क्रिकेटर बनने का था सपना, दोस्त की सलाह ने बदली जिंदगी, आज पशु चिकित्सा अधिकारी बनकर कर रहे सेवा
बुरहानपुर जिले में डॉ. अजय रघुवंशी, जिनका बचपन का सपना क्रिकेटर बनने का था. दोस्त की सलाह पर पशु चिकित्सा अधिकारी बने. आज वे 32 वर्षों से पशुओं की सेवा कर रहे हैं. वरिष्ठ पशु चिकित्सक के पद पर कार्यरत हैं.
Black Raisins: आयरन से भरपर है काली किशमिश, हड्डियों में लाएगी नई जान! कमाल के हैं 5 फायदे
Black Raisins: काली किशमिश स्वाद में मीठी होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर मानी जाती है। अंगूर को सुखाकर तैयार की जाने वाली यह ड्राई फ्रूट्स की श्रेणी में आने वाली चीज कई घरों में रोजाना के खानपान का हिस्सा है। इसे सीधे खाने के अलावा दूध, दलिया, खीर या दूसरे व्यंजनों में भी शामिल किया जा सकता है। काली किशमिश में प्राकृतिक शर्करा, फाइबर और कई तरह के माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, इसलिए संतुलित मात्रा में इसका सेवन डाइट में विविधता ला सकता है।
खासकर भीगी हुई काली किशमिश खाने का चलन काफी पुराना है। रात में कुछ किशमिश पानी में भिगोकर सुबह खाने से इसे नरम बनाना आसान होता है और इसका सेवन भी सुविधाजनक रहता है। हालांकि, किसी भी ड्राई फ्रूट की तरह इसे भी सीमित मात्रा में खाना बेहतर है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शुगर और कैलोरी होती है। आइए जानते हैं काली किशमिश को डाइट में शामिल करने से कौन-कौन से संभावित फायदे मिल सकते हैं।
काली किशमिश खाने के बड़े फायदे
पाचन के लिए फायदेमंद
काली किशमिश में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को सामान्य रखने में मदद कर सकता है। नियमित डाइट में पर्याप्त फाइबर लेने से मल त्याग बेहतर रहता है और कब्ज जैसी परेशानी से बचाव में मदद मिल सकती है। सुबह भिगोई हुई किशमिश खाने का चलन इसी वजह से भी लोकप्रिय है। हालांकि कब्ज लंबे समय से बनी हुई है तो केवल किशमिश पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
आयरन का स्रोत
किशमिश में आयरन सहित कई खनिज पाए जाते हैं। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व है। संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में किशमिश का सेवन आयरन के सेवन में योगदान दे सकता है। लेकिन आयरन की कमी या एनीमिया होने पर केवल किशमिश को उपचार नहीं माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह और उचित जांच जरूरी होती है।
हड्डियों के लिए उपयोगी पोषक तत्व
काली किशमिश में कैल्शियम और बोरॉन जैसे कुछ खनिज पाए जाते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं। इसे दूध, दही, नट्स और बीजों जैसी अन्य पौष्टिक चीजों के साथ डाइट में शामिल किया जा सकता है। अच्छी हड्डियों के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं
किशमिश में पॉलीफेनोल जैसे पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निपटने वाली प्राकृतिक प्रक्रियाओं में योगदान कर सकते हैं। रोजाना की डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स और बीजों के साथ थोड़ी मात्रा में किशमिश शामिल करना संतुलित खानपान का हिस्सा हो सकता है।
तुरंत ऊर्जा देने में मदद
काली किशमिश में प्राकृतिक रूप से मौजूद कार्बोहाइड्रेट और शुगर शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए इसे व्यस्त दिनचर्या में छोटे स्नैक के तौर पर लिया जा सकता है। हालांकि, इसकी मिठास को देखते हुए मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को किशमिश खाने की मात्रा अपने डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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