फर्जी चोट का ड्रामा... इमाम उल हक पर लग सकता है 2 साल का प्रतिबंध, मोहम्मद रिजवान का करियर खत्म?
Imam-Ul-Haq To Face 2-Year Ban: इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में चोट का बहाना बनाने के आरोप में पाकिस्तानी ओपनर इमाम-उल-हक पर पीसीबी 2 साल का प्रतिबंध लगा सकता है. पीसीबी की जांच समिति मार्च 2025 के न्यूजीलैंड दौरे पर भी उनके फर्जी चोट के मामले की पड़ताल कर रही है. वहीं, अनुशासनहीनता और लगातार खराब प्रदर्शन के चलते पूर्व कप्तान मोहम्मद रिजवान का इंटरनेशनल करियर भी खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है.
सुप्रीम कोर्ट के बाद लोकसभा स्पीकर ने 20 बागी टीएमसी सांसदों को भेजा नोटिस, मांगा जवाब
Lok sabha speaker notice to tmc rebel mps: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर दिया है। इन सभी सांसदों से सात दिनों के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई थी सुनवाई
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब मंगलवार (25 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर 20 सांसदों से जवाब तलब किया था, जिसमें अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले में देरी को चुनौती दी गई थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सांसदों को नोटिस जारी करने के साथ ही स्पीकर के पास लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर तेजी से विचार करने की बात कही थी।
सॉलिसिटर जनरल ने दी जानकारी
लोकसभा स्पीकर और महासचिव की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत टीएमसी द्वारा दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर इन 20 सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इस दलील पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा, "यह केवल नोटिस जारी करने का सवाल नहीं है, बल्कि पूरी कार्यवाही को एक तय समय सीमा के भीतर समाप्त करने का सवाल है।"
क्या है पूरा मामला?
तृणमूल कांग्रेस ने इन 20 सांसदों पर पार्टी छोड़ने और उसके बाद नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है। अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि इन सांसदों का ऐसा आचरण संविधान के दलबदल विरोधी प्रावधानों (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता को आकर्षित करता है। इस कानूनी मामले में लोकसभा स्पीकर और सदन के महासचिव को मुख्य प्रतिवादी बनाया गया है, साथ ही उन 20 सांसदों को भी पक्षकार बनाया गया है जिनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है।
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