प्रतापगढ़ के आंवले ने बदली किसानों की किस्मत, ODOP योजना से गांव से देश-दुनिया तक पहुंचा कारोबार
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ को लंबे समय से आंवले की खेती के लिए जाना जाता है. अब यही आंवला सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रह गया है. उत्तर प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना ने जिले के पारंपरिक उत्पाद को नई पहचान देने के साथ-साथ इसकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को भी बढ़ावा दिया है. इसका सीधा फायदा किसानों, छोटे कारोबारियों और ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा है.
आंवले से तैयार हो रहे कई तरह के उत्पाद
ODOP के तहत प्रतापगढ़ में आंवले की केवल कच्चे फल के रूप में बिक्री पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है. अब इससे कैंडी, मुरब्बा, जूस, अचार, लड्डू, च्यवनप्राश, पाउडर और हेयर ऑयल जैसे कई उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 15 से ज्यादा आंवला प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित हो चुके हैं. इससे स्थानीय स्तर पर फल की प्रोसेसिंग बढ़ी है और किसानों को अपनी उपज के लिए नए बाजार और बेहतर मूल्य हासिल करने का अवसर मिला है.
किसानों को कच्चे माल से आगे बढ़ने का मौका
किसी कृषि उत्पाद की कीमत सिर्फ उसकी पैदावार से नहीं, बल्कि उसकी प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग से भी तय होती है. प्रतापगढ़ में आंवले के साथ यही बदलाव देखने को मिल रहा है. किसान और स्थानीय कारोबारी अब कच्चे फल की बिक्री के साथ उससे तैयार उत्पादों की पूरी वैल्यू चेन से जुड़ रहे हैं.
प्रशासन और उद्यान विभाग की ओर से किसानों को प्रोसेसिंग के साथ बाजार तक पहुंच बनाने की जानकारी भी दी जा रही है. इससे स्थानीय उत्पाद को बड़े बाजारों में जगह मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं.
गांव की महिलाओं के लिए भी खुला रोजगार का रास्ता
इस बदलाव का एक अहम पहलू ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है. स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आंवला उत्पाद तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई है. इसके बाद कई महिलाएं प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से जुड़े कामों में शामिल हुई हैं.
इससे महिलाओं के लिए घर के आसपास रोजगार के अवसर बने हैं और वे परिवार की आय में योगदान देने के साथ आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.
ई-कॉमर्स ने बढ़ाई बाजार तक पहुंच
ODOP के तहत सिर्फ उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि बाजार तक पहुंच पर भी जोर दिया जा रहा है. सब्सिडी, आसान ऋण और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की मदद से प्रतापगढ़ के आंवला उत्पादों को स्थानीय बाजार से बाहर ले जाने का रास्ता आसान हुआ है.
रिपोर्ट के अनुसार, इन उत्पादों की बिक्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सरकारी पोर्टल के माध्यम से भी हो रही है. इसका मतलब है कि स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पाद अब बड़े शहरों के ग्राहकों तक सीधे पहुंच सकते हैं.
50 करोड़ रुपये से पार पहुंचा कारोबार
आंवले से जुड़े कारोबार में बढ़ोतरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल जिले में इसका कुल कारोबार 50 करोड़ रुपये से अधिक रहा. वहीं, एक स्थानीय कारोबारी के अनुसार प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है.
किसानों की मांग और बाजार में बढ़ती खपत ने भी इस क्षेत्र को गति दी है. रिपोर्ट में किसान स्तर पर आंवले की कीमतों में बढ़ोतरी और दूसरे राज्यों तक सीधी सप्लाई का भी उल्लेख किया गया है.
ODOP से स्थानीय उत्पाद को मिली नई पहचान
प्रतापगढ़ की कहानी यह दिखाती है कि किसी पारंपरिक कृषि उत्पाद को अगर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बाजार से जोड़ा जाए तो उसकी आर्थिक क्षमता काफी बढ़ सकती है. आंवला अब केवल खेत और बाग से निकलकर तैयार उत्पादों के रूप में बाजार तक पहुंच रहा है.
किसान, कारोबारी और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की भागीदारी से प्रतापगढ़ के आंवले को एक स्थानीय फसल से आगे बढ़ाकर रोजगार और कारोबार के अवसर पैदा करने वाले उत्पाद के रूप में विकसित करने की कोशिश हो रही है.
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Nifty and Sensex Today: निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट की क्या हैं बड़ी वजहें? फेड की सख्ती से भारतीय बाजार क्यों भरभराया
Nifty and Sensex Today: भारतीय शेयर बाजार सोमवार 31 अगस्त को गिरावट के साथ खुला. मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछला का असर बाजार पर साफ दिखाई दिया. सुबह NSE निफ्टी 50 24,020.10 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जिसमें 0.64% की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, BSE सेंसेक्स 76,894.34 पर था, जिसमें 0.39% की गिरावट दिखी. इस गिरावट के साथ, बाजार का कई हफ्तों से चल रहा करेक्शन का ट्रेंड और आगे बढ़ता हुआ लग रहा है.
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सेंसेक्स की आज की चाल
BSE सेंसेक्स 76,895.77 के लेवल पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछली क्लोजिंग से 368.74 प्वॉइंट्स या 0.48% नीचे है. मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन अचानक बढ़ने के कारण आज भारतीय इक्विटी मार्केट गिरावट के साथ खुला. रिपोर्ट्स के मुताबिक, US और ईरान की सेनाओं के बीच जवाबी हमलों की खबरों से ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से $89 प्रति बैरल के ऊपर चली गई. इसके बाद से मार्केट में यह गिरावट देखी गई. मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो आने वाले समय में इस कंपनी के शेयर्स निवेशकों को अच्छा मुनाफा दे सकते हैं.
ओपन: 77,130.73
पिछला क्लोज: 77,264.51
दिन का लो: 76,869.59
दिन का हाई: 77,177.27
52-वीक लो: 69,505.87
52-वीक हाई: 88,566.47
निफ्टी 50 की आज की चाल
निफ्टी 50 इंडेक्स 24,027.20 पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले क्लोज 24,175.65 से 148.45 अंक यानी 0.61% नीचे है.
ओपन: 24,117.55
पिछला क्लोज: 24,175.65
दिन का लो: 24,036.20
दिन का हाई: 24,128.70
52-वीक लो: 22,186.00
52-वीक हाई: 26,566.20
आखिर क्यों टूट रहा है आज बाजार?
सेंसेक्स और निफ्टी 50 में सोमवार, 31 अगस्त को गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ा तनाव है, जिससे तेल की सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं. अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा दबाव पड़ा. बाजार खुलने पर निफ्टी 50 0.42% गिरकर 24,073.85 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 0.28% गिरकर 77,042.87 पर खुला. दिनभर के कारोबार में बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है. सेंसेक्स करीब 300 अंक तक फिसल सकता है और निफ्टी 24,100 के नीचे जा सकता है.
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आज की गिरावट के पीछे ये हैं बड़ी वजहें
US-ईरान तनाव: हाल ही में सैन्य तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई में रुकावट और ग्लोबल स्तर पर रिस्क से बचने की चिंताएं बढ़ गई हैं.
क्रूड ऑयल में उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 प्रति बैरल के पार चली गई है, जिससे भारत के इंपोर्ट बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
फेड रेट-हाइक की आशंका: US फेड चेयर केविन वॉर्श के सख्त बयानों से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं, जिससे डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मजबूती आई है.
कमजोर ग्लोबल संकेत: जियोपॉलिटिकल और मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर चिंताओं के बीच एशियाई बाजार भी आज कमजोर कारोबार कर रहे हैं, जिसका असर भारतीय इक्विटीज पर भी पड़ा है.
रुपये पर बना दबाव: बढ़ती क्रूड कीमतें और रेट-हाइक की मजबूत होती उम्मीदें भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा रही हैं, जो सेंटिमेंट के लिए एक और निगेटिव फैक्टर साबित हो रहा है.
निवेशकों के लिए आगे क्या अहम रहेगा?
सेक्स और निफ्टी इंडेक्स सोमवार, 31 अगस्त को निगेटिव ग्लोबल फैक्टर्स और मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव की वजह से नीचे की तरफ मूव कर रहे हैं. क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए महंगाई और इम्पोर्ट कॉस्ट को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं. इसके अलावा आने वाले MSCI इंडेक्स री-क्लासिफिकेशन को लेकर भी निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जो बाजार में सावधानी की एक और वजह बन रहा है.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
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