेताओं ने ब्लैक सी में जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य करने और दुनिया की खाद्य सुरक्षा पर चर्चा की। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीति और बातचीत वाले रुख का स्वागत किया। दोनों देश अगली अंतर-सरकारी आयोग की बैठक कराने पर भी सहमत हुए। जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड दौरे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यूक्रेन के बाद वह पोलैंड के लिए रवाना होंगे। यहां वे पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यात्रा का मकसद दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत करना है। इस दौरान क्षेत्रीय हालात और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

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  Sports

Mike Hesson का बड़ा खुलासा: Rizwan और Imam-ul-Haq को हटाने के फैसले में मेरा कोई हाथ नहीं, PCB पर फोड़ा ठीकरा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो हार के बाद मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में टीम में किए गए बड़े बदलावों को लेकर अंतरिम लाल गेंद कोच माइक हेसन ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। हेसन ने कहा कि मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा और इमाम-उल-हक को टीम से बाहर करने के फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि जब उन्हें जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया, तब तक ये तीनों खिलाड़ी टीम छोड़कर स्वदेश लौट चुके थे।

बता दें कि इंग्लैंड ने सीरीज के पहले मुकाबले में हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी इंग्लैंड ने 194 रन से जीत दर्ज की। इन लगातार दो हार के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा और अंतिम टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन में खेला जाना है।

इन हार के बाद पाकिस्तान बोर्ड ने टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के स्तर पर बड़े बदलाव किए। मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद आवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से हटा दिया गया। इसके अलावा मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

माइक हेसन को इसके बाद अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की लाल गेंद वाली टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई। बर्मिंघम में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने रिजवान, आगा और इमाम को हटाए जाने के फैसले से खुद को अलग करते हुए कहा कि बोर्ड ने जब उनसे अंतिम टेस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बारे में पूछा, तब तक तीनों खिलाड़ी टीम से बाहर किए जा चुके थे और घर लौट रहे थे।

हालांकि हेसन ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी खिलाड़ियों को हटाने और कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका थी। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य अंतिम टेस्ट के लिए टीम में बेहतर संतुलन तैयार करना था।

मौजूद जानकारी के अनुसार, हेसन पाकिस्तान की सीमित ओवरों वाली टीम के साथ काम करने के बाद जापान से लौटे थे। जापान में एशियाई खेलों का आयोजन चल रहा है। लाहौर में पाकिस्तान का सीमित ओवरों का प्रशिक्षण शिविर भी हुआ था। इसी दौरान क्रिकेट बोर्ड ने उनसे टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा।

हेसन ने कहा कि अब उनका मुख्य जोर ऐसी गेंदबाजी इकाई तैयार करने पर है जिसमें अलग-अलग तरह के गेंदबाज मौजूद हों। वह टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ियों को भी रखना चाहते हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में योगदान दे सकें। उनके अनुसार, अंतिम टेस्ट में टीम का संतुलन सुधारना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

नई पाकिस्तान टीम में सैम अयूब और अब्दुल्ला फजल जैसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनके अलावा अराफात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बैग, मोहम्मद इमरान और रजाउल्लाह जैसे ऐसे खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं जिन्हें अभी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करना बाकी है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले ही श्रृंखला गंवा चुका है, इसलिए एजबेस्टन टेस्ट उसके लिए परिणाम से ज्यादा अपनी कमजोरियों को सुधारने का अवसर होगा। लगातार हार के बाद टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को मौका देकर भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करना चाहता है। ऐसे में अंतिम मुकाबले में नए चेहरों के प्रदर्शन और माइक हेसन की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Fri, 04 Sep 2026 21:59:00 +0530

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