EXPLAINER: दलीप ट्रॉफी में किस टीम ने जीती हैं सबसे ज्यादा ट्रॉफी? फाइनल से पहले जान लीजिए इस टूर्नामेंट का पूरा इतिहास
Duleep Trophy: दलीप ट्रॉफी 2026 रोमांचक अंदाज में आगे बढ़ते हुए अब फाइनल मुकाबले तक आ पहुंचा है. सेमीफाइनल मैच में सेंट्रल जोन को धूल चटाकर ईस्ट जोन ने फाइनल में जगह पक्की कर ली है. ईशान किशन की कप्तानी वाली इस टीम में वैभव सूर्यवंशी भी शामिल हैं, जिन्होंने सेमीफाइनल में अच्छा प्रदर्शन किया. 6 सितंबर से टूर्नामेंट का फाइनल मैच खेला जाने वाला है. मगर, क्या आपको मालूम है कि दलीप ट्रॉफी पर किसका राज है? कौन सी टीम है, जिसने सबसे अधिक बार ट्रॉफीज उठाई हैं? तो आइए इस आर्टिकल में जान लेते हैं कि टूर्नामेंट कब शुरू हुआ, इसकी पहली विनर टीम कौन सी है.
किसके नाम पर रखा गया दलीप ट्रॉफी का नाम?
दलीप ट्रॉफी भारत की प्रतिष्ठित घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट प्रतियोगिताओं में से एक है. इस टूर्नामेंट का नाम कुमार श्री दलीपसिंहजी के सम्मान में रखा गया है, जो भारतीय मूल के महान क्रिकेटर थे और उन्होंने 1929 से 1931 के बीच इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला था. दलीपसिंहजी अपनी शानदार बल्लेबाजी शैली और तकनीक के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध थे. वे महान क्रिकेटर कुमार श्री रणजीतसिंहजी के भतीजे थे, जिनके नाम पर रणजी ट्रॉफी खेली जाती है.
दलीपसिंहजी भारतीय क्रिकेट की शुरुआती महान हस्तियों में गिने जाते हैं. उनके खेल कौशल, भारतीय क्रिकेट में योगदान और प्रेरणादायक विरासत को सम्मान देने के लिए बीसीसीआई ने घरेलू प्रथम श्रेणी के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का नाम उनके नाम पर रखा. आपको बता दें, बीसीसीआई ने 1961-62 सीजन में इस टूर्नामेंट की शुरुआत की. इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग जोन के बेस्ट खिलाड़ियों को एक मंच पर लाकर उच्च स्तर का प्रतिस्पर्धी क्रिकेट कराना था, ताकि राष्ट्रीय टीम के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जा सके.
दलीप ट्रॉफी का पहला संस्करण किसने जीता?
दलीप ट्रॉफी का पहला संस्करण 1961-62 में खेला गया था और इसका खिताब वेस्ट जोन ने अपने नाम किया था. फाइनल मुकाबले में वेस्ट जोन का सामना साउथ जोन से हुआ. मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में वेस्ट जोन ने साउथ जोन को 10 विकेट से हराकर ऐतिहासिक खिताब जीता. साउथ जोन ने पहली पारी में 175 रन बनाए, जिसके जवाब में वेस्ट जोन ने 234/9 घोषित किए. दूसरी पारी में साउथ जोन सिर्फ 139 रन बना सका और वेस्ट जोन को जीत के लिए 81 रन का लक्ष्य मिला, जिसे उसने बिना विकेट गंवाए हासिल कर लिया.
किस टीम ने जीता है सबसे अधिक बार खिताब?
दलीप ट्रॉफी के खिताब की बात करें, तो नॉर्थ जोन की टीम ने सबसे अधिक बार ट्रॉफी उठाई है. जी हां, वेस्ट जोन की टीम अब तक 19 बार खिताबी जीत दर्ज कर चुकी है. वहीं, नॉर्थ जोन की टीम ने 18 ट्रॉफी उठाई हैं. साउथ जोन ने 13, सेंट्रल जोन ने 7 और ईस्ट जोन की टीम ने 2 बार खिताबी जीत दर्ज की है.
| टीम | खिताब |
|---|---|
| वेस्ट जोन | 19 |
| नॉर्थ जोन | 18 |
| साउथ जोन | 13 |
| सेंट्रल जोन | 7 |
| ईस्ट जोन | 2 |
फाइनल मैच 6 सितंबर से होगा शुरू
दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला 6 सितंबर से शुरू होने वाला है. इस मैच पर सभी की नजरें टिकी होंगी, क्योंकि ईस्ट जोन की ओर से एक बार फिर वैभव सूर्यवंशी मैदान पर उतरने वाले हैं. ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन की टीम ने सेमीफाइनल मैच में रजत पाटीदार की सेंट्रल जोन टीम को 4 विकेट से हराकर जीत दर्ज की और फाइनल में पहुंच गई. हालांकि, अभी दूसरा सेमीफाइनल नॉर्थ जोन और साउथ जोन के बीच खेला जा रहा है, जिसके बाद ही फैसला होगा कि फाइनल मैच में ईस्ट जोन का सामना किस टीम से होने वाला है.
ऐसे होता है 28 राज्यों से 6 टीमों का चुनाव
दलीप ट्रॉफी में सिर्फ 6 टीमें इसलिए खेलती हैं क्योंकि यह राज्य आधारित नहीं, बल्कि जोन आधारित टूर्नामेंट है. इसका उद्देश्य रणजी ट्रॉफी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को एक ही टीम में शामिल करके प्रतियोगिता का स्तर बढ़ाना और भारतीय टीम के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का आकलन करना है.
आपको बता दें, पूरे देश को 6 क्रिकेट जोन में बांटा गया है और हर जोन की एक टीम टूर्नामेंट में हिस्सा लेती है. यह फॉर्मेट घरेलू क्रिकेट के बेस्ट खिलाड़ियों को एक-दूसरे के खिलाफ खेलने का मौका देता है, जिससे सिलेक्टर्स को खिलाड़ियों का बेहतर मूल्यांकन करने में मदद मिलती है.
वैभव सूर्यवंशी पर टिकी होंगी नजरें
4⃣,6⃣,4⃣,4⃣, ????
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 1, 2026
Vaibhav Sooryavanshi ???? Yash Thakur battle part 2⃣ ????#DuleepTrophy | #CZvEZ
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सेंट्रल जोन के खिलाफ खेले गए दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मैच में वैभव सूर्यवंशी ने शानदार बल्लेबाजी की थी. उन्होंने पहली पारी में 81 गेंदों पर 92 रनों की धाकड़ पारी खेली थी, जिसमें 7 चौके और 7 छक्के लगाए थे. भले ही वह शतक लगाने से चूक गए हो, लेकिन उस मैच में अर्धशतक लगाने के साथ ही वैभव दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर बन गए. दूसरी पारी में वैभव ने अच्छी शुरुआत की.
मगर, वह 43 गेंद पर 40 रनों की पारी खेलकर आउट हो गए. अपनी पारी में वैभव ने 3 चौके और 2 छक्के भी लगाए. इस तरह सेमीफाइनल मैच में वैभव सूर्यवंशी अपनी ईस्ट जोन की टीम की ओर से सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. ऐसे में अब सभी की नजरें उनपर टिकी होंगी और उनकी टीम को उनसे बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी.
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उत्तराखंड में बिजली नियमों का उल्लंघन पड़ेगा महंगा, अब 10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान
Uttarakhand Electricity Rules: उत्तराखंड में बिजली से जुड़े नियम और सख्त हो गए हैं. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब पहले के मुकाबले ज्यादा आर्थिक कार्रवाई होगी. उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने केंद्र के जन विश्वास अधिनियम के प्रावधानों को लागू करते हुए बिजली चोरी, मीटर या विद्युत आपूर्ति की सामग्री को नुकसान पहुंचाने और आयोग के निर्देशों का पालन नहीं करने जैसे मामलों में जुर्माने की सीमा बढ़ा दी है.
नए प्रावधानों के तहत बिजली चोरी या विद्युत आपूर्ति से जुड़ी सामग्री को लापरवाही से नुकसान पहुंचाने पर अब 5 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. दोबारा इसी तरह का उल्लंघन करने पर भी यही जुर्माना लागू होगा. इससे पहले ऐसे मामलों में अधिकतम जुर्माना 10 हजार रुपये तक था.
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आयोग के आदेश नहीं माने तो 5 लाख तक जुर्माना
विद्युत नियामक आयोग की ओर से जारी आदेश या निर्देशों का पालन नहीं करना भी अब महंगा पड़ेगा. धारा 142 के तहत ऐसे मामलों में जुर्माने की सीमा 10 हजार से बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर दी गई है. वहीं, अन्य उल्लंघनों के मामलों में 1 हजार से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
नियम तोड़ने पर 10 लाख तक का जुर्माना
आयोग ने धारा 146 में भी बदलाव किया है. इसके तहत नियमों के उल्लंघन के मामलों में पहले मौजूद कारावास के प्रावधान को हटाकर जुर्माने पर जोर दिया गया है. गंभीर मामलों में यह जुर्माना 10 हजार से 10 लाख रुपये तक हो सकता है. छोटे उल्लंघनों के लिए 1 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है.
कुछ मामलों में मौके पर हो सकेगा निपटारा
अपराधों के शमन से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है. अधिनियम की धारा 135, 138 और 140 के तहत आने वाले मामलों में उपयुक्त सरकार या उसके अधिकृत अधिकारी निर्धारित राशि लेकर मामले का समाधान कर सकेंगे। यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के बावजूद लागू की जा सकेगी. यानी नए नियमों के बाद उत्तराखंड में बिजली चोरी से लेकर विद्युत व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और आयोग के निर्देशों की अनदेखी करने तक, कई तरह के उल्लंघनों पर आर्थिक कार्रवाई पहले से ज्यादा सख्त हो गई है.
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