किर्गिस्तान के बिश्केक में चल रहा एसइओ समिट अब खत्म हो गया है। लेकिन इस समिट की सबसे जानदार और शानदार तस्वीर अब आई है। क्या आप सोच सकते हैं कि राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी कार से उतरना ही भूल गए। यह घटना सच में हुई है। रूसी मीडिया चैनल ने पीएम मोदी और पुतिन की ऐसी वीडियो जारी की है जिसे देखकर आप तो हैरान हो जाएंगे लेकिन अमेरिका शायद परेशान हो जाएगा। दरअसल पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन बातों में ऐसे डूबे कि कार से उतरना ही भूल गए। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन कार की पिछली सीट पर काफी देर तक बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान बाहर खड़े एक सिक्योरिटी अधिकारी ने दरवाजा खोल दिया। लेकिन जब सिक्योरिटी अधिकारी को इस बात का एहसास हुआ कि पीएम मोदी और पुतिन के बीच कुछ गंभीर बात हो रही है और दोनों ही नेता कार से नीचे नहीं उतर रहे तो उस अधिकारी ने तुरंत कार का दरवाजा दोबारा बंद कर दिया।
अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक खबर छापी है जिसमें लिखा है कि पीएम मोदी दुनिया भर में बड़ी-बड़ी डील्स कर रहे हैं और डॉनल्ड ट्रंप से निपटने की तैयारी भी कर रहे हैं। इसमें यह भी जिक्र हुआ कि पूरी दुनिया जंग से धीमी पड़ चुकी है। तो भारत की जीडीपी कैसे 7.8% की गति से आगे बढ़ रही है। इसी को देखते हुए अमेरिका पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की दोस्ती से घबरा रहा है। लोग तो यहां तक बोल रहे हैं कि एससीओ तो सिर्फ झांकी है, ब्रिक्स अभी बाकी है। सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है। इसमें एक सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है नया ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम बनाना। दरअसल पुतिन एक ऐसा बैंक बनाना चाहते हैं जिसे अमेरिका छू भी ना पाए। क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और कुछ नाटो देशों ने पश्चिमी देशों में जमा रूसी पैसे, सोना और बाकी एसेट्स को फ्रीज कर दिया था। रूस के करीब $6 बिलियन विदेशों में फंसे हैं। पुतिन चाहकर भी अपने पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। इसके अलावा रूस को वैश्विक लेनदेन के लिए जरूरी Swift सिस्टम से भी बाहर निकाला जा चुका है। इसका एक बड़ा नुकसान इस उदाहरण से समझिए।
रूस ने बांग्लादेश में न्यूक्लियर प्लांट बनाया। लेकिन अब उसकी पेमेंट बांग्लादेश में ही फंस गई है। कोई इंटरनेशनल सिस्टम ना होने की वजह से बांग्लादेश रूस को पेमेंट नहीं कर पा रहा। ऐसे में रूस ने फिलहाल के लिए बांग्लादेश से कहा है कि हमें रुपए में पेमेंट कीजिए। लेकिन रूस का मानना है कि आने वाले समय में एक नया बैंक बनाना जरूरी है। एक नया ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम भी बनाना जरूरी है। यही कारण है कि रूस को देखकर दुनिया के कई बड़े-बड़े देश अब अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड्स की जगह सोना खरीद रहे हैं। इन देशों को लग रहा है कि विपरीत परिस्थितियों में इनका पैसा भी फ्रीज किया जा सकता है।
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मिडिल ईस्ट में जंग की तबाही अलग स्तर पर चल रही है। ईरान के राष्ट्रपति पेजिशियान इन दिनों किरगिस्तान में चल रहे एसइओ समिट में रूस और चीन के राष्ट्रपतियों से मुलाकात कर रहे हैं। लेकिन ये बात अमेरिका को खटक रही है। अमेरिका ने ना सिर्फ ईरान पर नए सिरे से हमले शुरू कर दिए हैं बल्कि ट्रंप ईरान पर किसी बड़े हमले की तैयारी में दिख रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति बिश्केक में उन नेताओं से मिल रहे हैं जो जंग में अमेरिकी हमले के खिलाफ हैं। इन नेताओं में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग है। रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन है जो किसी ना किसी तरह से अमेरिका के खिलाफ जंग में ईरान का साथ दे रहे हैं। इसे लेकर कई खबरें वायरल हैं। जिनके बारे में पूरी भनक ट्रंप को है। लेकिन बिश्केक के मंच से ईरान की दोस्ती चीन और रूस के साथ सरेआम जमती दिख रही है। उसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पारा सातवें आसमान पर है।
ईरान के राष्ट्रपति प्रदेशयान इधर बिक में हैंडशेक कर रहे थे। उधर अमेरिकी सेना ईरान पर नए सिरे से हमले कर रही थी। यह हमले ईरान के हॉर्मोंस वाले केशव और खाद्वीप पर किए गए। जिसमें ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की ऊर्जा सप्लाई की पूरी चेन तोड़ डाली है। ट्रंप की जुबान ऐसी है जैसे वह कहना चाह रहे हो। जब तक ईरान को तोड़ेंगे नहीं तब तक उसे छोड़ेंगे नहीं। हमले के साथ आर्थिक नाकेबंदी और ईरान को सहयोग देने वाले दूसरे देशों पर सख्त पाबंदी की धौस दिखाकर ट्रंप ईरान को घुटने पर लाना चाहते हैं। लेकिन ट्रंप यह भूल गए हैं कि ईरान के जिस लीडरशिप को खत्म करने की बात कर रहे हैं, वह वैसे भी ईरान में शांति वार्ता तक सीमित है। युद्ध की असली कमान तो ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड संभाल रहे हैं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सैन्य ट्रकों का काफिला जो घातक मिसाइलों से लैस है। एक ऑर्डर और एक बटन दबाते ही यह मीलों दूर तबाही मचा सकते हैं। ट्रंप रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की इस ताकत की अनदेखी कर रहे हैं। ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान हार गया है और इधर आईआरजीसी अपने तहखानों में छिपे ऐसे ऐसे ड्रोन दिखा रहा है जिनका इस्तेमाल अभी हुआ ही नहीं है। ईरान का दावा है कि ड्रोंस के साथ उसका पूरा बैलेस्टिक मिसाइल भंडार अभी भरा पड़ा है। इसे अमेरिका चाहकर भी नष्ट नहीं कर सकता बल्कि अब की बार जंग में घमासान होगा तो अमेरिका का कोई हथियार काम नहीं आएगा।
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