Donald Trump ने Lake Ontario का नाम बदलकर Lake America करने का दिया आदेश
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 अगस्त, 2026 को एक कार्यकारी आदेश जारी कर ‘‘लेक ओंटारियो’’ का नाम बदलकर “लेक अमेरिका” करने का आदेश दिया। उन्होंने दावा किया कि उनका प्रशासन पहले ही ‘‘उन सभी संबंधित लोगों को सूचित कर चुका है, जिन्हें सूचित किया जाना आवश्यक है।’’ ऐसा पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने किसी स्थान का नाम बदला हो। वर्ष 2025 में उन्होंने एक कार्यकारी आदेश जारी कर मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ करने और देश की सबसे ऊंची चोटी अलास्का स्थित डेनाली का नाम फिर से ‘माउंट मैकिनले’ करने का आदेश दिया था।
कुछ लोगों को हालांकि इस तरह नाम बदलना देश के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों की तुलना में कम महत्वपूर्ण लग सकता है, लेकिन अमेरिका में स्थानों के नाम बदलने की एक औपचारिक प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जाता है। आमतौर पर लोगों को भ्रमित न होना पड़े, इसलिए सरकार आधिकारिक और सर्वमान्य नामों का इस्तेमाल करती है। अमेरिका में, स्थानों के नामों का मानकीकरण अमेरिकी भौगोलिक नामकरण बोर्ड द्वारा किया जाता है, जो अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण का हिस्सा है।
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यह एजेंसी मानचित्र बनाने का काम करती है। ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकारी आदेश में अमेरिकी भौगोलिक नामकरण बोर्ड से कहा था कि वह “दूरदर्शी और देशभक्त अमेरिकियों के योगदान का सम्मान करे” और इसे ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं में बदलाव करे। ‘लेक ओंटारियो’ उन कई बड़ी झीलों में से एक है, जिनके साथ अमेरिका और कनाडा की सीमाएं लगती हैं।
किसी स्थान का नाम बदलने की शुरुआत स्थानीय स्तर पर होती है। राज्य या काउंटी के लोग नाम बदलने का प्रस्ताव रखते हैं और इसके समर्थन में लोगों को लामबंद करते हैं। हर राज्य में इसकी प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
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मिनेसोटा ने 2018 में मिनियापोलिस की एक बड़ी झील का नाम बदलकर ‘ब्डे माका स्का’ कर दिया था। डेनाली का नाम बदलने में 40 साल लग गये थे। इसका नाम 19वीं सदी के अंत में रखे गए नाम ‘माउंट मैकिनले’ से बदलकर डेनाली किया गया था।
अलास्का राज्य ने 1975 में नाम बदलने का अनुरोध किया था, लेकिन भौगोलिक नामकरण बोर्ड ने इसपर कोई कार्रवाई नहीं की। वर्ष 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आंतरिक मामलों के विभाग के लिए एक नयी प्रमुख सैली ज्वेल को नियुक्त किया। जिस समय ओबामा अगस्त 2015 के अंत में अलास्का की यात्रा पर गए, उसी समय ज्वेल ने नाम बदलने को आधिकारिक घोषित कर दिया।
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उन्होंने ऐसा एक ऐसे कानून के तहत किया, जो आंतरिक मामलों के मंत्री को किसी नाम को बदलने की अनुमति देता है, यदि बोर्ड उचित समय के भीतर उस प्रस्ताव पर कार्रवाई नहीं करता। मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलना, हालांकि एक अलग तरह का मामला है, क्योंकि यह अमेरिका की सीमाओं के भीतर स्थित किसी भौगोलिक स्थान का नाम बदलने से अलग है। मेक्सिको की पूरी खाड़ी अमेरिका के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।
तट से समुद्र की ओर शुरुआती 12 मील उस देश के क्षेत्र का हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन उसके बाहर का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है। भौगोलिक नामकरण बोर्ड ने हालांकि आधिकारिक अमेरिकी मानचित्रों में इसका नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ कर दिया है, और भले ही वह ओंटारियो झील के नाम में बदलाव को मंजूरी दे दे, लेकिन स्थानों के नाम तय करने के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय बोर्ड नहीं है। हर देश यह तय करता है कि वह किसी स्थान को किस नाम से पुकारेगा और अमेरिका के पास दूसरे देशों को अपने मानचित्रों पर उन स्थानों के नाम बदलने के लिए मजबूर करने का कोई आधिकारिक तरीका नहीं है।
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