Nifty and Sensex Today: निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट की क्या हैं बड़ी वजहें? फेड की सख्ती से भारतीय बाजार क्यों भरभराया
Nifty and Sensex Today: भारतीय शेयर बाजार सोमवार 31 अगस्त को गिरावट के साथ खुला. मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछला का असर बाजार पर साफ दिखाई दिया. सुबह NSE निफ्टी 50 24,020.10 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जिसमें 0.64% की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, BSE सेंसेक्स 76,894.34 पर था, जिसमें 0.39% की गिरावट दिखी. इस गिरावट के साथ, बाजार का कई हफ्तों से चल रहा करेक्शन का ट्रेंड और आगे बढ़ता हुआ लग रहा है.
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सेंसेक्स की आज की चाल
BSE सेंसेक्स 76,895.77 के लेवल पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछली क्लोजिंग से 368.74 प्वॉइंट्स या 0.48% नीचे है. मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन अचानक बढ़ने के कारण आज भारतीय इक्विटी मार्केट गिरावट के साथ खुला. रिपोर्ट्स के मुताबिक, US और ईरान की सेनाओं के बीच जवाबी हमलों की खबरों से ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से $89 प्रति बैरल के ऊपर चली गई. इसके बाद से मार्केट में यह गिरावट देखी गई. मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो आने वाले समय में इस कंपनी के शेयर्स निवेशकों को अच्छा मुनाफा दे सकते हैं.
ओपन: 77,130.73
पिछला क्लोज: 77,264.51
दिन का लो: 76,869.59
दिन का हाई: 77,177.27
52-वीक लो: 69,505.87
52-वीक हाई: 88,566.47
निफ्टी 50 की आज की चाल
निफ्टी 50 इंडेक्स 24,027.20 पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले क्लोज 24,175.65 से 148.45 अंक यानी 0.61% नीचे है.
ओपन: 24,117.55
पिछला क्लोज: 24,175.65
दिन का लो: 24,036.20
दिन का हाई: 24,128.70
52-वीक लो: 22,186.00
52-वीक हाई: 26,566.20
आखिर क्यों टूट रहा है आज बाजार?
सेंसेक्स और निफ्टी 50 में सोमवार, 31 अगस्त को गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ा तनाव है, जिससे तेल की सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं. अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा दबाव पड़ा. बाजार खुलने पर निफ्टी 50 0.42% गिरकर 24,073.85 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 0.28% गिरकर 77,042.87 पर खुला. दिनभर के कारोबार में बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है. सेंसेक्स करीब 300 अंक तक फिसल सकता है और निफ्टी 24,100 के नीचे जा सकता है.
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आज की गिरावट के पीछे ये हैं बड़ी वजहें
US-ईरान तनाव: हाल ही में सैन्य तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई में रुकावट और ग्लोबल स्तर पर रिस्क से बचने की चिंताएं बढ़ गई हैं.
क्रूड ऑयल में उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 प्रति बैरल के पार चली गई है, जिससे भारत के इंपोर्ट बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
फेड रेट-हाइक की आशंका: US फेड चेयर केविन वॉर्श के सख्त बयानों से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं, जिससे डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मजबूती आई है.
कमजोर ग्लोबल संकेत: जियोपॉलिटिकल और मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर चिंताओं के बीच एशियाई बाजार भी आज कमजोर कारोबार कर रहे हैं, जिसका असर भारतीय इक्विटीज पर भी पड़ा है.
रुपये पर बना दबाव: बढ़ती क्रूड कीमतें और रेट-हाइक की मजबूत होती उम्मीदें भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा रही हैं, जो सेंटिमेंट के लिए एक और निगेटिव फैक्टर साबित हो रहा है.
निवेशकों के लिए आगे क्या अहम रहेगा?
सेक्स और निफ्टी इंडेक्स सोमवार, 31 अगस्त को निगेटिव ग्लोबल फैक्टर्स और मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव की वजह से नीचे की तरफ मूव कर रहे हैं. क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए महंगाई और इम्पोर्ट कॉस्ट को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं. इसके अलावा आने वाले MSCI इंडेक्स री-क्लासिफिकेशन को लेकर भी निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जो बाजार में सावधानी की एक और वजह बन रहा है.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
BIRC 2026: भारतीय Rice Export का बढ़ा दबदबा, 138 देशों के 3,317 Buyers ने कराया Registration
राष्ट्रीय राजधानी में अक्टूबर में होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026 के लिए अब तक 138 देशों के 3,317 खरीदारों ने पंजीकरण कराया है। इससे भारतीय चावल की किस्मों में बढ़ती वैश्विक रुचि का पता चलता है। बीआईआरसी 2026 का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक भारत मंडपम में होगा। आयोजक की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 30 अगस्त तक 138 देशों के 3,317 खरीदारों ने पंजीकरण कराया है।
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा, ‘‘बीआईआरसी 2026 को मिल रही प्रतिक्रिया स्पष्ट रूप से बताती है कि वैश्विक बाजारों का भारत की ओर कितना व्यापक रुझान है। 138 देशों के 3,317 खरीदार पहले ही पंजीकरण करा चुके हैं। हमारा ध्यान इस अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को भारतीय चावल निर्यातकों के लिए नए व्यापार मार्गों, नए खरीदारों और दीर्घकालिक कारोबारी संबंधों में बदलने पर है।’’ उन्होंने कहा कि इस साल के सम्मेलन में पंजीकरण कराने वाले खरीदारों का भौगोलिक विस्तार चर्चा का एक विषय बनकर उभर रहा है। पड़ोसी बाजारों, अफ्रीका, खाड़ी तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के खरीदारों की इसमें महत्वपूर्ण भागीदारी है। देशवार पंजीकरण में 336 खरीदारों के साथ बांग्लादेश सबसे आगे है। इसके बाद बेनिन के 179 और नाइजीरिया के 177 खरीदार हैं।
संयुक्त अरब अमीरात से 145 खरीदारों ने पंजीकरण कराया है जबकि नेपाल और फिलीपीन से 137-137 खरीदार हैं। इथियोपिया से 127, सऊदी अरब से 125 तथा इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से 109-109 खरीदारों के पंजीकरण हुए हैं। सेनेगल, इराक, सोमालिया, गिनी, यमन, कोट द ईवोआर, नाइजर, ऑस्ट्रेलिया, माली, मलेशिया, घाना, अंगोला और केन्या समेत कई अन्य स्थापित और उभरते बाजारों के खरीदारों ने भी पंजीकरण कराया है।
आईआरईएफ ने कहा कि बीआईआरसी 2026 का उद्देश्य बढ़ती अंतरराष्ट्रीय रुचि को भारतीय चावल निर्यातकों के लिए नए कारोबारी अवसरों और दीर्घकालिक संबंधों में बदलना है। गर्ग ने कहा कि बीआईआरसी 2026 को ऐसे कारोबारी मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तथा भारतीय निर्यातकों के बीच लक्षित संवाद को सुगम बना सके।
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