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Success Story: मजदूर पिता की बेटी ने मचाया धमाल, 10 हजार मीटर दौड़ में जीता 8वां गोल्ड, अब इंटरनेशनल पर नजर

Sushila Prajapat Success Story: राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के हीरावती गांव की रहने वाली सुशीला प्रजापत ने राजस्थान स्टेट अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर 10 हजार मीटर दौड़ में गोल्ड और 5 हजार मीटर में सिल्वर मेडल जीता. सुशीला का सफर संघर्ष और मेहनत से भरा रहा है. मजदूर पिता की बेटी सुशीला ने गांव में सहेलियों के साथ दौड़ने से शुरुआत की और धीरे-धीरे लंबी दूरी की बेहतरीन धाविका बन गईं. वह रोजाना 15 से 18 किलोमीटर तक प्रैक्टिस करती हैं. करीब छह महीने पहले बीएसएफ ज्वाइन करने के बावजूद उन्होंने ट्रेनिंग जारी रखी है. अब सुशीला का लक्ष्य राष्ट्रीय पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है.

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Brown Rice vs White Rice: ब्राउन या सफेद चावल, कौन सा है सेहत के लिए बेस्ट? जानें दोनों के फायदे-नुकसान

Brown Rice vs White Rice: चावल भारतीय खाने का अहम हिस्सा है और देश के कई हिस्सों में रोजाना की थाली इसकी बिना अधूरी मानी जाती है। लेकिन जब बात सेहत की आती है तो अक्सर सवाल उठता है कि ब्राउन राइस खाना बेहतर है या सफेद चावल? दोनों एक ही अनाज से मिलते हैं, लेकिन उनकी प्रोसेसिंग अलग होती है। इसी वजह से इनके पोषण, फाइबर और शरीर पर असर में अंतर देखने को मिलता है।

ब्राउन राइस को आमतौर पर ज्यादा पौष्टिक विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें अनाज की बाहरी परत और चोकर की कुछ मात्रा बनी रहती है। वहीं सफेद चावल की प्रोसेसिंग के दौरान चोकर और जर्म की परत हटा दी जाती है, जिससे इसकी बनावट मुलायम और स्वाद हल्का हो जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि सफेद चावल हर किसी के लिए खराब है। आइए समझते हैं दोनों में क्या अंतर है और आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर हो सकता है।

ब्राउन राइस में ज्यादा फाइबर

ब्राउन राइस में सफेद चावल की तुलना में फाइबर अधिक होता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है और पाचन के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसी वजह से वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए संतुलित डाइट में ब्राउन राइस एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, सिर्फ चावल बदलने से वजन कम नहीं होता, पूरी डाइट और शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।

ब्राउन राइस के फायदे

ब्राउन राइस में फाइबर के साथ मैग्नीशियम, मैंगनीज और कुछ अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। इसमें मौजूद फाइबर भोजन के बाद ब्लड शुगर बढ़ने की गति को कुछ हद तक धीमा करने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि ब्लड शुगर मैनेजमेंट पर ध्यान देने वाले लोग इसे सफेद चावल के विकल्प के तौर पर चुनते हैं। फिर भी मात्रा और पूरी प्लेट में मौजूद कार्बोहाइड्रेट पर ध्यान देना जरूरी है।

ब्राउन राइस के नुकसान भी जानें

ब्राउन राइस सभी को आसानी से पच जाए, यह जरूरी नहीं है। इसमें ज्यादा फाइबर होने के कारण कुछ लोगों को शुरुआत में गैस, पेट फूलने या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इसका स्वाद और टेक्सचर भी सफेद चावल से अलग होता है। इसलिए इसे डाइट में शामिल करते समय धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाना बेहतर हो सकता है।

सफेद चावल क्यों है लोकप्रिय?

सफेद चावल आसानी से पचने वाला और जल्दी पकने वाला विकल्प है। इसका स्वाद हल्का होता है और इसे दाल, सब्जी, करी या अन्य व्यंजनों के साथ आसानी से खाया जा सकता है। जिन लोगों को ज्यादा फाइबर वाला भोजन पचाने में परेशानी होती है, उनके लिए कुछ परिस्थितियों में सफेद चावल अधिक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है।

सफेद चावल के नुकसान

सफेद चावल में ब्राउन राइस की तुलना में फाइबर कम होता है और यह शरीर में अपेक्षाकृत जल्दी पच सकता है। इसलिए इसकी बड़ी मात्रा खाने पर भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें ब्लड शुगर नियंत्रित रखने की जरूरत है। ऐसे में चावल की मात्रा सीमित रखना और साथ में दाल, सब्जियां, सलाद या प्रोटीन स्रोत लेना बेहतर रणनीति हो सकती है।

आखिर कौन सा चावल है बेस्ट?

अगर आपका फोकस ज्यादा फाइबर और पोषण पर है और आपको ब्राउन राइस आसानी से पचता है, तो यह बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं सफेद चावल भी संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है, खासकर जब इसकी मात्रा नियंत्रित रखी जाए और इसे दाल, सब्जियों तथा प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए। इसलिए किसी एक चावल को सभी के लिए "बेस्ट" कहना सही नहीं होगा। आपकी सेहत, पाचन, भोजन की मात्रा और कुल डाइट के आधार पर चुनाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

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लेखक: (कीर्ति)

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      Sports

    Mike Hesson का बड़ा खुलासा: Rizwan और Imam-ul-Haq को हटाने के फैसले में मेरा कोई हाथ नहीं, PCB पर फोड़ा ठीकरा

    पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो हार के बाद मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में टीम में किए गए बड़े बदलावों को लेकर अंतरिम लाल गेंद कोच माइक हेसन ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। हेसन ने कहा कि मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा और इमाम-उल-हक को टीम से बाहर करने के फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि जब उन्हें जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया, तब तक ये तीनों खिलाड़ी टीम छोड़कर स्वदेश लौट चुके थे।

    बता दें कि इंग्लैंड ने सीरीज के पहले मुकाबले में हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी इंग्लैंड ने 194 रन से जीत दर्ज की। इन लगातार दो हार के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा और अंतिम टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन में खेला जाना है।

    इन हार के बाद पाकिस्तान बोर्ड ने टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के स्तर पर बड़े बदलाव किए। मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद आवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से हटा दिया गया। इसके अलावा मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

    माइक हेसन को इसके बाद अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की लाल गेंद वाली टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई। बर्मिंघम में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने रिजवान, आगा और इमाम को हटाए जाने के फैसले से खुद को अलग करते हुए कहा कि बोर्ड ने जब उनसे अंतिम टेस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बारे में पूछा, तब तक तीनों खिलाड़ी टीम से बाहर किए जा चुके थे और घर लौट रहे थे।

    हालांकि हेसन ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी खिलाड़ियों को हटाने और कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका थी। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य अंतिम टेस्ट के लिए टीम में बेहतर संतुलन तैयार करना था।

    मौजूद जानकारी के अनुसार, हेसन पाकिस्तान की सीमित ओवरों वाली टीम के साथ काम करने के बाद जापान से लौटे थे। जापान में एशियाई खेलों का आयोजन चल रहा है। लाहौर में पाकिस्तान का सीमित ओवरों का प्रशिक्षण शिविर भी हुआ था। इसी दौरान क्रिकेट बोर्ड ने उनसे टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा।

    हेसन ने कहा कि अब उनका मुख्य जोर ऐसी गेंदबाजी इकाई तैयार करने पर है जिसमें अलग-अलग तरह के गेंदबाज मौजूद हों। वह टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ियों को भी रखना चाहते हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में योगदान दे सकें। उनके अनुसार, अंतिम टेस्ट में टीम का संतुलन सुधारना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

    नई पाकिस्तान टीम में सैम अयूब और अब्दुल्ला फजल जैसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनके अलावा अराफात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बैग, मोहम्मद इमरान और रजाउल्लाह जैसे ऐसे खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं जिन्हें अभी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करना बाकी है।

    गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले ही श्रृंखला गंवा चुका है, इसलिए एजबेस्टन टेस्ट उसके लिए परिणाम से ज्यादा अपनी कमजोरियों को सुधारने का अवसर होगा। लगातार हार के बाद टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को मौका देकर भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करना चाहता है। ऐसे में अंतिम मुकाबले में नए चेहरों के प्रदर्शन और माइक हेसन की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
    Fri, 04 Sep 2026 21:59:00 +0530

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