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Car Safety Tips: सफर पर निकलने से पहले चेक करें टायर, ब्रेक और बैटरी, सेफ होगी राइड

Car Safety Tips: लंबी यात्रा पर निकलने से पहले कार की फिटनेस और जरूरी सिस्टम की जांच कर लेना बेहद जरूरी है। घिसे हुए टायर, कमजोर ब्रेक, खराब बैटरी या किसी तरह का फ्लूइड लीकेज सफर के दौरान परेशानी बढ़ा सकता है। कई बार छोटी सी लापरवाही ब्रेकडाउन के साथ सुरक्षा के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए रोड ट्रिप शुरू करने से पहले कार को अच्छी तरह तैयार कर लेना बेहतर है। आइए जानते हैं सफर से पहले किन जरूरी चीजों की जांच करनी चाहिए।

1. टायर और एयर प्रेशर जरूर चेक करें
लंबी रोड ट्रिप से पहले कार के सभी टायरों का एयर प्रेशर जरूर जांचें। टायर में कंपनी द्वारा सुझाए गए स्तर के अनुसार ही हवा होनी चाहिए। इसके साथ टायर के ट्रेड और ओवरऑल कंडीशन को भी ध्यान से देखें।

अगर किसी टायर पर कट लगा है, उसमें असामान्य घिसावट है या वह काफी ज्यादा घिस चुका है, तो यात्रा से पहले उसे बदलवा लेना बेहतर होगा। स्पेयर टायर की भी जांच करें और सुनिश्चित करें कि उसमें पर्याप्त हवा हो और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके।

सही एयर प्रेशर से टायर की परफॉर्मेंस बेहतर रखने में मदद मिलती है और ईंधन की खपत को नियंत्रित रखने के साथ टायर से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी कम हो सकता है। कोशिश करें कि टायर की जांच यात्रा से एक दिन पहले कर लें।

2. इंजन ऑयल और दूसरे फ्लूइड्स की जांच करें
लॉन्ग ड्राइव पर जाने से पहले इंजन ऑयल का लेवल और उसकी कंडीशन जरूर चेक करें। अगर ऑयल कम है या काफी पुराना हो चुका है, तो जरूरत के अनुसार टॉप-अप या इसे बदलवा लेना चाहिए।

इसके अलावा कूलेंट, ब्रेक फ्लूइड और विंडशील्ड वॉशर फ्लूइड का लेवल भी जांचें। कार के नीचे या इंजन के आसपास किसी तरह के फ्लूइड लीकेज के निशान दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज न करें और सफर से पहले समस्या को ठीक करवाएं।

फ्लूइड का सही स्तर इंजन को बेहतर तरीके से काम करने और ओवरहीटिंग जैसी समस्या से बचाने में मदद करता है।

3. ब्रेक सिस्टम को जरूर चेक करें
रोड ट्रिप से पहले ब्रेक सिस्टम की जांच सबसे महत्वपूर्ण कामों में से एक है। ब्रेक पैडल दबाने पर अगर किसी तरह की अजीब आवाज, कंपन या असामान्य महसूस हो, तो कार को तुरंत मैकेनिक से चेक करवाएं।

इसके साथ ब्रेक पैड और ब्रेक डिस्क की स्थिति भी देखना जरूरी है। अगर इनमें ज्यादा घिसावट है, तो लंबी यात्रा से पहले इन्हें बदलवा लेना बेहतर रहेगा। खासकर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ जाता है, इसलिए कार का ब्रेकिंग सिस्टम अच्छी स्थिति में होना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।

4. बैटरी, लाइट्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम जांचें
यात्रा शुरू करने से पहले कार की बैटरी और बैटरी टर्मिनल्स की जांच कर लें। अगर टर्मिनल्स पर गंदगी या जंग जमा है, तो उन्हें साफ करवाएं। बैटरी कमजोर लग रही है तो उसका टेस्ट भी करवा लेना बेहतर होगा।

इसके अलावा हेडलाइट, इंडिकेटर, ब्रेक लाइट और हॉर्न को भी चेक करें। अगर रात में ड्राइव करने की योजना है, तो सभी लाइट्स का सही तरीके से काम करना और भी जरूरी हो जाता है।

कमजोर बैटरी के कारण रास्ते में कार स्टार्ट होने में परेशानी आ सकती है। इसलिए लंबी यात्रा से पहले बैटरी की स्थिति की जांच जरूर कर लें।

5. AC और इमरजेंसी किट तैयार रखें
गर्म मौसम में लंबी यात्रा के दौरान कार का AC लगातार इस्तेमाल होता है। इसलिए सफर से पहले यह जांच लें कि AC ठीक से कूलिंग कर रहा है या नहीं। अगर कूलिंग कम है या कोई दूसरी समस्या है, तो यात्रा से पहले इसकी जांच करवाना बेहतर है।

इसके अलावा कार में जरूरी इमरजेंसी सामान भी रखें। स्पेयर व्हील, जैक, टूल किट, फर्स्ट-एड बॉक्स, पानी, टॉर्च, मोबाइल चार्जर और पावर बैंक जैसी चीजें अचानक आने वाली परेशानी के समय काफी काम आ सकती हैं।

इन छोटी-छोटी तैयारियों से रोड ट्रिप के दौरान ब्रेकडाउन और अनावश्यक परेशानी का जोखिम कम किया जा सकता है और सफर को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है।

(मंजू कुमारी)

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Alto K10 vs Tiago: कम कीमत, ज्यादा माइलेज या बेहतर पावर? जानें कौन-सी कार है बेस्ट

Alto K10 vs Tiago: मारुति सुजुकी ऑल्टो K10 और टाटा टियागो भारतीय बाजार की किफायती कारों में शामिल हैं। दोनों मॉडल कम बजट में अच्छे माइलेज और जरूरी फीचर्स के साथ आते हैं। हालांकि इंजन क्षमता, पावर, सेफ्टी, फीचर्स और कीमत के मामले में दोनों के बीच काफी अंतर है। अगर आप बजट में नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि ऑल्टो K10 और टियागो में से कौन-सी कार आपके लिए बेहतर हो सकती है।

पावर के मामले में कौन आगे?
ऑल्टो K10 में 1.0-लीटर यानी 998cc K10C पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन 68bhp की अधिकतम पावर और 89Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है।

वहीं, टाटा टियागो में 1.2-लीटर यानी 1199cc Revotron पेट्रोल इंजन मिलता है। यह इंजन 86bhp की पावर और 113Nm का टॉर्क देता है। यानी इंजन क्षमता और पावर दोनों के मामले में टियागो आगे है।

दोनों कारों में 5-स्पीड मैनुअल और AMT ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है। साथ ही दोनों मॉडल में कंपनी-फिटेड सीएनजी वेरिएंट भी उपलब्ध हैं।

ऑल्टो K10 का छोटा इंजन शहर में हल्की और आसान ड्राइविंग के लिए पर्याप्त है, जबकि टियागो का ज्यादा पावरफुल इंजन हाईवे और ओवरटेकिंग के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

माइलेज में कौन बेहतर?
अगर कार खरीदते समय आपकी सबसे बड़ी प्राथमिकता माइलेज है, तो ऑल्टो K10 का पलड़ा भारी नजर आता है।

ऑल्टो K10 के पेट्रोल-मैनुअल वेरिएंट का ARAI-सर्टिफाइड माइलेज 24.39kmpl और ऑटोमैटिक वेरिएंट का 24.9kmpl तक है। इसका सीएनजी वेरिएंट 33.85km/kg तक का माइलेज देने का दावा करता है।

दूसरी ओर, टियागो पेट्रोल का माइलेज करीब 19-20kmpl है, जबकि सीएनजी वेरिएंट करीब 26.49km/kg का माइलेज देता है। इस लिहाज से ईंधन की बचत के मामले में ऑल्टो K10 ज्यादा आकर्षक विकल्प बनती है।

सिटी और हाईवे ड्राइविंग में कौन बेहतर?
शहर में रोजाना इस्तेमाल के लिए ऑल्टो K10 का कॉम्पैक्ट आकार और हल्का वजन इसे आसान बनाता है। भारी ट्रैफिक, संकरी सड़कों और छोटी पार्किंग जगहों में इसे चलाना और पार्क करना अपेक्षाकृत आसान रहता है।
टियागो का बड़ा इंजन ज्यादा पावर और टॉर्क देता है। इसलिए हाईवे पर तेज गति से ड्राइविंग और ओवरटेकिंग के दौरान यह ऑल्टो K10 की तुलना में ज्यादा सक्षम महसूस हो सकती है।

ऐसे में रोजाना शहरी इस्तेमाल के लिए ऑल्टो K10 और ज्यादा पावर व हाईवे ड्राइविंग के लिए टियागो को प्राथमिकता दी जा सकती है।

सेफ्टी में कौन आगे?
सेफ्टी के मामले में टियागो को बढ़त मिलती है। इसे ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 4-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिल चुकी है। कार में डुअल एयरबैग, ABS के साथ EBD, कॉर्नर स्टेबिलिटी कंट्रोल, रियर पार्किंग सेंसर और मजबूत बॉडी शेल जैसे सेफ्टी फीचर्स मिलते हैं।

वहीं ऑल्टो K10 को क्रैश टेस्ट में 2-स्टार रेटिंग मिली है। इसमें भी डुअल एयरबैग, ABS के साथ EBD और रियर पार्किंग सेंसर जैसे जरूरी सेफ्टी फीचर्स मौजूद हैं।

इसलिए उपलब्ध क्रैश-टेस्ट परिणामों और फीचर्स को देखते हुए सेफ्टी के मामले में टियागो ज्यादा मजबूत विकल्प नजर आती है।

फीचर्स में कौन ज्यादा बेहतर?
ऑल्टो K10 के टॉप वेरिएंट में 7-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, Android Auto और Apple CarPlay, डिजिटल स्पीडोमीटर और फ्रंट पावर विंडो जैसे फीचर्स मिलते हैं।

टियागो में भी 7-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। इसके साथ Harman साउंड सिस्टम, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल ORVM जैसे फीचर्स मिलते हैं।

इस वजह से ज्यादा प्रीमियम फीचर्स और बेहतर केबिन अनुभव चाहने वाले खरीदारों के लिए टियागो ज्यादा आकर्षक विकल्प हो सकती है।

कीमत में कितना अंतर?
ऑल्टो K10 की एक्स-शोरूम कीमत करीब 3.70 लाख रुपये से शुरू होकर 5.45 लाख रुपये तक जाती है। वहीं टियागो की एक्स-शोरूम कीमत करीब 4.70 लाख रुपये से शुरू होकर 8.55 लाख रुपये तक जाती है।

यानी शुरुआती कीमत के मामले में ऑल्टो K10 करीब 1 लाख रुपये तक सस्ती है। हालांकि टियागो ज्यादा पावर, फीचर्स और बेहतर सेफ्टी पैकेज के साथ आती है, जिसके लिए आपको ज्यादा बजट खर्च करना होगा।

किसके लिए कौन-सी कार बेहतर?
अगर आपका बजट सीमित है और आप कम कीमत, बेहतर माइलेज और शहर में आसान ड्राइविंग वाली कार चाहते हैं, तो मारुति सुजुकी ऑल्टो K10 एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

वहीं अगर आपकी प्राथमिकता ज्यादा पावर, बेहतर हाईवे परफॉर्मेंस, ज्यादा प्रीमियम फीचर्स और बेहतर क्रैश-टेस्ट रेटिंग है, तो टाटा टियागो ज्यादा बेहतर पैकेज साबित हो सकती है।

कुल मिलाकर, कम बजट और माइलेज के लिए ऑल्टो K10, जबकि पावर, फीचर्स और सेफ्टी के लिए टियागो को चुना जा सकता है।

(मंजू कुमारी)
 

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