डोनाल्ड ट्रंप ने Apple Maps पर लेक ओंटारियो का नाम बदलकर Lake America करने को कहा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एप्पल से अपने मानचित्र ऐप पर ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने को कहा है। अमेरिका के गृह मंत्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। ट्रंप ने कुछ दिन पहले ही इस झील से संबंधित एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे।
कनाडा के साथ बढ़ते व्यापार युद्ध के बीच यह झील चर्चा में है। गृह मंत्री डग बर्गम ने फॉक्स के कार्यक्रम ‘मॉर्निंग्स विद मारिया’ में कहा कि ट्रंप ने ‘‘एप्पल से सीधे संपर्क किया है।’’ उन्होंने भरोसा जताया कि एप्पल के मंच पर जल्द ही ‘‘लेक अमेरिका’’ नाम दिखाई दे सकता है। एप्पल ने इस बारे में तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
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लंबे समय से लेक ओंटारियो के नाम से जानी जाने वाली यह झील अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य और कनाडा के ओंटारियो प्रांत के बीच स्थित है। ‘गूगल मैप्स’ ने अमेरिका में अपने उपयोगकर्ताओं के लिए बीते सप्ताहांत ही इस झील का नया नाम दिखाना शुरू कर दिया था। कंपनी ने इसके लिए ट्रंप के हालिया आदेश और अमेरिकी भौगोलिक नाम सूचना प्रणाली (जीएनआईएस) द्वारा निर्धारित नामों का इस्तेमाल करने की अपनी पहले से जारी व्यवस्था का हवाला दिया।
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ट्रंप ने पिछले सप्ताह झील का नया नाम ‘‘लेक अमेरिका’’ घोषित किया था। इस फैसले को कनाडा के साथ अमेरिका के जारी व्यापार युद्ध के बीच ट्रंप का उकसाने वाला एक और कदम माना जा रहा है। इस व्यापार युद्ध के कारण सीमा के दोनों ओर शुल्क बढ़ रहे हैं।
ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश जारी कर गृह मंत्रालय को अमेरिकी भौगोलिक नामकरण प्रणाली में झील का नाम बदलने का निर्देश दिया था।
व्हाइट हाउस में 40 करोड़ डॉलर के बॉलरूम निर्माण को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी
वाशिंगटन, एक सितंबर (एपी) अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में प्रस्तावित 40 करोड़ डॉलर के भव्य बॉलरूम के निर्माण को फिलहाल जारी रखने की सोमवार को अनुमति दे दी। अदालत के इस फैसले को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जो अभूतपूर्व कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राजधानी की तस्वीर और स्वरूप को अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप बदलने का काम कर रहे हैं। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के उस अस्थायी आदेश की जगह लेगा, जो उन्होंने अधीनस्थ अदालत के निर्माण कार्य रोकने के फैसले के प्रभावी होने से कुछ घंटे पहले जारी किया था।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने सोमवार के ताजा आदेश से सार्वजनिक रूप से असहमति जताई और उन्होंने अदालत के तीन उदारवादी न्यायाधीशों का साथ दिया जिन्होंने निर्माण परियोजना को “संभावित रूप से गैरकानूनी” करार दिया। बहुमत में न्यायाधीशों ने परियोजना की वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया। उनका कहना है कि निर्माण को चुनौती देने वाले संरक्षण समूह के पास संभवतः ऐसा करने का कानूनी अधिकार नहीं है।
मामले पर सुनवाई अब अधीनस्थ अदालतों में होगी। हालांकि, अदालती दस्तावेजों के अनुसार परियोजना के अहम हिस्से अगले कुछ महीनों में ही पूरे हो सकते हैं। इस मामले में अधीनस्थ संघीय अदालतों ने परियोजना पर रोक लगाते हुए कहा था कि इसके लिए कांग्रेस (संसद) की मंजूरी जरूरी है जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
‘नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन’ ने मुकदमा दायर कर कहा है कि ट्रंप को एकतरफा तरीके से यह काम शुरू करने का अधिकार नहीं है। परियोजना के तहत ‘व्हाइट हाउस’ के ईस्ट विंग को गिराया जा चुका है। संगठन के वकीलों का आरोप है कि ‘व्हाइट हाउस’ निर्माण कार्य में तेजी लाकर “अदालतों की सुनवाई से पहले ही काम पूरा करने” की कोशिश कर रहा है।
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