Janmashtami 2026 Puja Samagri List: जन्माष्टमी की पूजा में क्या-क्या सामान लगेगा? जानें लड्डू गोपाल की पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट
Janmashtami 2026 Puja Samagri List: जन्माष्टमी का पर्व भगवान कृष्ण को समर्पित होता है. इस दिन कृष्ण जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है. हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है. इस दिन भक्त सुबह से व्रत रखते हैं और रात को भगवान कृष्ण का जन्म होने के पश्चात व्रत तोड़ते हैं. भक्त जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को झूले में बिठाते हैं, उन्हें पालने में सुलाते हैं, मोर पंख और बांसुरी जैसी श्रृंगार सामग्रियों से सुसज्जित करते हैं. चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि जन्माष्टमी में किन-किन सामग्रियों की जरूरत पड़ सकती है. यहां देखें पूरी लिस्ट.
कल मनाई जाएगी जन्माष्टमी
कल यानी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को देश भर में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी कि कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी. हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया था.
जन्माष्टमी पूजा सामग्री लिस्ट
- श्रृंगार और वस्त्र
- लड्डू गोपाल के वस्त्र (पीले या पीतांबरी रंग के)
- मुकुट, कुंडल
- बांसुरी और वैजयंती माला
- मोरपंख
- फूल माला
अभिषेक करने और स्नान करने की सामग्रियां
- लड्डू गोपाल का अभिषेक करने के लिए नई या शुद्ध थाली
- पंचामृत बनाने की सामग्री- गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध घी, शहद और शक्कर
- गंगाजल और शुद्ध जल
पूजन सामग्रियां
- रोली
- अक्षत
- पीला चंदन
- केसर
- धूप, अगरबत्ती
- शुद्ध देसी घी का दीया
- अखंड ज्योति
- कपूर
- माचिस
- इत्र
- लड्डू गोपाल के झूला
- शंख और घंटी
- लौंग वाला पान का बीड़ा
- श्रीफल
- पंच पल्लव- बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते
भगवान कृष्ण के मुख्य प्रसाद
- धनिया पंजीरी
- माखन-मिश्री
- पंचामृत
- मौसमी फल
- मखाने की खीर
- तुलसी दल
जन्माष्टमी पूजन विधि
जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा लड्डू गोपाल स्वरूप में की जाती है. जन्माष्टमी की पूजा रात को 12 बजे मुख्य रूप से की जाती है. पूजा के लिए आपको सबसे पहले बाल गोपाल की प्रतिमा का पंचामृत और फिर गंगाजल से अभिषेक किया जाता है. इसके बाद भगवान को साफ और नए वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है. श्रृंगार के दौरान भगवान को मुकुट, मोर पंख, बांसुरी और आभूषण पहनाए जाते हैं. इसके बाद बाल गोपाल को झूले में विराजमान कराकर उन्हें झूला झुलाया जाता है. इसके बाद पूजा में भगवान कृष्ण को चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान की आरती करें. आरती के बाद माखन, मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाई सहित तैयार भोग भगवान को चढ़ाएं.
अंत में भगवान श्री कृष्ण से परिवार की सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करें. पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांटे और स्वयं ग्रहण करें.
जन्माष्टमी का महत्व
धार्मिक कथाओं के मुताबिक, द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में कृष्ण जी का जन्म हुआ था. इस तिथि पर चंद्रमा वृषभ राशि में और सूर्य सिंह राशि मे स्थित होते हैं. यही वजह है कि हर साल इस तिथि पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है. जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है. कई घरों में परंपरा है कि माताएं अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए जन्माष्टमी का व्रत रखती है. इस दिन चंद्रमा दर्शन और जल अर्पित करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है.
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Explainer: भारत के लिए क्यों खास है 300 साल पुराना दोस्त बेल्जियम, PM बार्ट् डी वेवर की यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर बनेगी बात
India-Belgium Relations: भारत और बेल्जियम के रिश्ते करीब 300 साल पुराने हैं. बेल्जियम को लेकर एक फिर चर्चा शुरू हो रही है. इसकी वजह है बेल्जियम के पीएम का भारत दौरा. जी हां बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर तीन दिनों के लिए भारत दौरे पर आए हैं. दिल्ली में उनका स्वागत राज्य रक्षा मंत्री संजय सेठ ने किया. आज पीएम बार्ट पीएम मोदी के साथ दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक करेंगे.
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 2 से 4 सितंबर तक तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे हैं. इस दौरे का मकसद भारत और बेल्जियम के रिश्तों को और मजबूत करना है. इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. विदेश मंत्रालय ने X पर पोस्ट कर उनके भारत पहुंचने की जानकारी दी. मंत्रालय ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच मजबूत और कई क्षेत्रों में फैली साझेदारी को और आगे बढ़ाने का मौका देगा.
20 साल बाद बेल्जियम पीएम का भारत दौरा
बेल्जियम PM बार्ट डी वेवर ने फरवरी 2025 में पद संभाला था. प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है. साथ ही, करीब 20 साल बाद किसी बेल्जियम के प्रधानमंत्री का भारत दौरा हो रहा है. डी वेवर के साथ बेल्जियम के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकन भी भारत आए हैं. उनके साथ अधिकारियों, कारोबारियों और बेल्जियम के रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का एक बड़ा दल भी मौजूद है. भारत दौरे के दौरान डी वेवर 3 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. दोनों नेता भारत-बेल्जियम संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे.
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कल मुंबई दौरे पर रहेंगे पीएम वेवर
बेल्जियम के प्रधानमंत्री डी वेवर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक व्यापारिक कार्यक्रम में मुख्य भाषण देंगे. नई दिल्ली में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद डी वेवर 4 सितंबर को मुंबई जाएंगे. वहां वह हीरा कारोबार, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स समेत अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों और प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे.
साल दर साल मजबूत होते जा रहे रिश्ते
पीएम वेवर की यह यात्रा 15 जुलाई 2026 को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में हुए भारत-बेल्जियम के पहले मंत्रिस्तरीय रणनीतिक संवाद के बाद हो रही है. इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मैक्सिम प्रीवोट ने की थी. वहीं मार्च 2025 में राजकुमारी एस्ट्रिड के नेतृत्व में बेल्जियम का एक बड़ा आर्थिक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था. इसमें कंपनियों, व्यापारिक संगठनों, शिक्षाविदों और सरकारी संस्थानों से जुड़े 338 लोगों ने हिस्सा लिया था. इस दौरान दोनों देशों के बीच 38 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे.
300 साल पुराने हैं संबंध
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बेल्जियम के रिश्ते 300 साल से ज्यादा पुराने हैं. दोनों देशों ने सितंबर 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे. नया रणनीतिक संवाद भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग बढ़ाने का एक मंच है. इसके जरिए दोनों देश आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर भी चर्चा करेंगे.
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बेल्जियम भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
बेल्जियम भारत में निवेश करने वाले अहम देशों में शामिल है. अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच बेल्जियम से भारत में करीब 4.2 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है. व्यापार और निवेश के अलावा, दोनों देश रक्षा और सुरक्षा, तकनीक और नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी, बंदरगाह और समुद्री सहयोग के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी काम करना चाहते हैं.
विज्ञान और तकनीक भी भारत-बेल्जियम साझेदारी का एक अहम हिस्सा है. मार्च 2023 में नैनीताल स्थित एआरआईईएस (ARIES) में दुनिया की सबसे बड़ी लिक्विड मिरर टेलीस्कोप में से एक का उद्घाटन किया गया था. इसे बनाने में बेल्जियम की अंतरिक्ष कंपनी एएमओएस (AMOS) ने भी सहयोग किया था.
यूरोप में बेल्जियम सबसे अहम साझेदार
यूरोप में बेल्जियम भारत का एक अहम आर्थिक साझेदार है. वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कारोबार 13.01 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. दोनों देशों के व्यापार में हीरों का कारोबार महत्वपूर्ण है। बेल्जियम का एंटवर्प शहर दुनिया के बड़े हीरा कारोबार केंद्रों में शामिल है. नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ तकनीक के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है. बेल्जियम की कंपनी जॉन कॉकरिल आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में एक बड़े इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट का निर्माण कर रही है. इसकी उत्पादन क्षमता करीब 2 गीगावाट होगी.
बेल्जियम यूरोप का एक बड़ा समुद्री और लॉजिस्टिक्स हब भी है. ऐसे में भारत और बेल्जियम के बीच बंदरगाह, शिपिंग और सप्लाई चेन के क्षेत्र में सहयोग की काफी संभावनाएं हैं. भारत के जहाजरानी मंत्रालय और एंटवर्प बंदरगाह प्राधिकरण के बीच हुए समझौते के तहत भारतीय बंदरगाह अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.
रक्षा और आतंकवाद पर ये है सहयोग
रक्षा सहयोग भारत और बेल्जियम के रिश्तों का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है. बेल्जियम ने नई दिल्ली में रक्षा अताशे नियुक्त किया है, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की उसकी रुचि साफ होती है. डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान बेल्जियम के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री और रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे. इससे भारत और बेल्जियम की रक्षा कंपनियों के बीच साझेदारी और सहयोग बढ़ाने का मौका मिलेगा.
दोनों देश आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दे पर भी एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं. दोनों आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध हैं. 2016 में ब्रुसेल्स में हुए आतंकी हमलों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेल्जियम का दौरा किया था. इसके अलावा, बेल्जियम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद भारत को स्थायी सदस्यता मिलने की उम्मीदवारी का समर्थन भी करता है.
शिक्षा में भी निभा रहे साथ
शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत-बेल्जियम संबंध मजबूत हो रहे हैं. फिलहाल करीब 1,131 भारतीय छात्र बेल्जियम में पढ़ रहे हैं. दोनों देशों के कई विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी भी है. बेल्जियम में करीब 35,000 भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच एक अहम कड़ी हैं. योग, संगीत और नृत्य की लोकप्रियता से सांस्कृतिक रिश्ते भी मजबूत हुए हैं. दोनों देशों के बीच प्रथम विश्व युद्ध की साझा विरासत भी महत्वपूर्ण है. युद्ध के दौरान फ्लैंडर्स में 9,000 से ज्यादा भारतीय सैनिकों ने जान गंवाई थी. यप्रेस के मेनिन गेट पर बना भारतीय स्मारक उनके बलिदान को याद करता है.
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