पाकिस्तान क्रिकेट टीम मैदान पर संघर्ष कर रही है, और पर्दे के पीछे भी बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लगातार टेस्ट हार के कारण कप्तान बाबर आज़म पर दबाव बढ़ गया है। उनकी रणनीति बनाने की क्षमता और बल्लेबाज़ी फ़ॉर्म, दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली का दावा है कि बाबर और मुख्य तेज़ गेंदबाज शाहीन शाह अफरीदी के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों के बीच के तनाव को पिछले कुछ सालों से राष्ट्रीय टीम के खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण बताया है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए कप्तानी 'म्यूज़िकल चेयर्स' के खेल जैसी हो गई है। मोहम्मद रिज़वान, बाबर आज़म, शाहीन अफ़रीदी और शान मसूद जैसे खिलाड़ियों ने बार-बार एक-दूसरे को कप्तानी सौंपी है। बासित का मानना है कि जब बाबर और शाहीन के बीच कप्तानी को लेकर विवाद हुआ, तो पाकिस्तान क्रिकेट सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। बासित ने 'गेम प्लान' शो में कहा कि बाबर आज़म एक मज़बूत कप्तान नहीं हैं। मैं यह बात इंग्लैंड में उनके प्रदर्शन के आधार पर नहीं कह रहा हूँ। उन्होंने कई गलत फ़ैसले लिए हैं। पाकिस्तान क्रिकेट के पतन का मुख्य कारण शाहीन और बाबर के बीच की अनबन है। जिस दिन कप्तानी को लेकर दोनों के बीच मनमुटाव हुआ, उसी दिन पाकिस्तान क्रिकेट बर्बाद हो गया।
उन्होंने आगे कहा कि कई बयान दिए गए कि शाहीन एक बहुत अच्छे बॉलर हैं और बाबर एक बहुत अच्छे बैटर हैं। यह अनबन जिसने भी पैदा की, उसके बुरे नतीजे अब दिखाई दे रहे हैं। इस बीच, PCB ने इंग्लैंड के खिलाफ़ तीसरे और आखिरी टेस्ट मैच से पहले पाकिस्तान की टीम में बड़े बदलाव किए हैं। टीम के लगभग आधे खिलाड़ियों को बदल दिया गया है और हेड कोच सरफ़राज़ अहमद और बॉलिंग कोच उमर गुल को हटा दिया गया है।
ये बदलाव पाकिस्तान की दूसरे टेस्ट में 194 रनों से हार के बाद किए गए हैं, जिससे इंग्लैंड ने सीरीज में 2-0 की ऐसी बढ़त बना ली है जिसे अब तोड़ा नहीं जा सकता। पाकिस्तान ने सैम अयूब और अब्दुल्ला फ़ज़ल के साथ-साथ पाँच ऐसे खिलाड़ियों को भी टीम में बुलाया है जिन्होंने अभी तक कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है; इन दोनों खिलाड़ियों का कुल अनुभव सिर्फ़ 10 मैचों का है। जिन पाँच नए खिलाड़ियों को शामिल किया गया है, वे हैं अराफ़ात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बेग, मोहम्मद इमरान रंधावा और रज़ाउल्लाह। माइक हेसन और एशले नोफ़के, जो पाकिस्तान की व्हाइट-बॉल टीम के लिए क्रमशः हेड कोच और बॉलिंग कोच हैं, वे भी टेस्ट कोचिंग स्टाफ़ में शामिल हो गए हैं।
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इन दिनों देश के कई राज्य एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू का प्रकोप झेल रहे हैं। यह इन्फ्लुएंजा-ए वायरस का ही एक प्रकार माना जाता है। इस बार यह संक्रमण मुश्किलों को बढ़ाने वाला दिख रहा है। पिछले कुछ 15-20 दिनों में दिल्ली के हॉस्पटिलों में सर्दी-जुकाम, तेज फीवर और सांस से जुड़े मामलों में वृद्धि देखी गई है। देश की राजधानी में संक्रमण के 138 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं 3,177 इंफ्लूएंजा ए के मामले हैं। यह संक्रमण गंभीर स्थितियों में दिल और फेफड़ों की समस्याओं के साथ-साथ आंखों के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।
स्वाइन फ्लू का आंखों पर क्या होता है असर
दरअसल, यह वायरस फेफड़ों और हार्ट पर भी अटैक कर सकता है। देश के कई राज्यों में एच1एन1 के मामलों में वृद्धि देखी गई। जिसके बाद एक्सपर्ट ने बताया है कि यह फ्लू सिर्फ फेफड़ों और सांस की नली को ही प्रभावित नहीं करता है, बल्कि कुछ लोगों में आंखों से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
वैसे तो स्वाइन फ्लू इंफ्लूएंजा ए वायरस का एक प्रकार है। इसके होने पर आमतौर पर गले में खराश, खांसी, बुखार, थकान, शरीर में दर्द और सांस से जुड़े दूसरे लक्षण देखने को मिलते हैं।
यह संक्रमित व्यक्ति के छींकने, बात करने, खांसने पर निकलने वाली ड्ऱॉपलेट्स से फैलता है। जिसका असर शरीर के अन्य हिस्सों पर भी हो सकता है।
फ्लू के दौरान कुछ लोगों की आंखों में लालिमा, रोशनी से परेशानी होना, आंखों से पानी आना या ड्राईनेस की समस्या महसूस हो सकती है। आमतौर पर फ्लू के ठीक होने के साथ-साथ यह समस्याएं भी ठीक हो जाती हैं। लेकिन अगर आपको अचानक से नजर में बदलाव लगे, तो इसको सामान्य लक्षण नहीं समझना चाहिए।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
अधिकतर मामलों में स्वाइन फ्लू होने की वजह से हल्के स्तर पर दिक्कतें होती हैं। लेकिन कई मामलों में आंखों से जुड़ी परेशानी भी कम होती है और सही तरीके से देखभाल करने से ठीक हो जाती है। लेकिन सबसे आम समस्या वायरल कंजंक्टिवाइटिस हो सकता है। इसको आम भाषा में आंख आना कहा जाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो बहुत कम मामलों में इससे आंख की रोशनी से जुड़ी परत रेटिना में सूजन, आंख के अंदर की सूजन यानी यूवाइटिस या आंख से दिमाग तक संदेश पहुंचाने वाली ऑप्टिक नर्व पर गंभीर असर होने की समस्या हो सकती है। हालांकि यह दुर्लभ है, लेकिन यह आपकी नजर को प्रभावित कर सकती है।
अगर फ्लू के दौरान आपकी आंखों में लगातार तेज दर्द हो रहा, धुंधला दिख रहा या रोशनी से ज्यादा परेशान हो रही या फिर नजर अचानक कमजोर हो जाए। तो इसको सामान्य आंख की समस्या मानने की गलती नहीं करना चाहिए। ऐसे स्थिति होने पर आंखों की जांच जरूरी है। वहीं आंखों के अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देते रहना चाहिए।
डबल विजन या धुंधला दिखाई देने की समस्या।
आंखों के सामने चमकती रोशनी का दिखना
आंखों के सामने तैरते धब्बे या छोटे-छोटे काले बिंदुओं का अचानक से बढ़ जाना।
पास की चीजों को देखने में परेशानी महसूस होना।
आंखों को एच1एन1 के असर से ऐसे बचाएं
इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए हर साल फ्लू की वैक्सीन लगवाना चाहिए। इसके अलावा कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
हाथों को रोजाना अच्छे से धोना चाहिए।
छींकते या खांसने के दौरान नाम और मुंह ढक लें।
बीमार लोगों के बहुत करीब जाने से बचना चाहिए।
खुद बीमार हों, तो घर पर ही रहना चाहिए।
बिना हाथ धोए आंखों को छूने से बचें।
अगर कंजंक्टिवाइटिस हो गया है, तो अपना तौलिया, तकिया और अन्य आंखों से जुड़ी निजी चीजों को दूसरों के साथ शेयर न करें।
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