Nepal Floods: तिमुरे में अचानक आए सैलाब से भारी तबाही, पीड़ितों ने बयां किया खौफनाक मंजर
शुरू में दीपक तमांग को लगा कि जमीन हिल रही है। फिर उन्होंने देखा कि पानी, कीचड़ और पत्थरों का सैलाब तिमुरे बाजार में भोटेकोशी नदी के किनारे बने मकानों की ओर बढ़ रहा है। उन्हें एहसास हुआ कि ऊपर की ओर चढ़ाई करने के अलावा कोई चारा नहीं है।
नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ से बचे पीड़ितों ने आपदा के दौरान का बेहद डरावना मंजर बयां किया है, जिसमें ऊंचाई की तरफ भागने की होड़, आसपास के घरों का ढहना और लोगों का पानी, कीचड़ तथा मलबे के तेज बहाव में बहना शामिल है। कुछ लोग तेजी से ऊंची पहाड़ियों की ओर भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे, जबकि कुछ अन्य बेबसी से दोस्तों और परिजन को तेज बहाव के साथ बहते हुए देखते रहे। वहीं, जो लोग बाद में प्रभावित इलाकों में पहुंचे, उन्होंने देखा कि बाजार कीचड़ में डूबे हुए थे और परिवार लापता परिजन की तलाश में भटक रहे थे।
नेपाली समाचार पोर्टल ‘ऑनलाइनखबर’ की खबर के मुताबिक, सिंधुपालचौक के रहने वाले तमांग बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा पर बसे तिमुरे शहर में थे, जब अचानक आई बाढ़ की वजह से वहां भारी तबाही मची। तमांग ने बताया, “जब मैं घर से बाहर निकला और ऊपर पहाड़ी की ओर भागा, तब भीषण बाढ़ की वजह से कुछ मकान पहले ही ढह चुके थे।” उन्होंने कहा, “मेरे पास ज्यादा विकल्प नहीं थे। मेरे पीछे तेजी से बढ़ता बाढ़ का पानी था और सामने दीवार जैसी खड़ी पहाड़ी।” तमांग के अनुसार, वह ढलान की तरफ भागे और उस पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश करने लगे, जो दीवार जैसी लग रही थी।
उन्होंने बताया कि इस दौरान वह कई बार गिरे, लेकिन कांटेदार झाड़ियों और पौधों को पकड़कर ऊपर की ओर बढ़ना जारी रखा। तमांग ने कहा, “यह जिंदगी और मौत के बीच मेरी आखिरी दौड़ थी। हर बार जब मैं गिरता, तो मुझे लगता कि यह मेरी जिंदगी का आखिरी पल है।” उन्होंने बताया कि बाढ़ के पानी की चपेट में आने से बचने की कोशिश में लोग अलग-अलग दिशाओं में भाग रहे थे।
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तमांग ने कहा कि आखिरकार वह पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गए, जहां से उन्होंने लोगों को बाढ़ के तेज पानी में बहते देखा, जिनमें उनके दोस्त भी शामिल थे। उन्होंने कहा, “जब मेरे दोस्त मेरी आंखों के सामने तेज लहरों में बह रहे थे, तब मैं उन्हें बचाने के लिए कुछ भी नहीं कर सका।” तमांग के मुताबिक, आखिरकार वह जंगल में लकड़ी रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले एक पुराने गोदाम में पहुंचे, जहां बाढ़ से अपनी जान बचाने में कामयाब रहे दर्जनों अन्य लोगों ने भी शरण ले रखी थी। तमांग ने बताया कि उन्होंने बचाव दल के इंतजार में बारिश के बीच बिना बिस्तर के पूरी रात वहां बिताई।
उन्होंने बताया कि लगभग 24 घंटे बाद उन्हें बचा लिया गया। बाढ़ के कुछ देर बाद त्रिशूली पहुंचे फोटो पत्रकार अमूल थापा के लिए वहां मची तबाही को समझ पाना लगभग नामुमकिन था। थापा ने नेपाली अखबार ‘नया पत्रिका’ में लिखे लेख में बताया कि उन्होंने सुबह करीब 10 बजे (घटना के लगभग एक घंटे बाद) काठमांडू से अपनी यात्रा शुरू की और कुछ घंटे बाद त्रिशूली बाजार पहुंचे।
उन्होंने बताया कि तिमुरे बाजार में 50 से 60 मकान थे, लेकिन इनमें से ज्यादातर मलबे के नीचे दबे हुए थे। थापा के अनुसार, कुछ जगहों पर तो सिर्फ घरों की छतें दिखाई दे रही थीं। उन्होंने बताया कि सड़क और घरों के बीच मुश्किल से ही कोई फर्क पता चल रहा था।
थापा ने कहा कि कुछ लोग ऊपरी इलाकों में स्थित बाजार की ओर भाग रहे थे, जबकि कुछ अन्य बाढ़ के कारण लापता हुए अपने प्रियजनों को ढूंढ रहे थे। उन्होंने बताया कि बाजार का लगभग आधा हिस्सा बर्बाद हो चुका था। थापा के मुताबिक, उन्होंने लोगों को उत्तरगया बोर्डिंग स्कूल के कुछ ऐसे छात्रों के बारे में बात करते हुए भी सुना, जो लापता हो गए थे और बाद में जंगल में छह घंटे तक पैदल चलकर अपने स्कूल लौट आए थे।
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थापा ने बताया कि शुक्रवार दोपहर तक चितवन में चितवन औद्योगिक संघ के पास बड़ी संख्या में शव ले जाती एंबुलेंस दिखाई दे रही थीं। उन्होंने बताया कि रसुवा से बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए कुछ शव नारायणी नदी से बरामद किए गए। आपदा में फंसे लोगों में भारतीय-अमेरिकी दंपति अंजना राजा और पट्टाभिरमन वेंकटेशन भी शामिल थे, जिन्हें बाद में एयरलिफ्ट करके काठमांडू लाया गया।
अंजना ने ‘सीबीएस न्यूज’ से बातचीत में, “मुझे लगा था कि मैं मरने वाली हूं।” वेंकटेशन ने कहा कि मलबे का जो सैलाब उनकी तरफ बढ़ रहा था, वह करीब 60 से 70 फुट ऊंचा था और सुनामी की विशाल लहर की तरह प्रतीत हो रहा था। उन्होंने कहा, “मैं उस भयानक चीज को हमारी तरफ बढ़ते देख सकता था। उस समय मुझे पता नहीं था कि वह पानी है।
सच कहूं तो, मुझे लगा कि वह आग है, जंगल की आग।” अंजना ने ‘एबीसी न्यूज’ से कहा कि वह सैलाब पानी और मलबे का विशाल ढेर था। उन्होंने कहा, “यह पानी और मलबे का मिश्रण था, जो कम से कम 50 से 60 फुट ऊंचा था। यह किसी सांप या कोबरा के फन जैसा लग रहा था।” अंजना ने बताया कि उन्होंने अपने पति का कॉलर पकड़ा और चिल्लाई-“भागो!”, जिसके बाद दोनों बस से कूद पड़े।
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उन्होंने बताया कि दोनों तेजी से ऊंचाई की ओर भागे और सीढ़ियां चढ़ने लगे, इस दौरान उनके आसपास मकान ढहते नजर आ रहे थे। अंजना ने कहा कि उन्हें पता नहीं था कि वे कहां जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम बस आंख बंद करके... ऊपर चढ़ते गए।
हमें यह भी नहीं पता था कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। हमारे साथ कोई गाइड नहीं था, कोई नहीं था; हम बस घबराहट में भागे जा रहे थे।” अंजना के मुताबिक, पूरे रास्ते में कीचड़ था और चट्टानें फिसलन भरी थीं। उन्होंने बताया कि जब वे थोड़ी ऊंचाई पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि बाढ़ का पानी ऊपर की ओर आ रहा था और उनकी बस को अपनी चपेट में ले रहा था।
अंजना ने कहा, “मैंने अपने पति से कहा, ‘बस, अब तो गए। हम मरने वाले हैं।’ मैंने मौत को अपनी आंखों के सामने देखा।” अंजना के अनुसार, आखिरकार एक गाइड उन्हें पास में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित समतल जगह पर ले गया, जहां पहुंचना बहुत मुश्किल था, क्योंकि रास्ता बेहद संकरा और फिसलन भरा था, जिस पर पत्थर और मलबा बिखरा हुआ था। अंजना ने कहा, “मुझे नहीं पता कि हम इतनी ऊंचाई पर कैसे चढ़े।” वेंकटेशन ने कहा, “हमारा बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
इस घटना के बाद हम जिंदगी की अहमियत को ज्यादा बेहतर ढंग से समझने लगे हैं।” उन्होंने कहा, “इस घटना ने जीवन को लेकर मेरे नजरिये को और मजबूत किया है। अच्छा बनो, अच्छा करो, अच्छा सोचो और बाकी सब उस पर छोड़ दो, जो हमारे ऊपर है।
PM Modi और भारत की मदद को Nepal ने सराहा, बाढ़ राहत और पुनर्निर्माण में मिला बड़ा सहयोग
नेपाल ने देश में आयी विनाशकारी बाढ़ और 600 से अधिक लोगों की जान जाने के कारण उत्पन्न संकट के समय मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘अत्यंत उदार’ बताया। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने पीटीआई वीडियो से बातचीत में कहा कि भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह पुनर्निर्माण कार्यों के लिए उदारता से सहायता देगी। नेपाल-तिब्बत सीमा पर हिम नद के तटबंध तोड़ देने के कारण बुधवार को मध्य नेपाल में भीषण जल प्रवाह और मलबा बहकर आने से कई बस्तियां और गांव, सैकड़ों मकान, वाहन, सड़क, पुल के साथ साथ कई पन बिजली परियोजनाएं भी बह गयीं।
इस त्रासदी में 2400 से अधिक लोग अभी तक लापता हैं और करीब 2500 लोगों को बचावकर्ताओं ने बचाया है। बचावकर्ता मौसम की मार के बीच लगातार प्रयास कर रहे हैं। भारत ने बुधवार से नेपाल के बाढ़ पीड़ित इलाकों में 57.6 टन राहत सामग्री भिजवाई है।
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काठमांडू के अनुरोध के बाद 11 सदस्यीय भारतीय दल पहुंच चुका है जिसमें चिकित्सा अधिकारी एवं सुरंग से बचाव करने के कार्यों में विशेषज्ञ शामिल हैं जो स्थानीय अधिकारियों की मदद करेंगे। बाढ़ की स्थिति और पुनर्निर्माण के बारे में पूछे जाने पर नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने कहा, हम इस संकट से चरणों में निपट रहे हैं। हमारी फौरी प्राथमिकता उन लोगों को बचाना है जिन्हें बचाया जा सकता है, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो पनबिजली संयंत्रों में फंसे हुए हैं।
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नेपाली सेना ने 1,930 लोगों को, जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान धुनचे, रसुवा और स्याफ्रु बेसी जैसे इलाकों में हवाई रास्ते से राहत सामग्री पहुँचाने पर भी है, क्योंकि सड़कें बंद होने की वजह से ये इलाके कट गए हैं। नेपाल के वित्त मंत्री का कहना है कि एक बड़ी चुनौती उन शवों को संभालना है जो बहकर चितवन और नवलपुर की ओर और शायद सीमा के पार चले गए हैं।
अगले चरण में जल्द संकट से उबरने पर ध्यान दिया जाएगा, जिसमें अस्थायी आश्रय और काम के बदले नकद (कैश-फॉर-वर्क) जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे; इसके बाद पुनर्निर्माण का मुश्किल काम होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या नेपाल दूसरे देशों से मदद लेगा, तो वागले ने कहा, बिल्कुल। भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी बहुत उदार रहे हैं।
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2015 में जब भूकंप आया था, तब मैं सरकार में था और मुझे याद है कि भारत सरकार की उदारता वास्तव में सराहनीय थी।’’ उन्होंने कहा कि इस समय नयी दिल्ली से विशिष्ट सामान भी हवाई जहाज़ से मंगाया गया है। वागले ने कहा कि पुनर्निर्माण के लिए भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह उदारता से मदद करेगी। उन्होंने कहा कि सभी पड़ोसी देशों से भी ऐसी ही मदद मिल रही है।
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