Explainer: BJP-SAD गठबंधन पर अटका पेंच? सीटों से लेकर CM फेस तक..., दोनों के सामने क्या चुनौतियां?
BJP-SAD Alliance: पंजाब की सियासत में एक बार फिर हलचल है. इस बार चर्चा का विषय है क्या भाजपा और शिरोमणि अकाली दल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले फिर एक मंच पर आएंगे? दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों से दोनों दलों के बीच नजदीकियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं. मगर जिस मुद्दे पर बात हर बार अटक जाती है वह है सीटों का बंटवारा. आइए समझते हैं कि आखिर पूरा माजरा क्या है?
BJP-SAD दोनों दल फिर पास क्यों आ रहे हैं?
पंजाब के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इसके बाद अब उनकी एक और अहम बैठक भाजपा के पंजाब चुनाव प्रभारी सीआर पाटिल के साथ हुई है. जानकारी के मुताबिक यह मुलाकात काफी लंबी बताई जा रही है और इसे गठबंधन की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है. यहां बता दें कि पाटिल को हाल ही में पंजाब की चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है और उनके आने के बाद से ही गठबंधन को लेकर सरगर्मी तेज हुई है.
Ahead of the Panjab University Student Council (PUCSC) elections, SOI has extended its support to ABVP’s presidential candidate Ankit Bidhan. The ABVP (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) and SOI (Student Organisation of India) have formed an alliance for the Panjab University… pic.twitter.com/Y19cipOMpj
— ANI (@ANI) August 31, 2026
20 साल साथ रहने के बाद BJP-SAD क्यों हुए थे अलग?
गौरतलब है कि अकाली दल और भाजपा करीब दो दशकों तक साथ रहे हैं. चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक 2007 से 2017 तक पंजाब में दोनों ने मिलकर सरकार भी चलाई थी. एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 में दोनों में उस समय मतभेद हुए जब केंद्र की बीजेपी सरकार ने तीन कृषि कानून पेश किए और इसके विरोध में अकाली दल ने एनडीए का साथ छोड़ दिया बता दें तब से अकाली दल राज्य में लगातार कमजोर होती जा रही है और पंजाब में भाजपा ने अकेले दम पर अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश भी की है.
सीटों के बंटवारे पर पेंच क्यों फंसा है?
पंजाब मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में दोनों पार्टियों के बीच पुराने गठबंधन में अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में रहता था. विधानसभा की 117 में से भाजपा को महज 23 सीटें मिलती थीं, जबकि बाकी सीटों पर अकाली दल चुनाव लड़ता था. वहीं, लोकसभा की बात करें तो 13 सीटों में से भी भाजपा के हिस्से सिर्फ 3 सीटें आती थीं. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ते हुए कई विधानसभा क्षेत्रों में अच्छी बढ़त हासिल की थी खासकर शहरी इलाकों में वह पार्टी का जनाधार बढ़ा है. इसी आधार पर पार्टी अब गठबंधन में ज्यादा सीटों और बड़े भाई की भूमिका की मांग कर रही है. उधर, दूसरी तरफ अकाली दल के लिए जिसकी पकड़ अब तक ग्रामीण और पंथक वोटरों पर मानी जाती रही है इतनी बड़ी छूट देना आसान नहीं है. पिछले विधानसभा चुनावों के बाद अब उसे अपनी साख बचाना मुश्किल हो रहा है.
#WATCH | Patiala, Punjab: SAD president Sukhbir Singh Badal says, "... The employees are still protesting. There are clear High Court directions, but the government is still not taking proper action... I want to tell the employees of Punjab that the Shiromani Akali Dal is with… pic.twitter.com/JoafqwK5dm
— ANI (@ANI) August 30, 2026
बीजेपी ने नहीं खोले पत्ते, दोनों पार्टियों द्वारा बिझाई जा रही बिसात....
खबरों की मानें तो अकाली दल ने कुछ ग्रामीण सीटों पर अपने नेताओं को अभी से तैयारी न करने का इशारा दिया है जिसे संभावित सीट-बंटवारा फॉर्मूले से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि भाजपा की ओर से आधिकारिक रुख अब भी यही है कि पार्टी सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष अपने पंजाब दौरे में यह बात दोहरा भी चुके हैं.
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मुख्यमंत्री पद और नेतृत्व का सवाल
पंजाब सूत्रों के मुताबिक BJP-SAD के बीच विधानसभा चुनाव 2027 में सीटों के अलावा एक और पेचीदा मसला है. वह है गठबंधन होने की सूरत में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद किसके पास रहेगा? सूत्रों के मुताबिक इस पर भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन अभी कोई स्पष्ट फॉर्मूला सामने नहीं आया है. भाजपा अब खुद को पंजाब में सिर्फ जूनियर पार्टनर के तौर पर देखे जाने से बचना चाहती है जबकि अकाली दल के लिए नेतृत्व की भूमिका छोड़ना पार्टी की पहचान से जुड़ा सवाल बन गया है.
VIDEO | Chandigarh: On BJP announcing it will contest all 117 seats in the Assembly elections, Punjab Congress President Amarinder Singh Raja Warring says, "Prime Minister Modi met Sukhbir Singh Badal, after which reports started emerging that the two want to reach an… pic.twitter.com/rHHj7hLh2o
— Press Trust of India (@PTI_News) August 25, 2026
अकाली दल के भीतर बगावत भी बड़ी चुनौती
अकाली दल के सामने सिर्फ भाजपा से डील ही नहीं अपनी ही पार्टी के भीतर की टूट भी एक बड़ी चुनौती है. 2017 की करारी हार के बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़कर अपने अलग गुट बना लिए थे. इन नेताओं ने हार का ठीकरा बादल परिवार पर फोड़ा था. अगर भाजपा के साथ गठबंधन होता है तो इन बागी नेताओं के साथ रिश्ता कैसा रहेगा यह भी अभी साफ नहीं है।
दोनों तरफ के कार्यकर्ता असमंजस में
गठबंधन की खबरों के बीच सबसे ज्यादा उलझन जमीनी कार्यकर्ताओं में देखी जा रही है. अकाली दल के कार्यकर्ता समझ नहीं पा रहे कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी या भाजपा के साथ जबकि भाजपा का बार-बार यह दोहराना कि वह सभी सीटों पर लड़ने की तैयारी में है. पार्टी के अंदर से ही यह आवाज उठ रही है कि गठबंधन की लगातार चर्चा से संगठन का अपना नैरेटिव कमजोर पड़ सकता है. वहीं, अकाली दल के कुछ नेताओं ने खुलकर कहा है कि पंजाब के लोग दोनों पुराने सहयोगियों को फिर साथ देखना चाहते हैं और उन्होंने इस दौरान कांग्रेस पर भी निशाना साधा.
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सत्तारूढ़ AAP का पलटवार
इस पूरी कवायद पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल का नेतृत्व पंजाब को लूटने के लिए भाजपा के साथ हाथ मिलाने को बेताब है और पार्टी गठबंधन के लिए मानो गिड़गिड़ा रही है. जाहिर है अगर यह गठबंधन सिरे चढ़ता है तो सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए यह एक नई चुनौती बनकर उभर सकता है.जबकि आप और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अपनी-अपनी स्थिति को बेहद मजबूत बताया है.
BJP will contest all 117 seats in Punjab: BL Santosh amid speculation over alliance with SAD
— ANI Digital (@ani_digital) August 24, 2026
Read @ANI Story | https://t.co/a4iyAYE1T3#BJP #SAD #BLSantosh #Punjab pic.twitter.com/o4edHaYb8e
FAQ
Q: भाजपा और अकाली दल ने गठबंधन कब तोड़ा था?
A: 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से नाता तोड़ लिया था.
Q: पुराने गठबंधन में सीटों का बंटवारा कैसा था?
A: विधानसभा की 117 सीटों में से भाजपा को करीब 23 सीटें मिलती थीं, बाकी पर अकाली दल चुनाव लड़ता था. लोकसभा की 13 सीटों में भाजपा के पास सिर्फ तीन सीटें होती थीं.
Q: क्या दोनों दलों ने आधिकारिक तौर पर गठबंधन का ऐलान कर दिया है?
A: नहीं, अभी तक किसी भी पार्टी की ओर से औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है. बातचीत जारी होने की खबरें हैं, लेकिन अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व पर निर्भर है.
Q: भाजपा ज्यादा सीटें क्यों मांग रही है?
A: 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले लड़ते हुए भाजपा ने कई विधानसभा क्षेत्रों, खासकर शहरी इलाकों में मजबूत बढ़त हासिल की थी. इसी बढ़े हुए जनाधार के आधार पर पार्टी अब बड़े भाई की भूमिका और अधिक सीटों की मांग कर रही है.
Q: यह गठबंधन कब तक तय हो सकता है?
A: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं. ऐसे में उम्मीद है कि सीट-बंटवारे और नेतृत्व से जुड़े मसलों पर अगले कुछ महीनों में स्थिति साफ हो जाएगी.
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ का फर्स्ट लुक जारी, फिर लौटे अजय देवगन और तब्बू, जयदीप अहलावत-प्रकाश राज की भी हुई दमदार एंट्री
Drishyam: The Conclusion: अजय देवगन की पॉपुलर फ्रेंचाइजी ‘दृश्यम’ अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंचने वाली है. फिल्म के तीसरे और अंतिम पार्ट ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ को लेकर दर्शकों के बीच काफी एक्साइटमेंट है. ऐसे में अब मेकर्स ने फिल्म के कई अहम किरदारों के फर्स्ट लुक पोस्टर जारी कर दिए हैं. इन पोस्टर्स में अजय देवगन के साथ तब्बू, श्रिया सरन और रजत कपूर की वापसी देखने को मिल रही है. वहीं, जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की भी इस फ्रेंचाइजी में एंट्री हुई है. फिल्म की कहानी एक बार फिर विजय सालगांवकर और उसके परिवार के आसपास घूमती नजर आएगी. विजय का किरदार अजय देवगन निभा रहे हैं. वो एक बार फिर अपने परिवार को मुश्किलों से बचाने की कोशिश करते दिखाई देंगे.
फिर विजय सालगांवकर बनेंगे अजय देवगन
‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी के सबसे खास किरदार विजय सालगांवकर की भूमिका में अजय देवगन एक बार फिर नजर आएंगे. पिछले दोनों पार्ट में विजय ने अपने परिवार को बचाने के लिए पुलिस से लेकर कई मुश्किल हालात का सामना किया था. फिल्म के तीसरे पार्ट में भी विजय के सामने एक नई चुनौती होगी. मेकर्स की ओर से जारी फर्स्ट लुक में अजय देवगन को उनके पुराने अंदाज में देखा जा सकता है. वहीं, श्रिया सरन एक बार फिर विजय की पत्नी नंदिनी सालगांवकर के किरदार में नजर आएंगी. विजय और नंदिनी का परिवार एक बार फिर मुश्किलों में घिरता दिखाई देगा.
बदले अंदाज में लौटेंगी तब्बू
फिल्म में तब्बू एक बार फिर मीरा देशमुख के किरदार में वापसी कर रही हैं. पिछले दोनों पार्ट में मीरा ने विजय और उसके परिवार के खिलाफ जांच में अहम भूमिका निभाई थी. इस बार कहानी में मीरा का किरदार और भी ज्यादा व्यक्तिगत नजर आएगा. मेकर्स के मुताबिक, अपने बेटे की मौत का बदला लेने की कोशिश में मीरा की कहानी एक नए मोड़ पर पहुंचेगी. वहीं, रजत कपूर भी महेश देशमुख के किरदार में वापसी कर रहे हैं. महेश अपने बेटे को खोने के दर्द से अब भी बाहर नहीं निकल पाया है और इस वजह से उसके किरदार में भी काफी गहराई देखने को मिल सकती है.
जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की एंट्री
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ में इस बार दो बड़े कलाकारों की एंट्री हुई है. जयदीप अहलावत फिल्म में राजवीर सिंह तोमर का किरदार निभाएंगे. वो क्राइम ब्रांच के एसपी के रोल में नजर आएंगे. राजवीर सिंह तोमर की एंट्री से विजय सालगांवकर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. अब देखना होगा कि वो विजय तक पहुंचने में कामयाब होते हैं या नहीं. वहीं, प्रकाश राज फिल्म में वकील इंद्रजीत शेट्टी के किरदार में नजर आएंगे. उनका किरदार विजय और उसके परिवार के आसपास चल रही कहानी में एक अहम भूमिका निभा सकता है.
पुराने किरदार भी आएंगे नजर
फिल्म में सिर्फ नए किरदारों की एंट्री नहीं हुई है, बल्कि ‘दृश्यम’ की दुनिया से जुड़े कई पुराने कलाकार भी वापसी कर रहे हैं. कमलेश सावंत, इशिता दत्ता और मृणाल जाधव भी फिल्म का हिस्सा हैं. ऐसे में फिल्म में पुराने किरदारों और नए चेहरों का दिलचस्प मेल देखने को मिलेगा.
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ की कहानी होगी नई
‘दृश्यम’ की पिछली दोनों फिल्मों को दर्शकों का काफी प्यार मिला था. अब तीसरे पार्ट की कहानी वहीं से आगे बढ़ेगी, जहां पिछली फिल्म खत्म हुई थी. फिल्म के निर्देशक और राइटर अभिषेक पाठक हैं. उनके साथ आमिल कीयान खान और परवेज शेख ने फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले पर काम किया है. मेकर्स के मुताबिक, तीसरे पार्ट के लिए नई कहानी और नया स्क्रीनप्ले तैयार किया गया है. फिल्म में पुराने सवालों और किरदारों से जुड़े कई राज सामने आने की उम्मीद है.
क्या विजय सालगांवकर का होगा ‘चेकमेट’?
‘दृश्यम’ की कहानी में अब तक विजय सालगांवकर हर बार पुलिस और जांच एजेंसियों से एक कदम आगे रहा है. लेकिन इस बार उसके सामने पहले से ज्यादा मजबूत विरोधी नजर आ रहे हैं. जयदीप अहलावत के रूप में क्राइम ब्रांच के एसपी और प्रकाश राज के रूप में एक नए वकील की एंट्री ने कहानी को और दिलचस्प बना दिया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय एक बार फिर अपने परिवार को बचा पाएगा या इस बार पुलिस और कानून उसके बनाए पूरे खेल को समझने में कामयाब हो जाएंगे?
2 अक्टूबर 2026 को रिलीज होगी फिल्म
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ का निर्देशन अभिषेक पाठक कर रहे हैं. फिल्म को स्टार स्टूडियो18 और पैनोरमा स्टूडियोज के बैनर तले बनाया जा रहा है. फिल्म के प्रोड्यूसर्स में आलोक जैन, अजीत अंधारे, कुमार मंगत पाठक और अभिषेक पाठक शामिल हैं. मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट भी घोषित कर दी है. ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. फिल्म के फर्स्ट लुक सामने आने के बाद अब दर्शकों की नजर इसके ट्रेलर पर है. विजय सालगांवकर की कहानी इस बार किस मोड़ पर खत्म होगी और क्या वो आखिरी बार भी पुलिस को मात दे पाएगा, इसका जवाब फिल्म की रिलीज के बाद ही मिलेगा.
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