मजबूत कैपेक्स और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ से जुलाई में औद्योगिक उत्पादन को मिली गति: विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। जुलाई 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन में दर्ज 6.7 प्रतिशत की वृद्धि को अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया है। उनका मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ऊंची ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद देश में विनिर्माण गतिविधियों और निवेश आधारित विकास ने औद्योगिक क्षेत्र को मजबूती प्रदान की है।
ताजा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के अनुसार, जुलाई में विनिर्माण क्षेत्र में 7.3 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति क्षेत्र में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार भी व्यापक आधार पर रहा, जहां 23 में से 19 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की।
केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की औद्योगिक गतिविधियां काफी हद तक मजबूत बनी हुई हैं। उन्होंने विशेष रूप से पूंजीगत वस्तुओं और बुनियादी ढांचा एवं निर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन को उत्साहजनक बताया।
उन्होंने कहा कि जुलाई में पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में 16.1 प्रतिशत और बुनियादी ढांचा एवं निर्माण वस्तुओं के उत्पादन में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेश गतिविधियों में मजबूती का संकेत देते हैं।
वहीं, बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह ने कहा कि जुलाई के आंकड़े स्पष्ट रूप से निवेश आधारित वृद्धि को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि पूंजीगत वस्तुओं में 16.1 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुओं में 10 प्रतिशत और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई परियोजनाओं में निवेश का चक्र मजबूत बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र के 23 में से 19 समूहों में विस्तार दर्ज किया गया, जिनमें विद्युत उपकरण, मोटर वाहन, अन्य परिवहन उपकरण, मशीनरी और उपकरण निर्माण क्षेत्र अग्रणी रहे।
उत्पाद स्तर पर स्विचगियर, सर्किट सुरक्षा उपकरण, निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रणाली, सॉलिड-स्टेट ड्राइव, ऑटो कंपोनेंट्स, यात्री और वाणिज्यिक वाहन, निर्माण मशीनरी, पंप और टरबाइन जैसे उत्पादों में मजबूत वृद्धि देखने को मिली।
इसके अलावा, ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च प्रमुख राजीव शरण ने कहा कि वाहन और घरेलू उपकरणों जैसे उपभोक्ता टिकाऊ उत्पादों की मांग में मजबूती यह दर्शाती है कि गैर-आवश्यक उपभोक्ता खर्च और ऋण-आधारित खरीदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है। इससे शहरी मांग और उपभोक्ता विश्वास में सुधार का संकेत मिलता है।
हालांकि विशेषज्ञों ने कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। जुलाई में उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं के उत्पादन में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो दैनिक उपयोग की वस्तुओं की मांग में कुछ नरमी का संकेत देती है। इससे यह संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में खपत का रुझान अभी भी मिश्रित बना हुआ है।
रजनी सिन्हा ने कहा कि आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति, मौसम संबंधी व्यवधानों और इनके ग्रामीण मांग पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखना आवश्यक होगा। हालांकि उनका मानना है कि कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूत स्थिति औद्योगिक विकास के लिए सकारात्मक आधार प्रदान कर रही है।
वहीं, शाश्वत सिंह के अनुसार, आगे बाजार और औद्योगिक गतिविधियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम होंगे। यदि ऊर्जा लागत में तेज उतार-चढ़ाव होता है, तो उसका प्रभाव उत्पादन लागत और मांग दोनों पर पड़ सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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'हिजड़े भीख मांगते हैं....', लड़के से लड़की बनी इस एक्ट्रेस ने झेली नफरत, अब छलका दर्द
Ella D Verma on Transgender Trolling: सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और एक्ट्रेस एला डी वर्मा आज अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं. सोशल मीडिया पर अपनी बेबाकी और अपने अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली एला ने अपनी जिंदगी को लेकर कई बार खुलकर बात की है. हाल ही में सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में उन्होंने अपनी पर्सनल जर्नी, ट्रांसजेंडर लाइफ की चुनौतियों और परिवार से मिले सपोर्ट को लेकर कई बातें साझा कीं.
लड़की होने का एहसास
आपको बता दें कि एला का जन्म एक लड़के के रूप में हुआ था और बचपन में उन्हें देव के नाम से जाना जाता था. हालांकि, एला के मुताबिक, बचपन से ही उनके भीतर लड़की होने का एहसास था. अपनी पहचान को समझने और उसे स्वीकार करने में उन्हें काफी वक्त लगा. इसके बाद उन्होंने अपने परिवार और समाज के सामने अपनी पहचान को लेकर बात रखी और अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीने का फैसला किया. आज एला अपने सफर में काफी आगे बढ़ चुकी हैं. उन्होंने जेंडर अफर्मिंग सर्जरी करवाई और देव से एला डी वर्मा के रूप में अपनी पहचान बनाई. हालांकि ये सफर उनके लिए आसान नहीं रहा. इसमें परिवार की चिंता, समाज की सोच और खुद को स्वीकार करने की प्रक्रिया जैसी कई चुनौतियां शामिल थीं.
‘मेरी बॉडी में भी नॉर्मल लड़की की तरह बदलाव आते हैं’
सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में एला ने अपनी बॉडी और बदलावों को लेकर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि जिस तरह एक नार्मल लड़की के शरीर में समय के साथ बदलाव आते हैं, उसी तरह उनके शरीर में भी कई बदलाव आए हैं. एला ने अपनी आवाज और वजन में आए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके शरीर में बदलाव आने से उनकी वैल्यू या वर्थ कैसे कम या ज्यादा हो सकती है?
‘मैं इंटरनेट पर लोगों को एंटरटेन करने आती हूं’
एला सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और अपने कंटेंट के जरिए लोगों से जुड़ी रहती हैं. बातचीत के दौरान उन्होंने अपने सोशल मीडिया व्यक्तित्व को लेकर भी मजेदार अंदाज में बात की. उन्होंने कहा कि जब वो इंटरनेट पर आती हैं तो उनका मकसद लोगों को एंटरटेन करना होता है. वो चाहती हैं कि लोग उनके कंटेंट को देखें और उनके साथ हंसें. एला ने अपनी पुरानी शारीरिक पहचान से जुड़ी बात को भी हल्के-फुल्के अंदाज में रखा. उन्होंने कहा कि वो दाढ़ी में भी हंस सकती हैं, लेकिन उन्हें वो पसंद नहीं है.
‘रेड लाइट पर खड़े होकर भीख नहीं मांगनी पड़ रही'
एला ने ट्रांसजेंडर कम्यूनिटी के सामने आने वाली सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि ये उनकी किस्मत है कि आज उन्हें रेड लाइट पर खड़े होकर भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ रही है. बातचीत के दौरान एला से पूछा गया कि क्या वो खुद को हिजड़ा या किन्नर कम्युनिटी से अलग महसूस करती हैं? इसके जवाब में उन्होंने साफ कहा कि वो खुद को उनसे अलग महसूस नहीं करतीं. ये उनके लिए एक महत्वपूर्ण बात है, क्योंकि वो अपनी पहचान को लेकर समाज में मौजूद अलग-अलग धारणाओं से खुद को अलग करने के बजाय ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ जुड़ाव महसूस करती हैं. उनके मुताबिक, उनकी जिंदगी की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वो समुदाय के दूसरे लोगों से खुद को अलग मानती हैं.
माता-पिता को सच बताने पर डर गए थे पेरेंट्स
एला ने अपने माता-पिता को अपनी जेंडर आइडेंटिटी के बारे में बताने का अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार अपने माता-पिता के सामने अपनी सच्चाई रखी तो उनके पेरेंट्स काफी डर गए थे. इसकी एक बड़ी वजह ये थी कि उन्हें ट्रांसजेंडर लोगों की जिंदगी और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. एला के मुताबिक, उनके माता-पिता के मन में ट्रांसजेंडर समुदाय को लेकर कई तरह की धारणाएं थीं. उन्हें लगता था कि ट्रांसजेंडर या हिजड़ा समुदाय के लोगों के सामने जिंदगी में बहुत सीमित ऑप्शन होते हैं और उन्हें अक्सर भीख मांगने या सेक्स वर्क जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जब एला ने अपनी पहचान बताई तो उनके माता-पिता के मन में सबसे पहले यही डर आया कि उनके बच्चे का भविष्य क्या होगा?
‘मेरे पेरेंट्स डरे हुए थे, उन्हें पता नहीं था’
एला ने बताया कि उनके माता-पिता का डर उनकी बेटी की पहचान को लेकर नहीं, बल्कि उसके भविष्य को लेकर था. उन्हें ये जानकारी नहीं थी कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति भी पढ़ाई, करियर, नौकरी, बिजनेस, कला और मनोरंजन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी जगह बना सकते हैं. शुरुआत में उनके माता-पिता के लिए इस सच्चाई को समझना आसान नहीं था. उनके सामने समाज की पुरानी धारणाएं और अपनी संतान के भविष्य को लेकर डर था. लेकिन समय के साथ चीजें बदलीं. एला के मुताबिक, बाद में उनके माता-पिता ने उन्हें समझा और उनके फैसले का सम्मान किया. उन्होंने एला को वो करने की आजादी दी, जो वो अपनी जिंदगी में करना चाहती थीं.
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