स्कूल पहुंचने के लिए रोज 20 फीट ऊंचे पिलर पर चढ़ने को मजबूर बच्चे, हर कदम पर मौत से सामना
Ground Report: "लगा अब आखिरी वक्त आ गया, फिर इस मकान ने दी नई जिंदगी"—नेपाल त्रासदी से बची लक्ष्मी पांडे की आपबीती
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के तांडव के बीच एक हरे रंग की इमारत की चर्चा हर तरफ हो रही है, जहां त्रिशुली क्षेत्र में उफान मारते सैलाब ने आसपास के कई मकानों को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया और बहा ले गया, वहीं यह 'ग्रीन हाउस' उग्र लहरों का डटकर मुकाबला करता रहा. इस घर की मजबूती के कारण इसमें फंसे 6 लोगों को एक नया जीवन मिला है. आपदा के समय मकान की ऊपरी मंजिल पर 6 लोग फंसे हुए थे. मकान में मौजूद लक्ष्मी पांडे ने ग्राउंड जीरो पर पहुंची रिपोर्टिंग टीम को बताया कि जब मलबे का तेज बहाव आया, तो वे सभी नीचे की मंजिलों से भागकर ऊपरी मंजिलों (तीसरी और चौथी मंजिल) पर चले गए. लक्ष्मी पांडे के अनुसार, जब उनके ठीक बगल का घर सैलाब के थपेड़ों से पूरी तरह ढह गया, तो उनकी उम्मीदें टूट गई थीं. उन्होंने सोचा था कि अब कोई नहीं बचेगा और सभी ने एक-दूसरे का हाथ थाम लिया था ताकि अगर मौत भी आए तो सब साथ रहें. मदद की गुहार लगाने के लिए परिवार की महिला ने छत पर जाकर लाल कपड़ा भी लहराया ताकि रेस्क्यू हेलीकॉप्टर की नजर उन पर पड़ सके. इस घर का पूरी तरह सुरक्षित बचना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, लेकिन इसके पीछे इस इमारत का मजबूत ढांचा और आधुनिक इंजीनियरिंग है. घर का निर्माण लोहे की मजबूत छड़ों (सरिया) और कंक्रीट के इंटीग्रेटेड फ्रेम पर किया गया था, जिसमें बीम और पिलर आपस में बेहद मजबूती से जुड़े हुए थे. यह मकान मुख्य बहाव से थोड़ी ऊंचाई पर और एक विशेष कोण पर बना हुआ था.
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