Brown Rice vs White Rice: ब्राउन या सफेद चावल, कौन सा है सेहत के लिए बेस्ट? जानें दोनों के फायदे-नुकसान
Brown Rice vs White Rice: चावल भारतीय खाने का अहम हिस्सा है और देश के कई हिस्सों में रोजाना की थाली इसकी बिना अधूरी मानी जाती है। लेकिन जब बात सेहत की आती है तो अक्सर सवाल उठता है कि ब्राउन राइस खाना बेहतर है या सफेद चावल? दोनों एक ही अनाज से मिलते हैं, लेकिन उनकी प्रोसेसिंग अलग होती है। इसी वजह से इनके पोषण, फाइबर और शरीर पर असर में अंतर देखने को मिलता है।
ब्राउन राइस को आमतौर पर ज्यादा पौष्टिक विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें अनाज की बाहरी परत और चोकर की कुछ मात्रा बनी रहती है। वहीं सफेद चावल की प्रोसेसिंग के दौरान चोकर और जर्म की परत हटा दी जाती है, जिससे इसकी बनावट मुलायम और स्वाद हल्का हो जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि सफेद चावल हर किसी के लिए खराब है। आइए समझते हैं दोनों में क्या अंतर है और आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर हो सकता है।
ब्राउन राइस में ज्यादा फाइबर
ब्राउन राइस में सफेद चावल की तुलना में फाइबर अधिक होता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है और पाचन के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसी वजह से वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए संतुलित डाइट में ब्राउन राइस एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, सिर्फ चावल बदलने से वजन कम नहीं होता, पूरी डाइट और शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।
ब्राउन राइस के फायदे
ब्राउन राइस में फाइबर के साथ मैग्नीशियम, मैंगनीज और कुछ अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। इसमें मौजूद फाइबर भोजन के बाद ब्लड शुगर बढ़ने की गति को कुछ हद तक धीमा करने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि ब्लड शुगर मैनेजमेंट पर ध्यान देने वाले लोग इसे सफेद चावल के विकल्प के तौर पर चुनते हैं। फिर भी मात्रा और पूरी प्लेट में मौजूद कार्बोहाइड्रेट पर ध्यान देना जरूरी है।
ब्राउन राइस के नुकसान भी जानें
ब्राउन राइस सभी को आसानी से पच जाए, यह जरूरी नहीं है। इसमें ज्यादा फाइबर होने के कारण कुछ लोगों को शुरुआत में गैस, पेट फूलने या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इसका स्वाद और टेक्सचर भी सफेद चावल से अलग होता है। इसलिए इसे डाइट में शामिल करते समय धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाना बेहतर हो सकता है।
सफेद चावल क्यों है लोकप्रिय?
सफेद चावल आसानी से पचने वाला और जल्दी पकने वाला विकल्प है। इसका स्वाद हल्का होता है और इसे दाल, सब्जी, करी या अन्य व्यंजनों के साथ आसानी से खाया जा सकता है। जिन लोगों को ज्यादा फाइबर वाला भोजन पचाने में परेशानी होती है, उनके लिए कुछ परिस्थितियों में सफेद चावल अधिक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है।
सफेद चावल के नुकसान
सफेद चावल में ब्राउन राइस की तुलना में फाइबर कम होता है और यह शरीर में अपेक्षाकृत जल्दी पच सकता है। इसलिए इसकी बड़ी मात्रा खाने पर भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें ब्लड शुगर नियंत्रित रखने की जरूरत है। ऐसे में चावल की मात्रा सीमित रखना और साथ में दाल, सब्जियां, सलाद या प्रोटीन स्रोत लेना बेहतर रणनीति हो सकती है।
आखिर कौन सा चावल है बेस्ट?
अगर आपका फोकस ज्यादा फाइबर और पोषण पर है और आपको ब्राउन राइस आसानी से पचता है, तो यह बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं सफेद चावल भी संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है, खासकर जब इसकी मात्रा नियंत्रित रखी जाए और इसे दाल, सब्जियों तथा प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए। इसलिए किसी एक चावल को सभी के लिए "बेस्ट" कहना सही नहीं होगा। आपकी सेहत, पाचन, भोजन की मात्रा और कुल डाइट के आधार पर चुनाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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