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हिंदू अधिकारियों को खतरा क्यों नहीं? कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों पर फारूक अब्दुल्ला का बयान

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को हाल ही में मिली धमकियां एक साजिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा फिर से मिलने से रोकना है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि केंद्र शासित प्रदेश में तैनात वरिष्ठ हिंदू पुलिस अधिकारियों को ऐसी धमकियों का सामना क्यों नहीं करना पड़ रहा है। 
 

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कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को हाल ही में मिली धमकियों पर JKNC के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि ये धमकियां कौन दे रहा है? क्या कश्मीरी पंडित यहां नहीं रहते? यहां के अधिकारी—DIG, DG और SP (जिला SP समेत)—सभी बाहर के हिंदू हैं। डिप्टी कमिश्नर भी हिंदू हैं। उन्हें धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं? सवाल यह है कि अगर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, तो उन्हें धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं? यह एक साजिश है; यह इस इलाके को राज्य का दर्जा न देने और डर का माहौल बनाने की चाल है। वे दुनिया भर में दावा कर रहे हैं कि यहां शांति बहाल हो गई है और उग्रवाद खत्म हो गया है। तो फिर यह सब कहां से आ रहा है? उन्हें इसका जवाब देने दें। 

अब्दुल्ला की बातों पर राजनीतिक कमेंटेटर प्रदीप भंडारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता की आलोचना की। X पर एक पोस्ट में, भंडारी ने अब्दुल्ला पर कश्मीरी हिंदुओं का मज़ाक उड़ाने का आरोप लगाया और समुदाय को मिली कथित धमकियों पर उनकी प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। भंडारी ने कहा कि हिंदुओं को मिल रही इस्लामी धमकियों का सामना करने के बजाय, वह पूछते हैं: 'हिंदू अधिकारियों को धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं?
 

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उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इन बयानों से आतंकवाद-समर्थक सोच झलकती है और कहा कि इन्हीं की वजह से घाटी से कश्मीरी हिंदुओं को विस्थापित होना पड़ा। भंडारी ने यह भी आरोप लगाया कि 70 कट्टर आतंकवादियों को रिहा किया गया और कश्मीरी हिंदुओं के मुद्दे पर कांग्रेस और फारूक अब्दुल्ला के रुख की आलोचना की।
 
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Indore में Rahul Gandhi का कार्यक्रम टला, अब 19 सितंबर को होगी छात्रों की गूंज

(इंट्रो में सुधार के साथ) (फाइल फोटो के साथ) इंदौर, दो सितंबर कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में इंदौर में 12 सितंबर को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की तारीख जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजन की अनुमति नहीं मिलने के कारण बदल दी गई है। कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्टेडियम उपलब्ध कराने से इनकार किए जाने के बाद अब यह कार्यक्रम 12 सितंबर के बजाय 19 सितंबर को आयोजित होगा। पटवारी ने यह घोषणा इंदौर में कार्यक्रम की तैयारियों से जुड़ी बैठक के दौरान की।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब कार्यक्रम के लिए नया आयोजन स्थल तलाश करके उसे तैयार करेगी। पटवारी ने इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर 12 सितंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। उन्होंने पत्र में कहा था कि राहुल गांधी का कार्यक्रम कोई सामान्य राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि देश के भविष्य, युवाओं के सपनों, शिक्षा के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित जनसंवाद है।

नेहरू स्टेडियम इंदौर नगर निगम के तहत आता है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा था कि नेहरू स्टेडियम को लेकर उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है जिसके तहत वहां खेलकूद गतिविधियों या राज्यस्तरीय शासकीय कार्यक्रमों के आयोजन की ही अनुमति दी जा सकती है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा था कि यदि नेहरू स्टेडियम में गांधी के कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिली, तो आंदोलन किया जाएगा।

कांग्रेस ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में इंदौर और आसपास के 50,000 विद्यार्थियों को जुटाने का प्रयास कर रही है। ‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया विद्यार्थी-संवाद अभियान है जिसके तहत देश के अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विपक्षी दल इस अभियान के जरिये प्रश्नपत्र लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को घेरने का प्रयास कर रहा है।

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  Sports

SA vs NAM: हार की हैट्रिक से बाल-बाल बची साउथ अफ्रीका, हार की हैट्रिक से बाल-बाल बची साउथ अफ्रीका, नामीबिया को पहली बार हराया

साउथ अफ्रीका ने नामीबिया के खिलाफ इससे पहले सिर्फ 2 टी20 मैच खेले थे, जिसमें से एक इसी सीरीज में था. साउथ अफ्रीका को दोनों मुकाबलों में शिकस्त मिली थी और तीसरी बार भी टीम हारती हुई दिख रही थी. Sat, 05 Sep 2026 01:31:31 +0530

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