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राजस्थान उच्च न्यायालय: वकीलों की हड़ताल जारी, नए मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश के बाद बैठक आज

जयपुर, एक सितंबर राजस्थान उच्च न्यायालय एडवोकेट्स एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ मंगलवार को अपनी हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम द्वारा उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की सिफारिश के बाद, संगठन आगे की रणनीति तय करने के लिए आज यानी मंगलवार को ही एक बैठक करेगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने सोमवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्त करने की सिफारिश की।

कॉलेजियम की यह सिफारिश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शर्मा के सोमवार को अवकाश पर जाने के कुछ ही घंटों बाद आई। दरअसल, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता द्वारा लगाए गए प्रशासनिक और मुकदमों की सूचीबद्धता से जुड़े आरोपों के विरोध में सोमवार को वकीलों के एक समूह ने जयपुर पीठ में शर्मा के अदालत कक्ष के बाहर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद वह अवकाश पर चले गए। यह सिफारिश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शर्मा के सोमवार को अवकाश पर जाने के कुछ ही घंटों बाद की गई।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता द्वारा न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ न्यायिक प्रशासन और मामलों की सूचीबद्धता को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद वकीलों के एक समूह ने जयपुर पीठ में उनके अदालत कक्ष के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। जयपुर पीठ में सोमवार को कुछ अधिवक्ताओं के प्रदर्शन के बीच, मुख्य पीठ जोधपुर के वकीलों ने न्यायमूर्ति शर्मा को स्थायी मुख्य न्यायाधीश न बनाए जाने की मांग को लेकर मंगलवार से सप्ताहभर की हड़ताल का ऐलान किया। जोधपुर स्थित ‘राजस्थान उच्च न्यायालय एडवोकेट्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष रंजीत जोशी ने बताया कि तय घोषणा के अनुसार मंगलवार को हड़ताल रखी जाएगी, लेकिन आगे का रुख तय करने के लिए दिन में बैठक बुलाई गई है।

जोशी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘न्यायमूर्ति मेहता ने उन मुद्दों को उठाया जिन्हें उठाया जाना बेहद जरूरी था। मैंने भी इस संबंध में पहले सीजेआई को पत्र लिखा था। हमारी मांग थी कि न्यायमूर्ति शर्मा को स्थायी मुख्य न्यायाधीश न बनाया जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि हमारी मांग अब पूरी हो गई है, इसलिए हम दिन में बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे।

हालांकि, आज हड़ताल जारी रहेगी।’’ दूसरी ओर, जयपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने कहा कि मंगलवार को जयपुर पीठ में कामकाज सामान्य रह सकता है। सोगरवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अधिवक्ताओं की न्यायमूर्ति शर्मा से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। यह अच्छी बात है कि उच्चतम न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कदम उठाए।

इससे स्थिति सामान्य करने में मदद मिलेगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम नए मुख्य न्यायाधीश का स्वागत करते हैं।’’ यह पूरा विवाद न्यायमूर्ति मेहता द्वारा सीजेआई को लिखे गए पत्रों के बाद खड़ा हुआ, जिनमें उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल और मुकदमों की सूचीबद्धता पर गंभीर सवाल उठाए थे। न्यायमूर्ति मेहता ने न्यायमूर्ति शर्मा का राजस्थान से बाहर तबादला करने और किसी अन्य उच्च न्यायालय से स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का अनुरोध किया था। जयपुर पीठ के अधिवक्ता इंद्रेश शर्मा ने भी कॉलेजियम की सिफारिश का स्वागत किया।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह सभी के हित में है कि इस तात्कालिक मुद्दे का समाधान हो गया।’’ उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े ऐसे विवादों से इस संस्था में जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है। शर्मा ने कहा, ‘‘जब ऐसे मुद्दे उठते हैं, तो न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचता है और लोगों के बीच एक नकारात्मक धारणा बनती है। फिर वे उच्च न्यायालय के फैसलों को भी उसी चश्मे से देखना और उन पर सवाल उठाना शुरू कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की साख और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है।

शर्मा ने राजस्थान उच्च न्यायालय के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाने की कॉलेजियम की सिफारिश का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘राजस्थान उच्च न्यायालय के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को भी बाहर भेजा जा रहा है। इसमें कई सवाल और पहलू शामिल हैं, और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की ठीक से जांच की जानी चाहिए।’’ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में पदस्थ न्यायमूर्ति अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और राजस्थान उच्च न्यायालय में पदस्थ न्यायमूर्ति भाटी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश मेहता ने सीजेआई को तीन पत्र लिखकर न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे और उनका तबादला राजस्थान से बाहर करने का अनुरोध किया था।

न्यायमूर्ति मेहता ने अपने पत्रों में राजस्थान उच्च न्यायालय के कामकाज में ‘‘घोर कुप्रशासन’’, प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और पक्षपात के आरोप लगाए थे। उन्होंने मुकदमों की सूचीबद्धता पर भी सवाल उठाए थे और किसी अन्य उच्च न्यायालय से स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया था।

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Education Minister के इस्तीफे से ज्यादा छात्रों का भविष्य जरूरी: Sonam Wangchuk ने बताया क्यों बदली अपनी Strategy

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बताया है कि सरकार के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की अपनी मांग को नरम कर दिया और विरोध कर रहे छात्रों को कानूनी उत्पीड़न से बचाने की शर्त को अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के लिए "बिना किसी समझौते वाली" शर्त बना लिया। PGX पॉडकास्ट पर प्रखर गुप्ता से बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि 22 जुलाई तक प्रधान का इस्तीफ़ा उनकी पहली प्राथमिकता नहीं रह गया था, क्योंकि उन्हें हिंसा के दूसरे शहरों में फैलने की चिंता होने लगी थी।

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सोनम वांगचुक ने कहा 22 तारीख़ तक मुझे इस्तीफ़ा पहली प्राथमिकता नहीं लगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफ़े की लगातार मांग से जो नुकसान हो रहा था, उस पर भी वह सोच रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें लगने लगा था कि प्रधान का इस्तीफ़ा बाद में भी हो सकता है और दूसरे लोग भी इसकी मांग कर रहे थे। वांगचुक ने कहा इसलिए मुझे लगा कि यह इस्तीफ़ा शायद हो जाएगा, क्योंकि उन्हें यह बहुत पहले ही कर देना चाहिए था।" "हो सकता है कि इस्तीफ़ा उनके दिमाग़ में न हो। अगर अभी नहीं होता है, तो दो-चार दिन में हो जाएगा, और दूसरे लोग भी इसकी मांग कर रहे हैं।
'बिना समझौते वाली शर्त' का मतलब कानूनी उत्पीड़न नहीं था
वांगचुक ने कहा कि बातचीत के दौरान उनका ध्यान इस बात पर था कि विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कोई आपराधिक मामला न चले और न ही उन्हें किसी तरह का कानूनी उत्पीड़न झेलना पड़े। उन्होंने कहा लेकिन मेरी मुख्य बात यह थी कि कोई कानूनी उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।" "इसलिए मैंने इस्तीफ़े की मांग को थोड़ा नरम किया और कहा आप इस्तीफ़े के ज़रिए जवाबदेही तय करने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन मेरी बिना समझौते वाली शर्त यह है कि आप कानूनी उत्पीड़न नहीं करेंगे।

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