अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को इस मामले में FIR दर्ज करने और जांच अपने हाथ में लेने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद दिशा के पिता सतीश सालियन काफी भावुक हो गए और उन्होंने न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। सतीश कई सालों से इस मामले को लेकर कोशिश कर रहे थे। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा की मौत में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से उन्हें राहत मिली है।
बॉम्बे HC के फैसले के बाद दिशा सालियन के पिता भावुक हुए
सतीश सालियन ने पत्रकारों से कहा, "मैं 6 साल से इसका इंतज़ार कर रहा था। मैं 6 साल से इंतज़ार कर रहा हूँ, और खुश होने की कोई वजह नहीं है। मैंने अपनी बेटी को खो दिया है। आज मुझे राहत महसूस हो रही है। बस इतना ही... मैंने हाथ जोड़कर उनका (जज का) आभार व्यक्त किया।"
उन्होंने यह भी कहा, "मैंने जज से कहा कि मैं उनका आभारी हूँ। आप सभी की वजह से मुझे न्याय मिला। अब तक, मैंने एक भी आंसू नहीं बहाया था—तब भी नहीं जब दिशा गुज़र गई थी। लेकिन आज, आंसू बह रहे हैं... वकील जो भी सलाह देंगे, मैं वही करूँगा। वह दिन आ गया है; सच की जीत हुई है, और भविष्य में भी सच की जीत होती रहेगी।"
सतीश सालियन का पक्ष रखने वाले वकील नीलेश ओझा ने कोर्ट के निर्देशों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "कोर्ट ने CBI को सतीश सालियन का बयान दर्ज करने, FIR दर्ज करने, जांच के लिए एक सीनियर अधिकारी नियुक्त करने और मालवानी पुलिस स्टेशन को सभी रिकॉर्ड CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, जिसके खिलाफ भी सबूत मिलेंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी के खिलाफ सबूत नहीं होंगे तो उसे आरोपी नहीं बनाया जाएगा। साथ ही, अगर CBI कोई नेगेटिव रिपोर्ट सौंपती है, तो हमें आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) दाखिल करने का अधिकार है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से यह कहा है। मैं कोर्ट का धन्यवाद करता हूँ।"
बॉम्बे HC के आदेश पर BJP विधायक की प्रतिक्रिया
BJP विधायक राम कदम ने भी कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस आदेश से दिशा के परिवार को राहत मिली है। "आखिरकार, न्यायपालिका ने दिशा सालियन के परिवार को न्याय दिया है। भगवान के दरबार में देर हो सकती है, लेकिन अन्याय नहीं। दिशा सालियन के पिता खुद कह रहे हैं कि उनकी बेटी की सिर्फ मौत नहीं हुई, बल्कि उसे शिकार बनाया गया, प्रताड़ित किया गया, परेशान किया गया और उसकी हत्या कर दी गई," कदम ने कहा।
कदम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मामले को दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई थी।
उन्होंने कहा "उस समय की उद्धव ठाकरे सरकार ने कुछ बड़े नेताओं को बचाने के लिए इस मामले को दबाने की गलत हरकत की थी। ये आरोप दिशा सालियन के पिता ने लगाए हैं। किसी पिता से पूछिए कि बेटी को खोने का दर्द कैसा होता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उस समय मामले की ठीक से जांच क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा "अब, मामला दर्ज करके और इसे CBI को सौंपकर, न्यायपालिका ने दिशा के पिता को न्याय दिया है। सवाल उठता है: उस समय की उद्धव ठाकरे सरकार किसे बचाने की कोशिश कर रही थी? इस मामले को रातों-रात दबाने की कोशिश क्यों की गई? उद्धव ठाकरे और जिन लोगों को बचाने की कोशिश की गई, उन सभी को न्यायपालिका के सामने इसका जवाब देना होगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिशा 8 जून, 2020 को मृत पाई गई थीं। उनकी मौत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में 14 जून, 2020 को मृत पाए जाने से कुछ दिन पहले हुई थी।
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उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद एक मैदान में कथित 'शुद्धिकरण' कार्यक्रम को लेकर मंगलवार को राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। बीजेपी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तंज कसते हुए 'बुद्धि शुद्धि यज्ञ' किया। बीजेपी के अनुसूचित जाति (SC) मोर्चे ने देहरादून के एक मंदिर में 'बुद्धि शुद्धि यज्ञ' किया और इस दौरान राहुल गांधी की तस्वीर भी रखी। पार्टी ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को बुद्धि देना और झूठ फैलाना बंद करने के लिए प्रेरित करना था।
इस विवाद पर उत्तराखंड के मंत्री भागवत मकवाना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और उन्हें मंत्री का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मंत्री भी अपराध करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बीजेपी का 'बुद्धि शुद्धि यज्ञ' कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा उत्तराखंड भर के पुलिस स्टेशनों में शिकायतें दर्ज कराने के एक दिन बाद हुआ। इन शिकायतों में हल्द्वानी में कथित तौर पर किए गए "शुद्धिकरण" अनुष्ठान में शामिल लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई थी।
कार्यकर्ताओं ने 'शुद्धिकरण' विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लेने की मांग करते हुए उत्तराखंड सचिवालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस के प्रकोष्ठ ‘असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस’ ने पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे के उत्तराखंड में कथित अपमान और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के विरोध में बुधवार को यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। असंगठित कामगार कांग्रेस की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, संगठन के अध्यक्ष उदित राज की अगुवाई में किए गए इस प्रदर्शन के दौरान ‘मनुस्मृति’ की प्रतियां और आरएसएस की ड्रेस को जलाया गया, जिसके बाद पुलिस ने उदित राज तथा अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
उदित राज ने आरोप लगाया कि एक ओर संविधान, सामाजिक समानता और सम्मान को खत्म करने की साजिश की जा रही है और दूसरी ओर इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। उन्होंने हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद सभा स्थल के कथित ‘‘शुद्धिकरण’’ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोगों ने ऐसा किया और बाद में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर किसी व्यक्ति का अपमान केवल उस व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज का अपमान है और यह संविधान में निहित समानता, गरिमा तथा सामाजिक न्याय के मूल्यों पर हमला है।
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