चेन्नई कॉरपोरेशन ने कर्मचारियों के लिए मेंटल हेल्थ वेलनेस सेंटर खोला
चेन्नई, 2 सितंबर (आईएएनएस)। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के कमिश्नर जीएस समीरन ने बुधवार को रिपन बिल्डिंग्स कॉम्प्लेक्स में एक मेंटल हेल्थ और वेलनेस सेंटर का उद्घाटन किया। इसका मकसद कॉरपोरेशन के कर्मचारियों को प्रोफेशनल काउंसलिंग और इमोशनल सपोर्ट देना है।
माइंड मंदिरा वेलनेस सेंटर नाम की यह सुविधा कॉरपोरेशन हेडक्वार्टर में रेवेन्यू डिपार्टमेंट की बिल्डिंग में बनाई गई है। यह ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन, क्रेडाई चेन्नई फाउंडेशन और धृति फाउंडेशन की संयुक्त पहल से शुरू किए गए एक व्यापक मेंटल हेल्थ प्रोग्राम का हिस्सा है।
इस प्रोग्राम का मकसद कॉरपोरेशन के अधिकारियों और कर्मचारियों की मानसिक और भावनात्मक सेहत को बेहतर बनाना है। इसका उद्देश्य मेंटल हेल्थ के बारे में जागरूकता बढ़ाना, कर्मचारियों को काम की जगह पर होने वाले तनाव को समझने और उसे मैनेज करने में मदद करना, इमोशनल मजबूती विकसित करना और उन्हें सही समय पर प्रोफेशनल मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मदद चाहने वाले कर्मचारी सीधे सेंटर पर रजिस्टर कर सकते हैं या सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को माइंड मंदिरा हेल्पलाइन नंबर +91 80314 51918 पर संपर्क कर सकते हैं। मंगलवार और गुरुवार को साइकोलॉजिस्ट और ट्रेंड काउंसलर से आमने-सामने बातचीत (इन-पर्सन कंसल्टेशन) की सुविधा उपलब्ध होगी।
कॉरपोरेशन की ओर से काम की जगह पर ज्यादा स्वस्थ और सहयोगी माहौल बनाने की कोशिशों के तहत इस पहल को औपचारिक रूप से 10 अगस्त, 2026 को शुरू किया गया था।
इस प्रोग्राम का अगला चरण एक खास वेलनेस सेंटर खोलना है, जिससे कर्मचारियों के लिए व्यवस्थित मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
कॉरपोरेशन के अनुसार, यह सेंटर एक सुरक्षित और सहयोगी माहौल देगा जहां कर्मचारी बिना किसी झिझक के अपनी निजी या काम से जुड़ी चिंताओं पर बात कर सकेंगे। वे प्रोफेशनल काउंसलिंग ले सकेंगे, तनाव को संभालने के व्यावहारिक तरीके सीख सकेंगे और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करने की अपनी क्षमता को मजबूत कर सकेंगे।
इस प्रोग्राम का मकसद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति समाज में बनी गलत धारणाओं को दूर करना और कर्मचारियों को मानसिक सेहत को अपनी कुल सेहत का एक अहम हिस्सा मानने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। समय पर काउंसलिंग से भावनात्मक परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता लगाने और समस्याओं को कर्मचारियों के प्रोफेशनल और निजी जीवन पर बुरा असर डालने से रोकने में मदद मिल सकती है।
--आईएएनएस
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जब गोलियों से लाल हो गई थी मसूरी की वादियां, राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को देहरादून में दी गई श्रद्धांजलि
Uttarakhand News: उत्तराखंड राज्य निर्माण की नींव जिन वीरों के असीम त्याग और लहू से सींची गई थी, उनकी यादें आज भी हर पहाड़वासी के दिल में पूरी शिद्दत से जिंदा हैं. राजधानी देहरादून स्थित शहीद स्थल पर 2 सितंबर को एक बार फिर वही भावुक और गौरवशाली माहौल देखने को मिला. मसूरी गोलीकांड की बरसी के अवसर पर राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री खजान दास ने अमर शहीदों के स्मारक पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए. इस दौरान शहीद स्थल पर उपस्थित तमाम लोगों की आंखें नम थीं और वातावरण शहीदों के जयकारों से गूंज रहा था. हर किसी के चेहरे पर अपने पुरखों के उस संघर्ष के प्रति गहरा सम्मान झलक रहा था, जिसने अलग पहाड़ी राज्य के सपने को हकीकत में बदला.
बलिदानियों के त्याग से बना है हमारा राज्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि आज का दिन केवल औपचारिकता निभाने या कोई रस्म पूरी करने का दिन नहीं है. यह दिन हम सभी प्रदेशवासियों को यह याद दिलाता है कि आज हम जिस खुले और स्वतंत्र उत्तराखंड में गरिमा के साथ जीवन जी रहे हैं, वह इन्हीं वीर आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति न दी होती, तो अलग राज्य का सपना कभी पूरा नहीं हो पाता. इस मिट्टी का एक-एक कण उन अमर सेनानियों के त्याग का कर्जदार है, जिसे हम कभी नहीं भूल सकते.
इतिहास के पन्नों में दर्ज काला अध्याय
भाषण के दौरान मंत्री ने 2 सितंबर 1994 के उस खौफनाक मंजर को भी याद किया, जब शांत वादियों में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी थी. उन्होंने कहा कि एक दिन पहले यानी 1 सितंबर को खटीमा में आंदोलनकारियों पर बर्बर कार्रवाई हुई थी. इसके विरोध में अगले दिन मसूरी में लोग पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे. उस शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर जिस बेरहमी से तत्कालीन सत्ता के इशारे पर पुलिस ने गोलियां बरसाईं, वह इतिहास का एक काला अध्याय बनकर रह गया. उस गोलीकांड में बेलमती चौहान और हंसा धनाई जैसी वीरांगनाओं के साथ बलबीर सिंह नेगी, धनपत सिंह, मदन मोहन ममगाईं और राय सिंह बंगारी ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. वहीं आंदोलनकारियों की जान बचाने की कोशिश में पुलिस उपाधीक्षक उमाकांत त्रिपाठी भी वीरगति को प्राप्त हुए थे.
सपनों का उत्तराखंड बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि
कैबिनेट मंत्री ने जनता और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है, जब हम उनके सपनों के अनुरूप राज्य का निर्माण करें. हमारे पुरखों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, वह खुशहाल, आत्मनिर्भर और अपनी समृद्ध संस्कृति से जुड़ा हुआ राज्य था. उन्होंने कहा कि आज हम सभी को मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि हम अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हमेशा आगे रहेंगे. विकास की दौड़ में राज्य के मूल स्वरूप और पर्यावरण की रक्षा करना हमारा पहला दायित्व होना चाहिए. जब तक हर गांव तक बुनियादी सुविधाएं और खुशहाली नहीं पहुंचेगी, तब तक शहीदों का सपना अधूरा रहेगा.
आंदोलन के मार्गदर्शकों का हुआ स्मरण
इस पावन अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास ने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ आंदोलनकारी और पूर्व विधायक स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा को भी याद किया. उन्होंने स्वर्गीय वर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके जैसे समर्पित नेताओं ने आंदोलन को सही दिशा दी और जन-जन को अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना सिखाया. उनके विचार और संघर्ष आज भी प्रदेश के नीति निर्धारकों और समाजसेवियों के लिए पथ प्रदर्शक का काम करते हैं.
गणमान्य नागरिकों ने भी टेका मत्था
शहीद स्थल पर आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों, राज्य आंदोलनकारियों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. सभी ने बारी-बारी से शहीद वेदी पर पुष्प चढ़ाकर वीर सपूतों को नमन किया. इस मौके पर गढ़वाल मंडल विकास निगम के निदेशक विशाल गुप्ता, स्थानीय पार्षद रोहन चंदेल, मंडल महामंत्री राहुल पंवार, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल शर्मा, सोनी रावत, सुखबीर सिंह, अशोक राठौर और सत्यम शर्मा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में शहीदों के सपनों को साकार करने और राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वचन दोहराया.
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